❇️RSSB परीक्षार्थियों के लिए ड्रेस कोड जारी : जींस पहन भर्ती परीक्षा मे हो सकेंगे शामिल, जनेऊ भी नहीं उतरवाएंगे , 02 नवंबर को आयोजित होगी ग्राम विकास अधिकारी (VDO) भर्ती परीक्षा
🔥1
❇️इलाहाबाद हाईकोर्ट में 274 नए पदों का सृजन
✅ सहायक समीक्षा अधिकारी: 60 पद
✅ समीक्षा अधिकारी: 149 पद
✅ अनुभाग अधिकारी: 40 पद
✅ सहायक निबंधक: 14 पद
✅ उप निबंधक: 7 पद
✅ संयुक्त निबंधक: 3 पद
✅ निबंधक: 1 पद
✅ सहायक समीक्षा अधिकारी: 60 पद
✅ समीक्षा अधिकारी: 149 पद
✅ अनुभाग अधिकारी: 40 पद
✅ सहायक निबंधक: 14 पद
✅ उप निबंधक: 7 पद
✅ संयुक्त निबंधक: 3 पद
✅ निबंधक: 1 पद
👌1
❇️IBPS Clerk Vacancies 2025 Update:
➡️जुलाई 2025 की अधिसूचना में घोषित 10,277 पदों को बढ़ाकर अब 13,533 पद कर दिया गया है —
➡️जुलाई 2025 की अधिसूचना में घोषित 10,277 पदों को बढ़ाकर अब 13,533 पद कर दिया गया है —
यानी 3,200 से अधिक नई रिक्तियाँ जोड़ी गई हैं।
*दिल्ली में 1 नवंबर से गैर-BS-VI वाहनों की एंट्री बंद:* BS-IV को 31 अक्टूबर 2026 तक अस्थायी राहत, CAQM के आदेश जारी
अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में सीधी भर्ती के दिनांक 31 मार्च, 2026 तक की सम्भावित रिक्तियों को सम्मिलित करते हुए रिक्त पद जिनका अधियाचन चयन आयोग को प्रेषित किया जाना है, की सूचना उपलब्ध कराये जाने के संबंध में नोटिस💯✅
❇️RO/ARO मेंस की एग्जाम डेट जल्द जारी हो जायेगा...मेंस 🔜 फरवरी प्रथम सप्ताह में संभावित हैं❗
❇️उत्तरप्रदेश 2021 शिक्षक भर्ती कार्यक्रम✍️
■ ऑनलाइन आवेदन-15 November से 05 दिसंबर तक✅
■ विस्तृत विज्ञापन-03 दिसंबर को🔥
👉 नियुक्ति/काउन्सलिंग कार्यक्रम🤗
■ ऑनलाइन आवेदन-15 November से 05 दिसंबर तक✅
■ विस्तृत विज्ञापन-03 दिसंबर को🔥
👉 नियुक्ति/काउन्सलिंग कार्यक्रम🤗
■ विस्तृत विज्ञापन-03 दिसंबर को जारी होगी
यह भर्ती 2021 वाली हैं जिसमे नियुक्ति/काउन्सलिंग कार्यक्रम के किये आवेदन लिये जा रहें
▫️नये छात्रों का कोई लेना देना नहीं हैं
हम सभी बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना बन रहे हैं 🙈
देवउठनी एकादशी 1 नवंबर को, लेकिन शादियां 21 से शुरू होंगी; इस साल अब सिर्फ 11 दिन विवाह मुहूर्त, 2026 में 81
UPSSSC PET परिणाम
रिजल्ट: प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) का परिणाम नवंबर के पहले सप्ताह में आ सकता है। 📅
वैधता: PET का अंक अब तीन साल तक मान्य रहेगा। ⏳
रिजल्ट: प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) का परिणाम नवंबर के पहले सप्ताह में आ सकता है। 📅
वैधता: PET का अंक अब तीन साल तक मान्य रहेगा। ⏳
इंद्र देव के इन्हीं हरकतों से देवता असुर सब मिलकर उनकी फील्डिंग सेट कर देते थे, हरकत ही ऐसा था।
एक तो छठ पूजा में बारिश और एक अभी भी बारिश...।
एक तो छठ पूजा में बारिश और एक अभी भी बारिश...।
शिक्षक अपनी नौकरी छोड़ रहे हैं : एक कड़वी सच्चाई
“शिक्षक जा रहा है” — यह लेख एनसीईआरटी के पूर्व निदेशक कृष्ण कुमार द्वारा लिखा गया है, जो द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित हुआ था। इस लेख का सारांश इस प्रकार है —
आज देशभर के स्कूलों में एक शांत लेकिन गहराई तक परेशान करने वाला बदलाव हो रहा है —
👉वह है शिक्षकों के मन में बढ़ती थकान, बेबसी और मोहभंग।
👉शिक्षक अपनी नौकरियां छोड़ रहे हैं — कुछ चुपचाप, और कुछ भीतर ही भीतर टूटकर।
👉वहीं, नई पीढ़ी अब शिक्षक बनना ही नहीं चाहती।
ऐसा क्यों हो रहा है?
