कथन 1 यमुना नदी यमुनोत्री हिमनद गढ़वाल जिला से निकलती है।
कथन 2 यमुना नदी, गंगा की सबसे लंबी और पश्चिमी सहायक नदी है।
कथन 3 यमुना नदी, गंगा से कानपुर में मिल जाती है।
कथन 2 यमुना नदी, गंगा की सबसे लंबी और पश्चिमी सहायक नदी है।
कथन 3 यमुना नदी, गंगा से कानपुर में मिल जाती है।
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4%
कथन 1,3 सही है
31%
केवल कथन 2 सही है
60%
कथन 1,2 सही है
5%
कथन 2,3 सही है
❤3
कथन 1 चीनाब, सिंधु की विशालतम सहायक नदी है।
कथन 2 चीनाब, पंजाब में चंद्रभागा कहलाती है।
कथन 3 चंद्र और भागा नामक दो नदिया मिलकर चिनाब कहलाती है।
कथन 2 चीनाब, पंजाब में चंद्रभागा कहलाती है।
कथन 3 चंद्र और भागा नामक दो नदिया मिलकर चिनाब कहलाती है।
Anonymous Quiz
8%
केवल कथन 1 सही है
25%
केवल कथन 1,2 सही है
45%
केवल कथन 1,3 सही है
22%
केवल कथन 2,3 सही है
👍3
IQAir की World Air Quality Report 2025
दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर: लोनी (उत्तर प्रदेश)
दुनिया का सबसे प्रदूषित देश:पाकिस्तान
❤5
उत्तराखंड के बाद UCC पारित करने वाला दूसरा राज्य गुजरात बना ।
विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव इन रिलेशनशिप के लिये राज्य मे एक कानून
विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव इन रिलेशनशिप के लिये राज्य मे एक कानून
❤1👍1
किस चार्टर एक्ट के तहत ईसाई मिशनरियों को भारत में धर्म प्रचार की अनुमति मिल गई थी
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3%
1792
65%
1813
26%
1833
6%
1853
👍1
विलियम विल्बरफ़ोर्स ने ब्रिटिश संसद में ईसाई धर्म प्रचारकों के लिए संघर्ष जीता था
विल्बरफ़ोर्स एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में संसद में आए थे और एक वक्ता के रूप में अपनी ख्याति अर्जित की थी
विल्बरफ़ोर्स एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में संसद में आए थे और एक वक्ता के रूप में अपनी ख्याति अर्जित की थी
👍1
किस चार्टर एक्ट में यह प्रावधान किया गया कि नागरिक सेवा में सारे प्रवेश प्रतियोगी परीक्षाओं के द्वारा किए जाएंगे
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19%
1833
52%
1853
19%
1858
10%
1861
👍1
New York Times की शानदार रिपोर्ट पूरा मामला आसानी से समझ आ जाता है
ईरान और अमेरिका-इजराइल युद्ध अब इतना बढ़ गया है कि होर्मुज स्ट्रेट बंद है. सैकड़ों तेल के टैंकर दोनों तरफ खड़े हैं. इससे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर चुकी हैं. इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ‘किसी भी तरह’ उसे फिर से खोलने की बात कर रहे हैं. लेकिन जानकार बताते हैं, ये काम आसान नहीं है. ईरान से कोई समझौता नहीं होता या अमेरिका कोई बड़ा मिलिट्री एक्शन नहीं लेता, तो स्ट्रेट बंद ही रहेगा.
होर्मुज स्ट्रेट बहुत संकरा और उथला है. भौगोलिक स्थिति ने ईरान की पकड़ को मज़बूती दी है. वहां जहाजों को ईरान के पहाड़ी तट के बहुत करीब से गुजरना पड़ता है. यही वजह है कि ईरान इस इलाके का फायदा उठाकर हमले करता है.
ईरान के पास छोटे हथियार हैं, जिनको पहाड़ों, गुफाओं और सुरंगों में छिपाया जाता है. जरूरत पड़ने पर इन्हें तट के पास से ही लॉन्च किया जा सकता है. हमला इतने कम समय में होता है कि जवाब देने का टाइम ही नहीं मिलता.
ट्रम्प का नौसेना के जहाजों का टैंकरों को एस्कॉर्ट करने, विमान से निगरानी और तट पर मौजूद मिसाइलों के हमलों का प्लान जटिल है. इसमें काफी संसाधन लगेगा और ये जोखिम भरा होगा.
