BAMS study
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✅ Learn BASICS OF AYURVEDA with logical approach.

✅ रटना नही है , समझना है ।

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दांत निकलते समय शिशु चिड़चिड़े हो जाते हैं, उनके मसूड़ों में लगातार उत्तेजना बनी रहती है। होम्योपैथी में इसका आसान उपचार  उपलब्ध है। डॉक्टर की सलाह से कैमोमिला दवा दे सकते हैं। ज्वर या जुकाम हो तो शिशुओं को बेलाडोना दी जा सकती है।

क्या सावधानियां बरतें:


● रुई या साफ उंगली से बच्चों के मसूड़ों की मालिश करें - लार टपकने पर शिशु के चेहरे को किसी साफ कपड़े से हल्के हाथों से पोंछे


→ उंगलियां व अन्य वस्तुएं मुह में डालने से रोके

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Forwarded from Go Narad NEWS
पीएम मोदी आगामी 25 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश में 7 नए मेडिकल कॉलेजों का एक साथ उद्घाटन करेंगे। @GoNarad

यानि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार देश की 44 योजनाओं के क्रियान्वयन में नंबर वन रही है। जी हां, यूपी सरकार अब मेडिकल कॉलेजों का उद्घाटन कर एक नया रिकॉर्ड बनाने जा रही है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बनेगा, जहां 7 राज्य स्वायत्त मेडिकल कॉलेजों का एक साथ उद्घाटन किया जाएगा। यह यूपी में चिकित्सा शिक्षा के लिए एक प्रमुख मील का पत्थर साबित होगा तो वहीं देश में ‘मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर’ के विकास की दिशा में एक अहम पहल होगी।

मेडिकल क्षेत्र पर क्या होगा असर ?

पीएम मोदी 25 अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के 7 नए मेडिकल कॉलेजों का उद्घाटन यूपी के सिद्धार्थनगर जिले से करेंगे। जिनमें ये कॉलेज- सिद्धार्थनगर, देवरिया, एटा, मिर्जापुर, गाजीपुर, हरदोई और बहराइच जिलों में होंगे। ये कॉलेज देश के चिकित्सा संसाधनों के पूल में शामिल होंगे और देश में मेडिकल सीटों की क्षमता बढ़ाने में काम करेंगे। बता दें, इन मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश भी राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा, एनईईटी परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा।

बढ़ेंगी MBBS की सीटें

इन मेडिकल कॉलेजों के संचालन से उत्तर प्रदेश में MBBS की 700 सीटें बढ़ जाएंगी। इन सभी सात मेडिकल कॉलेजों को MBBS में 100-100 सीटों पर प्रवेश के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद से अनुमति मिल गई है। यानि अब आने वाले वर्षों में राज्य में डॉक्टरों की कमी नहीं खलेगी। इन सभी मेडिकल कॉलेजों में 100-100 एमबीबीएस सीटों के लिए प्रवेश प्रक्रिया इसी सत्र से शुरू हो जाएगी।

मेडिकल कॉलेजों में मिलेगी ये व्यवस्थाएं

इन मेडिकल कॉलेज में अस्पताल, छात्रावास, स्टाफ आवास की सभी व्यवस्थाएं की गई हैं। साथ ही साथ फैकल्टी भी पूरी है। सिद्धार्थ नगर मेडिकल कॉलेज से न केवल सिद्धार्थ नगर बल्कि बलरामपुर, महराजगंज और पड़ोसी देश नेपाल तक के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ प्राप्त हो सकेगा। ठीक उसी प्रकार बाकी 6 मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से आसपास के इलाकों के लोगों को भी चिकित्सा सुविधाएं प्राप्त होंगी। पीएम मोदी देवरिया, एटा, हरदोई, गाजीपुर, मिर्जापुर के मेडिकल कॉलेजों का भी उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा अगले डेढ़ महीने में गोरखपुर एम्स का उद्घाटन किया जाना है।

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In its latest drug safety alert, the apex drug regulatory body, the Central Drugs Standard Control Organization (CDSCO) has flagged 42 medicine batches for failing to qualify for a random drug sample test for the month of September, while 1 drug sample has been declared misbranded.

These drug samples that have been declared as 'Not of Standard Quality', include SYNOKEM Pharmaceutical's Olmesartan Medoxomil Tablets, which are used in the treatment of hypertension (high blood pressure), heart failure, and prevention of heart attack and stroke, and Cadila Pharmaceutical's PENTALOC-D, which is a combination of two medicines: Domperidone and Pantoprazole. This combination is used to treat acidity, heartburn or Gastroesophageal Reflux Disease.


