एच.एल. मेनकेन की वो पुरानी बात याद है न, "हर मुश्किल समस्या का एक सीधा-साधा, आसान और गलत जवाब होता है।" ये बात आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हमें बहुत कुछ सिखाती है। अक्सर हम किसी भी बड़ी दिक्कत का झटपट हल ढूंढने लगते हैं, पर सच कहें तो आसान जवाब हमेशा सही नहीं होते।
जैसे, गरीबी को ही ले लो। कोई कहेगा, "अरे, गरीब लोग खुद ही मेहनत नहीं करते।" पर असलियत में ये बहुत पेचीदा मामला है। इसमें शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, सही मज़दूरी न मिलना, भेदभाव और आर्थिक असमानता जैसी कई बड़ी वजहें शामिल होती हैं।
या फिर, जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) को देखो। कोई झट से कह देगा कि ये सब बकवास है या किसी एक चीज़ की वजह से हो रहा है। पर सच तो ये है कि इसमें वायुमंडल की जटिल प्रक्रियाएं, फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआँ, पेड़ों की कटाई और इंसानों की कई गतिविधियाँ जुड़ी हैं।
स्वास्थ्य सेवा में सुधार की बात करें तो, एक आसान हल लग सकता है कि "बाजार को सब संभालने दो।" लेकिन स्वास्थ्य सेवा सिर्फ़ व्यापार नहीं है। इसमें नैतिकता, ज़रूरतमंदों तक पहुँच, पुरानी बीमारियां, दवाओं का खर्च और जन स्वास्थ्य की ज़रूरतें, सब कुछ देखना पड़ता है।
हमारे शिक्षा सिस्टम की चुनौतियों के लिए भी, सिर्फ़ टीचरों या बच्चों को दोष देना गलत होगा। असली वजहें फंडिंग में कमी, सिलेबस का पुराना होना, माता-पिता की भागीदारी और समाज के दबाव जैसी कई बातें हैं। यहाँ तक कि ट्रैफ़िक जाम का भी एक आसान जवाब "और सड़कें बना दो" हो सकता है। पर अक्सर इससे जाम और बढ़ जाता है, क्योंकि इसमें शहरी योजना, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, ज़मीन का इस्तेमाल और लोगों के व्यवहार जैसे कई पहलू होते हैं।
मुश्किल चीज़ों को समझना मतलब उन्हें और मुश्किल बनाना नहीं है। इसका मतलब है असलियत को मानना। इसके लिए हमें थोड़ा दिमाग लगाना होगा, साथ मिलकर काम करना होगा और सिर्फ ऊपर-ऊपर की बातों के बजाय, गहराई में जाकर चीज़ों को समझना होगा। तो, एक लीडर या प्रोफेशनल होने के नाते, आइए हम उन "सीधे-साधे, गलत जवाबों" के पीछे न भागें। इसके बजाय, हम जिन भी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं, उनकी हर बारीकी को समझें। जब हम ऐसा करते हैं, तभी हमें ऐसे हल मिलते हैं जो सच में काम करते हैं और लंबे समय तक टिकते हैं।
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If you are interested more such Government Lateral Entry Jobs then WhatsApp me on: 9807052019 (Paid One on One Consultation)
Presently I am mentoring 300+ Freshers as well as Bankers to get other good opportunities!🙏
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PNB Employee shared me the news and then someone messaged me that it’s old, so deleted it.
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It’s very difficult for me to verify all the dates and news, actually in that news date doesn’t matter but still I removed it because some people felt bad!
So before sending me any news verify from your side!
Lakhs of the people follow and take my posts seriously so please think twice before sending me any news, I don’t have people to check all such news.
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जब तक किसी भी पार्टी को फुल ह्यूज मेजोरिटी ३५०+ नहीं है तब तक बैंक या इन्शुरन्स प्राइवेटाइजेशन का खतरा नहीं है!
चंद्राबाबू और नीतीश कुमार प्राइवेटाइजेशन होने नहीं देंगे!
As long as no single party has a full majority of 350+ seats, there is no real threat of bank or insurance privatization.
Leaders like Chandrababu Naidu and Nitish Kumar will not allow privatization to happen.
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