Q. करौली से उद्गम होने वाली नदियों का सही युग्म है-
Anonymous Quiz
13%
A. कालीसिन्ध, बनास, बाणगंगा
48%
B. कालीसिल, पार्वती, गम्भीर
13%
C. जवाई, खारी, बाण्डी
26%
D. गम्भीरी, पार्वती, कालीसिल
❤34👍7⚡4🥰2💯2
Q. वह नदी जो केवल एक ही जिले में बहती है?
Anonymous Quiz
18%
A. जोजड़ी
19%
B. साबी
31%
C. कांतली
32%
D. काकनी
❤45👍11⚡10
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Q. इंदिरा गाँधी नहर परियोजना के बारे में निम्न में से असत्य कथन है?
Anonymous Quiz
12%
A. इसका पुराना नाम 'राजस्थान नहर' है।
46%
B. इसकी सभी शाखाएँ नहर के दांयी तरफ निकाली गई हैं।
29%
C. इसकी सभी लिफ्ट नहरें बांयी तरफ निकाली गई हैं।
14%
D. इस पर 7 लिफ्ट नहरें व 9 शाखाएँ हैं।
❤26👍6👨💻6👏5⚡3🤔2
Q. नहर परियोजनाओं में नहरों में पानी के प्रवाह के आकलन व नियंत्रण हेतु स्थापित इलेक्ट्रोनिक नियंत्रण प्रणाली है-
Anonymous Quiz
29%
A. कोरिओलिस वॉटर मीटर
25%
B. एस्केप रिजर्वायर्स
21%
C. रिवर्स ऑस्मोसिस
26%
D. स्काडा सिस्टम
❤21👏6💯5👍4🥰3
Q. राजस्थान की नहर पर पानी के प्रवाह के आंकलन व नियंत्रण हेतु स्काडा प्रणाली (सुपरवाईजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्जिविशन) स्थापित की गई है?
Anonymous Quiz
33%
A. राजीव गांधी सिद्धमुख परियोजना
16%
B. गुड़गाँव नहर
48%
C. इंदिरा गाँधी नहर
3%
D. भरतपुर नहर
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Forwarded from Study With Sunil Saini Kotputli™
खैरथल-तिजारा जिले का नया नाम — "भृतृहरिनगर"
📍 राजस्थान
💔 भृतृहरि की प्रेमगाथा:
भृतृहरि की दो पत्नियां थीं, लेकिन उन्होंने पिंगला से प्रेम किया।
पिंगला को कोतवाल से प्रेम था,
कोतवाल को एक वेश्या से प्रेम था...
और इस तरह प्रेम की ये श्रृंखला अधूरी रह गई।
🧘♂️ वैराग्य की राह:
जब भृतृहरि को इस सच्चाई का ज्ञान हुआ, उन्होंने सांसारिक मोह छोड़कर वैराग्य की राह पकड़ ली।
उनका जीवन आज भी एक संदेश है — “जिससे आप प्रेम करते हैं, वह हमेशा आपको नहीं मिल सकता, परंतु आत्मबोध और त्याग ही सच्चा पथ है।”
🎉 भृतृहरिनगर के सभी नागरिकों को ढेरों शुभकामनाएं।
यह नाम न सिर्फ ऐतिहासिक है, बल्कि आत्मबोध का प्रतीक भी।
📍 राजस्थान
💔 भृतृहरि की प्रेमगाथा:
भृतृहरि की दो पत्नियां थीं, लेकिन उन्होंने पिंगला से प्रेम किया।
पिंगला को कोतवाल से प्रेम था,
कोतवाल को एक वेश्या से प्रेम था...
