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Pujya Shri Premanand Maharaj Ji🙏
Ek hi tattva hai. Radha hi Shiva hain. Krishna hi Kali hain.
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पूज्य श्री प्रेमानंद जी महाराज 🙏🙏
जो आत्मा है वही श्री कृष्ण है जो श्री कृष्ण है वही आत्मा है।
जो आत्मा है वही श्री कृष्ण है जो श्री कृष्ण है वही आत्मा है।
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स्कंद उपनिषद– श्लोक ८,९
शिवाय विष्णु रूपाय शिव रूपाय विष्णवे |
शिवस्य हृदयं विष्णुं विष्णोश्च हृदयं शिवः ||
यथा शिवमयो विष्णुरेवं विष्णुमयः शिवः |
यथाsन्तरम् न पश्यामि तथा में स्वस्तिरायुषि ||
Skanda Upanishad– Verse 8, 9: Salutations to Shiva who is in the form of Vishnu and to Vishnu who is in the form of Shiva. The heart of Shiva is Vishnu, and the heart of Vishnu is Shiva. Just as Shiva is pervaded by Vishnu, so too is Vishnu pervaded by Shiva. Since I see no difference between the two, may I have a blessed and long life.
Also in Harivamsha Parva of Mahabharata in 2.125.29
शिवाय विष्णुरूपाय विष्णवे शिवरूपिणे । यथान्तरं न पश्यमि तेन तौ दिशतः शिवम् ॥
Shiva is in the form of Vishnu and Vishnu is in the form of Shiva. There is no difference between them and both provide Auspiciousness.
शिवाय विष्णु रूपाय शिव रूपाय विष्णवे |
शिवस्य हृदयं विष्णुं विष्णोश्च हृदयं शिवः ||
यथा शिवमयो विष्णुरेवं विष्णुमयः शिवः |
यथाsन्तरम् न पश्यामि तथा में स्वस्तिरायुषि ||
Skanda Upanishad– Verse 8, 9: Salutations to Shiva who is in the form of Vishnu and to Vishnu who is in the form of Shiva. The heart of Shiva is Vishnu, and the heart of Vishnu is Shiva. Just as Shiva is pervaded by Vishnu, so too is Vishnu pervaded by Shiva. Since I see no difference between the two, may I have a blessed and long life.
Also in Harivamsha Parva of Mahabharata in 2.125.29
शिवाय विष्णुरूपाय विष्णवे शिवरूपिणे । यथान्तरं न पश्यमि तेन तौ दिशतः शिवम् ॥
Shiva is in the form of Vishnu and Vishnu is in the form of Shiva. There is no difference between them and both provide Auspiciousness.
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नारायण उपनिषद श्लोक २
अथ नित्यो नारायणः ।ब्रह्मा नारायण: ।शिवश्चनारायण: ।शक्रश्च नारायण: ।कलश्च नारायण: ।दिशाश्च नारायणः ।विदिशाश्च नारायणः ।ऊर्ध्वं च नारायणः ।अधश्च नारायणःअन्तर्बहिश्च नारायणः।
नारायण एवेदं सर्वं यद्भूतं यच्च भव्यम्। निष्कलंको निरञ्जनो निर्विकल्पो निरख्यातः शुद्धो देवा एको नारायणो ने द्वितीयोऽस्ति कश्चित् ।या एवं वेद से विष्णुरेव भवति स विष्णुरेव भवति ।
एतद्यजुर्वेदशिरोऽधिते ॥
हिंदी अर्थ
भगवान् नारायण ही नित्य (शाश्वत) हैं। ब्रह्माजी भी नारायण हैं। भगवान शिव एवं देवराज इन्द्र भी नारायण हैं। काल और दिशाएँ भी नारायण हैं। विदेशियाँ (दिशाओं के मध्य के कोण) भी नारायण हैं। ऊर्ध्व भी नारायण और अध; भी नारायण है। अन्तः एवं बाह्य भी नारायण हैं। जो कुछ हो गया और जो कुछ हो रहा है तथा जो होने वाला है, वह सभी कुछ भगवान नारायण ही हैं। नारायण ही एकमात्र निष्कलंक, निरञ्जन, निर्विकल्प, अनिर्वचनीय और विशुद्ध देव हैं। उनका अतिरिक्त कोई दूसरा नहीं। जो मनुष्य ऐसा जानता है, वह स्वयं विष्णुमय हो जाता है, वह विष्णु ही हो जाता है, ऐसा ही यजुर्वेदीय उपनिषद् का कथन है ॥
अथ नित्यो नारायणः ।ब्रह्मा नारायण: ।शिवश्चनारायण: ।शक्रश्च नारायण: ।कलश्च नारायण: ।दिशाश्च नारायणः ।विदिशाश्च नारायणः ।ऊर्ध्वं च नारायणः ।अधश्च नारायणःअन्तर्बहिश्च नारायणः।