🔹 1. शिक्षकों के चारों ओर फैला नौकरशाही का जाल :
📍 पढ़ाने के बजाय शिक्षक अब रिपोर्ट भरने, फॉर्म भरने और डाटा अपलोड करने में उलझे रहते हैं।
📍 “फोटो भेजो”, “प्रमाण दो”, “रिपोर्ट अपलोड करो” — यही उनका रोज़मर्रा का काम बन गया है।
📍 अब कक्षा में उनकी उपस्थिति घट रही है, जबकि स्क्रीन के सामने बिताया समय बढ़ रहा है।
🔹 2. तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता :
📍 हर विषय में डिजिटल टूल, ऐप्स और स्मार्ट बोर्ड थोपे जा रहे हैं।
📍 विषय, बच्चे की उम्र या संदर्भ को बिना समझे आदेश दिए जाते हैं — “तकनीक का उपयोग करो।”
📍 शिक्षण से मानवीय स्पर्श गायब हो गया है; शिक्षा अब मशीन-केंद्रित बन गई है।
🔹 3. शिक्षक बन गए हैं ‘इवेंट मैनेजर’ :
📍 हर दिन कोई न कोई दिवस मनाना होता है — योग दिवस, मातृभाषा दिवस, पर्यावरण दिवस आदि।
📍 अब शैक्षणिक गुणवत्ता नहीं, बल्कि कार्यक्रमों की संख्या और दिखावा सफलता का पैमाना बन गया है।
📍 प्रधानाचार्य और शिक्षक दोनों इस प्रदर्शन संस्कृति के जाल में फंसे हुए हैं।
🔹 4. ग्रामीण शिक्षकों की दयनीय स्थिति :
📍 दो-तीन शिक्षक सैकड़ों छात्रों को पढ़ाने के लिए मजबूर हैं।
📍 पढ़ाने के साथ-साथ उन्हें मिड-डे मील, छात्रवृत्ति, यूनिफॉर्म, साइकिल, सरकारी रिपोर्ट्स सब संभालनी पड़ती हैं।
📍 अब वास्तविक शिक्षा से अधिक महत्व “डाटा भेजने” को दिया जा रहा है।
*🔹 5. मानसिक तनाव और आत्म-सम्मान की हानि :
📍 लगातार ऊपर से निगरानी ने शिक्षकों का आत्मविश्वास तोड़ दिया है।
📍 हर काम का सबूत मांगा जाता है — विश्वास समाप्त हो गया है।
📍 छात्रों के तनाव और व्यवहारिक समस्याओं से जूझते-जूझते शिक्षक भावनात्मक रूप से थक चुके हैं।
📍 माता-पिता की अवास्तविक अपेक्षाएं और हर चीज़ का प्रमाण देने का दबाव।
🔹 6. शिक्षा का असली उद्देश्य खो गया है :
📍 शिक्षकों पर सिलेबस पूरा करने का भारी दबाव है।
📍 विषयों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, चाहे उसकी जरूरत हो या नहीं।
📍 अब स्कूल “मानव निर्माण की जगह” नहीं रह गए हैं।
📍 आज की शिक्षा प्रणाली प्रदर्शन दिखाने की परियोजना बनकर रह गई है।
📍 शिक्षक-छात्र का भावनात्मक रिश्ता, जो शिक्षा का केंद्र था, अब डाटा और डेडलाइन के नीचे दब गया है।
📍 अब छात्र शिक्षक को सेवा प्रदाता समझने लगे हैं — सम्मान खो गया है।
🔹 अब विचार करने का समय है...
