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वर्ग 3 दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। DV बहुत शीघ्र शुरू हो गया है। बहुत सारे चयनित अभ्यर्थियों को पता ही नहीं है कि DV प्रक्रिया शुरू हो गई है।
इसीलिए आपके जो साथी शिक्षक चयनित हुए है, उन्हें भी सूचना दीजिये।
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वर्ग_3_पात्र_अभ्यर्थियों_की_सूची_Eligible_Applicants_PST2025_General.pdf
1.8 MB
प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025-26 पात्र अभ्यर्थियों की सूची
वर्ग_3_विशेष_शिक्षक_पात्र_अभ्यर्थियों_की_सूची_Eligible_Applicants.pdf
402 KB
प्राथमिक शिक्षक (विशेष शिक्षक) नियोजन वर्ष 2025-26 पात्र अभ्यर्थियों की सूची
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MPTET 2020 Result
https://esb.mp.gov.in/results/RESULT_21/PSTET_RES21/default_results.htm
MPTET 2024 Result
https://esb.mp.gov.in/results/RESULT_24/PSTET_RES24/default_Results.htm
MPTET Admit Card ( For TAC Number )
https://esb.mp.gov.in/tacs/tac_2025/PSTST_TAC25/default_tac.htm
MP Verg 3 Mains Revised Result
https://esb.mp.gov.in/results/RESULT_25/PSTST_RES25/default_Results.htm
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MPTET 2024 Result
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले (2025 INSC 448) का मुख्य सारांश
मामले का मुख्य सारा
1. पृष्ठभूमि (Background):
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act), 2009 के तहत शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता होना अनिवार्य है।
वर्ष 2017 में केंद्र सरकार (MHRD) ने एक अधिसूचना जारी की, जिसके तहत स्कूलों में कार्यरत अप्रशिक्षित (untrained) प्राथमिक शिक्षकों को 31 मार्च 2019 तक आवश्यक प्रशिक्षण प्राप्त करने का अंतिम मौका दिया गया।
इसके लिए NCTE (राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद) ने नियमावली में छूट देते हुए NIOS के माध्यम से 18 महीने का D.El.Ed. (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) प्रोग्राम (ODL मोड से) आयोजित करने की मंजूरी दी।
2. विवाद (The Dispute):
प. बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड (WBBPE) ने 2022 में सहायक शिक्षकों की भर्ती निकाली।
कुछ उम्मीदवारों ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर की कि 18 महीने का NIOS D.El.Ed. कोर्स 2 साल के नियमित डिप्लोमा के बराबर नहीं है, इसलिए ऐसे उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया से बाहर रखा जाए।
कलकत्ता हाईकोर्ट के सिंगल जज और बाद में डिवीजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले (जयवीर सिंह मामला) का हवाला देते हुए NIOS से 18 महीने का डिप्लोमा करने वाले उम्मीदवारों पर भर्ती प्रक्रिया में पूरी तरह से प्रतिबंध (Blanket Ban) लगा दिया। इसके खिलाफ याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।
3. सुप्रीम कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां (Key Supreme Court Observations):
एकमुश्त छूट (One-Time Window): सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 18 महीने का NIOS D.El.Ed. प्रोग्राम उन शिक्षकों को नौकरी से बर्खास्तगी से बचाने के लिए दी गई एक विशेष छूट/अवसर था, जो 10 अगस्त 2017 को या उससे पहले सेवा (In-service) में कार्यरत थे।
पात्रता (Eligibility Criteria):
1. जो शिक्षक 10 अगस्त 2017 को सेवा में (In-service) थे, और
2. जिन्होंने 1 अप्रैल 2019 से पहले NIOS से 18 महीने का D.El.Ed. कोर्स सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है,
उन्हें 2 साल वाले D.El.Ed. डिप्लोमा धारकों के बराबर (at par) माना जाएगा।
ऐसे उम्मीदवार किसी अन्य संस्थान में नई नौकरी के लिए आवेदन करने और पदोन्नति (promotion) के भी हकदार हैं।
उच्च न्यायालय ने पूर्व फैसले की गलत व्याख्या करते हुए सभी NIOS डिप्लोमा धारकों पर पूरी तरह रोक लगाकर गलती की थी।
