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Mob. No. +91 77260 47578
+91 77260 47578
Thank you so much 🙏😊
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Note:- only WhatsApp kare call na kare .
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BSER : रीट 2024 की परीक्षा के कारण आगे बढ़ी तारीख, 10वीं -12वीं की मुख्य परीक्षाएं 6 मार्च से ही शुरू होगी, एक सप्ताह में बोर्ड जारी करेगा परीक्षा टाइम टेबल ✅
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प्रमुख रियासतों के राजाओं की उपाधियां🔰
[Special RAS Pre Exam]
🔶 मेवाड़ के शासक
▪️बप्पा रावल ➙ हिंदू सूरज, राजगुरु, चक्कवे
▪️राणा हमीर ➙ मेवाड़ का उद्घारक, विषम का घाटी पंचानन
▪️राणा कुंभा ➙ हिंदू सुरताण, अभिनव भरताचार्य, राणा रासो (साहित्यकारों का आश्रय दाता), हाल गुरु (पहाड़ी किलों को जीतने वाला), दान गुरु, छाप गुरु, छापामार युद्ध प्रणाली
▪️राणा सांगा ➙ हिंदू पथ, सैनिकों का भग्नावशेष
▪️राजसिंह ➙ विजय कटकातू (सेनाओ को जीतने वाला), हाइड्रोलिक रूलर
🔷 मारवाड़ के शासक
▪️मालदेव ➙ हिंदू बादशाह, हसमत वाला राजा (वैभव वाला राजा)
▪️चंद्रसेन ➙ मारवाड़ का प्रताप, प्रताप का अग्रगामी, मारवाड़ का भूला बिसरा राजा
▪️गजसिंह ➙ दल थंबन की उपाधि (जहांगीर) द्वारा
▪️अमर सिंह राठौड़ ➙ कटार का धणी
▪️दुर्गादास राठौड़ ➙ राठौड़ों का यूलीसेज (जेम्स टॉड), राजपूताने का गैरीबाल्डी, मारवाड़ का अणबिंदिओ मोती
🔷 बीकानेर के शासक
▪️राव लूणकरण ➙ बिट्टू सुजा ने लूणकरण को कलयुग का कर्ण कहां है
▪️कर्ण सिंह ➙ जांगल धर का बादशाह
▪️रायसिंह ➙ मुंशी देवी प्रसाद ने राजपूताने का कर्ण कहा
🔶 चौहान वंश के शासक
▪️विग्रहराज चतुर्थ ➙ बीसलदेव, कवि बंन्धु
▪️पृथ्वीराज चौहान तृतीय ➙ राय पिथौरा दल पुंगल
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[Special RAS Pre Exam]
🔶 मेवाड़ के शासक
▪️बप्पा रावल ➙ हिंदू सूरज, राजगुरु, चक्कवे
▪️राणा हमीर ➙ मेवाड़ का उद्घारक, विषम का घाटी पंचानन
▪️राणा कुंभा ➙ हिंदू सुरताण, अभिनव भरताचार्य, राणा रासो (साहित्यकारों का आश्रय दाता), हाल गुरु (पहाड़ी किलों को जीतने वाला), दान गुरु, छाप गुरु, छापामार युद्ध प्रणाली
▪️राणा सांगा ➙ हिंदू पथ, सैनिकों का भग्नावशेष
▪️राजसिंह ➙ विजय कटकातू (सेनाओ को जीतने वाला), हाइड्रोलिक रूलर
🔷 मारवाड़ के शासक
▪️मालदेव ➙ हिंदू बादशाह, हसमत वाला राजा (वैभव वाला राजा)
▪️चंद्रसेन ➙ मारवाड़ का प्रताप, प्रताप का अग्रगामी, मारवाड़ का भूला बिसरा राजा
▪️गजसिंह ➙ दल थंबन की उपाधि (जहांगीर) द्वारा
▪️अमर सिंह राठौड़ ➙ कटार का धणी
▪️दुर्गादास राठौड़ ➙ राठौड़ों का यूलीसेज (जेम्स टॉड), राजपूताने का गैरीबाल्डी, मारवाड़ का अणबिंदिओ मोती
🔷 बीकानेर के शासक
▪️राव लूणकरण ➙ बिट्टू सुजा ने लूणकरण को कलयुग का कर्ण कहां है
▪️कर्ण सिंह ➙ जांगल धर का बादशाह
▪️रायसिंह ➙ मुंशी देवी प्रसाद ने राजपूताने का कर्ण कहा
🔶 चौहान वंश के शासक
▪️विग्रहराज चतुर्थ ➙ बीसलदेव, कवि बंन्धु
▪️पृथ्वीराज चौहान तृतीय ➙ राय पिथौरा दल पुंगल
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राजस्थान का एकीकरण :-
