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Forwarded from IAS Ankushjadhavsir 📰🗞️ (Ankush Jadhav Sir)
ओज़ोन परत अवक्षय के परिणाम (पर्यावरण)
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• परबैगनी किरणों की पृथ्वी पर वृद्धि

• बेसल और पपड़ीदार कोशिका कैंसर – मानव मे कैंसर का एक सबसे सामान्य रूप।

• घातक मेलानोमा – अन्य प्रकार का त्वचा कैंसर।
• कोर्टिकल मोतियाबिंद।

• परबैगनी किरणों की वृद्धि से फसलों के प्रभावित होने की संभावना है। पौधो के आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण विभिन्न प्रजातियों मे जैसे कि चावल साइनोबैक्टीरिया पर निर्भर रहता है जो नाइट्रोजन के धारण के लिए इसकी जड़ो मे रहता है।

साइनोबैक्टीरिया परबैगनी किरणों के प्रति संवेदनशील होते है और इसकी वृद्धि के परिणाम स्वरूप प्रभावित हो सकते है।
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Forwarded from IAS Ankushjadhavsir 📰🗞️ (Ankush Jadhav Sir)
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल........(पर्यावरण)
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मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जिसे ओजोन क्षरण को रोकने KE LIYE बनाया गया है।

इस प्रोटोकॉल के माध्यम से उन पदार्थों के उत्पादन को कम करना है जो कि ओजोन परत के क्षरण के लिए जिम्मेदार है।

इस संधि पर 16 सितंबर, 1987 को हस्ताक्षर किए गये थे और यह 1 जनवरी, 1989 से यह प्रभावी हो गयी, जिसकी पहली बैठक मई 1989 में हेलसिंकी में हुयी थी।

तब से अभी तक इसमें सात संशोधन 1990 (लंदन), 1991 (नैरोबी), 1992 (कोपेनहेगन), 1993 (बैंकाक), 1995 (वियना), 1997 (मॉन्ट्रियल), और 1999 (बीजिंग) हो चुके हैं।

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ने ओजोन क्षयकारी पदार्थों या तत्वों के कुल वैश्विक उत्पादन और खपत की गिरावट में उल्लेखनीय योगदान दिया है जिसका प्रय़ोग विश्व भर में कृषि, उपभोक्ता और अद्यौगिक क्षेत्रों में प्रयोग किया गया। 

2010 के बाद से, प्रोटोकॉल के एजेंडे का ध्यान हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन (HCFCs) को कम  करने पर केंद्रित है जिनका मुख्य रूप से ठंडे और प्रशीतन अनुप्रयोगों और फोम उत्पादों के निर्माण में प्रयोग किया जाता है।

ओजोन लाभ के अतिरिक्त, HCFCs का फेज आउट एजेंडा दृढ़ता से जलवायु शमन और ऊर्जा दक्षता पर जोर देता है। जलवायु लाभ कम या बिना ग्लोबल वार्मिंग की क्षमता के साथ पदार्थों का उपयोग करके प्राप्त किया जा सकता है और निश्चित प्रौद्योगिकी उन्नयन के माध्यम से बड़े पैमाने पर ऊर्जा दक्षता में सुधार प्राप्त किया जा सकता है।

रणनीति :::::::
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विश्व बैंक की रणनीति, परियोजना की गतिविधियों मेंओजोन और जलवायु कार्यसूची को बेहतर तरीके सेपरिलक्षित करके एचसीएफसी चरण के लिए पर्यावरणीयलाभ को अधिकतम करने पर केंद्रित है।

बैंक द्वारा वित्तपोषित ऊर्जा दक्षता कार्यक्रम में एचसीएफसीका लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से बेहतर कार्य करना है जबकिगैर-एचसीएफसी उपकरणों की बढ़ती मांग तथा वैकल्पिकतकनीकों के संभावित जलवायु प्रभाव के बारे मेंउपयोगकर्ताओं को जानकारी देना है। 

परियोजनाओं में प्रौद्योगिकी के उपयोग का प्रदर्शन करने के लिए रणनीति निर्माताओं और सेवा क्षेत्र के साथ सीधे काम करने का भी समर्थन करती है जिससे प्रर्दशन में सुधार, कम ऊर्जा की खपत को सुनिश्चित करने में मदद मिलती है जबकि इससे जलवायु को लाभ मिलता है।

