https://rzp.io/rzp/KSfqNrMN
यही लिंक से आपको सभी MATTERIAL का ACCESS मिलेगा!
यही लिंक से आपको सभी MATTERIAL का ACCESS मिलेगा!
Razorpay
Pay for 10th PHYSICS ब्रह्मास्त्र PDF by ANIL KUMAR
10thभौतिकी (PHYSICS)ब्रह्मास्त्र PDF FOR 2026 BIHAR BOARD EXAM... . :- 100% QUESTIONS LARNE KI GUARANTEE . :- old is gold. :- ANIL SIR NAM HI KAFI HAI. :- ALL IN ONE NOTES ( NCERT AND important concept simplified ). :- covers previous 15 year questions with…
❤3
NOTICE FOR AK PHYSICS TUTORIAL 10th brahmastra पेमेंट ध्यान से करें और पेमेंट सक्सेसफुल होने के बाद आप कुछ हटाए नहीं वह खुद व खुद एक फॉर्म चालू होगा जिसे FILL करने के बाद आपको लिंक मिल जाएगा और उसके बाद लिंक से आपको सभी मटेरियल मिल जाएगा
👎4
आज के क्लास का नोट्स
BRAHMASTRA
1st LECTURE CONTENT
साइक्लोट्रॉन: यह एक ऐसा उपकरण है जिसका उपयोग प्रोटॉन, ड्यूटेरॉन और अल्फा कणों जैसे धनात्मक आवेशित कणों को गति देने के लिए किया जाता है। यह स्पष्ट किया गया है कि साइक्लोट्रॉन ऋणात्मक आवेशित या उदासीन कणों को गति नहीं देता है।
ओमीय और अन-ओमीय चालक:
ओमीय चालक वे होते हैं जो ओम के नियम का पालन करते हैं। इनमें वोल्टेज धारा के सीधे आनुपापातिक होता है, और वोल्टेज-धारा ग्राफ एक सीधी रेखा होती है। धात्विक चालक इसके उदाहरण हैं।
अन-ओमीय चालक ओम के नियम का पालन नहीं करते हैं। इनमें वोल्टेज-धारा ग्राफ सीधी रेखा नहीं होता, बल्कि वक्र होता है। अर्धचालक और इलेक्ट्रोलाइट्स इसके उदाहरण हैं।
विद्युत बल रेखाएँ: ये काल्पनिक रेखाएँ हैं (सीधी या वक्र) जो एक स्वतंत्र धनात्मक आवेश के पथ को दर्शाती हैं। ये धनात्मक आवेशों से निकलती हैं और ऋणात्मक आवेशों पर समाप्त होती हैं, और कभी एक दूसरे को नहीं काटतीं।
चुंबक के गुण: चुंबक लोहे, निकल और कोबाल्ट जैसे चुंबकीय पदार्थों को आकर्षित करते हैं। इनमें हमेशा दो ध्रुव (उत्तरी और दक्षिणी) होते हैं जिन्हें अलग नहीं किया जा सकता। समान ध्रुव एक दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं, जबकि विपरीत ध्रुव एक दूसरे को आकर्षित करते हैं। चुंबक का आकर्षण बल ध्रुवों पर सबसे मजबूत होता है।
विद्युत आवेश और उसके गुण:
विद्युत आवेश पदार्थ का एक मौलिक गुण है जो इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण के कारण उत्पन्न होता है। यह घर्षण, चालन या प्रेरण के माध्यम से उत्पन्न हो सकता है।
आवेश का क्वांटमीकरण: आवेश हमेशा मौलिक आवेश (e = 1.6 × 10^-19 कूलम्ब) के पूर्णांक गुणकों में मौजूद होता है। इसका अर्थ है कि इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण हमेशा पूर्ण संख्याओं में होता है, कभी दशमलव या भिन्न में नहीं।
आवेश का संरक्षण: एक विलगित प्रणाली में, कुल विद्युत आवेश स्थिर रहता है। इसे न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, बल्कि केवल एक वस्तु से दूसरी वस्तु में स्थानांतरित किया जा सकता है।
कूलम्ब के नियम की सीमाएँ: कूलम्ब का नियम केवल स्थिर बिंदु आवेशों और 10^-15 मीटर तथा अनंत के बीच की दूरी के लिए लागू होता है।
किरचॉफ के नियम:
पहला नियम (संधि नियम): एक विद्युत परिपथ में किसी भी संधि पर मिलने वाली सभी धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है। यह नियम आवेश के संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है।
दूसरा नियम (लूप नियम): एक विद्युत परिपथ के किसी भी बंद लूप में, परिपथ के प्रत्येक भाग में धारा और प्रतिरोध के गुणनफल का बीजगणितीय योग उस लूप में विद्युत वाहक बलों (EMF) के बीजगणितीय योग के बराबर होता है। यह नियम ऊर्जा के संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है।
प्रतिरोधकता और विद्युत चालकता:
प्रतिरोधकता: यह किसी पदार्थ का आंतरिक गुण है जो यह दर्शाता है कि वह विद्युत धारा का कितनी प्रबलता से विरोध करता है। इसे विद्युत क्षेत्र की तीव्रता और धारा घनत्व के अनुपात के रूप में या इकाई लंबाई और इकाई अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल वाले चालक के प्रतिरोध के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। इसकी इकाई ओम-मीटर है।
विद्युत चालकता: यह प्रतिरोधकता का व्युत्क्रम है, जो यह दर्शाता है कि कोई पदार्थ कितनी आसानी से विद्युत धारा को प्रवाहित होने देता है। इसकी इकाई ओम^-1 मीटर^-1 है।
BRAHMASTRA
1st LECTURE CONTENT
साइक्लोट्रॉन: यह एक ऐसा उपकरण है जिसका उपयोग प्रोटॉन, ड्यूटेरॉन और अल्फा कणों जैसे धनात्मक आवेशित कणों को गति देने के लिए किया जाता है। यह स्पष्ट किया गया है कि साइक्लोट्रॉन ऋणात्मक आवेशित या उदासीन कणों को गति नहीं देता है।
ओमीय और अन-ओमीय चालक:
ओमीय चालक वे होते हैं जो ओम के नियम का पालन करते हैं। इनमें वोल्टेज धारा के सीधे आनुपापातिक होता है, और वोल्टेज-धारा ग्राफ एक सीधी रेखा होती है। धात्विक चालक इसके उदाहरण हैं।
अन-ओमीय चालक ओम के नियम का पालन नहीं करते हैं। इनमें वोल्टेज-धारा ग्राफ सीधी रेखा नहीं होता, बल्कि वक्र होता है। अर्धचालक और इलेक्ट्रोलाइट्स इसके उदाहरण हैं।
विद्युत बल रेखाएँ: ये काल्पनिक रेखाएँ हैं (सीधी या वक्र) जो एक स्वतंत्र धनात्मक आवेश के पथ को दर्शाती हैं। ये धनात्मक आवेशों से निकलती हैं और ऋणात्मक आवेशों पर समाप्त होती हैं, और कभी एक दूसरे को नहीं काटतीं।
चुंबक के गुण: चुंबक लोहे, निकल और कोबाल्ट जैसे चुंबकीय पदार्थों को आकर्षित करते हैं। इनमें हमेशा दो ध्रुव (उत्तरी और दक्षिणी) होते हैं जिन्हें अलग नहीं किया जा सकता। समान ध्रुव एक दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं, जबकि विपरीत ध्रुव एक दूसरे को आकर्षित करते हैं। चुंबक का आकर्षण बल ध्रुवों पर सबसे मजबूत होता है।
विद्युत आवेश और उसके गुण:
विद्युत आवेश पदार्थ का एक मौलिक गुण है जो इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण के कारण उत्पन्न होता है। यह घर्षण, चालन या प्रेरण के माध्यम से उत्पन्न हो सकता है।
आवेश का क्वांटमीकरण: आवेश हमेशा मौलिक आवेश (e = 1.6 × 10^-19 कूलम्ब) के पूर्णांक गुणकों में मौजूद होता है। इसका अर्थ है कि इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण हमेशा पूर्ण संख्याओं में होता है, कभी दशमलव या भिन्न में नहीं।
आवेश का संरक्षण: एक विलगित प्रणाली में, कुल विद्युत आवेश स्थिर रहता है। इसे न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, बल्कि केवल एक वस्तु से दूसरी वस्तु में स्थानांतरित किया जा सकता है।
कूलम्ब के नियम की सीमाएँ: कूलम्ब का नियम केवल स्थिर बिंदु आवेशों और 10^-15 मीटर तथा अनंत के बीच की दूरी के लिए लागू होता है।
किरचॉफ के नियम:
पहला नियम (संधि नियम): एक विद्युत परिपथ में किसी भी संधि पर मिलने वाली सभी धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है। यह नियम आवेश के संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है।
दूसरा नियम (लूप नियम): एक विद्युत परिपथ के किसी भी बंद लूप में, परिपथ के प्रत्येक भाग में धारा और प्रतिरोध के गुणनफल का बीजगणितीय योग उस लूप में विद्युत वाहक बलों (EMF) के बीजगणितीय योग के बराबर होता है। यह नियम ऊर्जा के संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है।
प्रतिरोधकता और विद्युत चालकता:
प्रतिरोधकता: यह किसी पदार्थ का आंतरिक गुण है जो यह दर्शाता है कि वह विद्युत धारा का कितनी प्रबलता से विरोध करता है। इसे विद्युत क्षेत्र की तीव्रता और धारा घनत्व के अनुपात के रूप में या इकाई लंबाई और इकाई अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल वाले चालक के प्रतिरोध के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। इसकी इकाई ओम-मीटर है।
विद्युत चालकता: यह प्रतिरोधकता का व्युत्क्रम है, जो यह दर्शाता है कि कोई पदार्थ कितनी आसानी से विद्युत धारा को प्रवाहित होने देता है। इसकी इकाई ओम^-1 मीटर^-1 है।
❤11👍2🔥1