Karpaga Vinayagar Temple, Pillayarpatti in Tiruppathur Taluk Sivaganga district, Tamil Nadu, BHARAT (India)
It's an ancient rock-cut cave shrine dedicated to Sri Ganesh
In the cave temple, there are rock cut images of Siva and other gods as well as several shrines. The Āgama texts found on stone inscriptions in the temple help to date the temple between the years 1091 and 1238 B.C.
History and Architecture:
illaiyarpatti Karpaga Vinayagar temple was built by early Pandyas. Karpaga Vinayagar is carved out in a cave of Pillaiyarpatti Hillocks. Thiruveesar (Shiva) is also carved in the rock of this cave. There are 14 stone Sculptures in the cave (dated from 400 to 1038 AD). These stone sculptures state the ancient names of Pillaiyarpatti such as Ekkattoor, Thiruveenkaikkudi, Maruthangudi, and Rajanarayanapuram.
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It's an ancient rock-cut cave shrine dedicated to Sri Ganesh
In the cave temple, there are rock cut images of Siva and other gods as well as several shrines. The Āgama texts found on stone inscriptions in the temple help to date the temple between the years 1091 and 1238 B.C.
History and Architecture:
illaiyarpatti Karpaga Vinayagar temple was built by early Pandyas. Karpaga Vinayagar is carved out in a cave of Pillaiyarpatti Hillocks. Thiruveesar (Shiva) is also carved in the rock of this cave. There are 14 stone Sculptures in the cave (dated from 400 to 1038 AD). These stone sculptures state the ancient names of Pillaiyarpatti such as Ekkattoor, Thiruveenkaikkudi, Maruthangudi, and Rajanarayanapuram.
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शिव मंदिर खजुराहो - खजुराहो का सबसे ऊंचा मंदिर
लक्ष्मण मंदिर के पास स्थित यह मंदिर ३५ फीट के वर्गाकार दायरे में है। इसका गर्भगृह भी वर्गाकार है। प्रवेश द्वार पूरब की ओर है। मंदिर का शिखर बहुमंजिला है। इसका निर्माण काल ९०० से ९२५ ई. के आसपास का माना जाता है। चंदेल शासक हर्षदेव के काल में इस मंदिर का निर्माण हुआ। मंदिर के गर्भगृह में विशाल शिवलिंग है जो ८.५ फीट ऊंचा है। इसका घेरा लगभग ४ फीट का है। इस शिवलिंग को मृत्युंजय महादेव के नाम से भी लोग जानते हैं।
छतरपुर जिले के खजुराहो में किसी समय ८५ मंदिर होते थे, लेकिन अब केवल कुछ ही मंदिर बचे हैं। पुरातत्व मंदिरों में मतंगेश्वर महादेव का ही एक ऐसा मंदिर है। मतंगेश्वर महादेव मंदिर ९वीं सदी में बना हुआ मंदिर है। आज यह मंदिर पूजा-पाठ व आस्था का केंद्र बना हुआ है। मतंगेश्वर महादेव मंदिर को खजुराहो में सबसे ऊंचा मंदिर माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शंकर के पास मरकत मणि थी, जिसे शिव ने पांडवों के भाई युधिष्ठिर को दे दी थी। युधिष्ठिर के पास से वह मणि मतंग ऋषि पर पहुंची और उन्होंने राजा हर्षवर्मन को दे दी। मतंग ऋषि की मणि की वजह से ही इनका नाम मतंगेश्वर महादेव पड़ा, क्योंकि शिवलिंग के बीच मणि सुरक्षा की दृष्टि से जमीन में गाड़ दी गई थी। तब से मणि शिवलिंग के नीचे ही है।
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लक्ष्मण मंदिर के पास स्थित यह मंदिर ३५ फीट के वर्गाकार दायरे में है। इसका गर्भगृह भी वर्गाकार है। प्रवेश द्वार पूरब की ओर है। मंदिर का शिखर बहुमंजिला है। इसका निर्माण काल ९०० से ९२५ ई. के आसपास का माना जाता है। चंदेल शासक हर्षदेव के काल में इस मंदिर का निर्माण हुआ। मंदिर के गर्भगृह में विशाल शिवलिंग है जो ८.५ फीट ऊंचा है। इसका घेरा लगभग ४ फीट का है। इस शिवलिंग को मृत्युंजय महादेव के नाम से भी लोग जानते हैं।
छतरपुर जिले के खजुराहो में किसी समय ८५ मंदिर होते थे, लेकिन अब केवल कुछ ही मंदिर बचे हैं। पुरातत्व मंदिरों में मतंगेश्वर महादेव का ही एक ऐसा मंदिर है। मतंगेश्वर महादेव मंदिर ९वीं सदी में बना हुआ मंदिर है। आज यह मंदिर पूजा-पाठ व आस्था का केंद्र बना हुआ है। मतंगेश्वर महादेव मंदिर को खजुराहो में सबसे ऊंचा मंदिर माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शंकर के पास मरकत मणि थी, जिसे शिव ने पांडवों के भाई युधिष्ठिर को दे दी थी। युधिष्ठिर के पास से वह मणि मतंग ऋषि पर पहुंची और उन्होंने राजा हर्षवर्मन को दे दी। मतंग ऋषि की मणि की वजह से ही इनका नाम मतंगेश्वर महादेव पड़ा, क्योंकि शिवलिंग के बीच मणि सुरक्षा की दृष्टि से जमीन में गाड़ दी गई थी। तब से मणि शिवलिंग के नीचे ही है।
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🛕 पुरी की रथयात्रा में हुई अद्भुत चमत्कार
प्रभु जगन्नाथ मन्दिर से चली रथयात्रा जब गुण्डीचा मन्दिर पहुँची और आडप मण्डप विजय के समय जगन्नाथ जी का नन्दीघोष रथ चरमला पहुँचा, तब आरती होनी थी।
परन्तु रथयात्रा पर चारों ओर बहुत भारी वर्षा हो रही थी, जिस कारण आरती करना असम्भव-सा लगा....