विशेष रूप से कुछ विकासशील देशों में, वाणिज्यिक उपलब्धता और वैकल्पिक समाधान की लागत का मुद्दा इसे HCFCs को कम करना कुछ निर्माताओं के लिए चुनौती बन सकता है।

विश्व बैंक के द्वारा कार्यक्रमों और प्रस्तावों की एक श्रृखंला के अंतर्गत तकनीकी सहायता के  माध्यम से तकनीकी दक्षता को बढ़ावा देना है  साथ ही इन उपायों को विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उठाने की जरुरत पर भी बल देने पर बल दिया गया है ।

विश्व बैंक की एक तीन साल की शहरी ऊर्जा कुशल परिवर्तन पहल, शहर प्रमुखों से शहर में ऊर्जा दक्षता के नियोजन को सुद्रण करने में मदद करती है यह योजना इमारतों तथा लक्षित शहरी क्षेत्रों को डिजाइन करने में सहायता उपलब्ध करती है।

इस प्रोटोकॉल के समर्थकों को इस बात का भरोसा है कि अगर  इस अन्तर्राष्टीय समझौते का पालन किया जाता है तो 2050 तक ओजोन परत फिर से हासिल हो सकती है। इसके व्यापक तरीके से अपनाने और लागू करने के कारण इसे असाधारण अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग की एक मिशाल के रूप में मान्यता मिल चुकी है ।

संयुक्त राष्ट्र के पूर्व प्रमुख कोफी अन्नान ने कहा "शायद यह आज की तारीख में इकलौता सबसे सफल अन्तर्राष्ट्रीय समझौते का मॉन्ट्रिलय प्रोटोकॉल है"।

इस संधि को 197 देशों द्वारा समर्थन दिया गया है । यूरोपीय संघ ने इस  प्रोटोकॉल को संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में सबसे व्यापक और महत्वपूर्ण संधि का दर्जा दिया है।

वियना संधि (कन्वेंशन) :::::::::::::::
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यह ओजोन परत के संरक्षण के लिए एक बहुपक्षीय पर्यावरण समझौता है। इस पर 1985 के वियना सम्मेलन में सहमति बनी और 1988 में यह लागू किया गया।

196 देशों (सभी संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों के साथ- साथ ही होली सी, नियू और कुक आइलैंड्स) के साथ-साथ यूरोपीय संघों द्वारा इसे मंजूर किया जा चुका है।

वियना संधि, ओजोन परत की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीयप्रयासों के लिए एक ढांचे के रूप में कार्य करता है। 

हालांकि, इसमें सीएफसी के इस्तेमाल के लिए कानूनी रूप सेबाध्यकारी न्यूनता के लक्ष्य शामिल नहीं हैं, ओजोनरिक्तीकरण का मुख्य कारण रासायनिक कारक हैं। 

उपरोक्तबातें मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल में रखी गयीं हैं।
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संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) के सतत् विकास सम्मेलन (रियो, 2012)..............(पर्यावरण)
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संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) के सतत् विकास सम्मेलन जिसे रियो, 2012 के नाम से भी जाना जाता है।

सतत् विकास पर तीसरा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन है जो विश्व समुदाय के पर्यावरणीय तथा आर्थक उद्देश्यों से संबंधित है।

ब्राजील में 13 से 22 जून, 2012 तक रियो डि जेनेरियो में हुआ यह सम्मेलन 1992 के पृथ्वी सम्मेलन से अब तक 20 वर्षों में हुई प्रगति से संबंधित है। तथा 2002 के सतत् विकास के जोहान्सबर्ग विश्व सम्मेलन का द्योतक है।

यह इस दस दिवसीय महासम्मेलन जिसमें तीन दिन का उच्च स्तरीय संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन सम्मिलित है जिसमे संयुक्त राष्ट्र संघ के 192 सदस्यों ने हिस्सा लिया जिनमें 57 देशों के प्रमुखों तथा 31 देशों के सरकारों के प्रमुखों ने, निजी कंपनियों, गैर सरकारी संस्थानों तथा अन्य समूहों ने हिस्सा लिया।

इस सम्मेलन को करने का निर्णय संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्ताव संख्या A/RES/64/236 द्वारा 24 दिसंबर, 2009 को लिया गया।

एक बड़े स्तर का सम्मेलन करने का निर्णय लिया है जिसमें राष्ट्राध्यक्षों तथा सरकार के अध्यक्षों तथा अन्य प्रस्तुतकर्ता शामिल हुए तथा जिससे वैश्विक पर्यावरणीय नीति संबंधित एक केन्द्रित राजनैतिक प्रस्ताव तैयार हो सके।

