It's never important what you have archive in whole life and pray what you have. It's very important that what you given to any other person.
कुछ रिश्ते जिनके नाम नहीं होते, लेकिन एक-दूसरे पर भरोसे की मजबूत नींव का मकान होते हैं। इन्हें केवल एक रिश्ता सींचता और अमर करता है और वो है इंसानियत का रिश्ता। 😇
नये रंग की सुबह को लेकर चली एक नारी जग में।
करने चली साकार वो सपने बुने जो उसने रात भर में।
मन का साहस, दिल में राहत, बांध के मुठ्ठी चली जग में।
हृदय भूमि में प्रेम वृक्ष को सींच चली वन - उपवन में।
सहसा एक अचानक घटना घटित हुई निज जीवन में।
दुर्बल और असहाय समझती जीवन के संग्रामों में।
मिली एक उम्मीद उसे जो लगती थी निज ख उर में।
बांध हौंसला बढती आगे स्वप्न स्वयं सच करने में।
किया जो उसने कठिन परिश्रम स्वयं को साबित करने में।
सफल हुई जब मेहनत उसकी तो नृत्य करत हर्षी उर में।
मन में प्रयत्न निरंतर करती , नवीन स्वप्न सच करने में।
विजयगान की विजय पताका लहराती वो जग भर में।
करने चली साकार वो सपने बुने जो उसने रात भर में।
मन का साहस, दिल में राहत, बांध के मुठ्ठी चली जग में।
हृदय भूमि में प्रेम वृक्ष को सींच चली वन - उपवन में।
सहसा एक अचानक घटना घटित हुई निज जीवन में।
दुर्बल और असहाय समझती जीवन के संग्रामों में।
मिली एक उम्मीद उसे जो लगती थी निज ख उर में।
बांध हौंसला बढती आगे स्वप्न स्वयं सच करने में।
किया जो उसने कठिन परिश्रम स्वयं को साबित करने में।
सफल हुई जब मेहनत उसकी तो नृत्य करत हर्षी उर में।
मन में प्रयत्न निरंतर करती , नवीन स्वप्न सच करने में।
विजयगान की विजय पताका लहराती वो जग भर में।
घोर अंधकार के कमरे में भीक प्रकाश की एक बारीक किरण भी अंधेरे कमरे को रोशन करने में पूर्णतः सक्षम है।
आपके द्वारा किसी भी नेक काम में किया गया, छोटा-सा सहयोग भी मदद के पात्र व्यक्ति के लिए बेशकीमती है।
आपके द्वारा किसी भी नेक काम में किया गया, छोटा-सा सहयोग भी मदद के पात्र व्यक्ति के लिए बेशकीमती है।
अंधकार की रात अंधेरी दूर हटाने आई दिवाली,
रोशन दिन की सहर को लेकर जग में आई नयी दिवाली।
बांध के मुठ्ठी कमर को कसके
बैर मिटाने आई दिवाली,
सबका आदर मन में चाहत
आज पिरोने आई दिवाली।
रोशन दिन की सहर को लेकर जग में आई नयी दिवाली।
बांध के मुठ्ठी कमर को कसके
बैर मिटाने आई दिवाली,
सबका आदर मन में चाहत
आज पिरोने आई दिवाली।
कल जो मन्नत मांगी थी,
आज वो जन्नत में बदल गई।
रोशन चांद के उजाले में वो सूरत मिल गई,
खुदा से जो चाही वो बरकत मिल गई ।
इश्क की तहजीब में वो आरजू मिल गई,
सजदे में उनके हिफाजत मिल गई ।
आज वो जन्नत में बदल गई।
रोशन चांद के उजाले में वो सूरत मिल गई,
खुदा से जो चाही वो बरकत मिल गई ।
इश्क की तहजीब में वो आरजू मिल गई,
सजदे में उनके हिफाजत मिल गई ।
एक शाम रोज मैं घर से निकल जाता हूँ
यादों के कई गुब्बार मैं वहाँ खाली कर आता हूँ
कुछ नई कुछ पुरानी यादों को बिखेर आता हूँ
