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Know the importance of pension🙏
लघु कथा
“सम्मान निधि”
=========
माँ, तुम भी न ...यह क्या पिताजी की जरा सी 12000 रुपये की पेंशन के लिए इतना माथापच्ची कर रही हो, अरे इससे ज़्यादा तो हम तनख्वाह पेमेंट में एक कर्मचारी को दे देतें हैं..
मोहित ने चिढ़कर अपनी माँ के साथ स्टेट बैंक की लंबी कतार में लगने की बजाय माँ को घर वापस घर पर ले जाने के लिए आग्रह करने लगा।
वैसे मोहित ने सच ही कहा था, करोड़ों का बिजनेस था उनका, लाखों रुपये तो साल भर में यूँ ही तनख्वाह और भत्ते के नाम पर कर्मचारियों पर निकल जाते हैं, फ़िर मात्र 12000 रुपये प्रतिमाह की पेंशन पाने के लिये, स्टेट बैंक की लम्बी कतार में खड़े होकर पेंशन की औपचारिकता पूर्ण करने के लिये इतना समय व्यर्थ करने का क्या औचित्य ??
मोहित के पिता विशम्भरनाथ जी का निधन पिछले माह ही बीमारी की वजह से हुआ था, वह लगभग 12 वर्ष पूर्व एक सरकारी स्कूल में प्राध्यापक पद से रिटायर हुये थे , तब से उनके नाम पर पेंशन आया करती थी, विशम्भर नाथ जी मृत्यु के उपरांत आधी पेंशन उनकी पत्नी सरला जी को मिलने का शासकीय योजना के अनुसार प्रावधान था, जिसके लिये सरला जी आज स्टेट बैंक में अपने बेटे मोहित के साथ जाकर पेंशन की औपचारिकता पूर्ण करने आई हुई थी।
★
उस दिन मोहित के बेटे कुशाग्र का आठवां जन्मदिन था, उसने अपनी दादी से साइकिल की फ़रमाइश की थी, सरला के खुद के बैंक अकाऊंट में पैसे नाममात्र के ही बचे थे, उनकी पेंशन अभी शुरू नहीं हुई थी..इसलिए उन्होंने मोहित से 10000 हज़ार रुपये माँगें... मोहित अपने ऑफिस जाने की तैयारी में व्यस्त था, उसने अचानक माँ के द्वारा दस हज़ार रुपये की माँग पर थोड़ा अचरज़ से देखा, फिर अपनी पत्नी श्रेया को माँ को दस हज़ार रुपये देने को कहकर चला गया।
श्रेया ने एक दो बार माँगने पर अपनी सास को दस हजार रुपये देते हुये कहा, "पता नहीं आजकल बहुत मंदी चल रही है, थोड़ा हाँथ सम्हालकर खर्च करना... " हलांकि शाम को जब सरला ने उन पैसों से कुशाग्र की साइकिल खरीदी, तो घर का माहौल पूर्ववत हँसी मज़ाक का हो गया।
अगले हफ्ते मोहित की बड़ी बहन दो दिन के लिए मायके आई थी, जब तक विशम्भरनाथ जी जीवित थे, सरला को कभी पैसे के लिये किसी से पूछना नही पड़ता, वह खुद ही अपनी पेंशन से एक रकम निकाल कर सरला को दे देते थे, मग़र आज बेटी की विदाई के लिए सरला को बहु से पैसे माँगते समय उसके शब्द "पता नहीं आजकल बहुत मंदी चल रही है, थोड़ा हाँथ सम्हालकर खर्च करना..." याद आ गये और बहुत दुःखी मन से बेटी को बिना कुछ दिये ही विदा करने लगी, तब बहु ने खुद आकर सरला के हाथ में 2000 रुपये पकड़ाकर कहा, बेटी को खाली हाथ विदा करेंगी क्या? सरला ने महसूस कर लिया था कि बहु की बात में अपनापन कम उलाहना ज्यादा है।
★★
ऐसा नहीं था कि सरला के जीवन में पैसे का आभाव आ गया हो, उसके इलाज़ के लिए, दवा के लिये, मोबाइल रिचार्ज करना, छोटी मोटी जरूरतों के लिए तो मोहित बिना कुछ कहे ही पैसा लाकर दे देता था, परन्तु इसके इतर सरला को जो भी खर्च करना होता जैसे किसी मंदिर में दान करना, नौकरों को उनकी जरूरत या त्योहार पर पैसा देना या अपने रिश्तेदारों के आने पर उपहार देना जैसे छोटी मोटी जरूरतों के लिए उसे मोहित या बहु से पैसा माँगना स्वाभिमान को चोट करता था।
अभी दो दिन पहले सरला की बहन आई हुई थी, बहन की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी, इसलिए वह सरला से कुछ आर्थिक सहयोग की अपेक्षा कर रही थी, मग़र खुद सरला को छोटे-छोटे खर्चो के लिए बहु की तरफ मुँह देखते देखकर उसने अपनी बहन से कुछ न कहा।
आज जैसे ही उसके मोबाईल पर पहली बार स्टेट बैंक का SMS आया, सरला ने आश्चर्य से मैसेज खोलकर देखा, पिछले छः महीने की पेंशन 72000 रुपये उसके अकाउंट में क्रेडिट होने का मैसेज था वह।
सरला नज़दीक के ATM से 10000 रुपये निकालकर जब सरला घर आ रही थी, उसके आत्मविश्वास और कदमों की चाल ही बता रही थी कि पेंशन को "सम्मान निधि" क्यों कहतें हैं।
अपने करोड़पति बेटे की करोड़ों की दौलत से ज्यादा वजन सरला को अपने पति की पेंशन से मिले 12000 रुपयों में लग रहा था।
सौजन्य
#ShyamTahalramani
Know the importance of pension🙏
लघु कथा
“सम्मान निधि”
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माँ, तुम भी न ...यह क्या पिताजी की जरा सी 12000 रुपये की पेंशन के लिए इतना माथापच्ची कर रही हो, अरे इससे ज़्यादा तो हम तनख्वाह पेमेंट में एक कर्मचारी को दे देतें हैं..
