Forwarded from Vivek Choudhary
~ YajurVed :- Uttar-Ardha, 40th Adhyay, Verse 6 and 7
Advaita in YajurVeda 🤣🤣
Advaita in YajurVeda 🤣🤣
Srimad Bhagvatam (Bhagvat Puran) 12.5.10-12 Gita Press
Sukhdev ji raja parikshit ji ko updesha de rhe hain ki tum hi bhagwan ho.
Sukhdev ji raja parikshit ji ko updesha de rhe hain ki tum hi bhagwan ho.
Forwarded from Shastra Manthan 🕉 ((योगी) सर्वोत्तम)
ऋग्वेद से अद्वैत प्रतिपादन
ब्रह्मांड उत्पत्ति
अर्थात:-
प्रलय की दशा में न असत् था और न सत् था। उस समय न लोक थे और न अंतरिक्ष था, न कोई आवरण था और न ढकने योग्य पदार्थ था। कहीं भी न कोई प्राणी था और न कोई सुख पहुंचाने वाला भोग था। उस समय गहन गंभीर जल भी नहीं था।
अर्थात:-
उस समय न मृत्यु थी और न अमृत था। न रात्रि थी और न दिन का ज्ञान था।
उस समय एकमात्र ब्रह्मा ही स्वधा के साथ प्राणयुक्त था। उससे बढ़कर अन्य कुछ भी नहीं था।
स्वधा:- माया , या प्रकृति
टिप्पणी:-
वेद, वेदांत आदी शास्त्र तुम्हारा अस्तित्व है, यही सभीका मुल सिद्धांत है। इसी की और तुम्हे आना है।
समस्या दिखे तो गुरुवो, आचार्यो से उसका समाधान करवा लीजिए, भोंदु, भांगडुओ से नही।
🙏ब्रह्मणे नमः🙏
Join:- @Shastra_Manthan
ब्रह्मांड उत्पत्ति
नासासादिनो सदासित्तदानीं नासीद्रजो नो व्योमा परो यत्। किमाफोरिवः कुह कस्य शर्मन्नंभः किमासीद्घनं गभीरम् ॥
अर्थात:-
प्रलय की दशा में न असत् था और न सत् था। उस समय न लोक थे और न अंतरिक्ष था, न कोई आवरण था और न ढकने योग्य पदार्थ था। कहीं भी न कोई प्राणी था और न कोई सुख पहुंचाने वाला भोग था। उस समय गहन गंभीर जल भी नहीं था।
न मृत्युरासीदमृतं न तारहि न रात्रिया अहं आसीत्प्रकेतः। अनिदावतं स्वध्या तदेकं तस्माधान्यान्न परः किं चानस ॥
अर्थात:-
उस समय न मृत्यु थी और न अमृत था। न रात्रि थी और न दिन का ज्ञान था।
उस समय एकमात्र ब्रह्मा ही स्वधा के साथ प्राणयुक्त था। उससे बढ़कर अन्य कुछ भी नहीं था।
स्वधा:- माया , या प्रकृति
टिप्पणी:-
वेद, वेदांत आदी शास्त्र तुम्हारा अस्तित्व है, यही सभीका मुल सिद्धांत है। इसी की और तुम्हे आना है।
समस्या दिखे तो गुरुवो, आचार्यो से उसका समाधान करवा लीजिए, भोंदु, भांगडुओ से नही।
🙏ब्रह्मणे नमः🙏
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Gita 7.19 बहुत जन्मोंके अन्तके जन्ममें तत्वज्ञान को प्राप्त पुरुष सब कुछ वासुदेव ही है इस प्रकार मुझको भजता है। वह महात्मा अत्यंत दुर्लभ है।
Advait me hamlog aise hi bhagwan ko bhajte hain. Sabkuchh Vasudev hi hain. Unke alawa is sansar me aur kuchh nahi h
#Bhakti@advaitikreference
Advait me hamlog aise hi bhagwan ko bhajte hain. Sabkuchh Vasudev hi hain. Unke alawa is sansar me aur kuchh nahi h
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अद्वैत में भक्ति कैसे होती है, बताता हूँ। हम लोग भगवान को भजते हैं जो यह संसार है, जो सब कुछ है, सब कुछ (अद्वैत - non-duality) उसके अलावा कुछ नहीं है। उस भगवान को मैं भजता हूँ। मेरे माता-पिता सब भगवान हैं।
