राजस्थान_बजट_2026_27_सरल_भाषा_में_.pdf
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राजस्थान बजट 2026-27 ( सरल भाषा में ).pdf
Rajasthan Budget 2026 Important Questions Answers.pdf
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Rajasthan Budget 2026 Important Questions Answers.pdf
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Forwarded from Study With Sunil Saini Kotputli™
पैसे लेकर सेमिनार में आए toppers ऐसी ही दुःख भरी कहानी सुनाते हैं...
सहमत ❤️
असहमत 😢
सहमत ❤️
असहमत 😢
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Study RAS™
मर्डर कहूं या आत्महत्या ? (आज के न्यूजपेपर में )
शीर्षक: मर्डर या आत्महत्या? कोटा की एक और मासूम बलि
कोटा में नीट की तैयारी कर रही 18 वर्षीय छात्रा जूही पटेल ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। गुरुवार रात उसने जहर खाया, उल्टियाँ हुईं, मदद के लिए चिल्लाई, लेकिन अस्पताल में उसकी मौत हो गई। पुलिस ने अभी तक केस दर्ज नहीं किया है।
यह कोई इकलौती घटना नहीं है। यह उस व्यवस्था का नतीजा है, जो बच्चों की रुचि को नजरअंदाज कर उन पर अपने सपनों का बोझ लाद देती है।
क्यों बार-बार होती हैं ये घटनाएँ?
1. पेरेंट्स का दबाव: 10वीं में 90% से ज्यादा नंबर आते ही बच्चे की रुचि जाने बिना उसे डॉक्टर या इंजीनियर बनने के लिए मजबूर कर देना। बच्चे से कभी नहीं पूछा जाता कि वह क्या बनना चाहता है।(राजस्थान बोर्ड को RPSC की तरह सुधार करना चाहिए, बोर्ड परीक्षा में 98%..100% मार्क्स नहीं देने चाहिए)
2. गलत मूल्यांकन प्रणाली: राजस्थान बोर्ड हर बच्चे को टॉपर बना देता है। फुल मार्क्स मिलने से बच्चों में यह झूठा विश्वास बन जाता है कि उन्हें सब आता है, जबकि प्रतियोगी परीक्षाओं की वास्तविकता इससे कहीं कठिन होती है। बोर्ड को अपनी मार्किंग में सुधार करना चाहिए।
3. कठिन प्रतियोगिता: NEET, IIT-JEE जैसी परीक्षाओं में लाखों बच्चे आते हैं और सीटें सीमित हैं। यह संघर्ष बहुत कठिन है।
4. कोचिंग संस्थानों के झूठे वादे: "गारंटी सिलेक्शन" और लुभावने ऑफर देकर एडमिशन लेना और बाद में कह देना कि हमारा काम सिर्फ पढ़ाना था, बाकी तुम्हें खुद करना होगा। (बैच शुरू होने पर सलेक्शन की 100% गारंटी, खत्म होते होते 5% पर आ जाता है)
5. दोस्तों का मजाक: टेस्ट में नंबर न आने पर दोस्त ही कमियाँ निकालने और मजाक उड़ाने लगते हैं। कोई सुधार नहीं, सिर्फ ताने मिलते हैं, जिससे बच्चे का मन टूट जाता है।
6. मानसिक अवसाद और अकेलापन: असफलता पर बच्चा डिप्रेशन में चला जाता है। उसे लगता है कि माँ-बाप ने घर गिरवी रखकर पैसे दिए थे, और मैं कुछ नहीं कर सका। उसका दर्द समझने वाला कोई नहीं होता, हर तरफ ताने ही मिलते हैं। प्रशासन/हॉस्टल वालों ने पंखों में अलार्म लगा दिए हैं, लेकिन यह कोई स्थायी समाधान नहीं है।
7. नाजुक उम्र और समझ की कमी: 16 से 22 साल के ये बच्चे मानसिक रूप से इतने परिपक्व नहीं होते कि इतना बड़ा दबाव झेल सकें। वे सही-गलत नहीं समझ पाते और आत्महत्या को ही आखिरी रास्ता मान लेते हैं।
8. जीवन का असली उद्देश्य भूलना: माता-पिता, शिक्षक और प्रशासन को समझना होगा कि सिर्फ परीक्षा पास करना ही जीवन नहीं है। असफल होने पर भी जीवन में बहुत सारे अच्छे विकल्प मौजूद हैं। हमें बच्चों को यही सिखाना होगा।
यह सिर्फ एक आत्महत्या नहीं है,
यह हमारी महत्वाकांक्षाओं का क्रूर चेहरा है।
सहमत ❤️
कोटा में नीट की तैयारी कर रही 18 वर्षीय छात्रा जूही पटेल ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। गुरुवार रात उसने जहर खाया, उल्टियाँ हुईं, मदद के लिए चिल्लाई, लेकिन अस्पताल में उसकी मौत हो गई। पुलिस ने अभी तक केस दर्ज नहीं किया है।
यह कोई इकलौती घटना नहीं है। यह उस व्यवस्था का नतीजा है, जो बच्चों की रुचि को नजरअंदाज कर उन पर अपने सपनों का बोझ लाद देती है।
क्यों बार-बार होती हैं ये घटनाएँ?