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Acute management of asthma attack ; with trick
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The fastest muscle in the body is the oculomotor one 👀

The blinking process lasts about 100 milliseconds, or 5 times per second. Every second, the lens of the eye can focus on 50 objects, only intermittently; the eye muscles can only make smooth movements when following a moving object.

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देश में स्वास्थ्य संबंधित इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए पीएम आयुष्मान भारत हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन का शुभारंभ। इसके तहत 64, 000 करोड़ रुपये के निवेश से महत्वपूर्ण स्वास्थ्य नेटवर्क को गांव से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक मजबूत किया जाएगा। #HealthInfrastructureMission
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Each of us is a whole Universe for different bacteria ✨

An average person with a healthy microbiome commonly hosts about 1,000 different species of intestinal bacteria, roughly 300 species of bacteria living in the mouth, 850 species of skin bacteria and from a few dozen to several hundred bacterial species that inhabit the urogenital passages.

And that's not counting viruses, microscopic fungi and parasites that are also part of our microbiome!

You are not alone😅

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PM मोदी ने भारत की संस्कृति का ध्वज-वाहक बन आयुर्वेद को दुनिया भर में पहुंचाया : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

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केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि पीएम मोदी ने योजनाएं बनाते वक्त उसके आकार और क्षमता को बदल दिया। आजादी के बाद भारत की संस्कृति का ध्वज-वाहक बनकर उन्होंने आयुर्वेद को दुनिया भर में पहुंचाया।

पीएम मोदी ने योजनाएं बनाते वक्त उसके साइज और स्केल को बदल दिया

केंद्रीय गृह मंत्री बुधवार को नई दिल्ली में रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी के ओर से आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में अपनी बात रख रहे थे। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा कि पीएम मोदी ने योजनाएं बनाते वक्त उसके साइज और स्केल को बदल दिया। अगर पहले किसी योजना में कहा जाता था कि 10,000 लोगों को पक्का घर देंगे, तो पीएम मोदी ने निर्णय किया कि हम 2022 के पहले सभी को पक्का घर देंगे।

साल 2014 आते-आते देश में राम-राज की परिकल्पना हो चुकी थी ध्वस्त

आगे उन्होंने कहा कि जब भारतीय जनता पार्टी ने नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार घोषित किया था। तभी से लोगों के अंदर का आक्रोश आशा में परिवर्तित होता दिखने लगा था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि साल 2014 आते-आते देश में राम-राज की परिकल्पना ध्वस्त हो चुकी थी। जनता के मन में यह आशंका थी कि कहीं हमारी बहुपक्षीय लोकतांत्रिक संसदीय व्यवस्था फेल तो नहीं हो गई। लेकिन देश की जनता ने धैर्य से फैसला देते हुए नरेन्द्र मोदी को पूर्ण बहुमत के साथ देश का शासन सौंपा।

देश में होना चाहिए मल्टी पार्टी डेमोक्रेटिक सिस्टम

सम्मेलन में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश में मल्टी पार्टी डेमोक्रेटिक सिस्टम होना चाहिए और हर पार्टी की एक विचारधारा होनी चाहिए। भारत की आजादी को 75 वर्ष हो गए हैं। जब हम आजाद हुए तो हमारे देश की संविधान सभा बनी। संविधान सभा ने मल्टी पार्टी डेमोक्रेटिक सिस्टम को बहुत सोच-समझकर स्वीकार किया। यह उचित फैसला था। सम्मेलन में वे डिलेवरिंग डेमोक्रेसी विषय पर अपनी बात रख रहे थे।
#muscle attachments of humerus
Muscle Attachment Of Humerus

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There are 57 muscles on the human face and most of them are involved in the formation of emotions. 😇😇
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How a single sperm is selected and injected directly into the egg using a fine glass needle.

Method is called - ICSI (Intracytoplasmic sperm injection)

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- प्रो. बनवारी लाल गौड़

(पूर्व निदेशक, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर)

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श्रीमद्भागवत पुराण में एक प्रसंग में कहा गया है कि देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मन्थन किया, जिसमें मन्दर पर्वत को मथनी के रूप में प्रयुक्त किया और वासुकि नाग को डोरी के रूप में प्रयुक्त कर मन्थन किया। उसमें एक-एक करके अनेक रत्न उत्पन्न हुए, जिनमें अमृतकलश के साथ धन्वंतरि का प्रकट होना एक महत्तवपूर्ण घटना है।