👉शिक्षा का असली केंद्र फिर से बच्चे और शिक्षक होने चाहिए, ना कि डाटा और रिपोर्ट।
👉यदि शिक्षकों को स्वतंत्रता, सम्मान और विश्वास नहीं दिया गया,तो कल की शिक्षा निर्जीव हो जाएगी।
📚 हमें एक बार फिर शिक्षकों पर विश्वास करना होगा — क्योंकि अगर शिक्षक चला गया,तो स्कूल तो खड़ा रहेगा,पर शिक्षा नहीं बचेगी।।
“शिक्षक जा रहा है” — यह लेख एनसीईआरटी के पूर्व निदेशक कृष्ण कुमार द्वारा लिखा गया है, जो द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित हुआ था। इस लेख का सारांश इस प्रकार है —
आज देशभर के स्कूलों में एक शांत लेकिन गहराई तक परेशान करने वाला बदलाव हो रहा है —
👉वह है शिक्षकों के मन में बढ़ती थकान, बेबसी और मोहभंग।
👉शिक्षक अपनी नौकरियां छोड़ रहे हैं — कुछ चुपचाप, और कुछ भीतर ही भीतर टूटकर।
👉वहीं, नई पीढ़ी अब शिक्षक बनना ही नहीं चाहती।
ऐसा क्यों हो रहा है?
🔹 1. शिक्षकों के चारों ओर फैला नौकरशाही का जाल :
📍 पढ़ाने के बजाय शिक्षक अब रिपोर्ट भरने, फॉर्म भरने और डाटा अपलोड करने में उलझे रहते हैं।
📍 “फोटो भेजो”, “प्रमाण दो”, “रिपोर्ट अपलोड करो” — यही उनका रोज़मर्रा का काम बन गया है।
📍 अब कक्षा में उनकी उपस्थिति घट रही है, जबकि स्क्रीन के सामने बिताया समय बढ़ रहा है।
🔹 2. तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता :
📍 हर विषय में डिजिटल टूल, ऐप्स और स्मार्ट बोर्ड थोपे जा रहे हैं।
📍 विषय, बच्चे की उम्र या संदर्भ को बिना समझे आदेश दिए जाते हैं — “तकनीक का उपयोग करो।”
📍 शिक्षण से मानवीय स्पर्श गायब हो गया है; शिक्षा अब मशीन-केंद्रित बन गई है।
🔹 3. शिक्षक बन गए हैं ‘इवेंट मैनेजर’ :
📍 हर दिन कोई न कोई दिवस मनाना होता है — योग दिवस, मातृभाषा दिवस, पर्यावरण दिवस आदि।
📍 अब शैक्षणिक गुणवत्ता नहीं, बल्कि कार्यक्रमों की संख्या और दिखावा सफलता का पैमाना बन गया है।
📍 प्रधानाचार्य और शिक्षक दोनों इस प्रदर्शन संस्कृति के जाल में फंसे हुए हैं।
🔹 4. ग्रामीण शिक्षकों की दयनीय स्थिति :
📍 दो-तीन शिक्षक सैकड़ों छात्रों को पढ़ाने के लिए मजबूर हैं।
📍 पढ़ाने के साथ-साथ उन्हें मिड-डे मील, छात्रवृत्ति, यूनिफॉर्म, साइकिल, सरकारी रिपोर्ट्स सब संभालनी पड़ती हैं।
📍 अब वास्तविक शिक्षा से अधिक महत्व “डाटा भेजने” को दिया जा रहा है।
*🔹 5. मानसिक तनाव और आत्म-सम्मान की हानि :
📍 लगातार ऊपर से निगरानी ने शिक्षकों का आत्मविश्वास तोड़ दिया है।
📍 हर काम का सबूत मांगा जाता है — विश्वास समाप्त हो गया है।
📍 छात्रों के तनाव और व्यवहारिक समस्याओं से जूझते-जूझते शिक्षक भावनात्मक रूप से थक चुके हैं।