इस सम्मेलन के तीन मुख्य उद्देश्य हैं ::::::::::::
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सतत् विकास हेतु एक नई राजनैतिक प्रतिबद्धता स्थापित करना।

पिछली निर्धारित प्रतिबद्धताओं की प्रगति का आंकलन तथा योजनाओं को कार्यबद्ध करने में आने वाली समस्याओं का आंकलन।

नयी समस्याओं को संबोधित करना।

परिणाम ::::: इस सम्मेलन का प्राथमिक परिणाम गैर-बाध्य प्रपत्र, “भविष्य जो हम चाहते हैं” जो एक 49 पृष्ठों का कार्यकारी दस्तावेज था। इसमें 192 सरकारों के राष्ट्राध्यक्षों ने उपस्थित होकर, सतत् विकास से संबंधित अपनी राजनैतिक प्रतिबद्धताओं को नवीकृत किया तथा उन्होंने सतत् भविष्य के लिए की गई प्रतिबद्धताओं का उल्लेख किया।

इस दस्तावेज में मुख्यत: सभी राष्ट्रों ने अपने पिछली कार्यकारी योजनाओं जैसे एजेंडा 21 को अपना विश्वास दिखाया। कुछ मुख्य परिणाम इस प्रकार हैं :::::::::

इस लेख में सतत् विकास लक्ष्यों के विकास का समर्थन करने वाली भाषा का प्रयोग किया गया है जिसमें वैश्विक स्तर पर सतत् विकास को बढ़ावा देने वाले लक्ष्यों का उल्लेख किया गया है। यह सोचा गया है कि सतत् विकास के लक्ष्य वहां से शुरू करेंगे जहां शताब्दी विकास लक्ष्य समाप्त होंगे तथा इइस आलोचना को कि जहां मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के विकास में हार जाएंगे को संबोधित करेंगे।

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम को सुदृढ़ करने का प्रयास ताकि इसे अग्रिम वैश्विक पर्यावरणीय ईकाई बनाया जा सके, इसकी 48 प्रमुख सलाहों को मानकर इसकी कारिणी को वैश्विक सदस्यता से सुदृढ़ करना, इसके आर्थिक स्त्रोतों को बढ़ाकर तथा संयुक्त राष्ट्र के मुख्य अंगों से इसका सामंजस्य बढ़ाकर।

राष्ट्रों ने सकल घरेलू उत्पाद के स्थान पर संपदा के एक ऐसे मानक को चुनने पर सहमति जताई जिसमें पर्यावरणीय तथा सामाजिक कारकों को सम्मिलित किया जाए तथा पर्यारण द्वारा दी गई सेवाओं का भुगतान किया जाए जैसे कार्बन श्रंखलाकरण तथा निकाय संरक्षण।

इस बात को मान्यता दी गई कि किन मुख्य परिवर्तनों जिनसे समाज ग्रहण तथा उत्पादन करता है ताकि एक वैश्विक सतत् विकास को प्राप्त किया जा सके। यूरोपियन संघ के अधिकारी यह सलाह देते हैं कि एक ऐसी व्यवस्था हो जिसमें मजदूरों को कम तथा प्रदूषकों को ज्यादा कर देना पड़े।

यह दस्तावेज सामुद्रिक भंडारों को सतत् स्तर तक पहुंचाने तथा देशों को विज्ञान संबंधी प्रबंधन तकनीकें अपनाने पर बल देते हैं।

सभी राष्ट्रों में जीवाश्म ईंधनों पर मिलने वाली सरकारी छूट (सब्सिडी) को समाप्त करने पर बल दिया।

एजेंडा 21 सतत् विकास से संबंधित एक स्वायत्त, गैर बाध्य संयुक्त राष्ट्र संघ की कार्यकारी योजना है। यह पर्यावरण तथा विकास पर संयुक्त राष्ट्र संघ के सम्मेलन का एक उत्पाद है जो 1992 में ब्राजील के रियो डि जेनेरियो शहर में हुआ।

