Bhai log ho skta hai mai telegram par kuchh din active na rahu. Lekin post maine bahut sare schedule kar diye hain. 12 may Tak posts schedule hain. Vo sab aate rahenge. Telegram uninstall karne ja raha hu kuchh dino ke liye.
1. पिता ने कहा: "मुझे उस न्यग्रोध (बरगद) वृक्ष का एक फल लाकर दो।"
पुत्र ने कहा: "यह रहा, गुरुदेव।"
पिता बोले: "इसे तोड़ो।"
पुत्र: "मैंने इसे तोड़ दिया, गुरुदेव।"
पिता: "इसके अंदर क्या दिख रहा है?"
पुत्र: "इसमें बहुत छोटे-छोटे बीज हैं।"
पिता: "इनमें से एक बीज तोड़ो।"
पुत्र: "मैंने इसे तोड़ दिया, गुरुदेव।"
पिता: "अब इसमें क्या दिख रहा है?"
पुत्र: "कुछ भी नहीं, गुरुदेव।"
2. पिता ने कहा: "हे प्रिय, जो यह सूक्ष्म तत्व (बीज के भीतर) तुम नहीं देख पा रहे—इसी सूक्ष्म तत्व से यह विशाल न्यग्रोध वृक्ष उत्पन्न होता है। इसे सत्य मानो, हे प्रिय।"
3. "अब, जो यह सूक्ष्म तत्व (सार) है, उसी में संपूर्ण अस्तित्व स्थित है। वही सत्य है। वही आत्मा है।
हे श्वेतकेतु, तुम वही हो!"
- Chhandogya Upanishad 6.12.1-3, Saam Veda
पुत्र ने कहा: "यह रहा, गुरुदेव।"
पिता बोले: "इसे तोड़ो।"
पुत्र: "मैंने इसे तोड़ दिया, गुरुदेव।"
पिता: "इसके अंदर क्या दिख रहा है?"
पुत्र: "इसमें बहुत छोटे-छोटे बीज हैं।"
पिता: "इनमें से एक बीज तोड़ो।"
पुत्र: "मैंने इसे तोड़ दिया, गुरुदेव।"
पिता: "अब इसमें क्या दिख रहा है?"
पुत्र: "कुछ भी नहीं, गुरुदेव।"
2. पिता ने कहा: "हे प्रिय, जो यह सूक्ष्म तत्व (बीज के भीतर) तुम नहीं देख पा रहे—इसी सूक्ष्म तत्व से यह विशाल न्यग्रोध वृक्ष उत्पन्न होता है। इसे सत्य मानो, हे प्रिय।"
3. "अब, जो यह सूक्ष्म तत्व (सार) है, उसी में संपूर्ण अस्तित्व स्थित है। वही सत्य है। वही आत्मा है।
हे श्वेतकेतु, तुम वही हो!"
- Chhandogya Upanishad 6.12.1-3, Saam Veda
1. पिता ने कहा: "इस नमक को पानी में डाल दो और सुबह मेरे पास आओ।"
पुत्र ने वैसा ही किया।
अगली सुबह, पिता ने पूछा: "बेटा, वह नमक लाकर दो जो तुमने पानी में डाला था।"
पुत्र ने पानी में ढूँढा, लेकिन वह नमक नहीं मिला, क्योंकि वह पूरी तरह घुल चुका था।
2. पिता ने कहा:
"बेटा, पानी के ऊपर से थोड़ा चखो। कैसा है?"
पुत्र: "यह खारा (नमकीन) है।"
पिता: "अब बीच से चखो। कैसा है?"
पुत्र: "यह भी खारा है।"
पिता: "अब तले से चखो। कैसा है?"
