Sids Analysis
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Political Comedy - Sids Analysis
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Bhagwat Part Sudama charatra katha
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https://youtube.com/shorts/i5Q4uVbHjrw?si=0XmZ3s_QNIAHZTrJ

Sanso ki Mala pe feru mai pee ka nam

Apne man ki mai janu aur pee ke man ki Ram

( Ram, Ram ) 😁
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🙏🙏
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Bharteey UPI vs Pakistan 🤣😂

1. "Bharat mein UPI ka istemal:
Beta, tumhe paise transfer karne hain? UPI se 2 second mein ho jayega!"
Pakistan mein:
"Bhai, voh paise jo mujhe chaar mahine pehle diye the, voh mujhe waapas chahiye… cash mein!"

2. India: "Yaha toh paise bhejne ka tarika UPI hai!"
Pakistan: "Yaha paise bhejne ka tarika hai... dua!"

3. "Bharat: *UPI se ek click pe payment ho jaye!"
Pakistan: "Hamare yaha click toh sirf ghanti bajane ke kaam aata hai!"

4. "Bharat mein:
Aapka paisa transfer ho gaya hai!"
Pakistan mein:
"Pehle paisa toh aane do!"

5. "Bharat mein UPI transfer ka confirmation:
"Aapke Rs. 500 transfer ho gaye!"
Pakistan mein:
"Aapka Rs. 500 transfer ho gaya... khayalon mein!"

6. India: "Yaha log apne phone se shopping karte hain!"
Pakistan: "Yaha log apne phone ko bech kar shopping karte hain!"

7. "Bharat mein: *UPI, PhonePe, Google Pay har jagah!"
Pakistan mein: *Paisa dekhne ke liye bank ki line lagao aur dua karo ke account mein kuch ho!"

8. "Bharat mein:
Aaj kal bhikhari bhi QR code lekar ghoomte hain!"
Pakistan mein:
"QR code kya hota hai, pehle yeh batao!"

9. "Bharat mein UPI offer:
Rs. 50 cashback milega!"
Pakistan mein:
"Yaha cashback nahi, sirf flashback milta hai… woh bhi kab paisa tha, uska!"

10. "Bharat mein:
UPI se sab kuch online ho gaya hai!"
Pakistan mein:
"Online sirf sapne hain, aur vo bhi balance dekhte hi chhant jaate hain!"

11. "Bharat mein:
"Aaj paise transfer kiye, kal cashback mil gaya!"
Pakistan mein:
"Yaha aaj paise diye, aur kal bhool gaye ki diye bhi the!"

Maza aaya? 😆
@SidsAnalysis
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🕉 नमो नारायणाय 🙏

भगवान अर्जुन को अपने विराट रूप के दर्शन कराकर कहते हैं -

मैं पाप से परे, श्राप से परे, मैं श्राप हूं, आशीर्वाद भी। जन्म हूं, मृत्यु भी, और उनके बीच का जीवन भी।
मैं प्रकाश हूं और अंधकार भी। अग्नि हूं और पानी भी, जो नष्ट करता है, वही जीवन भी देता है। प्रेम भी मैं हूं, और घृणा भी। मैं स्थिर हूं और चलायमान भी, शांति भी मैं हूं और युद्ध भी। मैं ज्ञान हूं, अज्ञान भी; मैं सत्य हूं और माया भी।

जो देखा जा सकता है, मैं वही हूं और जो अदृश्य है, वह भी मैं हूं। मैं रचना हूं और संहार भी। मैं गति हूं और ठहराव भी। मैं धैर्य हूं, और अधीरता भी। मैं अभय हूं और भय का कारण भी। मैं स्वतंत्रता हूं और बंधन भी। सृजन में मेरी शक्ति है, और विनाश में भी। मैं आदिकाल से हूं और अनंतकाल तक रहूंगा।

मैं धरती का आधार हूं, और आकाश का विस्तार भी। जीवन का संचालक हूं, और मृत्यु का भी मार्गदर्शक हूं। मैं विचार हूं, और शून्यता भी। सुख भी मैं हूं और दुख भी। मैं प्रतिक्षण बदलता रहता हूं, फिर भी अनंत हूं। मैं मनुष्यों का मर्म हूं, और देवताओं का स्वप्न भी। मैं जीवन का आदर्श हूं और यथार्थ भी।

