UGC NET_JRF PAPER 1
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Congratulations dear Ashokji..! Wish you happy and successful journey...! 💐🙌🏻
Many Many Congratulations all of you guys..! Wish you a very happy and successful journey...! 💐🙌🏻
Forwarded from IAS Ankushjadhavsir 📰🗞️ (Ankush Jadhav Sir)
दोस्तों,


नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के मुताबिक, 18 से 30 साल की युवतियों के लिए तेलंगाना देश में सबसे असुरक्षित राज्य है।


वर्ष 2017 में यहां दर्ज दुष्कर्म के कुल मामलों में 91 फीसदी पीड़ताएं 18 से 30 साल की हैं, जो देश में सबसे ज्यादा है।


हालांकि, दुष्कर्म के सबसे ज्यादा मामले मध्यप्रदेश में सामने आए हैं।
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UPSC (CSAT)

SSC & IBPS Exams


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📚🎯📚 यदि आप अपने जीवन को सही तरीके से जीना चाहते हो, तो बस मेहनत करों..! 📚🎯📚🙌😊
बधाई हो अनुराग...! भविष्य के लिए सुभकामनाएँ..! 📚🎯📚🙌😊
यदि आप अपने सब्जेक्ट पर सही तरीके से ध्यान दोंगे तो ज़रूर कामयाबी कदम चूमती आएगी दोस्तों..! 📚🎯📚😊
बधाई हो करनी रामजी...! भविष्य के लिए सुभकामनाएँ..! 📚🎯📚🙌😊
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UGC NET June 2020 Exam : Important Dates ::: APJSIR
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Online Application and Registration Date :::

16th March 2020 to 16th April 2020

Downloading of Admit Cards :::

15th May 2020

UGC NET June 2019 Exam Dates :::

15th June 2020 to 20th June 2020

Date for announcing results :::

5th July 2020
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Wish You All The Very Best...! 📚📚🙌🏻
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उच्च शिक्षा हेतु सामान्य परीक्षा :::::
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा अनुमोदन के पश्चात् राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (National Testing Agency- NTA) अगले शैक्षणिक सत्र के लिये देश के 15 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश हेतु एक साझा प्रवेश परीक्षा आयोजित करेगा। अब तक केंद्रीय विश्वविद्यालयों हेतु साझा प्रवेश परीक्षा का आयोजन सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान द्वारा किया जाता था। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे के अनुसार, NTA NEET, JEE, CAT जैसी प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन करेगा।

NTA ही क्यों....?

अब तक OMR आधारित टेस्ट हुआ करता था, जिसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठता रहा है। इसके अलावा कभी-कभी विकल्प को पेन या पेंसिल द्वारा सही से न भर पाने के कारण भी परिक्षण में परेशानी होती रही है; लेकिन NTA कंप्यूटर आधारित परीक्षण (Computer Based Test- CBT) है जिसमें ऐसी समस्याएँ नहीं हैं।

अधिकांश स्थानों में कंप्यूटर आधारित टेस्ट वर्ष भर लिया जा सकता है। उम्मीदवार परीक्षण के लिये उपलब्ध स्थानों (Examination Center) में सेअपनी सुविधा के अनुसार स्थानों का चयन कर सकते हैं। इस तरह उन्हें परीक्षा देने के लिये किसी विशेष स्थान की यात्रा नहीं करनी पड़ेगी। अत: यह दूर-दराज के क्षेत्रों के उम्मीदवारों के लिये भी सहायक है।

CBT में प्रश्नों का उत्तर देने के लिये उम्मीदवारों को निर्धारित समय दिया जाएगा। उन्हें अपने उत्तर तय समय में देने होंगे एवं वो अगले प्रश्न हेतु आगे बढ़ जाएँगे। उम्मीदवारों के लिये प्रश्नों का उत्तर बदलने के लिये पुन: उस प्रश्न पर जाना संभव नहीं होगा। इससे परीक्षण कम समय में पूरा हो जायेगा साथ ही यह भी पता चल जाएगा कि उम्मीदवार ने किस प्रकार के प्रश्नों को हल करने में कितना समय लिया है।

कंप्यूटर आधारित परीक्षण में धोखा-धड़ी एवं नक़ल की समस्या में भी कमी आएगी। इसके माध्यम से दिव्यांग उम्मीदवार भी अपनी सुविधानुसार स्थान चुनकर परीक्षा दे सकते हैं।