नारायण एवेदं सर्वं यद्भूतं यच्च भव्यम्। निष्कलंको निरञ्जनो निर्विकल्पो निरख्यातः शुद्धो देवा एको नारायणो ने द्वितीयोऽस्ति कश्चित् ।या एवं वेद से विष्णुरेव भवति स विष्णुरेव भवति ।
एतद्यजुर्वेदशिरोऽधिते ॥
हिंदी अर्थ
भगवान् नारायण ही नित्य (शाश्वत) हैं। ब्रह्माजी भी नारायण हैं। भगवान शिव एवं देवराज इन्द्र भी नारायण हैं। काल और दिशाएँ भी नारायण हैं। विदेशियाँ (दिशाओं के मध्य के कोण) भी नारायण हैं। ऊर्ध्व भी नारायण और अध; भी नारायण है। अन्तः एवं बाह्य भी नारायण हैं। जो कुछ हो गया और जो कुछ हो रहा है तथा जो होने वाला है, वह सभी कुछ भगवान नारायण ही हैं। नारायण ही एकमात्र निष्कलंक, निरञ्जन, निर्विकल्प, अनिर्वचनीय और विशुद्ध देव हैं। उनका अतिरिक्त कोई दूसरा नहीं। जो मनुष्य ऐसा जानता है, वह स्वयं विष्णुमय हो जाता है, वह विष्णु ही हो जाता है, ऐसा ही यजुर्वेदीय उपनिषद् का कथन है ॥
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Pujya Shri Premanand Ji Maharaj 🙏
Tu hi bhagwan hai. Sabkuchh tu hi hai.
Tu hi bhagwan hai. Sabkuchh tu hi hai.
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Forwarded from ꧁वासुदेव꧂
श्रीशिवमहापुराणे चतुर्थ्या कोटिरुद्रसंहितायां ज्ञाननिरूपर्ण नाम त्रिचत्वारिशोऽ ध्यायः ॥ ४३ ॥ ॥ इस प्रकार श्रीशिवमहापुराणके अन्तर्गत चतुर्थ कोटिरुद्रसंहितामें ज्ञान निरूपण
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Jai Maa Radha. Jai Maa Parvati. Jai Maa Adi Shakti. Satyamev Jayate🙏
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Srimad Bhagwatam (Bhagvat Puran) 10.30.2-3 Gita press
Ye dekhiye bhakti ki param avastha. Gopiya jab Shri Krishna ke prati prem ras me dubi thi. Tab unhe ahsas ho gya ki vahi Shri Krishna hain.
Bhakti ki param avastha me bhakt bhagwan se apne ko abhed dekh leta h. Isi ko to advait kahte hain.
#Bhakti@advaitikreference
Ye dekhiye bhakti ki param avastha. Gopiya jab Shri Krishna ke prati prem ras me dubi thi. Tab unhe ahsas ho gya ki vahi Shri Krishna hain.
Bhakti ki param avastha me bhakt bhagwan se apne ko abhed dekh leta h. Isi ko to advait kahte hain.
#Bhakti@advaitikreference
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Govardhan math ke vartaman Shankracharya Pujya Swami Shri Nischalananda Saraswati Ji🙏
Kya hai Sanatan dharm me ishwar ki paribhasa. Shankracharya ji jis shlok ke bare me bata rhe hain vo upar bheja hu.
Kya hai Sanatan dharm me ishwar ki paribhasa. Shankracharya ji jis shlok ke bare me bata rhe hain vo upar bheja hu.
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परम पूज्य श्री प्रेमानंद जी महाराज आत्मा की परिभाषा देते हुए 🙏🙏 ध्यान से सुनें 🙏🙏
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ऋग्वेद का नासदीय सूक्त। Last me dhayan se suniye.
" Ya sayad use bhi pata na ho. "
Last में आया है शायद उसे भी पता नहीं है। यहाँ पर इसे अद्वैत से जोड़ा जा सकता है। जीव जो अविद्या में है वही ब्रह्म है, उसी ने संसार को रचा है लेकिन उसे ही पता नहीं है कि उसने संसार को रचा है। In short ये संसार हमने ही रचा है, हमारे मन का ही खेल है लेकिन हमें ही नहीं पता है।
" Ya sayad use bhi pata na ho. "
Last में आया है शायद उसे भी पता नहीं है। यहाँ पर इसे अद्वैत से जोड़ा जा सकता है। जीव जो अविद्या में है वही ब्रह्म है, उसी ने संसार को रचा है लेकिन उसे ही पता नहीं है कि उसने संसार को रचा है। In short ये संसार हमने ही रचा है, हमारे मन का ही खेल है लेकिन हमें ही नहीं पता है।