त्वमेव माता च पिता त्वमेव,
त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।
त्वमेव विद्या च द्रविणं त्वमेव,
त्वमेव सर्वम् मम देवदेवम्।।
त्वमेव सर्वम् (अद्वैत केवल एक) यानी वह सब कुछ है, मैं उस भगवान को भजता हूँ। जब मैं अपनी माता का सेवा करता हूँ, तब मैं यह सोचता हूँ कि मैं भगवान की सेवा कर रहा हूँ, क्योंकि वह भी भगवान हैं (अद्वैत - he is the only one)। सब कुछ भगवान है, सब कुछ। जब मैं अपने दोस्त के साथ खेल रहा होता हूँ, तब मैं यह देखता हूँ कि यह मेरा दोस्त स्वयं भगवान है। मैं कृष्ण के साथ ही खेल रहा हूँ। जब मैं आपसे बात कर रहा हूँ, तब भी मैं आपको भगवान के रूप में देखता हूँ। मेरा यह शरीर भगवान नहीं है। मेरी चेतना भगवान है। मेरी चेतना ही आप हो। भगवान मेरी चेतना है, सबकी चेतना। वह मुझसे अलग नहीं है। वह हम सब से अलग नहीं है क्योंकि वह हमारी चेतना है। उस भगवान को मैं भजता हूँ। उस भगवान को मैं भजता हूँ। जय श्री कृष्ण। हर हर महादेव। जय माँ आदि शक्ति। 🙏🙏 सत्यमेव जयते 🙏🙏
#Explainers@advaitikreference
त्वमेव माता च पिता त्वमेव,
त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।
त्वमेव विद्या च द्रविणं त्वमेव,
त्वमेव सर्वम् मम देवदेवम्।।
त्वमेव सर्वम् (अद्वैत केवल एक) यानी वह सब कुछ है, मैं उस भगवान को भजता हूँ। जब मैं अपनी माता का सेवा करता हूँ, तब मैं यह सोचता हूँ कि मैं भगवान की सेवा कर रहा हूँ, क्योंकि वह भी भगवान हैं (अद्वैत - he is the only one)। सब कुछ भगवान है, सब कुछ। जब मैं अपने दोस्त के साथ खेल रहा होता हूँ, तब मैं यह देखता हूँ कि यह मेरा दोस्त स्वयं भगवान है। मैं कृष्ण के साथ ही खेल रहा हूँ। जब मैं आपसे बात कर रहा हूँ, तब भी मैं आपको भगवान के रूप में देखता हूँ। मेरा यह शरीर भगवान नहीं है। मेरी चेतना भगवान है। मेरी चेतना ही आप हो। भगवान मेरी चेतना है, सबकी चेतना। वह मुझसे अलग नहीं है। वह हम सब से अलग नहीं है क्योंकि वह हमारी चेतना है। उस भगवान को मैं भजता हूँ। उस भगवान को मैं भजता हूँ। जय श्री कृष्ण। हर हर महादेव। जय माँ आदि शक्ति। 🙏🙏 सत्यमेव जयते 🙏🙏
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Formless God is known as Brahm.
Brahm has internal Shakti from which it does actions and also creates universe. This Shakti is known as Maya.
Nirgun Brahm + Vidya(Shudda) Maya = Sagun Brahm (Ishwar).
This includes sagun gods like Shiva, Vishnu, Krishna, Adi Shakti etc.
Nirgun Brahm + Avidya Maya = Jeeva
This includes all of us human beings, animals, plants etc.
#Explainers@advaitikreference
Brahm has internal Shakti from which it does actions and also creates universe. This Shakti is known as Maya.
Nirgun Brahm + Vidya(Shudda) Maya = Sagun Brahm (Ishwar).
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Nirgun Brahm + Avidya Maya = Jeeva
This includes all of us human beings, animals, plants etc.
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