*अपमान*
बंगाल काफी चर्चे में हैं। उसका कारण क्या है वो हम सब जानते हैं। आज बंगाल को कैसे जाना जा रहा है वो अलग बात है परंतु कई वर्षों पहले बंगाल को Swami Vivekananda जी के नाम से जाना जाता था। 😊 एक दिन किसी चर्चा में स्वामी जी शामिल थे। एक व्यक्ति ने उनकी टिप्पणी का जवाब देते समय बहुत बुरा भला कहा। 😠 स्वामी जी ने क्रोधित न होकर उस व्यक्ति से सवाल पूछा - "अगर कोई आपको उपहार देता है और आप उसको स्वीकार नहीं करते हैं तो वो उपहार कौन रखता है?" 🎁 व्यक्ति ने तुरंत पलटकर जवाब दिया - "जो उपहार दे रहा था, वही रखेगा।" स्वामी जी ने फिर कहा - ऐसे ही जब आप किसी का अपमान करते हैं तब भी यही होता है। वो व्यक्ति अपमान स्वीकार न करे तो उन शब्दों का बुरा प्रभाव आप तक ही सीमित रहता है। ✨
अपमान आखिर हम करते क्यों है? 🤔 लोग आजकल इसको फनी होना मान लेते हैं। सोशल मीडिया में रील्स, विडिओ, कमेंट्स को पढ़कर ऐसा लगता है कि मनुष्य अपने हंसने के लिए दूसरों को कुछ भी बोल सकता है। 📱😂 जो लोग ऐसा करते हैं, वो समझते हैं कि ऐसा करना बहुत बुद्धिमानी का कार्य है। पर ये सब एक भ्रम है। ⚠️ अपमान करने का सबसे महत्वपूर्ण कारण है - खुद को दूसरे से बड़ा समझना। 👑 विद्यार्थी जीवन में ऐसा कई बार होता है कि हमारे किसी टेस्ट में मार्क्स अच्छे आ गए तब कुछ विद्यार्थी उस मार्क्स को लेकर जिसके कम आते हैं, उसका मजाक बनाने की कोशिश करते हैं। 📝 या कई बार आम जीवन में हम किसी की खूबसूरती पर टिप्पणी करते हैं, किसी के मोटापे पर, किसी के गरीबी पर, किसी की शारीरिक कमजोरियों पर और सब ये भूल जाते हैं कि ये सब टिप्पणियाँ, ये सब मजाक लौटकर एक दिन वापस आता है और फिर बाद में हम सोचते रह जाते हैं कि हमारे साथ ऐसा क्यों हो रहा है। 🔄 इसलिए, मेरा सभी ईमानदार विद्यार्थियों से विनम्र निवेदन है कि अपनी सीमित शक्तियों को किसी को नीचा, किसी को दबाने के लिए इस्तेमाल ना करे। 🙏 उन शक्तियों का इस्तेमाल करें - अपने ज्ञान की वृद्धि के लिए। 📚 ज्ञान ही वही चाभी है जो आपके लिए खुशियों के अनेक द्वार खोलता है। 🔑✨
तुम्हारा बेस्टफ्रेंड,
बंगाल काफी चर्चे में हैं। उसका कारण क्या है वो हम सब जानते हैं। आज बंगाल को कैसे जाना जा रहा है वो अलग बात है परंतु कई वर्षों पहले बंगाल को Swami Vivekananda जी के नाम से जाना जाता था। 😊 एक दिन किसी चर्चा में स्वामी जी शामिल थे। एक व्यक्ति ने उनकी टिप्पणी का जवाब देते समय बहुत बुरा भला कहा। 😠 स्वामी जी ने क्रोधित न होकर उस व्यक्ति से सवाल पूछा - "अगर कोई आपको उपहार देता है और आप उसको स्वीकार नहीं करते हैं तो वो उपहार कौन रखता है?" 🎁 व्यक्ति ने तुरंत पलटकर जवाब दिया - "जो उपहार दे रहा था, वही रखेगा।" स्वामी जी ने फिर कहा - ऐसे ही जब आप किसी का अपमान करते हैं तब भी यही होता है। वो व्यक्ति अपमान स्वीकार न करे तो उन शब्दों का बुरा प्रभाव आप तक ही सीमित रहता है। ✨
अपमान आखिर हम करते क्यों है? 🤔 लोग आजकल इसको फनी होना मान लेते हैं। सोशल मीडिया में रील्स, विडिओ, कमेंट्स को पढ़कर ऐसा लगता है कि मनुष्य अपने हंसने के लिए दूसरों को कुछ भी बोल सकता है। 📱😂 जो लोग ऐसा करते हैं, वो समझते हैं कि ऐसा करना बहुत बुद्धिमानी का कार्य है। पर ये सब एक भ्रम है। ⚠️ अपमान करने का सबसे महत्वपूर्ण कारण है - खुद को दूसरे से बड़ा समझना। 👑 विद्यार्थी जीवन में ऐसा कई बार होता है कि हमारे किसी टेस्ट में मार्क्स अच्छे आ गए तब कुछ विद्यार्थी उस मार्क्स को लेकर जिसके कम आते हैं, उसका मजाक बनाने की कोशिश करते हैं। 📝 या कई बार आम जीवन में हम किसी की खूबसूरती पर टिप्पणी करते हैं, किसी के मोटापे पर, किसी के गरीबी पर, किसी की शारीरिक कमजोरियों पर और सब ये भूल जाते हैं कि ये सब टिप्पणियाँ, ये सब मजाक लौटकर एक दिन वापस आता है और फिर बाद में हम सोचते रह जाते हैं कि हमारे साथ ऐसा क्यों हो रहा है। 🔄 इसलिए, मेरा सभी ईमानदार विद्यार्थियों से विनम्र निवेदन है कि अपनी सीमित शक्तियों को किसी को नीचा, किसी को दबाने के लिए इस्तेमाल ना करे। 🙏 उन शक्तियों का इस्तेमाल करें - अपने ज्ञान की वृद्धि के लिए। 📚 ज्ञान ही वही चाभी है जो आपके लिए खुशियों के अनेक द्वार खोलता है। 🔑✨
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