NTA के बारे में :::::

स्थापना ::: राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की स्थापना भारतीय संस्था पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत की गई थी।

इसे देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश / छात्रवृत्ति हेतु प्रवेश परीक्षा आयोजित करने के लिये एक प्रमुख, विशेषज्ञ, स्वायत्त और आत्मनिर्भर परीक्षण संगठन के रूप में स्थापित किया गया है।

उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश हेतु उम्मीदवारों की क्षमता का पारदर्शी , दक्ष एवं त्रुटिहीन आकलन अंतरराष्ट्रीय मानकों पर करना हमेशा एक चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है।

उद्देश्य :::: इस एजेंसी का उद्देश्य प्रवेश एवं छात्रवृत्ति हेतु उम्मीदवारों की योग्यता का अंतर्राष्ट्रीय मानकों के आधार पर कुशल और पारदर्शी परीक्षण करना है।
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NTA कार्य ::::

यह ऑनलाइन माध्यम में परीक्षा आयोजित करवाता है जिसके लिये इसे ऐसे विद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों का चयन करना होता है जहाँ पर सभी बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध हों और परीक्षा के आयोजन से उनके शैक्षणिक दिनचर्या पर कोई प्रभाव न पड़े।

अत्याधुनिक तकनीक की सहायता से सभी विषयों का प्रश्न-पत्र बनाना।

अनुसंधान एवं विकास के साथ-साथ परीक्षण हेतु विषय के विशेषज्ञों का क पैनल तैयार करना।

भारतीय शैक्षणिक संस्थानों में समय-समय पर प्रशिक्षण प्रदान करना और सलाहकारी सेवाएँ उपलब्ध कराना।

एजुकेशनल टेस्टिंग सर्विसेज़ (Educational Testing Services) जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मिलकर कार्य करना।

विभिन्न मंत्रालयों एवं केंद्र सरकार के विभागों तथा राज्य सरकारों द्वारा किसी परीक्षा के आयोजन का दायित्व सौंपे जाने कि स्थिति में उसका संचालन करना।

स्कूलों, बोर्ड तथा अन्य निकायों में प्रशिक्षण के साथ-साथ सुधार सुनिश्चित करना एवं प्रवेश परीक्षाओं के परीक्षण संबंधी मानकों की समय-समय पर जाँच करना।

प्रशासन :::

NTA का अध्यक्ष एक प्रख्यात शिक्षाविद् होता है एवं इसकी नियुक्ति मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा की जाती है।

इसका मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer-CEO) एक महानिदेशक होता है जिसकी नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है।

इसमें एक बोर्ड ऑफ़ गवर्नर होगा जिसमें परीक्षा आयोजित करवाने वाले संस्थानों के सदस्य भी शामिल होंगे।

महत्त्व ::::

NTA जैसी विशिष्ट परीक्षण एजेंसी की स्थापना से केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education-CBSE), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (All India For Technical Education-AICTE) जैसी संस्थाओं से परीक्षा आयोजित कराने का बोझ कम हुआ है।

NTA प्रत्येक वर्ष ऑनलाइन माध्यम से कम-से-कम दो बार परीक्षाओं का आयोजन करता है जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिये प्रवेश के अवसर बढ़ जाते हैं।

NTA ग्रामीण क्षेत्रों में पहुँच बढ़ाने के लिये तथा अभ्यर्थियों की सुविधा हेतु ज़िला स्तर एवं उप-ज़िला स्तर पर अपने केंद्र स्थापित कर रहा है।

NTA ने एक मोबाइल एप प्रारंभ करने के साथ ही अभ्यास परीक्षण केंद्रों की स्थापना की है जिसकी सहायता से अभ्यर्थी अपने स्मार्टफोन पर भी मॉक टेस्ट (Mock Test) देकर परीक्षा पूर्व अपना मूल्यांकन कर सकते हैं।

NTA के सामने चुनौतियाँ ::::

कंप्यूटर आधारित परीक्षण में तकनीकी समस्याओं, जैसे-इंटरनेट की पहुँच, बिजली की निरंतर आपूर्ति इत्यादि, का सामना करना पड़ सकता हैं।

इसके अतिरिक्त मानविकी विषयों में कई बार प्रश्नों को एप्टीट्यूड के आधार पर हल करना होता है, जो इस तरह के परीक्षण की सीमा है।
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BPSC Recruitment 2020 :::::
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 बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने 553 असिस्टेंट प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर (APO) पदों पर भर्ती हेतु आवेदन आमंत्रित किये हैं.