तूफान की गर्जना में भी मैं हूं, और सागर की शांति में भी। मैं शब्द हूं और मौन भी। मैं विजय की मुस्कान हूं और पराजय के आंसू भी। मैं मानव का साथी हूं, और उसका परीक्षण भी। मैं अनगिनत रूपों में प्रकट होता हूं, और फिर भी निराकार हूं। मैं कर्म हूं, और अकर्म भी। मैं संसार के हर जीव की आत्मा में हूं, फिर भी असंग हूं।

मैं आशा हूं और निराशा भी। मैं उम्मीद की किरण हूं, और अंधकार का साया भी। मैं समय हूं, जो निरंतर चलता है, और अनंत भी हूं जो कभी समाप्त नहीं होता। मैं संघर्ष हूं, और समर्पण भी। मैं सपनों का संसार हूं, और सच्चाई की कठोरता भी। मैं शांति का संदेश हूं, और क्रांति का उद्घोष भी। मैं जीवन का संगीत हूं, और मौन की गूंज भी। मैं निर्मलता हूं, और अशांति भी।

मैं पवित्रता का प्रतीक हूं, और पाप का भार भी। मैं प्रेम की मिठास हूं, और नफरत की कड़वाहट भी। मैं तरंग हूं, जो कभी स्थिर नहीं होती, और सागर का ठहराव भी। मैं शक्ति हूं, और निर्बलता भी। मैं यात्रा का आरंभ हूं, और उसका अंत भी। मैं चढ़ाव हूं, और ढलान भी। मैं आत्मविश्वास हूं, और संकोच भी। मैं प्रेरणा हूं, और मायूसी का भाव भी।

मैं सृजन का स्वर हूं, और विनाश की खामोशी भी। मैं आनंद की अनुभूति हूं, और पीड़ा का एहसास भी। मैं पहाड़ों की ऊंचाई हूं, और गहरी घाटियों की गहराई भी। मैं दिन का उजाला हूं, और रात का अंधेरा भी। मैं सत्य की मशाल हूं, और भ्रम की परछाई भी। मैं यात्रा की मंजिल हूं, और राह की मुश्किलें भी। मैं मन का संतोष हूं, और इच्छाओं की प्यास भी।

मैं स्वतंत्रता की उड़ान हूं, और बंधन की जंजीरें भी। मैं वीरता का प्रतीक हूं, और भय का अंश भी। मैं आत्मा का प्रकाश हूं, और अहंकार का अंधकार भी। मैं संतुलन हूं, और उथल-पुथल भी। मैं उत्सव की खुशी हूं, और विरह का दर्द भी। मैं सपनों की हकीकत हूं, और हकीकत का सपना भी। मैं वचन हूं, और मौन की कसमें भी।

@SidsAnalysis
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1985: Me majdooro ki halat
2024: Me ?

@SidsAnalysis
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Hum aksar sochte hain, "Bhagwan ne hume kya diya hai?" Lekin agar dhyan se dekhein, toh Bhagwan ne hume sab kuch diya hai:

Jeevan aur sharir (jismein hath, pair, aankhen, nak, muh sab kuch hai).

Vatavaran—hawa, paani, dharti, aakash, aur surya ki roshni jo jeene ke liye zaroori hain.

Vastuein aur dhatuen—jaise sona, chandi, aur loha, jinse hum naye naye cheezein bana sakte hain.

Sabse zaroori, dimag—jo sochne aur naye inventions karne mein madad karta hai.


Aaj kal logon mein "Vigyan vs Bhagwan" ki debate hoti hai, lekin sochne wali baat yeh hai ki vigyan toh wahi cheezein istemal karta hai jo Bhagwan ne humein di hain! Bhagwan ne hume itni shakti aur kshamata di hai ki hum unke diye huye sansadhan ka upyog karke kuch bhi bana sakte hain, naye tareeke dhoond sakte hain.

Vigyan toh bas Bhagwan ki di hui cheejo ko samajhne aur behtar tarike se istemal karne ka zariya hai.

Vigyan hi nhi hame yog/tapasya/vrat aise kayee aur tareeke diye hain jinse ham bachi kuchhi shaktiya jo vigyan se sambhav nhi vo ham inse pa sakte hain.