यह संयुक्त राष्ट्र संघ के अन्य बहुमुखी संस्थाओं तथा वैयक्तिक सरकारों की एक कार्यकारी योजना है जिसे क्षेत्रीय, राष्ट्रीय तथा वैश्विक स्तर पर लागू किया जा सकता है। ऐजेंडा 21 में ‘21’ से अभिप्राय 21सवीं शताब्दी से है। यह आगे हुई संयुक्त राष्ट्र संध के अन्य सम्मेलनों में हुए कुछ बदलाव तथा पुन: अधिकृत किया गया।
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Forwarded from IAS Ankushjadhavsir 📰🗞️ (Ankush Jadhav Sir)
Educationist & Author Govind Prasad Sharma has been appointed as the Chairman of National Book Trust (NBT)
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Govind Prasad Sharma :::::::

Govind Prasad Sharma in his long carrier has served as the Principal of Government P.G. College in Madhya Pradesh, Additional Director of Higher Education of Gwalior Chambal Division, Director of Madhya Pradesh Hindi Granth Akademi & also as Vice Chairman of Madhya Pradesh Board of Secondary Education....!

National Book Trust :::::::
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National Book Trust (NBT) is an apex body established by the Government Of India in the Year 1957 under the Department Of Higher Education, Ministry Of Human Resource Development....!

Objectives of NBT :::::::::
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To produce and encourage the production of good literature in English, Hindi And Other Indian Languages.

To make such literature available at moderate prices to the public.

To bring out book catalogues.

Arrange Book Fairs/Exhibitions and Seminars.

Take all necessary steps to make the people book-minded.

To pursue these objectives NBT publishes ::::::::::::::
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The Classical Literature of India.

Outstanding works of Indian authors in Indian Languages and their translation from one Indian Language to another.

Translation of outstanding books from foreign languages.

Outstanding Books of Modern Knowledge for Popular Diffusion.

The major activities of NBT include publishing non- textbooks, organizing book fairs, book exhibitions, conducting literary events, activities for children, training in publishing throughout the country, participating in international book fairs to promote Indian literature.
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MCQs on Research Aptitude..........
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1.The main purpose of research in education is to ___________

a) Help in the personal growth of an individual...
b) Help the candidate become an eminent educationist...
c) Increase job prospects of an individual...
d) Increase social status of an individual....
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2. Sampling is advantageous as it __

a) Helps in capital-saving....
b) Saves time....
c) Increases accuracy...
d) Both (a) and (b)...
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3. Tippit table refers to ___________

a) Table of random digits....
b) Table used in sampling methods...
c) Table used in statistical investigations....
d) All the above..…..
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4. _________ is a preferred sampling method for the population with finite size.


a) Area sampling....
b) Cluster sampling...
c) Purposive sampling....
d) Systematic sampling...
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5. _________ refers to inferring about the whole population based on the observations made on a small part.


a) Deductive inference...
b) Inductive inference....
c) Pseudo-inference....
d) Objective inference....
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6. Random sampling is helpful as it is ____________


a) An economical method of data collection....
b) Free from personal biases....
c) Reasonably accurate.....
d) All the above..…
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7.The data of research is ___________


a) Qualitative only......
b) Quantitative only....
c) Both (a) and (b)....
d) Neither (a) nor (b)....
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8.The longitudinal approach of research deals with _____________.


a) Horizontal researches...
b) Long-term researches...
c) Short-term researches...
d) None of the above........
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9.A researcher divides the populations into PG, graduates and 10 + 2 students and using the random digit table he selects some of them from each. This is technically called
::::

A. stratified sampling.....
B. stratified random sampling.....
C. representative sampling....
D. none of these......
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10. A researcher divides his population into certain groups and fixes the size of the sample from each group. It is called :::

A. stratified sample....
B. quota sample.........
C. cluster sample.....
D. all of the above.....
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11. Field study is related to ::::::


A real life situations........
B experimental situations.....
C laboratory situations......
D none of the above......
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12. Attributes of objects, events or things which can be measured are called
:::::::::

A. qualitative measure....
B. data......
C. variables......
D. none of the above......
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1- B, 2- D, 3- D, 4- D, 5-B, 6-D,
7- C,. 8- B, 9-B, 10- B, 11- A, 12- C..!
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The Union Cabinet headed by Prime Minister Narendra Modi has cleared the ordinance for the Reservation Roster for University Teachers.......!
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What was the issue?
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Following an order by the Allahabad high court in April 2017, the University Grants Commission had announced in March last year that an individual department should be considered as the base unit to calculate the number of teaching posts to be reserved for the Scheduled Castes and Scheduled Tribes candidates.

This order of UGC led to a series of protests.

The protestors were demanding the restoration of the 200-point roster and the government had filed a review petition against the verdict of the Allahabad High Court which was dismissed by the Supreme Court.