मोहित ने चिढ़कर अपनी माँ के साथ स्टेट बैंक की लंबी कतार में लगने की बजाय माँ को घर वापस घर पर ले जाने के लिए आग्रह करने लगा।
वैसे मोहित ने सच ही कहा था, करोड़ों का बिजनेस था उनका, लाखों रुपये तो साल भर में यूँ ही तनख्वाह और भत्ते के नाम पर कर्मचारियों पर निकल जाते हैं, फ़िर मात्र 12000 रुपये प्रतिमाह की पेंशन पाने के लिये, स्टेट बैंक की लम्बी कतार में खड़े होकर पेंशन की औपचारिकता पूर्ण करने के लिये इतना समय व्यर्थ करने का क्या औचित्य ??
मोहित के पिता विशम्भरनाथ जी का निधन पिछले माह ही बीमारी की वजह से हुआ था, वह लगभग 12 वर्ष पूर्व एक सरकारी स्कूल में प्राध्यापक पद से रिटायर हुये थे , तब से उनके नाम पर पेंशन आया करती थी, विशम्भर नाथ जी मृत्यु के उपरांत आधी पेंशन उनकी पत्नी सरला जी को मिलने का शासकीय योजना के अनुसार प्रावधान था, जिसके लिये सरला जी आज स्टेट बैंक में अपने बेटे मोहित के साथ जाकर पेंशन की औपचारिकता पूर्ण करने आई हुई थी।
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उस दिन मोहित के बेटे कुशाग्र का आठवां जन्मदिन था, उसने अपनी दादी से साइकिल की फ़रमाइश की थी, सरला के खुद के बैंक अकाऊंट में पैसे नाममात्र के ही बचे थे, उनकी पेंशन अभी शुरू नहीं हुई थी..इसलिए उन्होंने मोहित से 10000 हज़ार रुपये माँगें... मोहित अपने ऑफिस जाने की तैयारी में व्यस्त था, उसने अचानक माँ के द्वारा दस हज़ार रुपये की माँग पर थोड़ा अचरज़ से देखा, फिर अपनी पत्नी श्रेया को माँ को दस हज़ार रुपये देने को कहकर चला गया।
श्रेया ने एक दो बार माँगने पर अपनी सास को दस हजार रुपये देते हुये कहा, "पता नहीं आजकल बहुत मंदी चल रही है, थोड़ा हाँथ सम्हालकर खर्च करना... " हलांकि शाम को जब सरला ने उन पैसों से कुशाग्र की साइकिल खरीदी, तो घर का माहौल पूर्ववत हँसी मज़ाक का हो गया।
अगले हफ्ते मोहित की बड़ी बहन दो दिन के लिए मायके आई थी, जब तक विशम्भरनाथ जी जीवित थे, सरला को कभी पैसे के लिये किसी से पूछना नही पड़ता, वह खुद ही अपनी पेंशन से एक रकम निकाल कर सरला को दे देते थे, मग़र आज बेटी की विदाई के लिए सरला को बहु से पैसे माँगते समय उसके शब्द "पता नहीं आजकल बहुत मंदी चल रही है, थोड़ा हाँथ सम्हालकर खर्च करना..." याद आ गये और बहुत दुःखी मन से बेटी को बिना कुछ दिये ही विदा करने लगी, तब बहु ने खुद आकर सरला के हाथ में 2000 रुपये पकड़ाकर कहा, बेटी को खाली हाथ विदा करेंगी क्या? सरला ने महसूस कर लिया था कि बहु की बात में अपनापन कम उलाहना ज्यादा है।
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Forwarded from ABC ABC
What North Indian and Eastern Indian Stduents are doing?
UPSC, SSC, Railway, IBPS Exams?
Important to understand attend and reasons behind it. In Delhi count also there are chances that people might be from Western and Southern parts of India who are doing job or studying or preparing for exams.
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You can check this if you have an interview, all info is given there and for extra info call IIM K Office.
Forwarded from ABC ABC
Poll for people working in the private sector, it’s about salary.
Mention your monthly salary.
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Anonymous Poll
6%
Less than 25K
7%
25-40K
5%
40-50K
8%
50-80K
5%
80-100K
5%
1-2 lakhs
2%
2-4 lakhs
3%
More than 4 lakhs
32%
Working in a govt job
29%
Unemployed
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