लगभग इसी तरह का वर्णन महाभारत, अग्निपुराण, विष्णुपुराण, हरिवंशपुराण और ब्रह्मवैवर्तपुराण आदि में है। जिनमें वर्णनशैली में थोड़ा-बहुत अन्तर कर दिया गया है। इन सभी में आलंकारिक वर्णन है जो पुराणों की शैली में इनके देवत्व को प्रतिपादित करने की दृष्टि से अतिशयोक्ति पूर्ण स्वरूप को भी प्रकट करता है। समुद्र मन्थन करना और उसमें वासुकि नाग तथा मन्दराचल का प्रयोग करना आलंकारिक है।


मुख्य उद्देश्य तो अमृत का निर्माण और उसके प्रयोग में दक्ष करना ही है। यहां यह भी उल्लेखित कर देना उपयुक्त होगा कि वेदमर्मज्ञ पं. मधुसूदन ओझा ने इन्द्रविजय नामक ग्रन्थ में लिखा है कि देवों और असुरों में अनेक संग्राम हुए। उनमें 12 महासंग्राम अत्यन्त प्रसिद्ध हैं। इन 12 महायुद्धों में एक महायुद्ध का नाम समुद्रमन्थन (जलधिमन्थन) भी है। अत: समुद्रमन्थन के इस प्रसंग का व्यावहारिक अर्थ किया जायेे तो यह कहा जा सकता है कि इस युद्ध का मूल कारण अमृतमन्थन था।

भगवान धन्वंतरि की पूजा सम्पूर्ण भारत में की जाती है, लेकिन उत्तर भारत में इनके बहुत कम मन्दिर देखने को मिलते हैं। वहीं दक्षिण भारत के तमिलनाडु एवं केरल में इनके कई मन्दिर हैं। केरल के नेल्लुवायि में धन्वंतरि भगवान का सर्वाधिक सुन्दर व विशाल मन्दिर है।


केरल के अष्टवैद्यों के वंश में आज भी भगवान धन्वंतरि की पूजा का विशेष महत्व है। इनके अलावा अन्नकाल धन्वंतरि मंदिर( त्रिशूर) धन्वंतरि मंदिर, रामनाथपुरम (कोयम्बटूर), श्रीकृष्ण धन्वंतरि मंदिर(उडुपी) आदि भी प्रसिद्ध हैं। गुजरात के जामनगर व मध्य प्रदेश में भी इनके  मंदिर हैं।  


धन्वंतरि मंदिर, वालाजपत, तमिलनाडु

तमिलनाडु के वालाजपत में श्री धन्वंतरि आरोग्यपीदम मंदिर स्थापित है। इस आरोग्य मंदिर का निर्माण श्रीमुरलीधर स्वामिगल ने करवाया था।  बीमारी के कारण अपने माता-पिता को खो चुके स्वामिगल ने जनसेवा के लिए इस मंदिर की स्थापना की। यहां स्थापित भगवान धन्वंतरि की मूर्ति ग्रेनाइट कला की एक अनुपम कृति है। आरोग्यपीदम की साइट पर लाइव पूजा देख सकते हैं।


तक्षकेश्वर मंदिर, मंदसौर, मध्य प्रदेश

यहां नागराज तक्षक और आरोग्य देव धन्वंतरि की मूर्ति स्थापित है। इस मंदिर के निर्माण के पीछे महाराज परीक्षित की सर्प काटने से मृत्यु और फिर उनके पुत्र जन्मेजय द्वारा नागों से प्रतिशोध की पौराणिक कथा जुड़ी है। माना जाता है कि यहां के स्थानीय वैद्य यहां स्थापित धन्वंतरि देव की प्रतिमा के दर्शन के बाद ही जड़ी-बूटी इकट्ठा करते हैं और इलाज शुरू करते हैं।



आयुर्वेद में कहलाए आरोग्य देव

मद्भागवत पुराण के अष्टम स्कन्ध के छठे अध्याय में स्पष्ट कहा गया है कि क्षीरसागर में तिनके, लताएं आदि जो भी औषधिस्वरूप हों, उन्हें डालकर मन्थन करके अमृत निकालना चाहिए।


यहां यह ध्यान देने योग्य बात है कि विभिन्न औषधियों से अमृत निकालने की विधि उस युग में केवल धन्वंतरि को ही आती थी। अत: धन्वंतरि ने एक विशिष्ट प्रक्रिया से देवों और असुरों के श्रम का सहारा लेकर अमृत निकाला, जिसे होशियारी से केवल देवों ने ही पीया।


बाद में इसी के कारण युद्ध हुआ। जब असुर अमृत प्राप्त न  कर सके तो उन्होंने उसी के अनुरूप दूसरा पेय बनाने का प्रयत्न किया जो विशेषज्ञता के अभाव में अमृत न बनकर सुरा स्वरूप पेय बना। इस घटना से धन्वंतरि का महत्तव लोक में प्रतिष्ठित हुआ तथा इसे धन्वंतरि के आविर्भाव से जोड़ा जाने लगा।