राजस्थान के एकीकरण का श्रेय सरदार वल्लभभाई पटेल को दिया जाता है। राजस्थान का एकीकरण 7 चरणों में पूरा हुआ राजस्थान का एकीकरण 18 मार्च 1948 से शुरू होकर 1 नवंबर 1956 को पूरा हुआ इसमें 8 वर्ष 7 माह 14 दिन लगे।
आजादी के समय राजस्थान में 19 रियासते की 3 ठिकाने और 1 केंद्र शासित प्रदेश अजमेर-मेरवाड़ा था।
ठिकाने – लावा, कुशलगढ़, नीमराना ठिकाना।
राजस्थान के एकीकरण के चरण
• एकीकरण की प्रक्रिया में शामिल होने वाली पहली रियासत अलवर और अंतिम रियासत सिरोही अजमेर मेरवाड़ा क्षेत्र थे।
• राजस्थान में सबसे पुरानी रियासत मेवाड़ और सबसे नई रियासत झालावाड़ थी।
• क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ी रियासत जोधपुर और सबसे छोटी शाहपुरा थी राजस्थान की एकमात्र मुस्लिम रियासत टोंक थी।
प्रथम चरण – मत्स्य संघ
तिथि – 18 मार्च 1948
सम्मिलित रियासतें एवं ठिकाने – अलवर भरतपुर धौलपुर करौली नीमराना ठिकाना।
राजधानी- अलवर
उद्घाटनकर्ता – एन. वी. गाडगिल
प्रधानमंत्री – शोभाराम कुमावत (अलवर से)
राजप्रमुख – उदयभान सिंह (धौलपुर शासक)
नामकरण – के. एम्. मुंशी
द्वितीय चरण – पूर्व राजस्थान संघ
तिथि – 25 मार्च 1948
सम्मिलित रियासतें एवं ठिकाने – टोंक (ठिकाना—लावा), बूंदी, कोटा, झालावाड़, शाहगढ़, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा (ठिकाना—कुशलगढ़) और किशनगढ़।
उद्घाटनकर्ता – एन. वी. गाडगिल
प्रधानमंत्री – गोकुल लाल ओसवा (शाहपुरा)
राजप्रमुख – भीम सिंह (कोटा)
उपराजप्रमुख – बहादुरसिंह (बूंदी)
तृतीय चरण – संयुक्त राजस्थान
तिथि – 18 अप्रैल 1948
सम्मिलित रियासत – उदयपुर रियासत
राजधानी – उदयपुर
उद्घाटनकर्ता – पं. जवाहर लाल नेहरु
प्रधानमंत्री – माणिक्यलाल वर्मा (उदयपुर)
राजप्रमुख – भूपाल सिंह (उदयपुर)
उपराजप्रमुख – भीम सिंह (कोटा)
चतुर्थ चरण – वृहत राजस्थान
तिथि – 30 मार्च 1949
सम्मिलित रियासतें एवं ठिकाने – संयुक्त राजस्थान में जयपुर जोधपुर जैसलमेर बीकानेर रियासतें शामिल।
राजधानी – जयपुर
उद्घाटनकर्ता – सरदार वल्लभ भाई पटेल
प्रधानमंत्री – हीरालाल शास्त्री (जयपुर)
महाराजप्रमुख – भूपाल सिंह (उदयपुर)
राजप्रमुख – मानसिंह दितीय (जयपुर)
उपराजप्रमुख – भीम सिंह (कोटा)
पंचम चरण – संयुक्त वृहत राजस्थान
तिथि – 15 मई 1949
सम्मिलित रियासतें एवं ठिकाने – वृहत राजस्थान में मत्स्य संघ शामिल।
राजधानी – जयपुर
सम्मलित रियासतें – वृहद राजस्थान और मत्स्य संघ
प्रथम मुख्यमंत्री – हीरा लाल शास्त्री
राजप्रमुख – मानसिंह दितीय (जयपुर)
षष्ठम चरण – राजस्थान संघ
तिथि – 26 जनवरी 1950
सम्मिलित रियासतें एवं ठिकाने – संयुक्त वृहद राजस्थान एवं सिरोही राजस्थान में शामिल।
आज ही के दिन इस भौगोलिक क्षेत्र को आधिकारिक राजस्थान नाम मिला।
राजधानी – जयपुर
मुख्यमंत्री – हीरा लाल शास्त्री
राजप्रमुख – मानसिंह दितीय (जयपुर)
सप्तम चरण – राजस्थान
तिथि – 1 नवम्बर 1956
अजमेर-मेरवाड़ा, आबू-देलवाड़ा व मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले का सुनील टप्पा गाँव राजस्थान में शामिल।
सिरोंज उपखण्ड मध्यप्रदेश को दिया गया।
राजधानी – जयपुर
मुख्यमंत्री – मोहन लाल सुखाडिया
प्रथम राज्यपाल – गुरुमुख निहालसिंह