पुत्र: "यह भी खारा है।"
पिता: "अब इस पानी को बाहर फेंक दो और वापस आओ।"
पुत्र ने ऐसा ही किया और कहा: "गुरुदेव, नमक हर जगह मौजूद था।"
पिता बोले: "बिल्कुल वैसे ही, हे प्रिय, इस शरीर में भी तुम सत् (परम सत्ता) को प्रत्यक्ष नहीं देख पाते, लेकिन वह वास्तव में विद्यमान है।"
3. "अब, जो यह सूक्ष्म तत्व (सार) है, उसी में संपूर्ण अस्तित्व स्थित है। वही सत्य है। वही आत्मा है।
हे श्वेतकेतु, तुम वही हो!"
- Chhandogya Upanishad 6.13.1-3, Saam Veda
पुत्र ने वैसा ही किया।
अगली सुबह, पिता ने पूछा: "बेटा, वह नमक लाकर दो जो तुमने पानी में डाला था।"
पुत्र ने पानी में ढूँढा, लेकिन वह नमक नहीं मिला, क्योंकि वह पूरी तरह घुल चुका था।
2. पिता ने कहा:
"बेटा, पानी के ऊपर से थोड़ा चखो। कैसा है?"
पुत्र: "यह खारा (नमकीन) है।"
पिता: "अब बीच से चखो। कैसा है?"
पुत्र: "यह भी खारा है।"
पिता: "अब तले से चखो। कैसा है?"
पुत्र: "यह भी खारा है।"
पिता: "अब इस पानी को बाहर फेंक दो और वापस आओ।"
पुत्र ने ऐसा ही किया और कहा: "गुरुदेव, नमक हर जगह मौजूद था।"
पिता बोले: "बिल्कुल वैसे ही, हे प्रिय, इस शरीर में भी तुम सत् (परम सत्ता) को प्रत्यक्ष नहीं देख पाते, लेकिन वह वास्तव में विद्यमान है।"
3. "अब, जो यह सूक्ष्म तत्व (सार) है, उसी में संपूर्ण अस्तित्व स्थित है। वही सत्य है। वही आत्मा है।
हे श्वेतकेतु, तुम वही हो!"
- Chhandogya Upanishad 6.13.1-3, Saam Veda
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Source - Grok AI
Credits - Ramakrishna Sharanam
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Credits - Ramakrishna Sharanam
Vishnu Puran 1.3.1 Gita Press
कई लोग कहते हैं कि निर्गुण ब्रह्म तो अकर्ता है तो उससे समस्त संसार कैसे उत्पन्न हो सकता है। पहली बात, कुछ उत्पन्न नहीं होता है। निर्गुण ब्रह्म ही माया के कारण विभिन्न रूपों में प्रतीत होता है। और दूसरी बात जैसे वेद कहता है कि आकाश से वायु उत्पन्न हुआ। तो क्या उससे आकाश प्रभावित हुआ? आकाश में तो कोई चेंज नहीं आया। वैसे ही ब्रह्म अकर्ता होते हुए भी ये सब प्रपंच उसमें होता है।
कई लोग कहते हैं कि निर्गुण ब्रह्म तो अकर्ता है तो उससे समस्त संसार कैसे उत्पन्न हो सकता है। पहली बात, कुछ उत्पन्न नहीं होता है। निर्गुण ब्रह्म ही माया के कारण विभिन्न रूपों में प्रतीत होता है। और दूसरी बात जैसे वेद कहता है कि आकाश से वायु उत्पन्न हुआ। तो क्या उससे आकाश प्रभावित हुआ? आकाश में तो कोई चेंज नहीं आया। वैसे ही ब्रह्म अकर्ता होते हुए भी ये सब प्रपंच उसमें होता है।
कई लोग पूछते हैं की क्या अद्वैत बस भारत तक ही सीमित है। क्या दूसरे धर्मो के लोगो को अद्वैत realisation नही होता? क्या दुनिया के दूसरे कोनो में लोगो को आत्मज्ञान हुआ ही नहीं है?