1. पेरेंट्स का दबाव: 10वीं में 90% से ज्यादा नंबर आते ही बच्चे की रुचि जाने बिना उसे डॉक्टर या इंजीनियर बनने के लिए मजबूर कर देना। बच्चे से कभी नहीं पूछा जाता कि वह क्या बनना चाहता है।(राजस्थान बोर्ड को RPSC की तरह सुधार करना चाहिए, बोर्ड परीक्षा में 98%..100% मार्क्स नहीं देने चाहिए)
2. गलत मूल्यांकन प्रणाली: राजस्थान बोर्ड हर बच्चे को टॉपर बना देता है। फुल मार्क्स मिलने से बच्चों में यह झूठा विश्वास बन जाता है कि उन्हें सब आता है, जबकि प्रतियोगी परीक्षाओं की वास्तविकता इससे कहीं कठिन होती है। बोर्ड को अपनी मार्किंग में सुधार करना चाहिए।
3. कठिन प्रतियोगिता: NEET, IIT-JEE जैसी परीक्षाओं में लाखों बच्चे आते हैं और सीटें सीमित हैं। यह संघर्ष बहुत कठिन है।
4. कोचिंग संस्थानों के झूठे वादे: "गारंटी सिलेक्शन" और लुभावने ऑफर देकर एडमिशन लेना और बाद में कह देना कि हमारा काम सिर्फ पढ़ाना था, बाकी तुम्हें खुद करना होगा। (बैच शुरू होने पर सलेक्शन की 100% गारंटी, खत्म होते होते 5% पर आ जाता है)
5. दोस्तों का मजाक: टेस्ट में नंबर न आने पर दोस्त ही कमियाँ निकालने और मजाक उड़ाने लगते हैं। कोई सुधार नहीं, सिर्फ ताने मिलते हैं, जिससे बच्चे का मन टूट जाता है।
6. मानसिक अवसाद और अकेलापन: असफलता पर बच्चा डिप्रेशन में चला जाता है। उसे लगता है कि माँ-बाप ने घर गिरवी रखकर पैसे दिए थे, और मैं कुछ नहीं कर सका। उसका दर्द समझने वाला कोई नहीं होता, हर तरफ ताने ही मिलते हैं। प्रशासन/हॉस्टल वालों ने पंखों में अलार्म लगा दिए हैं, लेकिन यह कोई स्थायी समाधान नहीं है।
7. नाजुक उम्र और समझ की कमी: 16 से 22 साल के ये बच्चे मानसिक रूप से इतने परिपक्व नहीं होते कि इतना बड़ा दबाव झेल सकें। वे सही-गलत नहीं समझ पाते और आत्महत्या को ही आखिरी रास्ता मान लेते हैं।
8. जीवन का असली उद्देश्य भूलना: माता-पिता, शिक्षक और प्रशासन को समझना होगा कि सिर्फ परीक्षा पास करना ही जीवन नहीं है। असफल होने पर भी जीवन में बहुत सारे अच्छे विकल्प मौजूद हैं। हमें बच्चों को यही सिखाना होगा।
यह सिर्फ एक आत्महत्या नहीं है,
यह हमारी महत्वाकांक्षाओं का क्रूर चेहरा है।
सहमत ❤️
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लोकसभा अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया ❤️👆
• सर्वप्रथम ऐसा प्रस्ताव वर्ष 1954 में जीवी मावलंकर के खिलाफ लाया गया था।
• हालांकि ऐसी ड्रामेबाजी विपक्ष द्वारा सरदार हुकुम सिंह और बलराम जाखड़ के खिलाफ भी की जा चुकी है।
• लेकिन भारतीय लोकसभा के इतिहास में आज तक किसी भी स्पीकर के खिलाफ उसे हटाने का प्रस्ताव पारित नहीं हुआ है।
• सर्वप्रथम ऐसा प्रस्ताव वर्ष 1954 में जीवी मावलंकर के खिलाफ लाया गया था।