और इस तरह प्रेम की ये श्रृंखला अधूरी रह गई।
🧘♂️ वैराग्य की राह:
जब भृतृहरि को इस सच्चाई का ज्ञान हुआ, उन्होंने सांसारिक मोह छोड़कर वैराग्य की राह पकड़ ली।
उनका जीवन आज भी एक संदेश है — “जिससे आप प्रेम करते हैं, वह हमेशा आपको नहीं मिल सकता, परंतु आत्मबोध और त्याग ही सच्चा पथ है।”
🎉 भृतृहरिनगर के सभी नागरिकों को ढेरों शुभकामनाएं।
यह नाम न सिर्फ ऐतिहासिक है, बल्कि आत्मबोध का प्रतीक भी।
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Forwarded from Study With Sunil Saini Kotputli™
भर्तृहरि पाठ्यक्रम में है, तो आपने शायद उनकी प्रसिद्ध वैराग्य, नीति, और श्रृंगार शतक के श्लोक जरूर पढ़े होंगे। लेकिन जो "अमरफल वाली कथा" है, वह भर्तृहरि के जीवन से जुड़ी एक प्रचलित लोककथा है – ऐतिहासिक प्रमाण से अधिक यह प्रतीकात्मक और शिक्षाप्रद कथा मानी जाती है।
🌿 भर्तृहरि और अमरफल की कथा (संक्षिप्त और प्रभावशाली रूप में):
राजा भर्तृहरि उज्जयिनी के राजा थे और शक्ति, वैभव और सुंदरता में अनुपम थे। वे अपनी रानी पिंगला से अत्यंत प्रेम करते थे।
कथा ऐसे है:
एक दिन एक ऋषि (या किसी-किसी संस्करण में एक साधु) ने राजा को एक अमरता प्रदान करने वाला फल (अमरफल) दिया और कहा:
राजा ने सोचा कि उनकी प्रिय रानी पिंगला इस फल की सबसे योग्य है। उन्होंने फल रानी को दे दिया।
लेकिन रानी पिंगला किसी कोतवाल (सैनिक प्रमुख) से प्रेम करती थी। उसने वह अमरफल उसे दे दिया।
कोतवाल भी एक वेश्या से प्रेम करता था, उसने फल उस वेश्या को दे दिया।
वेश्या ने सोचा कि यह फल तो राजा जैसे व्यक्ति को देना चाहिए, और वह अमरफल लेकर राजा के पास आ गई।
राजा ने जब यह देखा कि जो फल उन्होंने प्रेम में रानी को दिया था, वह घूमकर वापस उनके पास आ गया, तो उन्हें अपनी आंखें खुल गईं।
🧠 इस कथा से क्या सीख मिलती है?
मोह और माया का भ्रम: जिसे हम अमरता या प्रेम समझते हैं, वह दुनिया में कहीं और बहकता रहता है।
वैराग्य का जन्म: भर्तृहरि को इस घटना से संसार की असारता का बोध हुआ और उन्होंने सिंहासन त्याग दिया, फिर सन्यासी बन गए और शेष जीवन तपस्या व साधना में बिताया।
📝 निष्कर्ष:
यह कथा केवल मनोरंजन या चमत्कार की नहीं, बल्कि गहरी आध्यात्मिक सीख देती है — कि जीवन की सच्ची समझ तब आती है जब व्यक्ति असत्य मोह से बाहर निकलता है।
🌿 भर्तृहरि और अमरफल की कथा (संक्षिप्त और प्रभावशाली रूप में):
राजा भर्तृहरि उज्जयिनी के राजा थे और शक्ति, वैभव और सुंदरता में अनुपम थे। वे अपनी रानी पिंगला से अत्यंत प्रेम करते थे।
कथा ऐसे है:
एक दिन एक ऋषि (या किसी-किसी संस्करण में एक साधु) ने राजा को एक अमरता प्रदान करने वाला फल (अमरफल) दिया और कहा:
> "जो भी इस फल को खाएगा, वह हमेशा जवान और अमर रहेगा।"
राजा ने सोचा कि उनकी प्रिय रानी पिंगला इस फल की सबसे योग्य है। उन्होंने फल रानी को दे दिया।
लेकिन रानी पिंगला किसी कोतवाल (सैनिक प्रमुख) से प्रेम करती थी। उसने वह अमरफल उसे दे दिया।
कोतवाल भी एक वेश्या से प्रेम करता था, उसने फल उस वेश्या को दे दिया।
वेश्या ने सोचा कि यह फल तो राजा जैसे व्यक्ति को देना चाहिए, और वह अमरफल लेकर राजा के पास आ गई।
राजा ने जब यह देखा कि जो फल उन्होंने प्रेम में रानी को दिया था, वह घूमकर वापस उनके पास आ गया, तो उन्हें अपनी आंखें खुल गईं।
🧠 इस कथा से क्या सीख मिलती है?
मोह और माया का भ्रम: जिसे हम अमरता या प्रेम समझते हैं, वह दुनिया में कहीं और बहकता रहता है।
वैराग्य का जन्म: भर्तृहरि को इस घटना से संसार की असारता का बोध हुआ और उन्होंने सिंहासन त्याग दिया, फिर सन्यासी बन गए और शेष जीवन तपस्या व साधना में बिताया।
📝 निष्कर्ष:
यह कथा केवल मनोरंजन या चमत्कार की नहीं, बल्कि गहरी आध्यात्मिक सीख देती है — कि जीवन की सच्ची समझ तब आती है जब व्यक्ति असत्य मोह से बाहर निकलता है।
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