BPSC APO Recruitment 2020 के लिए उम्मीदवार 7 फरवरी से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. ऑनलाइन आवेदन का लिंक 21 फरवरी 2020 तक एक्टिव रहेगा.

BPSC APO वेकेंसी के लिए ऑनलाइन एप्लीकेशन फी उम्मीदवार 26 फरवरी 2020 तक जमा कर सकते हैं. उम्मीदवार 6 मार्च 2020 तक एप्लीकेशन अंतिम रूप से सबमिट कर सकते हैं. 

वैसे उम्मीदवार जो BPSC APO Recruitment 2020 के लिए आवेदन करना चाहते हैं उनके पास किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री होनी चाहिए.

महत्वपूर्ण तिथि :::

ऑनलाइन आवेदन शुरू होने की तिथि- 7 फरवरी 2020

ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि- 21 फरवरी 2020

ऑनलाइन आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि- 6 मार्च 2020

BPSC APO 2020 रिक्ति विवरण ::::

असिस्टेंट प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर (APO)- 553 पद

BPSC APO शैक्षणिक योग्यता ::: किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से लॉ में ग्रेजुएट होना चाहिए.

आयु सीमा :::

जनरल मेल- 18 से 37 वर्ष

जनरल फीमेल/बीसी/ओबीसी (पुरुष/महिला)- 18 से 42 वर्ष

एससी/एसटी (मेल/फीमेल)- 18 से 40 वर्ष

चयन प्रक्रिया ::: उम्मीदवारों का चयन प्रारंभिक, मुख्य परीक्षा एवं इंटरव्यू में उनके प्रदर्शन के आधार पर किया जायेगा.

आवेदन कैसे करें ::: योग्य उम्मीदवार बिहार लोक सेवा आयोग के ऑफिशियल वेबसाइट से 7 फरवरी से 21 फरवरी 2020 तक आवेदन कर सकते हैं...!
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ऑनलाइन अपराध संबंधी रिपोर्ट :::::
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दोस्तों, हाल ही में ‘बाल अधिकार और आप’ (Child Rights and You-CRY) नामक एक गैर सरकारी संगठन द्वारा स्कूली छात्रों पर किये गए एक अध्ययन में पता चला है कि प्रत्येक तीन में से एक किशोर ऑनलाइन अपराध का शिकार है।

प्रमुख बिंदु :::::

गैर सरकारी संगठन ‘बाल अधिकार और आप’ द्वारा ‘फोरम फाॅर लर्निंग एंड एक्शन विद इनोवेशन एंड रिगोर’ (Forum for Learning and Action with Innovation and Rigour-FLAIR) के सहयोग से इंटरनेट उपयोग और ऑनलाइन सुरक्षा के पैटर्न का आकलन करने हेतु दिल्ली-एनसीआर के 13 -18 आयु वर्ग के 630 स्कूली छात्रों पर एक सर्वेक्षण किया गया।

अध्ययन से पता चलता है कि 93% छात्रों के घरों में इंटरनेट उपयोग संबंधी सुविधाएँ उपलब्ध थी।

इंटरनेट उपकरणों तक व्यक्तिगत पहुँच के संदर्भ में पर्याप्त लैंगिक असमानता देखी जा सकती है, आँकड़ों से पता चलता है कि 60% बालकों की इंटरनेट उपकरणों तक व्यक्तिगत पहुँच के सापेक्ष केवल 40% बालिकाओं की इंटरनेट उपकरणों तक व्यक्तिगत पहुँच है।

अध्ययन से यह भी पता चला है कि इंटरनेट उपयोग के संदर्भ में 30% छात्रों का अनुभव नकारात्मक रहा।

इंटरनेट अपराध की विभिन्न श्रेणियों के आँकड़ो से पता चलता है कि लगभग 10% किशोर साइबर बुलिंग (Cyberbullying), अन्य 10% किशोर सोशल मीडिया अकाउंट और प्रोफाइल के दुरुपयोग तथा 23% किशोर फोटो व वीडियो में छेड़छाड़ को घटना से पीड़ित थे।