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राजस्थान के एकीकरण का श्रेय सरदार वल्लभभाई पटेल को दिया जाता है। राजस्थान का एकीकरण 7 चरणों में पूरा हुआ राजस्थान का एकीकरण 18 मार्च 1948 से शुरू होकर 1 नवंबर 1956 को पूरा हुआ इसमें 8 वर्ष 7 माह 14 दिन लगे।
आजादी के समय राजस्थान में 19 रियासते की 3 ठिकाने और 1 केंद्र शासित प्रदेश अजमेर-मेरवाड़ा था।
ठिकाने – लावा, कुशलगढ़, नीमराना ठिकाना।
राजस्थान के एकीकरण के चरण
• एकीकरण की प्रक्रिया में शामिल होने वाली पहली रियासत अलवर और अंतिम रियासत सिरोही अजमेर मेरवाड़ा क्षेत्र थे।
• राजस्थान में सबसे पुरानी रियासत मेवाड़ और सबसे नई रियासत झालावाड़ थी।
• क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ी रियासत जोधपुर और सबसे छोटी शाहपुरा थी राजस्थान की एकमात्र मुस्लिम रियासत टोंक थी।
प्रथम चरण – मत्स्य संघ
तिथि – 18 मार्च 1948
सम्मिलित रियासतें एवं ठिकाने – अलवर भरतपुर धौलपुर करौली नीमराना ठिकाना।
राजधानी- अलवर
उद्घाटनकर्ता – एन. वी. गाडगिल
प्रधानमंत्री – शोभाराम कुमावत (अलवर से)
राजप्रमुख – उदयभान सिंह (धौलपुर शासक)
नामकरण – के. एम्. मुंशी
द्वितीय चरण – पूर्व राजस्थान संघ
तिथि – 25 मार्च 1948
सम्मिलित रियासतें एवं ठिकाने – टोंक (ठिकाना—लावा), बूंदी, कोटा, झालावाड़, शाहगढ़, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा (ठिकाना—कुशलगढ़) और किशनगढ़।
उद्घाटनकर्ता – एन. वी. गाडगिल
प्रधानमंत्री – गोकुल लाल ओसवा (शाहपुरा)
राजप्रमुख – भीम सिंह (कोटा)
उपराजप्रमुख – बहादुरसिंह (बूंदी)
तृतीय चरण – संयुक्त राजस्थान
तिथि – 18 अप्रैल 1948
सम्मिलित रियासत – उदयपुर रियासत
राजधानी – उदयपुर
उद्घाटनकर्ता – पं. जवाहर लाल नेहरु
प्रधानमंत्री – माणिक्यलाल वर्मा (उदयपुर)
राजप्रमुख – भूपाल सिंह (उदयपुर)
उपराजप्रमुख – भीम सिंह (कोटा)
चतुर्थ चरण – वृहत राजस्थान
तिथि – 30 मार्च 1949
सम्मिलित रियासतें एवं ठिकाने – संयुक्त राजस्थान में जयपुर जोधपुर जैसलमेर बीकानेर रियासतें शामिल।
राजधानी – जयपुर
उद्घाटनकर्ता – सरदार वल्लभ भाई पटेल
प्रधानमंत्री – हीरालाल शास्त्री (जयपुर)
महाराजप्रमुख – भूपाल सिंह (उदयपुर)
राजप्रमुख – मानसिंह दितीय (जयपुर)
उपराजप्रमुख – भीम सिंह (कोटा)
पंचम चरण – संयुक्त वृहत राजस्थान
तिथि – 15 मई 1949
सम्मिलित रियासतें एवं ठिकाने – वृहत राजस्थान में मत्स्य संघ शामिल।
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सम्मलित रियासतें – वृहद राजस्थान और मत्स्य संघ
प्रथम मुख्यमंत्री – हीरा लाल शास्त्री
राजप्रमुख – मानसिंह दितीय (जयपुर)
षष्ठम चरण – राजस्थान संघ
तिथि – 26 जनवरी 1950
सम्मिलित रियासतें एवं ठिकाने – संयुक्त वृहद राजस्थान एवं सिरोही राजस्थान में शामिल।
आज ही के दिन इस भौगोलिक क्षेत्र को आधिकारिक राजस्थान नाम मिला।
राजधानी – जयपुर
मुख्यमंत्री – हीरा लाल शास्त्री
राजप्रमुख – मानसिंह दितीय (जयपुर)
सप्तम चरण – राजस्थान
तिथि – 1 नवम्बर 1956
अजमेर-मेरवाड़ा, आबू-देलवाड़ा व मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले का सुनील टप्पा गाँव राजस्थान में शामिल।
सिरोंज उपखण्ड मध्यप्रदेश को दिया गया।
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मुख्यमंत्री – मोहन लाल सुखाडिया
प्रथम राज्यपाल – गुरुमुख निहालसिंह