To samajh gye na ki bhagwan ne hame sab kuchh diya hai par insan insan me apna paraya hua pada hai bas.

Comment me "Jay Shree Ram" zaroor likhein!

@SidsAnalysis
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Apne Aap ko Aisa banao ki koi buri sangat aapke upar apna koi prabhav na kar sake

Lekin Kisi acchi sangat ka asar hone se bhi na roke apne aapko usse bhi accha banane ki koshish kare.

@SidsAnalysis
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Gift aur Help do aisi cheeje hain jo free hoti hain.

Agar koi insan aapko kuchh gift deta hai aur uske paise bhi leleta hai to ye kya hua ?

Ye hua uska business

Isi tarah help bhi ek aisi cheej hai jo free hoti hai

Lekin agar kisi ne aapki help karne ke paise mange to ye uski hui kya ?

Ye hui uski naukri .

Gift + Paisa = Business
Help + Paisa = Service

@SidsAnalysis
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😂😂😂Congress ko vote dene walo ke liye ye reaction sahi hai
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Vishnu bhagwan ke 1000 nam

विश्वम्, अपांनिधि, विष्णु, अधिष्ठानम, वषट्कार, अप्रमत्त, भूतभव्यभवत्प्रभुः, प्रतिष्ठित, भूतकृत, स्कन्द, भूतभृत, स्कन्दधर, भाव, धुर्य, भूतात्मा, वरद, भूतभावन, वायुवाहन, पूतात्मा, वासुदेव, परमात्मा, बृहद्भानु, मुक्तानां परमागतिः, आदिदेव, अव्ययः, पुरन्दर, पुरुषः, अशोक, साक्षी, तारण, क्षेत्रज्ञः, तार, अक्षर, शूर, योगः, शौरि, योगविदां नेता, जनेश्वर, प्रधानपुरुषेश्वर, अनुकूल, नारसिंहवपुः, शतावर्त, श्रीमान्, पद्मी, केशव, पद्मनिभेक्षण, पुरुषोत्तम, पद्मनाभ, सर्व, अरविन्दाक्ष, शर्व, पद्मगर्भ, शिव, शरीरभृत्, स्थाणु, महार्दि, भूतादि, ऋद्ध, निधिरव्यय, वृद्धात्मा, सम्भव, महाक्ष, भावन, गरुडध्वज, भर्ता, अतुल, प्रभव, शरभ, प्रभु, भीम, ईश्वर, समयज्ञ, स्वयम्भू, हविर्हरि, शम्भु, सर्वलक्षणलक्षण्य, आदित्य, लक्ष्मीवान्, पुष्कराक्ष, समितिञ्जय, महास्वन, विक्षर, अनादिनिधन, रोहित, धाता, मार्ग, विधाता, हेतु, धातुरुत्तम, दामोदर, अप्रमेय, सह, हृषीकेश, महीधर, पद्मनाभ, महाभाग, अमरप्रभु, वेगवान, विश्वकर्मा, अमिताशन, मनु, उद्भव, त्वष्टा, क्षोभण, स्थविष्ठ, देव, स्थविरो ध्रुव, श्रीगर्भ, अग्राह्य, परमेश्वर, शाश्वत, करणं, कृष्ण, कारणं, लोहिताक्ष, कर्ता, प्रतर्दन, विकर्ता, प्रभूत, गहन, त्रिककुब्धाम, गुह, पवित्रं, व्यवसाय, मङ्गलंपरम्, व्यवस्थान, ईशान, संस्थान, प्राणद, स्थानद, प्राण, ध्रुव, ज्येष्ठ, परर्द्धि, श्रेष्ठ, परमस्पष्ट, प्रजापति, तुष्ट, हिरण्यगर्भ, पुष्ट, भूगर्भ, शुभेक्षण, माधव, राम, मधुसूदन, विराम, ईश्वर, विरज, विक्रमी, मार्ग, धन्वी, नेय, मेधावी, नय, विक्रम, अनय, क्रम, वीर, अनुत्तम, शक्तिमतां