इंटरनेट उपयोग संबंधी आदत :::

NCERT द्वारा विकसित इंटरनेट सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों की जानकारी के संबंध में जागरुकता का अभाव है। केवल 30% छात्रों को इंटरनेट सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों की जानकारी थी।

इंटरनेट उपयोग संबंधी एक टेस्ट में लगभग 48% छात्र सामान्य रूप से इंटरनेट के उपयोग से ग्रस्त पाये गए वहीं 1% छात्र इंटरनेट के उपयोग से अत्यधिक ग्रस्त थे।

इंटरनेट तक पहुँच सभी के लिये हानिकारक नहीं है क्योंकि 40% छात्रों ने माना कि उन्होंने इसका प्रयोग अपने अध्ययन में मदद के लिये किया (जैसे कि शब्दों या सूचनाओं, ट्यूटोरियल और अपने स्कूल के ऑनलाइन शिक्षा कार्यक्रम तक ऑनलाइन खोज)।

लगभग 50% छात्रों ने पाठ्येतर गतिविधियों जैसे कि संगीत, पेंटिंग या खेल के लिये भी इंटरनेट का उपयोग किया।

कानूनी प्रावधान ::::

भारत में ऑनलाइन अपराध के मामलों में सूचना प्रोद्योगिकी अधिनियम 2000 और सूचना प्रोद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम 2008 लागू होते हैं।
भारत में बच्चों से संबंधित ऑनलाइन अपराध के मामले में कोई विशेष कानून नहीं है।

सूचना प्रोद्योगिकी कानून की धारा 66(a)(b) साइबर बुलिंग पर लागू होती है, जिसके तहत तीन साल तक की सज़ा तथा जुर्माना हो सकता है।

आगे की राह ::::

इंटरनेट उपयोग संबंधी जागरूकता उत्पन्न करने के लिये स्कूलों में वर्कशॉप आयोजित किये जाने चाहिये।

किशोरों के खिलाफ साइबर अपराधों से निपटने के लिये बुनियादी ढाँचे के निर्माण हेतु केंद्र सरकार की बाल संरक्षण योजना को संशोधित करने की आवश्यकता है।

पारिवारिक स्तर पर अभिभावकों को अपने बच्चों के साथ अधिक से अधिक समय व्यतीत करने का प्रयास करना चाहिये।
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संविधान और रोचक तथ्य ::::
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वर्तमान में भारत एक स्वतंत्र, संप्रभु गणराज्य है और इसका शासन एक मजबूत संविधान में दिए गए दिशा निर्देशों से चलता है. लेकिन क्या आपको पता है कि इस मजबूत संविधान को बनाने के लिए लाखों रुपये खर्च होने के साथ साथ कई लोगों ने अपना अमूल्य समय और परिश्रम भी खर्च किया था..?

भारत में संविधान सभा के गठन का विचार सर्वप्रथम एम एन राय ने 1934 में रखा था. इसके बाद 1935 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पहली बार भारत के संविधान के निर्माण के लिए आधिकारिक रूप से संविधान सभा के गठन की मांग की थी.
आइये इस लेख में भारतीय संविधान से सम्बंधित कुछ रोचक तथ्यों को जानते हैं. इन तथ्यों के बारे में या तो लोग जानते नहीं या फिर जानते हैं तो गलत जानते हैं.

1. संविधान सभा की पहली बैठक : संविधान सभा, स्वतंत्र भारत की पहली संसद थी. डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा संविधान सभा के पहले अध्यक्ष (अस्थायी अध्यक्ष) थे. इस संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी.

2. संविधान निर्माताओं ने लगभग 60 देशों के संविधानों का अवलोकन किया था और जिस संविधान में जो प्रावधान भारत के लिए सर्वश्रेष्ठ लगा उसे भारत के संविधान में शामिल कर लिया गया था.

3. कुल खर्च : संविधान के निर्माण पर कुल 64 लाख रुपये का खर्च आया था.

4. कुल समय : संविधान के बनने में 2 साल, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा था.

5.जब संविधान का मसौदा (Draft) तैयार किया गया था और बहस और चर्चा के लिए रखा गया था, तो अंतिम रूप देने से पहले इसमें 2000 से अधिक संशोधन किए गए थे.