जानकार बताते हैं: वहां वॉरशिप खुद भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं होंगे. संकरे इलाके में जहाजों को चारों तरफ से खतरा होगा. ड्रोन और मिसाइल से बचाव मुश्किल होगा.
सबसे बड़ा खतरा समुद्र में बिछाई गई माइंस से है. थोड़ा भी ख़तरे का डर हो, तो कोई भी देश अपने बड़े जहाज वहां नहीं भेजेगा. उनको हटाने में वक़्त लगेगा, जो टीमें माइंस हटाती हैं, उन्हें भी सुरक्षा की जरूरत होती है.
अमेरिकी मरीन सैनिक इस इलाके की तरफ भेजे जा रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि उन्हें स्ट्रेट के आसपास के छोटे-छोटे द्वीपों पर तैनात किया जा सकता है, जहां से वे हमले रोकने या एयर डिफेंस सिस्टम लगाने का काम कर सकते हैं। लेकिन ईरान की बड़ी आर्मी को देखते वहां घुसना बहुत जोखिम भरा mission होगा. ट्रम्प इसके लिए तैयार नहीं होंगे.
जानकार एकमत हैं कि स्थायी समाधान सैन्य कार्रवाई से नहीं, बल्कि आपसी बातचीत और राजनीतिक समझौते से ही निकलेगा
क्या होंगी हॉर्मूज़ स्ट्रेट खुलवाने में मुश्किल
ईरान और अमेरिका-इजराइल युद्ध अब इतना बढ़ गया है कि होर्मुज स्ट्रेट बंद है. सैकड़ों तेल के टैंकर दोनों तरफ खड़े हैं. इससे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर चुकी हैं. इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ‘किसी भी तरह’ उसे फिर से खोलने की बात कर रहे हैं. लेकिन जानकार बताते हैं, ये काम आसान नहीं है. ईरान से कोई समझौता नहीं होता या अमेरिका कोई बड़ा मिलिट्री एक्शन नहीं लेता, तो स्ट्रेट बंद ही रहेगा.
होर्मुज स्ट्रेट बहुत संकरा और उथला है. भौगोलिक स्थिति ने ईरान की पकड़ को मज़बूती दी है. वहां जहाजों को ईरान के पहाड़ी तट के बहुत करीब से गुजरना पड़ता है. यही वजह है कि ईरान इस इलाके का फायदा उठाकर हमले करता है.
ईरान के पास छोटे हथियार हैं, जिनको पहाड़ों, गुफाओं और सुरंगों में छिपाया जाता है. जरूरत पड़ने पर इन्हें तट के पास से ही लॉन्च किया जा सकता है. हमला इतने कम समय में होता है कि जवाब देने का टाइम ही नहीं मिलता.
ट्रम्प का नौसेना के जहाजों का टैंकरों को एस्कॉर्ट करने, विमान से निगरानी और तट पर मौजूद मिसाइलों के हमलों का प्लान जटिल है. इसमें काफी संसाधन लगेगा और ये जोखिम भरा होगा.
जानकार बताते हैं: वहां वॉरशिप खुद भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं होंगे. संकरे इलाके में जहाजों को चारों तरफ से खतरा होगा. ड्रोन और मिसाइल से बचाव मुश्किल होगा.
सबसे बड़ा खतरा समुद्र में बिछाई गई माइंस से है. थोड़ा भी ख़तरे का डर हो, तो कोई भी देश अपने बड़े जहाज वहां नहीं भेजेगा. उनको हटाने में वक़्त लगेगा, जो टीमें माइंस हटाती हैं, उन्हें भी सुरक्षा की जरूरत होती है.
अमेरिकी मरीन सैनिक इस इलाके की तरफ भेजे जा रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि उन्हें स्ट्रेट के आसपास के छोटे-छोटे द्वीपों पर तैनात किया जा सकता है, जहां से वे हमले रोकने या एयर डिफेंस सिस्टम लगाने का काम कर सकते हैं। लेकिन ईरान की बड़ी आर्मी को देखते वहां घुसना बहुत जोखिम भरा mission होगा. ट्रम्प इसके लिए तैयार नहीं होंगे.
जानकार एकमत हैं कि स्थायी समाधान सैन्य कार्रवाई से नहीं, बल्कि आपसी बातचीत और राजनीतिक समझौते से ही निकलेगा
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