The ordinance has been brought in by the Supreme Court to nullify the verdict of the Supreme Court.



What is the 200-point Roster System?
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200 point roster system is a roster system for faculty positions that includes 99 posts reserved for the SC, ST and OBC communities and 101 posts for the unreserved.

Under this roster, in case there is a deficit of reserved seats in one department, it could be compensated by more people from the reserved communities in other departments in the university. 

It considers college or university as a unit for reservation in teaching posts.

Whereas under the new 13 point roster proposed by the UGC, an individual department should be considered as the base unit to calculate the number of teaching posts to be reserved for the Scheduled Castes and Scheduled Tribes candidates. This system had drawbacks for small departments of the university or college. 

Also, the 200 point roster system provided an advantage wherein the deficit in reservation in one department could be compensated by other departments. 

The government has brought an ordinance to restore the 200-point roster system.

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मंत्रिमंडल ने शिक्षक कैडर अध्यादेश, 2019 में आरक्षण को मंजूरी दी.....(8 मार्च)
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• केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विश्वविद्यालय/कॉलेज को एक विभाग/विषय के बजाय एक इकाई मानते हुए केंद्रीय शैक्षिक संस्थान (शिक्षक के कैडर में आरक्षण) अध्यादेश, 2019 की घोषणा के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दी है. इस निर्णय से पात्र प्रतिभाशाली आवेदकों को आकर्षित करके उच्च शैक्षिक संस्थानों में शिक्षा के मानकों में सुधार होने की उम्मीद है.

• इस निर्णय से अनुसूचित जातियों/ जनजातियों और सामाजिक तथा आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए निर्धारित आरक्षण मानदंडों के साथ-साथ अनुच्छेद 14, 16 और 19 के संवैधानिक प्रावधानों को विधिवत रूप से सुनिश्चित करते हुए शिक्षक कैडर में सीधी भर्ती द्वारा 5000 से अधिक खाली पदों को भरने की अनुमति मिलेगी.

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Photo from Ankushjadhavsir
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राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE).......
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यह भारत सरकार की एक संस्था है, जिसकी स्थापना राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद अधिनियम, १९९३ के अन्तर्गत १७ अगस्त, १९९५ में की गई थी।

इसका उत्तरदायित्व भारतीय शिक्षा प्रणाली के मानक, प्रक्रियाएं एवं धाराओं की स्थापना एवं निरीक्षण करना है।

1973 के पूर्व राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की भूमिका अध्यापक शिक्षा से संबंधित सभी विषयो पर केंद्रीय और राज्य सरकारो के लिए एक सलाहकार निकाय के रूप में थी।

परिषद का सचिवालय राष्ट्रीय शेक्षिक अनुशंधान तथा प्रशिक्षण परिषद, (एनसीईआरटी) के अध्यापक शिक्षा विभाग में स्थित था।

शैक्षणिक क्षेत्र में अपने प्रशंसनीय कार्य के बाबजूद परिषद, अध्यापक शिक्षा में मानको को बनाये रखने तथा घटिया अध्यापक शिक्षा संस्थानों की बरोतरी को रोकने के अपने अनिवार्ये विनियामक कार्य नहीं कर सकी थी।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NPE) 1986 और उसके अधीन कार्य योजना में अध्यापक शिक्षा प्रणाली को सर्वथा दुरुस्त करने के लिए पहले उपाय के रूप में संविधिक दर्जे और अपेक्षित संसाधनों से युक्त राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा प्ररिषद की कल्पना की गई थी। एक साविधिक निकाय के रूप में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा प्ररिषद अधिनियम 1993 के अधीन राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा प्ररिषद 17 अगस्त 1995 से अस्तितव में आई।

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा प्ररिषद का मूल उद्देश्य समूचे भारत में अध्यापक शिक्षा प्रणाली का नियोजित और समन्वित विकास करना, अध्यापक शिक्षा प्रणाली में मानदंडों और मानको का विनियमन तथा उन्हे समुचित रूप से बनाये रखना और तत्संबंधी विषय हैं।

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद का मुख्यालय दिल्ली में है तथा भोपाल, भुवनेश्वर, बंगलुरु तथा जयपुर में इसकी क्षेत्रिय समितियाँ हैं।

प्रेम व आदरसाहित,
अंकुश-जाधव-सर...📚🕚📚😊🙌
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आकाशवाणी (All India Radio):::::
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भारत के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन संचालित सार्वजनिक क्षेत्र की रेडियो प्रसारण सेवा है।