एक शाम रोज मैं घर से निकल जाता हूँ
छोङ आता हूँ कुछ हसीन फल उन अनजान राहों के
याद कर कुछ लम्हे साथ बटोर लाता हूँ
वक्त जब मिला करता हूँ याद उनकी बातों को
वैसे तो उनकी हर बात को अपने जेहन में समेट लाता हूँ
एक शाम रोज मैं घर से निकल जाता हूँ
यादों के कई गुब्बार मैं वहाँ खाली कर आता हूँ
कुछ नई कुछ पुरानी यादों को बिखेर आता हूँ
एक शाम रोज मैं घर से निकल जाता हूँ
छोङ आता हूँ कुछ हसीन फल उन अनजान राहों के
याद कर कुछ लम्हे साथ बटोर लाता हूँ
वक्त जब मिला करता हूँ याद उनकी बातों को
वैसे तो उनकी हर बात को अपने जेहन में समेट लाता हूँ
एक शाम रोज मैं घर से निकल जाता हूँ
मैं तुमसे अब कुछ बोलूं क्या,
जो सोचा फिर अब बोलूं क्या
शिकायत इक मैं कर लूं क्या
तुम चाहो तो कुछ बोलूं क्या
बहुत दिन हो गये अब मिल लूं क्या
जो मांगो अब मैं दे दूं क्या
मैं तुमसे अब कुछ बोलूं क्या
जो सोचा फिर अब बोलूं क्या
कैद तुम्हारी यादें हैं अब मैं इनको खोलूं क्या
पत्र तुम्हारे बहुत रखे हैं अब मैं फिर से पढ लूं क्या
कलम भी रूठ रही है मुझसे इसको अब खुश कर लूं क्या
गम में तेरी चीख रहे सब इनको मैं चुप कर लूं क्या
मैं तुमसे अब कुछ बोलूं क्या
जो सोचा फिर अब बोलूं क्या
सीख लिया है मैंने रहना सोचा तुम्हें बता दूं क्या
सीख लिया है मैंने चलना सोचा तुम्हें सिखा दूं क्या
भूल चुके हैं गम के रस्ते फिर से अब मैं रोलूं क्या
खोल हृदय के राज घनेरे तुमसे फिर अब मिल लूं क्या
मैं तुमसे अब कुछ बोलूं क्या
जो सोचा फिर अब बोलूं क्या
जो सोचा फिर अब बोलूं क्या
शिकायत इक मैं कर लूं क्या
तुम चाहो तो कुछ बोलूं क्या
बहुत दिन हो गये अब मिल लूं क्या
जो मांगो अब मैं दे दूं क्या
मैं तुमसे अब कुछ बोलूं क्या
जो सोचा फिर अब बोलूं क्या
कैद तुम्हारी यादें हैं अब मैं इनको खोलूं क्या
पत्र तुम्हारे बहुत रखे हैं अब मैं फिर से पढ लूं क्या
कलम भी रूठ रही है मुझसे इसको अब खुश कर लूं क्या
गम में तेरी चीख रहे सब इनको मैं चुप कर लूं क्या
मैं तुमसे अब कुछ बोलूं क्या
जो सोचा फिर अब बोलूं क्या
सीख लिया है मैंने रहना सोचा तुम्हें बता दूं क्या
सीख लिया है मैंने चलना सोचा तुम्हें सिखा दूं क्या
भूल चुके हैं गम के रस्ते फिर से अब मैं रोलूं क्या
खोल हृदय के राज घनेरे तुमसे फिर अब मिल लूं क्या
मैं तुमसे अब कुछ बोलूं क्या
जो सोचा फिर अब बोलूं क्या
न जाने क्यों एक चाहत अधूरी कहानी में बदल जाती है,
रंगों से भरी महफ़िल की वो रंगीन शाम कयामत में बदल जाती है।
खुदा की सलामती में चंद पलों की बरकत भी न ठहर पाती है,
कच्चे धागों की बंधी एक डोर बिखरे टुकङों में बदल जाती है।
अंदाजा यूं ही लगाकर एक रिश्ते की समझ गलतफहमी में बदल जाती है
और अल्फाजों के महक की वो महफिल खामोशी के शोर में बदल जाती है।
रंगों से भरी महफ़िल की वो रंगीन शाम कयामत में बदल जाती है।
खुदा की सलामती में चंद पलों की बरकत भी न ठहर पाती है,
कच्चे धागों की बंधी एक डोर बिखरे टुकङों में बदल जाती है।