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💥💥 राजस्थान की रैंकिंग
💫 स्वच्छता सर्वेक्षण 2023 -25वां
💫 अटल भूजल योजना - तीसरा
💫 हैप्पीनेस इंडेक्स-13वां
💫 राष्ट्रीय पोषण माह (सितंबर 2024)- चौथा
💫 छठा फूड सेफ्टी इंडेक्स - छठा
💫 निशुल्क दवा योजना क्रियान्वयन -प्रथम
💫सीमेंट उत्पादन -दूसरा
💫अंगदान संकल्प करने में- प्रथम
💫घर-घर शौचालय निर्माण योजना-16वां
💫 अक्षय ऊर्जा क्षमता - प्रथम
💫 नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता-द्वितीय
💫 सौर ऊर्जा-प्रथम
💫पवन ऊर्जा - पांचवा
Important fact ❤️👍👍👍❤️
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💫 राष्ट्रीय पोषण माह (सितंबर 2024)- चौथा
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Forwarded from Shekhawati Mission 100
💐सर्वनाम💐
परिभाषा – संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते है |
उदाहरण – वह , तुम, यह , मैं , इसका ,उसका , तुम्हारा , हमारा , कौन , कोई , आपका आदि सर्वनाम के उदाहरण है |
📚 सर्वनाम के भेद
– प्रयोग की दृष्टि से सर्वनाम के छ: भेद है –
(i) पुरुषवाचक सर्वनाम
(ii) निश्चयवाचक सर्वनाम
(iii) अनिश्चयवाचक सर्वनाम
(iv) सम्बंध वाचक सर्वनाम
(v) निजवाचक सर्वनाम
(vi) प्रश्नवाचक सर्वनाम
1. पुरुषवाचक सर्वनाम -
जो शब्द व्यक्ति के नाम के स्थान पर प्रयोग किये जाते है , उसे पुरुषवाचक सर्वनाम कहते है | पुरुषवाचक का तात्पर्य स्त्री व पुरुष दोनों से होता है | उदाहरण – मै, तू, हम, वे , वह आदि |
पुरुषवाचक सर्वनाम के भेद – इसके तीन भेद है
(क) उत्तम पुरुष – बोलने वाले वक्ता को उत्तम पुरुष कहते है | जैसे- मैं ,हम |
(ख) मध्यम पुरुष – जिससे बात कही जाए अर्थात सुनने वाले श्रोता को मध्यम पुरुष कहते है | जैसे – तुम , तू, आप |
(ग) अन्य पुरुष – जिसके सम्बंध में बात कही गई हो , वह अन्य पुरुष कहलाता है | जैसे – वे, वह ,यह |
2. निश्चयवाचक सर्वनाम –
जिस सर्वनाम से किसी व्यक्ति या वस्तु की निश्चित स्थिति का बोध होता है , उसे निश्चयवाचक सर्वनाम कहते है |
जैसे – यह अच्छी किताब है | वह बुरा है |
3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम –
जिस सर्वनाम से किसी व्यक्ति या वस्तु की निश्चित स्थिति का बोध नही होता है बल्कि अनिश्चय की स्थिति बनी रहती है ,उसे अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहते है | जैसे- दाल में कुछ मिला है | कोई आया था |
4. सम्बंध वाचक सर्वनाम –
जिस सर्वनाम से दो वस्तुओं अथवा व्यक्तियों का एक दूसरे से संबंध प्रकट होता है ,वहाँ सम्बंध वाचक सर्वनाम होता है | जिसका-उसकी, जितना-उतना, जो-सो आदि सम्बंध वाचक सर्वनाम हैं |
जैसे – जो पढ़ेगा सो पास होगा | जितना गुड़ डालोगे उतना ही मीठा होगा |
5. निजवाचक सर्वनाम –
वे सर्वनाम जिसे कर्ता स्वयं अपने लिये प्रयुक्त करता है ,उसे निजवाचक सर्वनाम कहते है | अपना ,आप ,खुद आदि निजवाचक सर्वनाम है | जैसे- मैं अपनी किताब पढ़ रहा हूँ |
6. प्रश्नवाचक सर्वनाम –
जिस सर्वनाम से प्रश्न करने का बोध होता है या वाक्य को प्रश्नवाचक बना देते है ,उन्हे प्रश्नवाचक सर्वनाम कहते है | कौन , क्या ,कैसे आदि प्रश्नवाचक सर्वनाम है |
जैसे –वह क्या चाहता है ? तुम वहाँ कैसे चले गए ?