6. फाइनल ड्राफ्ट तैयार : संविधान सभा कुल 11 सत्रों के लिए बैठी थी. संविधान सभा का 11 वां सत्र 14-26 नवंबर 1949 के बीच आयोजित किया गया था. 26 नवंबर 1949 को संविधान का अंतिम ड्राफ्ट तैयार हुआ था.

7. यह दुनिया का सबसे लंबा संविधान : भारतीय संविधान दुनिया में किसी भी संप्रभु देश का सबसे लंबा है. अपने वर्तमान रूप में, इसमें; एक प्रस्तावना, 22 भाग, 448 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियां हैं.

8.  संविधान पर हस्ताक्षर : 24 जनवरी 1950 को, संविधान सभा के 284 सदस्यों ने भारतीय संविधान को संविधान भवन में हस्ताक्षरित किया थ, जिसे अब संसद के केंद्रीय कक्ष के रूप में जाना जाता है.

9. भारतीय संविधान टाइप या प्रिंट नहीं : भारतीय संविधान के हिंदी और अंग्रेजी के दोनों संस्करण हस्तलिखित थे. यह पृथ्वी पर किसी भी देश का सबसे लंबा हस्तलिखित संविधान है.

10.भारतीय संविधान, प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा (Prem Behari Narain Raizada) ने लिखा था : भारत के मूल संविधान को 'प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा' ने सुंदर सुलेख के साथ  इटैलिक शैली में लिखा था. 

11. भारतीय संविधान का प्रकाशन देहरादून में किया गया था और सर्वे ऑफ़ इंडिया द्वारा फोटोलिथोग्राफ किया गया था.

12. कलाकारी : प्रत्येक पृष्ठ को शांतिनिकेतन के कलाकारों ने सजाया था: मूल संविधान हस्तलिखित है, जिसमें शान्तिनिकेतन के कलाकारों द्वारा प्रत्येक पृष्ठ को अनोखे ढंग से सजाया गया है. इन कलाकारों में राममनोहर सिन्हा और नंदलाल बोस शामिल हैं. 


13. मूल प्रतियां हीलियम बॉक्स में रखी गयीं हैं : हिंदी और अंग्रेजी में लिखी गई भारतीय संविधान की मूल प्रतियों को भारत की संसद की लाइब्रेरी में विशेष हीलियम से भरे केस में रखा गया है ताकि लम्बे समय तक सुरक्षित रहें.
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वर्ल्ड वाइड एजुकेटिंग फॉर द फ्यूचर इंडेक्स :::
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दोस्तों, हाल ही में द इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (The Economist Intellligence Unit) नामक संस्था द्वारा जारी वर्ल्ड वाइड एजुकेटिंग फॉर द फ्यूचर इंडेक्स (Worldwide Educating for the Future Index), 2019 में भारत को 35वाँ स्थान प्राप्त हुआ है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु ::::

यह सूचकांक छात्रों को कौशल-आधारित शिक्षा से लैस करने की देशों की क्षमताओं के आधार पर रैंक प्रदान करता है।

यह रिपोर्ट कौशल आधारित शिक्षा के परिप्रेक्ष्य से महत्त्वपूर्ण दृष्टिकोण, समस्या को सुलझाने की क्षमता, नेतृत्व, सहयोग, रचनात्मकता और उद्यमशीलता तथा डिजिटल एवं तकनीकी कौशल जैसे क्षेत्रों में शिक्षा प्रणाली का विश्लेषण करती है।

इस रिपोर्ट में दी जाने वाली रैंकिंग तीन श्रेणियों पर आधारित है :::

1. नीतिगत वातावरण
2. शैक्षणिक वातावरण
3. समग्र सामाजिक-आर्थिक वातावरण

वर्ष 2019 में सूचकांक का विषय "नीति से अभ्यास तक” (From Policy to Practice) है।

वर्ल्ड वाइड एजुकेटिंग फॉर द फ्यूचर इंडेक्स :::

इस सूचकांक (इंडेक्स) और रिपोर्ट को येडान प्राइस फाउंडेशन (Yidan Prize Foundation) द्वारा प्रस्तुत किया जाता है।

तेज़ी से बदलते परिदृश्य में कार्य और बेहतर जीवनयापन के लिये छात्रों को तैयार करने में शिक्षा प्रणालियों की प्रभावशीलता का आकलन करने हेतु इसे विकसित किया गया था।