भारत में रेडियो प्रसारण की शुरुआत मुंबई और कोलकाता में सन १९२७ में दो निजी ट्रांसमीटरों से हुई। १९३० में इसका राष्ट्रीयकरण हुआ और तब इसका नाम भारतीय प्रसारण सेवा (इंडियन ब्राडकास्टिंग कॉरपोरेशन) रखा गया। बाद में १९५७ में इसका नाम बदल कर आकाशवाणी रखा गया।

आकाशवाणी की बहुत भषाओं में विभिन्न सेवाएं हैं जो प्रत्येक देश भर के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं।

विविध भरती आकाशवाणी की सबसे लोकप्रिय - ज्ञात सेवा है। इसे विज्ञापन प्रसारण सेवा भी कहा जाता है।
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New Doc 2019-03-18 13.09.48 - Page 1
New Doc 2019-03-18 13.30.56 - Sample of my Writing Notes...!
SCHEDULES IN THE CONSTITUTION..
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1 : List of States & Union Territories
2 : Contains provisions as to the President, Governor, Speaker, Deputy Speaker of the House of the people, chairman and deputy chairman of the council of states and the speaker of the legislative assembly and chairman and deputy chairman of the legislative council of a state, Salary of President, Governors, Chief Judges, Judges of High Court and Supreme court, Comptroller and Auditor General

3 : Forms of Oaths and affirmations
4 : Allocate seats for each state of India in Rajya Sabha
5 : Administration and control of scheduled areas and tribes
6 : Provisions for administration of Tribal Area in Assam, Meghalaya, Tripura, Mizoram & Arunachal Pradesh

7 : Gives allocation of powers and functions between Union & States. It contains 3 lists

1) Union List (For central Govt) .
2) States List (Powers of State Govt)
3) Concurrent List (Central & States)

8 : List of 22 languages of India recognized by Constitution

1. Assamese. 2. Bengali
3. Gujarati. 4. Hindi
5. Kannada. 6. Kashmiri
7. Manipuri. 8. Malayalam
9. Konkani. 10. Marathi
11. Nepali. 12. Oriya
13. Punjabi. 14. Sanskrit
15. Sindhi. 16. Tamil
17. Telugu. 18. Urdu
19. Santhali. 20. Bodo
21. Maithili. 22. Dogri

# Sindhi was added in 1967 by 21 Amendment
# Konkani, Manipuri ad Nepali were added in 1992 by 71 amendment
# Santhali, Maithili, Bodo and Dogri were added in 2003 by 92 amendment

9 : Added by first amendment in 1951. Contains acts & orders related to land tenure, land tax, railways, industries.{Right of property not a fundamental right now}

10 : Added by 52nd amendment in 1985. Contains provisions of disqualification of grounds of defection

11 : By 73rd amendment in 1992. Contains provisions of Panchayati Raj.

12 : By 74thamendment in 1992. Contains provisions of Municipal Corporation.
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Indian Constitution when adopted by Constituent Assembly in 1949 had 395 articles & 22 parts. Many other articles & three other parts were added to it by subsequent constitutional amendments................
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List of Important Article & Description
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Article 1- 4 ::: Deals with the territory of India, formation of new states, alterations, names of existing states.

Article 5-11 ::: Deals with various rights of citizenship.

Article 12-35 ::: Deals with fundamental rights of Indian Citizen Abolition of untouchability and titles.

Articles 36-51 ::: Deals with Directive Principles of State Policy

Articles 51A ::: This part was added by 42nnd Amendment in 1976, which contains the fundamental duties of the citizens.

Articles 52-151 ::: Deals with government at the centre level.

Articles 152-237 ::: Deals with government at the state level.

Article 238 ::: Deals with States.

Articles 239-241 ::: Deals with Union Territories

Articles 242-243 ::: It consists of two parts::::
(i) added by 73rd amendment in 1992, which contains a new schedule. It contains 29 subjects related to Panchayati Raj, who have been given administrative powers.
(ii) It is added by 74th amendment in 1992, which contains a new schedule. It contains 18 subjects relate to municipalities, who have been given administrative powers.

Articles 244-244A ::: Deals with scheduled and tribal areas.

Articles 245-263 ::: Deals with the relationship between union and states.

Articles 264-300A ::: Deals with the distribution of revenue between union and states, appointment of Finance Commission etc.

Article 301-307 ::: Deals with the trade, commerce and intercourse within the territory of India.