• हालांकि ऐसी ड्रामेबाजी विपक्ष द्वारा सरदार हुकुम सिंह और बलराम जाखड़ के खिलाफ भी की जा चुकी है।
• लेकिन भारतीय लोकसभा के इतिहास में आज तक किसी भी स्पीकर के खिलाफ उसे हटाने का प्रस्ताव पारित नहीं हुआ है।
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Forwarded from Study With Sunil Saini Kotputli™
SI की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए सलाह & सुझाव...❤️
जो भी साथी राजस्थान पुलिस SI की तैयारी कर रहे हैं वह पिछले पेपर पर आश्रित ने होकर 2025 में हुए RPSC व RSSB परीक्षा के पैटर्न को देखकर तैयारी करें क्योंकि 2021 से 2025 तक परीक्षा पैटर्न में बहुत ज्यादा बदलाव हो चुका है अब परीक्षा में आसान प्रश्न नहीं पूछे जाते हैं कथन कारक, निष्कर्ष या कूट वाले प्रश्न ज्यादा पूछे जाते हैं तो उनकी तैयारी करें।
पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र आपको 1..2% प्रतिशत ही फायदा होगा, सबसे ज्यादा फायदा आपको 2025 में हुए सभी पेपर हल करने व ज्यादा से ज्यादा टेस्ट सीरीज लगाने, MCQ हल करने से होगा।
(Si 2021 पेपर के प्रश्न आप ऊपर देख सकते हैं वर्तमान में ऐसे प्रश्न नहीं आते)
जो भी साथी राजस्थान पुलिस SI की तैयारी कर रहे हैं वह पिछले पेपर पर आश्रित ने होकर 2025 में हुए RPSC व RSSB परीक्षा के पैटर्न को देखकर तैयारी करें क्योंकि 2021 से 2025 तक परीक्षा पैटर्न में बहुत ज्यादा बदलाव हो चुका है अब परीक्षा में आसान प्रश्न नहीं पूछे जाते हैं कथन कारक, निष्कर्ष या कूट वाले प्रश्न ज्यादा पूछे जाते हैं तो उनकी तैयारी करें।
पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र आपको 1..2% प्रतिशत ही फायदा होगा, सबसे ज्यादा फायदा आपको 2025 में हुए सभी पेपर हल करने व ज्यादा से ज्यादा टेस्ट सीरीज लगाने, MCQ हल करने से होगा।
(Si 2021 पेपर के प्रश्न आप ऊपर देख सकते हैं वर्तमान में ऐसे प्रश्न नहीं आते)
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Forwarded from Study With Sunil Saini Kotputli™
राजस्थान_आर्थिक_समीक्षा_2025_26_1_1.pdf
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राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2025_26.pdf...❤️👆
बजट संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े
(इनको अच्छे से पढ़ लेना बजट में इससे बाहर किसी एग्जाम से कोई प्रश्न नहीं जाएगा, प्रिंट भी निकलवा सकते हो)
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प्रदेश का बाजरा, सरसों, तिलहन, जौ, ग्वार, ईसबगोल और जीरा में प्रथम स्थान....
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