असल में अद्वैत हर जगह है। Abrahmic religion (Islam, Christianity, Judaism) के पहले Pagan Traditions दुनिया भर में थे। और आपको जानकर आश्चर्य होगा की उनका philosophy भी अद्वैत के काफी similar है। यहाँ तक की कुछ sufi संतो को और कुछ christian mystics को भी अद्वैत realisation हो गया और तो Judaism में भी एक संप्रदाय है kabbalah जिसकी teachings भी अद्वैत जैसी ही है।
ये सारे link पर जाइए और आपको खुद से भी research करना है तो कर सकते हैं।
1. Advait in Pagan Traditions
2. Advait Realisation across various people and culture around the globe
3. Advait in Kabbalah Judaism
4. Advait in Sufism Islam and Christian Mystics
5. Quote of a sufi saint teaching Non Duality
6. Christianity and Non Duality
[Islam और Christianity भी यहूदी धर्म (Judaism) से ही निकले हैं। इन्हें Abrahmic Religion इसलिए कहा जाता है क्योंकि तीनों ही धर्म एक ही पैगंबर अब्राहम (इब्राहीम) को मानते हैं। सबसे पहले यहूदी धर्म बना, फिर उसके बाद ईसाई धर्म और फिर इस्लाम आया। इन सब religions के पहले pagan traditions दुनिया भर में थे।]
असल में अद्वैत हर जगह है। Abrahmic religion (Islam, Christianity, Judaism) के पहले Pagan Traditions दुनिया भर में थे। और आपको जानकर आश्चर्य होगा की उनका philosophy भी अद्वैत के काफी similar है। यहाँ तक की कुछ sufi संतो को और कुछ christian mystics को भी अद्वैत realisation हो गया और तो Judaism में भी एक संप्रदाय है kabbalah जिसकी teachings भी अद्वैत जैसी ही है।
ये सारे link पर जाइए और आपको खुद से भी research करना है तो कर सकते हैं।
1. Advait in Pagan Traditions
2. Advait Realisation across various people and culture around the globe
3. Advait in Kabbalah Judaism
4. Advait in Sufism Islam and Christian Mystics
5. Quote of a sufi saint teaching Non Duality
6. Christianity and Non Duality
[Islam और Christianity भी यहूदी धर्म (Judaism) से ही निकले हैं। इन्हें Abrahmic Religion इसलिए कहा जाता है क्योंकि तीनों ही धर्म एक ही पैगंबर अब्राहम (इब्राहीम) को मानते हैं। सबसे पहले यहूदी धर्म बना, फिर उसके बाद ईसाई धर्म और फिर इस्लाम आया। इन सब religions के पहले pagan traditions दुनिया भर में थे।]
कई लोग कहते हैं की मोक्ष मिलना तो बहुत कठिन है। अगर कोई प्रयत्न भी करें तब भी क्या लाभ, क्या पता मोक्ष मिल ही नही पाए।
ऐसा ही प्रश्न अर्जुन ने भी कृष्ण से किया था।
भगवद गीता 6.37 से 6.45
इसमें अर्जुन ने पूछा है कि उन लोगों का क्या होता है जो मोक्ष के लिए प्रयत्न करते हैं लेकिन मोक्ष नहीं मिल पाता।
इस पर कृष्ण कहते हैं कि वे मृत्यु के बाद अच्छे लोकों को जाते हैं। वहाँ पर कई सारा समय बिताने के बाद उनका जन्म अमीर परिवार में होता है, उसके बाद जितना उन्होंने साधना अपने पिछले जन्म में किया था, वह सब waste नहीं जाता बल्कि वह सब ज्ञान वापस आ जाता है और साधना जहाँ से छोड़ा था वहीं से continue होता है।
तो भाई फायदा ही फायदा है। मोक्ष नहीं मिल पाया तो उत्तम लोक मिल जाएगा। देवताओं का शरीर मिल जाएगा। और योग साधना वगैरह करने से जीवन में शांति का भी अनुभव होता है। Budhhist Monks के brain पर तो कई research किए गए हैं।