परन्तु अचानक देखा गया कि स्वयं प्रभु जगन्नाथ के नन्दीघोष रथ तथा आसपास कुछ दूरी तक पर वर्षा बिलकुल नहीं हो रही थी..
जब कि शेष पूरी रथयात्रा एवं साथ चलने वाले लाखों भक्त मूसलाधार वर्षा में भीग रहे थे..!
नन्दीघोष रथ पर पानी नहीं बरस रहा था, अत: आरती निर्विघ्न रूप से हो सकी...!
महाप्रभु जगन्नाथ स्वामी की जय 🚩
ये है हमारे सनातन धर्म की शक्ति 🙏
#RathYatra
#RathYatra2022
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प्रभु जगन्नाथ मन्दिर से चली रथयात्रा जब गुण्डीचा मन्दिर पहुँची और आडप मण्डप विजय के समय जगन्नाथ जी का नन्दीघोष रथ चरमला पहुँचा, तब आरती होनी थी।
परन्तु रथयात्रा पर चारों ओर बहुत भारी वर्षा हो रही थी, जिस कारण आरती करना असम्भव-सा लगा....
परन्तु अचानक देखा गया कि स्वयं प्रभु जगन्नाथ के नन्दीघोष रथ तथा आसपास कुछ दूरी तक पर वर्षा बिलकुल नहीं हो रही थी..
जब कि शेष पूरी रथयात्रा एवं साथ चलने वाले लाखों भक्त मूसलाधार वर्षा में भीग रहे थे..!
नन्दीघोष रथ पर पानी नहीं बरस रहा था, अत: आरती निर्विघ्न रूप से हो सकी...!
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नास्ति गङ्गासमं तीर्थं नास्ति मातृसमो गुरुः ।
नास्ति विष्णुसमं दैवं नास्ति तत्त्वं गुरोः परम् ।।
⚜ भावार्थ : गंगा (माँ) के समान और कोई तीर्थ नहीं है, माता के समान और कोई गुरु नहीं है, श्री विष्णु के समान और कोई देव नहीं है, और गुरु से बढ़कर और कोई तत्त्व नहीं है।
#गुरु_पूर्णिमा #GuruPurnima
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नास्ति विष्णुसमं दैवं नास्ति तत्त्वं गुरोः परम् ।।
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Sanskrit is our Culture.
Sanskrit is our Heritage.
Sanskrit is our Language.
#DevBhasha #Sanskrit
#Samskrit #Samskritam
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🙏🚩🇮🇳🔱🏹🐚🕉️
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सन 1928 की प्रभु जगन्नाथ जी की रथ यात्रा वीडियो। ये अति दुर्लभ वीडियो है।
जय जगन्नाथपुरी 🙏
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सन १९३७ में एक ब्रिटिश ने जगन्नाथ जी की रथ यात्रा वीडियो बनाया। ये अति दुर्लभ वीडियो बताता है कि हमारी परंपरा कितनी महान है.. आज भी वैसी की वैसी बनी हुई है।
जय जगन्नाथपुरी 🙏
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बनारस का एक ऐसा मंदिर जो साल भर में 11 महिने पानी के अंदर डूबा रहता है। पहली बार गर्भगृह के अंदर से अद्भुत दर्शन।
रत्नेश्वर महादेव मंदिर (जिसे मातृ-ऋण महादेव या वाराणसी का झुका हुआ मंदिर भी कहा जाता है) भारत के उत्तर प्रदेश के पवित्र शहर वाराणसी में गंगा तट पत सबसे अधिक फोटो लिये जाने वाले मंदिरों में से एक है। यह मंदिर, हालांकि अच्छी तरह से संरक्षित है, फ़िर भी उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर ओर झुकता हुआ है, और इसका गर्भगृह आमतौर पर गर्मियों के दौरान कुछ महीनों को छोड़कर, वर्ष के अधिकांश समय में पानी में डूबा हुआ होता है। रत्नेश्वर महादेव मंदिर मणिकर्णिका घाट, वाराणसी में स्थित है।
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🕉️ 🚩गणपति बाप्पा मोरया 😍🙏
🚨 टेलिग्रामवरील प्रशासक समितीच्या मराठी चॅनल व ग्रूप मध्ये सामील व्हा👇
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The restoration of Sri Lakshmi Narasimha Swamy temple, a 13th-century Hindu shrine in Telangana, is remarkable. Renovated with black granite, the temple is the finest example of ancient Agama Shastra, which is building temples as per Hindu traditions.
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महालक्ष्मी का यह प्रसिद्ध मंदिर सूर्य देवता स्वयं देवी लक्ष्मी के चरणों में अभिषेक करते हैं। यह मन्दिर महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित है।
श्री अंबाबाई मंदिर भारत देश के हिन्दू धर्म के अनुसार में पुराणों में सूचित किया हुआ विभिन्न शक्ति पीठों में एक है।
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श्री अंबाबाई मंदिर भारत देश के हिन्दू धर्म के अनुसार में पुराणों में सूचित किया हुआ विभिन्न शक्ति पीठों में एक है।
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