यहां यह उल्लेखनीय है कि वेदों में समुद्रमन्थन नामक युद्ध का संकेत है पर धन्वंतरि का कहीं नामोल्लेख नहीं है, इसी तरह पुराणों में समुद्र मन्थन का उल्लेख तो है पर उसे युद्ध न मानकर अमृतमन्थन का क्रियात्मक स्वरूप मान लिया है।


निष्कर्ष रूप में यह कहा जा सकता है कि पुराणों ने अमृत मन्थन के स्वरूप को आलंकारिक शैली में वर्णित किया तथा धन्वंतरि को देवत्व रूप में प्रतिष्ठापित किया। आयुर्वेद में इन्हें आदिदेव धन्वंतरि के रूप में जाना जाता है।  


कई स्वरूपों का उल्लेख

हरिवंशपुराण ने समुद्रमन्थन के इस स्वरूप को व्यावहारिकता  प्रदान करने का यत्न किया है। इसमें कहा गया है कि समुद्रमन्थन से अब्जदेव (ये धन्वंतरि ही थे)  उत्पन्न हुए। ये विष्णु के अंशावतार थे। इनको यज्ञभाग नहीं दिया गया। अत: ये बाद में काश राजा (काशी के राजा) धन्व के पुत्र रूप में उत्पन्न होकर धन्वंतरि कहलाये। ये अष्टांग आयुर्वेद के ज्ञाता थे। ये प्रसिद्ध एवं लोगों के
द्वारा पूजनीय रहे।  इनके प्रपौत्र दिवोदास नाम के राजा हुए जो आयुर्वेदज्ञ थे तथा विशेष रूप से शल्यशास्त्र के विशेषज्ञ भी थे। आयुर्वेदज्ञ होने के कारण दिवोदास ने अपने प्रपितामह धन्वंतरि का नाम अपने उपनाम के रूप में प्रयुक्त किया।


इन दिवोदास धन्वंतरि ने सुश्रुत, औपधेनव, औरभ्र आदि सात शिष्यों को शल्यप्रधान आयुर्वेद का ज्ञान दिया, जो आज भी प्रतिसंस्कार के बाद उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त एक प्रसंग और भी है जिसमें एक धन्वंतरि, गालव ऋ षि की मन्त्रशक्ति से उत्पन्न हुए थे। इतिहास में विषवैद्य के रूप में भी एक धन्वंतरि का उल्लेख है।


निष्कर्ष रूप में यह कहा जा सकता है कि चार भुजाओं वाले अमृतकलश को धारण करने वाले समुद्र मन्थन से आविर्भूत आदिदेव धन्वंतरि है तथा प्रसिद्ध शल्यशास्त्री आयुर्वेदोपदेष्ता दिवोदास धन्वंतरि सुश्रुत के गुरु और काशी के राजा हुए हैं। दोनों ही पूज्य हैं। धन्वंतरि त्रयोदशी के दिन आदिदेव चतुर्भुज धन्वंतरि की पूजा कर आरोग्य और अमृत की कामना की जाती है।
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विद्वानों के विभिन्न मत

आयुर्वेद एक जीवन विज्ञान है तथा सृष्टि के प्रारम्भ से ही इसका अस्तित्त्व रहा है। यद्यपि इसके प्रारम्भिक प्रवर्तक के रूप में एकमत से ब्रह्मा को ही स्वीकृत किया गया है। इसके बाद भूतल पर इसके प्रचार प्रसार में किस देवता या ऋषि का योगदान है, इसमें भिन्न-भिन्न मत हैं, पर वर्तमान काल में आयुर्वेद के आराध्य भगवान् धन्वंतरि है, इसमें कहीं भी दो राय नहीं है।


संसार का सबसे प्राचीन ग्रन्थ ऋग्वेद है, जिसमें आयुर्वेद का पर्याप्त वर्णन है, पर इसमें चिकित्सक या आयुर्वेद प्रवर्तक के रूप में कहीं भी धन्वंतरि का नाम नहीं है। विभिन्न पुराणों में धन्वंतरि का आविर्भाव समुद्रमन्थन से ही माना गया है।

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Question
जो औषधद्रव्य गुरु, शीत, सर, स्निग्ध, मन्द, सूक्ष्म, मृदु एवं द्रव होता है वह प्रायः ......... होता है।
Anonymous Quiz
6%
A. रूक्षण
68%
B. स्नेहन
21%
C. Both A and B
4%
D. उपरोक्त सभी