अंदाजा यूं ही लगाकर एक रिश्ते की समझ गलतफहमी में बदल जाती है
और अल्फाजों के महक की वो महफिल खामोशी के शोर में बदल जाती है।
हर किसी के लिए, खुद को बदलना मना है,
मुसीबत के हर पङाव में, यूं ही झुकना मना है।
आंखों में कैद इन मोतियों से कह दो,
जज्बात की हर बात में बहना मना है।
बंद मुठ्ठी के सपनों को आजाद कर दो,
इन सपनों को सच करना कब मना है।
एक बार अपने दिल पर हाथ रखकर तो देखो,
अपने अंतस की सुनना कब मना है।
बस एक बार अपने डर से लङकर तो देखो,
यूं ही हर डर से अब डरना मना है।
मुसीबत के हर पङाव में, यूं ही झुकना मना है।
आंखों में कैद इन मोतियों से कह दो,
जज्बात की हर बात में बहना मना है।
बंद मुठ्ठी के सपनों को आजाद कर दो,
इन सपनों को सच करना कब मना है।
एक बार अपने दिल पर हाथ रखकर तो देखो,
अपने अंतस की सुनना कब मना है।
बस एक बार अपने डर से लङकर तो देखो,
यूं ही हर डर से अब डरना मना है।
दीपोत्सव से मनी दिवाली,
जग - मग, जग - मग रोशन जग में
खुशियाँ लाई कोटि - कोटि की,
श्रीराम की भव्य अगवानी में।
महावीर जब मोक्ष सिधारे,
मन मंदिर हर्षित उर में
जग सारा खुशहाल हो गया,
तमस स्वयं हर लेने में।
रोम - रोम हर्षित हो जाता,
स्वर्णमयी उज्जवल क्षण में
बैर, क्रोध जब मिट जाता तो,
प्रेम वृक्ष खिलता उर में।
दीपोत्सव से मनी दिवाली,
जग - मग, जग - मग रोशन जग में।
जग - मग, जग - मग रोशन जग में
खुशियाँ लाई कोटि - कोटि की,
श्रीराम की भव्य अगवानी में।
महावीर जब मोक्ष सिधारे,
मन मंदिर हर्षित उर में
जग सारा खुशहाल हो गया,
तमस स्वयं हर लेने में।
रोम - रोम हर्षित हो जाता,
स्वर्णमयी उज्जवल क्षण में
बैर, क्रोध जब मिट जाता तो,
प्रेम वृक्ष खिलता उर में।
दीपोत्सव से मनी दिवाली,
जग - मग, जग - मग रोशन जग में।
प्रेम और वात्सल्य से भरा मोह का ये रिश्ता अटूट और बेशकीमती हो जाता है। जब भाई, बहन और बहन, भाई के साथ हर मुश्किल में एक - दूसरे की ढाल साबित होते हैं।
HAPPY Dooj 😊
HAPPY Dooj 😊
तुमने बिना छुये मेरे दिल को छुआ है,
ऐसा मेरे साथ शायद पहली बार हुआ है।
संवेदनाओं और अहसासों को एक नया मोड़ मिला है,
मन आशियाने को सुकूं अनकहा मिला है
ऐसा मेरे साथ शायद पहली बार हुआ है।
आंखों में बसता मासूम-सा चेहरा खिला है,
गुलदान में मानो एक नया गुल खिला है
ऐसा मेरे साथ शायद पहली बार हुआ है।
किताबों के पन्नों में नया एक अध्याय मिला है,
जिंदगी में एक नया आयाम मिला है
तुमने बिना छुये मेरे दिल को छुआ है
ऐसा मेरे साथ शायद पहली बार हुआ है।
ऐसा मेरे साथ शायद पहली बार हुआ है।
संवेदनाओं और अहसासों को एक नया मोड़ मिला है,
मन आशियाने को सुकूं अनकहा मिला है
ऐसा मेरे साथ शायद पहली बार हुआ है।
आंखों में बसता मासूम-सा चेहरा खिला है,
गुलदान में मानो एक नया गुल खिला है
ऐसा मेरे साथ शायद पहली बार हुआ है।
किताबों के पन्नों में नया एक अध्याय मिला है,
जिंदगी में एक नया आयाम मिला है
तुमने बिना छुये मेरे दिल को छुआ है
ऐसा मेरे साथ शायद पहली बार हुआ है।