ऐसा ही प्रश्न अर्जुन ने भी कृष्ण से किया था।
भगवद गीता 6.37 से 6.45
इसमें अर्जुन ने पूछा है कि उन लोगों का क्या होता है जो मोक्ष के लिए प्रयत्न करते हैं लेकिन मोक्ष नहीं मिल पाता।
इस पर कृष्ण कहते हैं कि वे मृत्यु के बाद अच्छे लोकों को जाते हैं। वहाँ पर कई सारा समय बिताने के बाद उनका जन्म अमीर परिवार में होता है, उसके बाद जितना उन्होंने साधना अपने पिछले जन्म में किया था, वह सब waste नहीं जाता बल्कि वह सब ज्ञान वापस आ जाता है और साधना जहाँ से छोड़ा था वहीं से continue होता है।
तो भाई फायदा ही फायदा है। मोक्ष नहीं मिल पाया तो उत्तम लोक मिल जाएगा। देवताओं का शरीर मिल जाएगा। और योग साधना वगैरह करने से जीवन में शांति का भी अनुभव होता है। Budhhist Monks के brain पर तो कई research किए गए हैं।
Jyotirmath ke vartaman shankracharya Swami Shri Avimukteshvaranand Ji
https://youtu.be/_cSaIAa9sgo?si=rvyY4qvuCY3raoYd
https://youtu.be/_cSaIAa9sgo?si=rvyY4qvuCY3raoYd
YouTube
प्रश्न प्रबोध: 611 - जब हम ही ब्रह्म हैं, तो किसीकी पूजा क्यों करें?
Just a small act - Big impact!
When you help somebody it's actually you are helping yourselves because everything is you and it goes vice versa also when you hurt somebody you hurt yourself.
https://youtube.com/shorts/OVzf1zg3xys?si=mg51XmsMP4ZMEevs
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आप सभी को शिवावतार भगवान् आदि शंकराचार्य जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏
आदि शंकराचार्य जी के बारे में जानने के लिए ये documentary देखें। काफी अच्छा documentary है आप सभी को पसंद आएगा। इसकी hosting अनुपम खेर ने की है।
https://youtu.be/qLdUesiPSb0?si=PGFs8SHkTOn9FNf5
कलौ रुद्रो महादेवो लोकानामीश्वरः परः । न देवता भवेन्नृणां देवतानांच दैवतम्। । करिष्यत्यवताराणि शंकरो नीललोहितः । श्रौतस्मार्त्तप्रतिष्ठार्थं भक्तानां हितकाम्यया ।। उपदेक्ष्यति तज्ज्ञानं शिष्याणां ब्रह्मासंज्ञितम । सर्ववेदान्तसार हि धर्मान वेदनदिर्शितान।। ये तं विप्रा निषेवन्ते येन केनोपचारत: । विजित्य कलिजान दोषान यान्ति ते परमं पदम।।
Mahadeva (who goes by the name Rudra), who is the greatest controller and even the Lord of the Devatas will incarnate in Kalyuga for the benefit of humanity. He will spread the philosophy of the Shrutis and Smritis. He will preach about the Ultimate Brahman along with his disciples. The philosophy spread by him would be flawless and the crux of the Vedanta.
- Kurma Puran 1.2.8.32-34
आदि शंकराचार्य जी के बारे में जानने के लिए ये documentary देखें। काफी अच्छा documentary है आप सभी को पसंद आएगा। इसकी hosting अनुपम खेर ने की है।
https://youtu.be/qLdUesiPSb0?si=PGFs8SHkTOn9FNf5
Shiva Puran, Rudra samhita, Sati khand, Chapter 43, Verse 12-17
Lord Shiva is saying that he does actions through his maya. 👇
Lord Shiva is saying that he does actions through his maya. 👇
-- Lord Brahma to Devas and Rishis
•Shiva Maha Puran, Rudra Samhita, Chapter 12, Verses 57-78
•Shiva Maha Puran, Rudra Samhita, Chapter 12, Verses 57-78