श्रेष्ठ, दुराधर्ष, धर्म, कृतज्ञ, धर्मविदुत्तम, कृति, वैकुण्ठ, आत्मवान्, पुरुष, सुरेश, प्राण, शरणम, प्राणद, शर्मा, प्रणव, विश्वरेता, पृथु, प्रजाभव, हिरण्यगर्भ, अह, शत्रुघ्न, सम्वत्सर, व्याप्त, व्याल, वायु, प्रत्यय, अधोक्षज, सर्वदर्शन, ऋतु, अज, सुदर्शन, सर्वेश्वर, काल, सिद्ध, परमेष्ठी, सिद्धि, परिग्रह, सर्वादि, उग्र, अच्युत, सम्वत्सर, वृषाकपि, दक्ष, अमेयात्मा, विश्राम, सर्वयोगविनिःसृत, विश्वदक्षिण, वसु, विस्तार, वसुमना, स्थावरस्थाणु, सत्य, प्रमाणम्, समात्मा, बीजमव्ययम्, सम्मित, अर्थ, सम, अनर्थ, अमोघ, महाकोश, पुण्डरीकाक्ष, महाभोग, वृषकर्मा, महाधन, वृषाकृति, अनिर्विण्ण, रुद्र, स्थविष्ठ, बहुशिरा, अभू, बभ्रु, धर्मयूप, विश्वयोनि, महामख, शुचिश्रवा, नक्षत्रनेमि, अमृत, नक्षत्री, शाश्वतस्थाणु, क्षम, वरारोह, क्षाम, महातपा, समीहन, सर्वग, यज्ञ, सर्वविद्भानु, ईज्य, विश्वक्सेन, महेज्य, जनार्दन, क्रतु, वेद, सत्रं, वेदविद, सतांगति, अव्यङ्ग, सर्वदर्शी, वेदाङ्ग, विमुक्तात्मा, वेदवित्, सर्वज्ञ, कवि, ज्ञानमुत्तमम्, लोकाध्यक्ष, सुव्रत, सुराध्यक्ष, सुमुख, धर्माध्यक्ष, सूक्ष्म, कृताकृत, सुघोष, चतुरात्मा, सुखद, चतुर्व्यूह, सुहृत्, चतुर्दंष्ट्र, मनोहर, चतुर्भुज, जितक्रोध, भ्राजिष्णु, वीरबाहु, भोजनं, विदारण, भोक्ता, स्वापन, सहिष्णु, स्ववश, जगदादिज, व्यापी, अनघ, नैकात्मा, विजय, नैककर्मकृत्, जेता, वत्सर, विश्वयोनि, वत्सल, पुनर्वसु, वत्सी, उपेन्द्र, रत्नगर्भ, वामन, धनेश्वर, प्रांशु, धर्मगुप, अमोघ, धर्मकृत्, शुचि, धर्मी, उर्जित, सत्, अतीन्द्र, असत्, संग्रह, क्षरम्, सर्ग, अक्षरम्, धृतात्मा, अविज्ञाता, नियम, सहस्रांशु, यम, विधाता, वेद्य, कृतलक्षण, वैद्य, गभस्तिनेमि, सदायोगी, सत्त्वस्थ, वीरहा, सिंह, माधव, भूतमहेश्वर, मधु, आदिदेव, अतीन्द्रिय, महादेव, महामाय, देवेश, महोत्साह, देवभृद्गुरु, महाबल, उत्तर, महाबुद्धि, गोपति, महावीर्य, गोप्ता, महाशक्ति, ज्ञानगम्य, महाद्युति, पुरातन, अनिर्देश्यवपु, शरीरभूतभृत्, श्रीमान, भोक्ता, अमेयात्मा, कपीन्द्र, महाद्रिधृक्, भूरिदक्षिण, महेष्वास, सोमप, महीभर्ता, अमृतप, श्रीनिवास, सोम, सतांगति, पुरुजित, अनिरुद्ध, पुरुसत्तम, सुरानन्द, विनय, गोविन्द, जय, गोविदांपति, सत्यसंध, मरीचि, दाशार्ह, दमन, सात्वतांपति, हंस, जीव, सुपर्ण, विनयितासाक्षी, भुजगोत्तम, मुकुन्द...