📍 माता-पिता की अवास्तविक अपेक्षाएं और हर चीज़ का प्रमाण देने का दबाव।
🔹 6. शिक्षा का असली उद्देश्य खो गया है :
📍 शिक्षकों पर सिलेबस पूरा करने का भारी दबाव है।
📍 विषयों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, चाहे उसकी जरूरत हो या नहीं।
📍 अब स्कूल “मानव निर्माण की जगह” नहीं रह गए हैं।
📍 आज की शिक्षा प्रणाली प्रदर्शन दिखाने की परियोजना बनकर रह गई है।
📍 शिक्षक-छात्र का भावनात्मक रिश्ता, जो शिक्षा का केंद्र था, अब डाटा और डेडलाइन के नीचे दब गया है।
📍 अब छात्र शिक्षक को सेवा प्रदाता समझने लगे हैं — सम्मान खो गया है।
🔹 अब विचार करने का समय है...
👉शिक्षा का असली केंद्र फिर से बच्चे और शिक्षक होने चाहिए, ना कि डाटा और रिपोर्ट।
👉यदि शिक्षकों को स्वतंत्रता, सम्मान और विश्वास नहीं दिया गया,तो कल की शिक्षा निर्जीव हो जाएगी।
📚 हमें एक बार फिर शिक्षकों पर विश्वास करना होगा — क्योंकि अगर शिक्षक चला गया,तो स्कूल तो खड़ा रहेगा,पर शिक्षा नहीं बचेगी।।
❤3👍3
❇️Famous Awards Established Years
✅️Famous Awards Established Years
✅️1901 = नोबेल पुरस्कार
✅️1917 = पुलित्जर पुरस्कार
✅️1929 = ऑस्कर अवार्ड
✅️1952 = कलिंग पुरस्कार
✅️1954 = भारत रत्न
✅️1954 = राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
✅️1954 = साहित्य अकादमी पुरस्कार
✅️1957 = रेमन मैग्सेसे पुरस्कार
✅️1958 = शांति स्वरूप भटनागर
✅️1961 = ज्ञानपीठ पुरस्कार
✅️1961 = अर्जुन पुरस्कार
✅️1969 = मैन बुकर पुरस्कार
✅️1969 = दादा साहब फाल्के पुरस्कार
✅️1985 = द्रोणाचार्य पुरस्कार
✅️1991 = सरस्वती सम्मान
✅️1992 = व्यास सम्मान
✅️1992 = राजीव गांधी खेल रत्न
✅️1995 = गांधी शांति पुरस्कार
✅️Famous Awards Established Years
✅️1901 = नोबेल पुरस्कार
✅️1917 = पुलित्जर पुरस्कार
✅️1929 = ऑस्कर अवार्ड
✅️1952 = कलिंग पुरस्कार
✅️1954 = भारत रत्न
✅️1954 = राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
✅️1954 = साहित्य अकादमी पुरस्कार
✅️1957 = रेमन मैग्सेसे पुरस्कार
✅️1958 = शांति स्वरूप भटनागर
✅️1961 = ज्ञानपीठ पुरस्कार
✅️1961 = अर्जुन पुरस्कार
✅️1969 = मैन बुकर पुरस्कार
✅️1969 = दादा साहब फाल्के पुरस्कार
✅️1985 = द्रोणाचार्य पुरस्कार
✅️1991 = सरस्वती सम्मान
✅️1992 = व्यास सम्मान
✅️1992 = राजीव गांधी खेल रत्न
✅️1995 = गांधी शांति पुरस्कार
❤2
*❇️Railway group D, Exam आप सबके बीच पहले भी बता या था 17 November से paper नही हो पायेगा, तो clear* है अब 17 November से नही हो पायेगा Railway Board नई date जारी करेगा # Group D
👍2