अदालत का अंतिम आदेश (Final Decision):
1. अपील स्वीकार की गई: कलकत्ता उच्च न्यायालय के सिंगल जज और डिवीजन बेंच दोनों के आदेशों को रद्द (quash) कर दिया गया।
2. वैधता की पुष्टि: जो शिक्षक 10 अगस्त 2017 को सेवा में थे और जिन्होंने 1 अप्रैल 2019 से पहले NIOS से 18 महीने का D.El.Ed. पास कर लिया है, उन्हें वैध डिप्लोमा धारक माना जाएगा।
3. भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार/प्राधिकरणों को निर्देश दिया कि पात्रता की जांच (verification) के बाद ऐसे सभी उम्मीदवारों के आवेदनों पर विचार किया जाए और योग्य पाए जाने पर तीन महीने के भीतर नियुक्ति दी जाए।
मामले का मुख्य सारा
1. पृष्ठभूमि (Background):
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act), 2009 के तहत शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता होना अनिवार्य है।
वर्ष 2017 में केंद्र सरकार (MHRD) ने एक अधिसूचना जारी की, जिसके तहत स्कूलों में कार्यरत अप्रशिक्षित (untrained) प्राथमिक शिक्षकों को 31 मार्च 2019 तक आवश्यक प्रशिक्षण प्राप्त करने का अंतिम मौका दिया गया।
इसके लिए NCTE (राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद) ने नियमावली में छूट देते हुए NIOS के माध्यम से 18 महीने का D.El.Ed. (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) प्रोग्राम (ODL मोड से) आयोजित करने की मंजूरी दी।
2. विवाद (The Dispute):
प. बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड (WBBPE) ने 2022 में सहायक शिक्षकों की भर्ती निकाली।
कुछ उम्मीदवारों ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर की कि 18 महीने का NIOS D.El.Ed. कोर्स 2 साल के नियमित डिप्लोमा के बराबर नहीं है, इसलिए ऐसे उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया से बाहर रखा जाए।
कलकत्ता हाईकोर्ट के सिंगल जज और बाद में डिवीजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले (जयवीर सिंह मामला) का हवाला देते हुए NIOS से 18 महीने का डिप्लोमा करने वाले उम्मीदवारों पर भर्ती प्रक्रिया में पूरी तरह से प्रतिबंध (Blanket Ban) लगा दिया। इसके खिलाफ याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।
3. सुप्रीम कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां (Key Supreme Court Observations):
एकमुश्त छूट (One-Time Window): सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 18 महीने का NIOS D.El.Ed. प्रोग्राम उन शिक्षकों को नौकरी से बर्खास्तगी से बचाने के लिए दी गई एक विशेष छूट/अवसर था, जो 10 अगस्त 2017 को या उससे पहले सेवा (In-service) में कार्यरत थे।
पात्रता (Eligibility Criteria):
1. जो शिक्षक 10 अगस्त 2017 को सेवा में (In-service) थे, और
2. जिन्होंने 1 अप्रैल 2019 से पहले NIOS से 18 महीने का D.El.Ed. कोर्स सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है,
उन्हें 2 साल वाले D.El.Ed. डिप्लोमा धारकों के बराबर (at par) माना जाएगा।
ऐसे उम्मीदवार किसी अन्य संस्थान में नई नौकरी के लिए आवेदन करने और पदोन्नति (promotion) के भी हकदार हैं।
उच्च न्यायालय ने पूर्व फैसले की गलत व्याख्या करते हुए सभी NIOS डिप्लोमा धारकों पर पूरी तरह रोक लगाकर गलती की थी।
अदालत का अंतिम आदेश (Final Decision):
1. अपील स्वीकार की गई: कलकत्ता उच्च न्यायालय के सिंगल जज और डिवीजन बेंच दोनों के आदेशों को रद्द (quash) कर दिया गया।
2. वैधता की पुष्टि: जो शिक्षक 10 अगस्त 2017 को सेवा में थे और जिन्होंने 1 अप्रैल 2019 से पहले NIOS से 18 महीने का D.El.Ed. पास कर लिया है, उन्हें वैध डिप्लोमा धारक माना जाएगा।
3. भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार/प्राधिकरणों को निर्देश दिया कि पात्रता की जांच (verification) के बाद ऐसे सभी उम्मीदवारों के आवेदनों पर विचार किया जाए और योग्य पाए जाने पर तीन महीने के भीतर नियुक्ति दी जाए।
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