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हिरण्यनाभ, अमितविक्रम, सुतपा, अम्भोनिधि, पद्मनाभ, अनन्तात्मा, प्रजापति, महोदधिशय, अमृत्यु, अन्तक, सर्वदृक्, अज, सिंह, महार्ह, सन्धाता, स्वाभाव्य, सन्धिमान्, जितामित्र, स्थिर, प्रमोदन, अज, आनन्द, दुर्मर्षण, नन्दन, शास्ता, नन्द, विश्रुतात्मा, सत्यधर्मा, सुरारिहा, त्रिविक्रम, गुरु, महर्षि कपिलाचार्य, गुरुतम, कृतज्ञ, धाम, मेदिनीपति, सत्य, त्रिपद, सत्यपराक्रम, त्रिदशाध्यक्ष, निमिष, महाशृङ्ग, अनिमिष, कृतान्तकृत्, स्रग्वी, महावराह, वाचस्पतिउदारधी, गोविन्द, अग्रणी, सुषेण, ग्रामणी, कनकाङ्गदी, श्रीमान्, गुह्य, न्याय, गभीर, नेता, गहन, समीरण, गुप्त, सहस्रमूर्धा, चक्रगदाधर, विश्वात्मा, वेधा, सहस्राक्ष, स्वाङ्ग, सहस्रपात्, अजित, आवर्तन, कृष्ण, निवृत्तात्मा, दृढ, संवृत, संकर्षणोऽच्युत, संप्रमर्दन, वरुण, अहःसंवर्तक, वारुण, वह्नि, वृक्ष, अनिल, पुष्कराक्ष, धरणीधर, महामना, सुप्रसाद, भगवान्, प्रसन्नात्मा, भगहा, विश्वधृक, आनन्दी, विश्वभुज, वनमाली, विभु, हलायुध, सत्कर्ता, आदित्य, सत्कृत, ज्योतिरादित्य, साधु, सहिष्णु, जह्नुनु, गतिसत्तम, नारायण, सुधन्वा, नर, खण्डपरशु, असंख्येय, दारुण, अप्रमेयात्मा, द्रविणप्रद, विशिष्ट, दिवःस्पृक्, शिष्टकृत, सर्वदृग्व्यास, शुचि, वाचस्पतिरयोनिज, सिद्धार्थ, त्रिसामा, सिद्धसंकल्प, सामग, सिद्धिद, साम, सिद्धिसाधन, निर्वाणं, वृषाही, भेषजं, वृषभ, भिषक्, विष्णु, संन्यासकृत, वृषपर्वा, शम, वृषोदर, शान्त, वर्धन, निष्ठा, वर्धमान, शान्ति, विविक्त, परायणम्, श्रुतिसागर, शुभाङ्ग, सुभुज, शान्तिद, दुर्धर, स्रष्टा, वाग्मी, कुमुद, महेन्द्र, कुवलेशय, वसुद, गोहित, वसु, गोपति, नैकरूप, गोप्ता, बृहद्रूप, वृषभाक्ष, शिपिविष्ट, वृषप्रिय, प्रकाशन, अनिवर्ती, ओजस्तेजोद्युतिधर, निवृत्तात्मा, प्रकाशात्मा, संक्षेप्ता, प्रतापन, क्षेमकृत्, ऋद्ध, शिव, स्पष्टाक्षर, श्रीवत्सवक्षा, मन्त्र, श्रीवास, चन्द्रांशु, श्रीपति, भास्करद्युति, श्रीमतां वर, अमृतांशूद्भव, श्रीद, भानु, श्रीश, शशबिन्दु, श्रीनिवास, सुरेश्वर, श्रीनिधि, औषधं, श्रीविभावन, जगतसेतु, श्रीधर, सत्यधर्मपराक्रमः, श्रीकर, भूतभव्यभवन्नाथ, श्रेय, पवन, श्रीमान, पावन, लोकत्रयाश्रय, अनल, स्वक्ष, कामहा, स्वङ्ग, कामकृत्, शतानन्द, कान्त, नन्दि, काम, ज्योतिर्गणेश्वर, कामप्रद, विजितात्मा, प्रभु, अविधेयात्मा, युगादिकृत, सत्कीर्ति, युगावर्त, छिन्नसंशय