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परिभाषा – संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते है |
उदाहरण – वह , तुम, यह , मैं , इसका ,उसका , तुम्हारा , हमारा , कौन , कोई , आपका आदि सर्वनाम के उदाहरण है |
📚 सर्वनाम के भेद
– प्रयोग की दृष्टि से सर्वनाम के छ: भेद है –
(i) पुरुषवाचक सर्वनाम
(ii) निश्चयवाचक सर्वनाम
(iii) अनिश्चयवाचक सर्वनाम
(iv) सम्बंध वाचक सर्वनाम
(v) निजवाचक सर्वनाम
(vi) प्रश्नवाचक सर्वनाम
1. पुरुषवाचक सर्वनाम -
जो शब्द व्यक्ति के नाम के स्थान पर प्रयोग किये जाते है , उसे पुरुषवाचक सर्वनाम कहते है | पुरुषवाचक का तात्पर्य स्त्री व पुरुष दोनों से होता है | उदाहरण – मै, तू, हम, वे , वह आदि |
पुरुषवाचक सर्वनाम के भेद – इसके तीन भेद है
(क) उत्तम पुरुष – बोलने वाले वक्ता को उत्तम पुरुष कहते है | जैसे- मैं ,हम |
(ख) मध्यम पुरुष – जिससे बात कही जाए अर्थात सुनने वाले श्रोता को मध्यम पुरुष कहते है | जैसे – तुम , तू, आप |
(ग) अन्य पुरुष – जिसके सम्बंध में बात कही गई हो , वह अन्य पुरुष कहलाता है | जैसे – वे, वह ,यह |
2. निश्चयवाचक सर्वनाम –
जिस सर्वनाम से किसी व्यक्ति या वस्तु की निश्चित स्थिति का बोध होता है , उसे निश्चयवाचक सर्वनाम कहते है |
जैसे – यह अच्छी किताब है | वह बुरा है |
3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम –
जिस सर्वनाम से किसी व्यक्ति या वस्तु की निश्चित स्थिति का बोध नही होता है बल्कि अनिश्चय की स्थिति बनी रहती है ,उसे अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहते है | जैसे- दाल में कुछ मिला है | कोई आया था |
4. सम्बंध वाचक सर्वनाम –
जिस सर्वनाम से दो वस्तुओं अथवा व्यक्तियों का एक दूसरे से संबंध प्रकट होता है ,वहाँ सम्बंध वाचक सर्वनाम होता है | जिसका-उसकी, जितना-उतना, जो-सो आदि सम्बंध वाचक सर्वनाम हैं |
जैसे – जो पढ़ेगा सो पास होगा | जितना गुड़ डालोगे उतना ही मीठा होगा |
5. निजवाचक सर्वनाम –
वे सर्वनाम जिसे कर्ता स्वयं अपने लिये प्रयुक्त करता है ,उसे निजवाचक सर्वनाम कहते है | अपना ,आप ,खुद आदि निजवाचक सर्वनाम है | जैसे- मैं अपनी किताब पढ़ रहा हूँ |
6. प्रश्नवाचक सर्वनाम –
जिस सर्वनाम से प्रश्न करने का बोध होता है या वाक्य को प्रश्नवाचक बना देते है ,उन्हे प्रश्नवाचक सर्वनाम कहते है | कौन , क्या ,कैसे आदि प्रश्नवाचक सर्वनाम है |
जैसे –वह क्या चाहता है ? तुम वहाँ कैसे चले गए ?
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