Article 308-323 ::: Deals with Union Public Service Commission and State Public Services Commissions.

Article 323A, 323B ::: Added by 42nd Amendment in 1976. Deals with administrative tribunals set up by parliament to hear disputes and complaints regarding Union, states or local Government Employees.

Articles 324-329 ::: Deals with election.

Articles 330-342 ::: Deals with special provision for SCs and STs and Anglo-Indian Representatives.

Articles 343-351 ::: Deals with official language of union and states.

Article 352-360 ::: Deals with emergency provisions, President’s rule.

Articles 361-367 ::: Deals with exemption of criminal proceedings for their official acts of president and governors.

Article 368 ::: Deals with Amendment of constitution.

Article 369-392 ::: Article 370 deals with Special status to J&K.

Article 371A ::: Gives special provisions with respect to state of Nagaland.

Articles 393-395 ::: Deals with the short title, commencement and repeal of the constitution.
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वर्ल्ड वाइड वेब (www)..................
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वर्ल्ड वाइड वेब इंटरनेट का सबसे महत्वपूर्ण उपकरण है क्योंकि इसके बिना एक-दूसरे से जुड़ना बहुत मुश्किल है.

वर्ल्ड वाइड वेब क्या है.....?

यह हाइपरटेक्स्ट मार्क-अप भाषा या HTML का उपयोग करके हाइपरमीडिया को संदर्भित करता है. इसे WWW, W3 या web के नाम से भी जाना जाता है.

यह इन्टरनेट पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली सर्विस है. इसके जरिये कई सारे वेब servers और क्लाइंट्स एक साथ जुड़ते है.

ये हम सब जानते हैं कि वेब सर्वर के HTML डाक्यूमेंट्स में images, videos और अलग-अलग प्रकार के ऑनलाइन कंटेंट्स स्टोर रहते हैं जिन्हें वेब की मदद से एक्सेस किया जा सकता है.

WWW एक प्रकार का इनफार्मेशन स्पेस है जहां पर डाक्यूमेंट्स और अन्य संसाधनों की पहचान यूनिफ़ॉर्म रिसोर्स लोकेटर यूआरएल जैसे https://www.apjsir.com द्वारा की जाती है जो हाइपरटेक्स्ट द्वारा इंटरलिंक हो सकते हैं और इंटरनेट के माध्यम से एक्सेस किए जा सकते हैं.

WWW संसाधनों को वेब ब्राउज़र के रूप में जाना जाने वाले सॉफ़्टवेयर एप्लिकेशन के माध्यम से उपयोगकर्ताओं द्वारा एक्सेस किया जाता है.

इसलिए, ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि दुनियाभर में जितने भी वेबसाइटस और वेब पेजेज हैं जिन्हें आप अपने वेब ब्राउज़र पर देखते हैं वे सभी वेब से जुड़े होते हैं और इन्हें एक्सेस करने के लिए हाइपरटेक्स्ट ट्रान्सफर प्रोटोकॉल का इस्तेमाल किया जाता है. ये सारे वेब servers का एक प्रकार का कलेक्शन ही तो है. अधिक समझने के लिए जब किसी ब्राउज़र के एड्रेस बार पर किसी वेबसाइट के URL से पहले www लगा हो तो इसका अर्थ है कि वह वेबसाइट किसी वेब सर्वर पर स्टोर है जो कि वेब से जुड़ा हुआ है इसीलिए ही तो उसे एक्सेस करने के लिए www की मदद ली जाती है.

हाइपरटेक्स्ट क्या होता है......?

हाइपरटेक्स्ट का मतलब है कि यह एक ऐसा टेक्स्ट है जिसमें अन्य टेक्स्ट के 'लिंक' होते हैं और जरूरी नहीं है कि वह लीनियर हों. यह शब्द 1965 के आसपास टेड नेल्सन द्वारा इस्तेमाल किया गया था.

इतिहास ::::::::::

1989 में, CERN में काम करते हुए, ब्रिटिश वैज्ञानिक टीम बेर्नेर्स–ली ने वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) का आविष्कार किया. यह दुनिया भर के विश्वविद्यालयों और संस्थानों में वैज्ञानिकों के बीच स्वचालित सूचना-साझाकरण की मांग को पूरा करने के लिए विकसित किया गया था. क्या आप जानते हैं कि CERN एक अलग प्रयोगशाला नहीं है; इसमें 100 से अधिक देशों के लगभग 17,000 वैज्ञानिक शामिल हैं. WWW का मूल विचार कंप्यूटर, डेटा नेटवर्क और हाइपरटेक्स्ट की विकसित तकनीकों को वैश्विक सूचना प्रणाली का एक शक्तिशाली और आसान उपयोग में विलय करना था.

