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पैसे कितने कमाने हैं और किसके लिए? 🙏

वन बेडरूम फ्लैट

मेरे पिताजी का सपना था कि मैं इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर अमेरिका की मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करूं। जब मैं अमेरिका आया, तो ये सपना लगभग पूरा हो गया।

अब मैं वहां पहुंच चुका था जहां मुझे होना चाहिए था। मैंने तय किया कि मैं यहां पांच साल रहकर ढेर सारा पैसा कमाऊंगा ताकि भारत लौटकर पुणे जैसे शहर में बस सकूं।

मेरे पिताजी सरकारी नौकरी में थे। उनकी पूरी कमाई एक बेडरूम के फ्लैट और थोड़ी सी पेंशन तक सीमित थी। लेकिन मुझे उनसे ज्यादा कमाना था। घर और मम्मी-पापा की बहुत याद आती थी। अकेलापन महसूस होता। सस्ते फोन कार्ड का इस्तेमाल करके मैं हफ्ते में 2-3 बार उनसे बात करता था। दिन हवा की तरह उड़ रहे थे। दो साल पिज्जा और बर्गर खाते हुए निकल गए। और दो साल डॉलर और रुपये के एक्सचेंज रेट पर नजर रखते हुए। रुपये की गिरावट होती तो खुशी होती।

शादी के लिए कई रिश्ते आ रहे थे। आखिरकार मैंने शादी का फैसला किया। पेरेंट्स को बताया कि मुझे सिर्फ 10 दिन की छुट्टी मिलेगी और इन्हीं 10 दिनों में सबकुछ होना चाहिए। सस्ती टिकट देखकर मैंने छुट्टी ली। मैं खुश था कि पेरेंट्स से मिलूंगा। रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए गिफ्ट्स लेने की भी प्लानिंग थी, लेकिन वो भी छूट गए।

घर पहुंचकर आए हुए सभी रिश्तों की तस्वीरें देखीं और समय की कमी की वजह से एक लड़की को चुना। लड़की के पिताजी समझदार थे, और दो दिन में मेरी शादी हो गई। बहुत से दोस्तों के आने की उम्मीद थी, लेकिन सिर्फ गिने-चुने लोग शादी में आए। शादी के बाद पापा को कुछ पैसे दिए। पापा बोले, “हमें तेरे पैसे नहीं चाहिए बेटा, पर तू अक्सर मिलने आता रहना।” यह कहते हुए उनकी आवाज भारी हो गई। पापा अब बूढ़े हो चुके थे, चेहरे पर झुर्रियां और सफेद भौहें ये सब बता रही थीं। पड़ोसियों से उनकी देखभाल करने की विनती की और हम अमेरिका लौट आए।

पहले दो साल पत्नी को ये देश बहुत पसंद आया। अलग-अलग स्टेट्स और नेशनल पार्क घूमकर वो खुश थी। बचत कम हो रही थी, लेकिन उसका मूड अच्छा था। धीरे-धीरे उसे अकेलापन महसूस होने लगा। हफ्ते में दो-तीन बार वो भारत कॉल करने लगी। दो साल बाद हमारे बच्चे हुए। एक बेटा और एक बेटी। जब भी मैं पेरेंट्स को कॉल करता, वे पोते-पोतियों को देखने की विनती करते।

हर साल तय करता कि फैमिली के साथ भारत जाऊंगा, लेकिन पैसों की वजह से प्लान कैंसिल करना पड़ता। साल-दर-साल गुजरते गए। भारत आने का सपना अधूरा रह गया। एक दिन अचानक ऑफिस में भारत से कॉल आया, “मोहन बाबा सुबह चल बसे।” बहुत कोशिश की, लेकिन छुट्टी नहीं मिली। न अंतिम संस्कार में शामिल हो सका, न बाद के रस्मों में। मन बेचैन था। दस दिन बाद फिर कॉल आया, “मां भी गुजर गई।” पड़ोसियों ने अंतिम संस्कार किए। बिना नाती-पोतों का चेहरा देखे मम्मी-पापा दुनिया छोड़ गए।

मम्मी-पापा के जाने के दो साल बाद भी एक खालीपन महसूस होता। उनकी आखिरी इच्छा अधूरी रह गई। बच्चों के विरोध के बावजूद मैंने भारत लौटने का फैसला किया। पत्नी खुश थी। रहने के लिए घर ढूंढ रहा था, लेकिन पैसे कम पड़ने लगे। नया घर नहीं ले पाया। फिर अमेरिका वापस आना पड़ा। बच्चों ने भारत में रहने से मना कर दिया, तो उन्हें भी वापस लाना पड़ा।

बच्चे बड़े हुए। बेटी ने एक अमेरिकी लड़के से शादी कर ली। बेटा भी अमेरिका में ही खुश है। मैंने तय कर लिया था कि अब बहुत हो गया। सब समेटकर भारत लौट आया। एक अच्छी सोसाइटी में ‘दो बेडरूम फ्लैट’ खरीदने लायक पैसे बचे थे। फ्लैट खरीद लिया।

अब मैं 60 साल का हूं। इस ‘दो बेडरूम फ्लैट’ में अकेला रहता हूं। जिसके साथ जिंदगी बिताने का सोचा था, उसने भी यहीं दम तोड़ दिया।

कभी-कभी सोचता हूं कि ये सब किसके लिए किया? और इसकी कीमत क्या चुकाई?

मेरे पिताजी भी भारत में रहते हुए एक फ्लैट के मालिक थे। मेरे पास उनसे ज्यादा कुछ नहीं है, सिर्फ एक बेडरूम ज्यादा। और उसी एक बेडरूम के लिए मैंने अपने माता-पिता खो दिए, बच्चों को दूर कर दिया, और पत्नी को भी खो दिया।

खिड़की से बाहर झांकते हुए बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं। वो खूबसूरत पल मन में घूमने लगते हैं।
कभी-कभी अमेरिका से बच्चों का फोन आता है, तबियत पूछते हैं। उनकी यादों में हूं, यही संतोष है।

शायद मेरी मौत पर पड़ोसी ही अंतिम संस्कार करेंगे। भगवान उनका भला करे।

फिर भी वही सवाल बना रहता है: ये सब क्यों और किस कीमत पर?

मैं अभी भी जवाब ढूंढ रहा हूं।
सिर्फ एक बेडरूम के लिए?

जिंदगी की कीमत इससे कई गुना ज्यादा है। इसके लिए अपनी जिंदगी दांव पर मत लगाइए। 🙏🏻🙏🏻

दोस्त बनाइए, दोस्तों का साथ निभाइए और उनके संपर्क में रहिए। 🙏
शब्दांकन: अनामिक (लेखक बताएं)
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IRDAI further strengthens the Regulatory framework!
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Almost 500 Bankers were on Job on Sunday!🤦🏻‍♂️
Top Ranker was SBI 275!
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Forwarded from Target RBI Grade B 2025
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Target RBI Grade B 2025
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To understand this, one first has to join bank job and then prepare for Regulatory / Supervisory / AIFI Jobs.
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