सूचकांक के मुख्य बिंदु :::

फिनलैंड इस सूचकांक में शीर्ष पर है जबकि स्वीडन दूसरे स्थान पर है।

वर्ष 2019 में तीनों श्रेणियों (नीतिगत वातावरण, शैक्षणिक वातावरण और समग्र सामाजिक-आर्थिक वातावरण) के आधार पर 53 के कुल स्कोर के साथ भारत समग्र सूचकांक में 35वें स्थान पर रहा। वर्ष 2018 में इन्हीं श्रेणियों में 41.2 के समग्र स्कोर के साथ भारत 40वें स्थान पर था।

भारत का स्कोर नीतिगत वातावरण के संदर्भ में वर्ष 2018 में 61.5 की तुलना में वर्ष 2019 में घटकर 56.3 हो गया है। इसके अतिरिक्त शैक्षणिक वातावरण श्रेणी एवं समग्र सामाजिक-आर्थिक वातावरण श्रेणी में भारत का स्कोर वर्ष 2018 में क्रमशः 32.2 एवं 33.3 की तुलना में बढ़कर क्रमशः 52.2 और 50.1 हो गया है।

सूचकांक में भारत की स्थिति में सुधार के कारण :::

रिपोर्ट के अनुसार, सूचकांक की ‘शैक्षणिक वातावरण’ श्रेणी में भारत के बेहतर प्रदर्शन का प्रमुख कारण सरकार द्वारा शुरू की गई नई शिक्षा नीति है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 2019 की शुरुआत में प्रकाशित एक नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के साथ विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण दृष्टिकोण, संचार और उद्यमिता जैसे भविष्योन्मुखी कौशल का उल्लेख करते हुए नीतिगत माहौल में प्रगति की है।

केंद्रीय बजट 2020 में ‘एस्पिरेशनल इंडिया’ के तहत नई शिक्षा नीति पर प्रकाश डाला गया है जिसका उद्देश्य प्रतिभावान शिक्षकों को आकर्षित करने के लिये वित्त की अधिक से अधिक प्राप्ति, नई प्रयोगशालाओं का निर्माण और नवाचार करना है।

साथ ही 150 उच्च शिक्षण संस्थानों में अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री या डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के साथ डिग्री स्तर के पूर्ण-ऑनलाइन शिक्षा कार्यक्रम शुरू करने का भी प्रस्ताव है जो मार्च 2021 तक शुरू हो जाएगा।

गौरतलब है कि ये सभी कारण भारत के इस सूचकांक में बेहतर प्रदर्शन के लिये ज़िम्मेदार हैं।

भारत के समक्ष चुनौतियाँ :::

वर्ष 2018 की रिपोर्ट में उच्च शिक्षा प्रणाली के अंतर्राष्ट्रीयकरण के अवसर का उपयोग करने से संबंधित भारतीय शिक्षा प्रणाली की अक्षमता पर प्रकाश डाला गया था।

वर्ष 2019 की रिपोर्ट के अनुसार, विकेंद्रीकृत शिक्षा प्रणाली भी भारतीय शिक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी चुनौती है।

कौशल विकास से संबंधित सुविचारित नीतिगत लक्ष्य अक्सर ज़मीनी स्तर तक नहीं पहुँच पाते हैं जो कि अमेरिका और भारत जैसी अर्थव्यवस्थाओं में एक बड़ी समस्या है।

समाधान :::

भारत को अपनी शिक्षा प्रणाली को विकसित करना चाहिये ताकि वह उच्च शिक्षा के लिये पसंदीदा स्थान बन जाए।

भारतीय शिक्षा पद्धति में व्यापक बदलाव किया जाना चाहिये एवं शिक्षा को सर्वसुलभ बनाने का प्रयास किया जाना चाहिये।

आगे की राह :::

भारत को अपने शैक्षणिक वातावरण, नीतिगत वातावरण एवं समग्र सामाजिक-आर्थिक वातावरण में सुधार के प्रयास करने चाहिये।

ध्यातव्य है कि भारत द्वारा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक बेहतर गंतव्य बनने के लिये स्टडी इन इंडिया (Study In India) एवं वज्र योजना के अंतर्गत प्रयास किया जा रहा है किंतु इसे और व्यापक स्तर पर प्रयास करने की आवश्यकता है।
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