आपको बता दें कि मार्च 1989 में टीम बर्नर्स-ली ने WWW के लिए पहला प्रस्ताव और मई 1990 में अपना दूसरा प्रस्ताव लिखा था. नवंबर 1990 में, रॉबर्ट कैलीयू (Robert Cailliu) के साथ बेल्जियम के सिस्टम इंजीनियर के रूप में इस प्रणाली को प्रबंधन प्रस्ताव के रूप में औपचारिक रूप दिया गया था. इस डाक्यूमेंट्स में हाइपरटेक्स्ट डॉक्यूमेंट के वेब ब्राउज़र को देखा जा सकता है. 1992 में इलिनोइस विश्वविद्यालय ने पहला वेब ब्राउज़र पेश किया, एक ऑनलाइन सर्च टूल, जो वेब पर मौजूद सभी सूचनाओं को "surfs" करता है, मैच का पता लगाता है, और फिर रिजल्ट्स को रैंक करता है.
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वर्ल्ड वाइड वेब कैसे कार्य करता है .....?

जब कोई यूजर वेब डॉक्यूमेंट को खोलता है तो वह इसके लिए एक प्रकार की एप्लीकेशन का इस्तेमाल करता है जिसे वेब ब्राउज़र कहते हैं. जब किसी वेब ब्राउज़र मैं डोमेन या URL का नाम लिखा जाता है तो ब्राउज़र http के डोमेन एड्रेस को खोजने की रिक्वेस्ट generate करता है क्योंकि हर डोमेन का अपना अलग एड्रेस होता है. इसके बाद ब्राउज़र डोमेन name को सर्वर IP एड्रेस में बदल देता है. जिसको www उस सर्वर में सर्च करता है. जब एड्रेस वह सर्वर जिससे डोमेन को होस्ट किया गया है वह मैच हो जाता है तो सर्वर उस पेज को ब्राउज़र के पास वापस भेज देता है. जिसको आप अपने वेब ब्राउज़र पर आसानी से देख सकते है.

वर्ल्ड वाइड वेब के लाभ ::::::::::

- जानकारी की उपलब्धता और दुनिया भर से आसानी से कांटेक्ट स्थापित किया जा सकता है.
- प्रकटीकरण (divulgation) की लागत को कम करता है.
- रैपिड इंटरैक्टिव संचार जो विभिन्न सेवाओं के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.
- प्रोफेशनल कांटेक्ट की स्थापना के साथ-साथ सूचनाओं का आदान-प्रदान.
- प्रारंभिक कनेक्शन की कम लागत.
- जानकारी के विभिन्न स्रोतों तक पहुंच को सुगम बनाता है, जो लगातार अपडेट किया जाता है.
- यह एक प्रकार का वैश्विक मीडिया (global media) बन गया है.

कुछ नुकसान इस प्रकार हैं:::::::::

- ओवरलोड और अधिक जानकारी का खतरा.
- कुशल सूचना खोज रणनीति की आवश्यकता है.
- सर्च धीमा हो सकता है.
- जानकारी को फ़िल्टर करना और प्राथमिकता देना मुश्किल हो सकता है.
- नेट भी ओवरलोड हो जाता है क्योंकि बड़ी संख्या में उपयोगकर्ता इसका इस्तेमाल करते हैं.
- उपलब्ध डेटा इत्यादि पर गुणवत्ता का नियंत्रण करना कठिन हो सकता है.

ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि वर्ल्ड वाइड वेब हाइपरटेक्स्ट मार्कअप लैंग्वेज या HTML का उपयोग करने वाला हाइपरमीडिया है. यह अनूठी भाषा उपयोगकर्ता को उन सूचनाओं तक पहुंचने में मदद करेगी जो लिंक की जाती हैं ताकि जब कोई व्यक्ति किसी लिंक के एक हिस्से पर चयन या क्लिक करे तो स्वचालित रूप से निर्दिष्ट जानकारी मिल जाए. अनूठी विशेषता यह है कि यह उपयोगकर्ताओं को एक शब्द पर 'क्लिक' करने का अधिकार देता है और इससे संबंधित वेब स्थान पर भी ले जाता है.
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