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नैकमाय, उदीर्ण, महाशन, सर्वतश्चक्षु, अदृश्य, अनीश, व्यक्तरूप, शाश्वतस्थिर, सहस्रजित्, भूशय, अनन्तजित्, भूषण, इष्ट, भूति, अविशिष्ट, विशोक, शिष्टेष्ट, शोकनाशन, शिखण्डी, अर्चिष्मान, नहुष, अर्चित, वृष, कुम्भ, क्रोधहा, विशुद्धात्मा, क्रोधकृत्कर्ता, विशोधन, विश्वबाहु, अनिरुद्ध, महीधर, अप्रतिरथ, अच्युत, प्रद्युम्न, प्रथित, अमितविक्रम, प्राण, कालनेमिनिहा, प्राणद, वीर, वासवानुज, शौरि, वाजसन, शूरजनेश्वर, शृङ्गी, त्रिलोकात्मा, जयन्त, त्रिलोकेश, सर्वविज्जयी, केशव, सुवर्णबिन्दु, केशिहा, अक्षोभ्य, हरि, सर्ववागीश्वरेश्वर, कामदेव, महाह्रद, कामपाल, महागर्त, कामी, महाभूत, कान्त, महानिधि, कृतागम, कुमुद, अनिर्देश्यवपु, कुन्दर, विष्णु, कुन्द, वीर, पर्जन्य, अनन्त, पावन, धनंजय, अनिल, ब्रह्मण्य, अमृतांश, ब्रह्मकृत, अमृतवपु, ब्रह्मा, सर्वज्ञ, ब्रह्म, सर्वतोमुख, ब्रह्मविवर्धन, सुलभ, ब्रह्मवित, सुव्रत, ब्राह्मण, सिद्ध, ब्राह्मी, शत्रुजित, ब्रह्मज्ञ, शत्रुतापन, ब्राह्मणप्रिय, न्यग्रोध, महाक्रम, उदुम्बर, महाकर्मा, अश्वत्थ, महातेजा, चाणूरान्ध्रनिषूदन, महोरग, सहस्रार्चि, महाक्रतु, सप्तजिह्व, महायज्वा, सप्तैधा, महायज्ञ, सप्तवाहन, महाहवि, अमूर्ति, स्तव्य, अनघ, स्तवप्रिय, अचिन्त्य, स्तोत्रं, भयकृत, स्तुति, भयनाशन, स्तोता, अणु, रणप्रिय, बृहत, पूर्ण, कृश, पूरयिता, स्थूल, पुण्य, गुणभृत, पुण्यकीर्ति, निर्गुण, अनामय, महान्, मनोजव, अधृत, तीर्थकर, स्वधृत, वसुरेता, स्वास्य, वसुप्रद, प्राग्वंश, वसुप्रद, वंशवर्धन, वासुदेव, भारभृत्, वसु, कथित, वसुमना, योगी, हवि, योगीश, सद्गति, सर्वकामद, सत्कृति, आश्रम, सत्ता, श्रमण, सद्भूति, क्षाम, सत्परायण, सुपर्ण, शूरसेन, वायुवाहन, यदुश्रेष्ठ, धनुर्धर, सन्निवास, धनुर्वेद, सुयामुन, दण्ड, भूतावास, दमयिता, वासुदेव, दम, सर्वासुनिलय, अपराजित, अनल, सर्वसह, दर्पहा, नियन्ता, दर्पद, अनियम, दृप्त, अयम, दुर्धर, सत्त्ववान्, अपराजित, सात्त्विक, विश्वमूर्ति, सत्य, महामूर्ति, सत्यधर्मपरायण, दीप्तमूर्ति, अभिप्राय, अमूर्तिमान्, प्रियार्ह, अनेकमूर्ति, अर्ह, अव्यक्त, प्रियकृत्, शतमूर्ति, प्रीतिवर्धन, शतानन, विहायसगति, एक, ज्योति, नैक, सुरुचि, सव, हुतभुक, कः, विभु, किं, रवि, यत्, विरोचन, तत्, सूर्य, पदमनुत्तमम्, सविता, लोकबन्धु, रविलोचन, लोकनाथ, अनन्त, माधव, हुतभुक, भक्तवत्सल, भोक्ता, सुवर्णवर्ण, सुखद, हेमाङ्ग, नैकज, वराङ्ग, अग्रज, चन्दनाङ्गदी, अनिर्विण्ण, वीरहा, सदामर्षी, विषम, लोकाधिष्ठानाम्, शून्य, अद्भूत, घृताशी, सनात्, अचल, सनातनतम, चल, कपिल, अमानी, कपि, मानद, अव्यय, मान्य, स्वस्तिद, लोकस्वामी, स्वस्तिकृत्, त्रिलोकधृक्, स्वस्ति, सुमेधा, स्वस्तिभुक, मेधज, स्वस्तिदक्षिण, धन्य, अरौद्र, सत्यमेधा, कुण्डली, धराधर, चक्री, तेजोवृष, जन्ममृत्युजरातिग, द्युतिधर, भूर्भुव:स्वस्तरु, सर्वशस्त्रभृतांवर, तार, प्रग्रह, सविता, निग्रह, प्रपितामह, व्यग्र, यज्ञ, नैकशृङ्ग, यज्ञपति, गदाग्रज, यज्वा, चतुर्मूर्ति, यज्ञाङ्ग, चतुर्बाहु, यज्ञवाहन, चतुर्व्यूह, यज्ञभृत्, चतुर्गति, यज्ञकृत्, चतुरात्मा, यज्ञी, चतुर्भाव, यज्ञभुक, चतुर्वेदवित्, यज्ञसाधन, एकपात्, यज्ञान्तकृत्, समावर्त, यज्ञगुह्यम्, अनिवृत्तात्मा, अन्नं, दुर्जय, अन्नाद, दुरतिक्रम, आत्मयोनि, दुर्लभ, स्वयंजात, दुर्गम, वैखान, दुर्ग, सामगायन, दुरावासा, देवकीनन्दन, दुरारिहा, सृष्टा, शुभाङ्ग, क्षितीश, लोकसारङ्ग, पापनाशन, सुतन्तु, शङ्खभृत्, तन्तुवर्धन, नन्दकी, इन्द्रकर्मा, चक्री, महाकर्मा, शार्ङ्गधन्वा, कृतकर्मा, गदाधर, कृतागम, रथाङ्गपाणि, उद्भव, अक्षोभ्य, सुन्दर, सर्वप्रहरणायुध, सुन्द, चतुरश्र, रत्ननाभ, गभीरात्म, सुलोचन, विदिश, अर्क, व्यादिश, विक्रमी, दिश, उर्जितशासन, अनादि, शब्दातिग, भुवोभुव, शब्दसह, लक्ष्मी, शिशिर, सुवीर, शर्वरीकर, अधाता, अक्रूर, आधारनिलय, पेशल, ऊर्ध्वग, दक्ष, एकात्मा, दक्षिण, जनजन्मादि, क्षमिणां वर, जनन, विद्वत्तम, तत्त्वं, वीटभय, तत्त्ववित्, पुण्यश्रवणकीर्तन, पण, उत्तारण, पुष्पहास, दुष्कृतिहा, प्रजागर, पुण्य, प्रणव, दुःस्वप्ननाशन, प्रमाणम्, वीरहा, प्राणजीवन, रक्षण, प्राणद, सन्त, प्राणनिलय, जीवन, प्राणभृत्, पर्यवस्थित, भीम, अनन्तरूप, भीमपराक्रम, अनन्तश्री, रुचिराङ्गद, जितमन्यु, विश्वम, भयापह.
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Shree Ram Reilly
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Rahul Ka Nya Tareeka desh ke vikas ka
https://youtube.com/shorts/FlQ8n0nCaWg?si=Zs1t_iyeKwnNkTGH

राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का अब एक ही रास्ता बचा है उसका नाम ही प्रधानमंत्री रख दिया जाए

😐😐😐
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Uneducated bolne walo ko lagta hai sirf degree hi jaroori hai education/knowledge ke liye

Lekin modi ji jaisa har language ko janne wala insan politics, economy, etc subjects ke master aur logo ke hitaishi ke liye
Kisi degree ya praman patra ki avashyakta nhi

@SidsAnalysis
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श्रीमद भगवत गीता सार- अध्याय १ |Shrimad Bhagawad Geeta With Narration…
Saregama Bhakti
Bhagwat Geeta chapter 1

1 hour daily Listen Bhagwat Geeta
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श्रीमद भगवत गीता सार- अध्याय 2 |Shrimad Bhagawad Geeta With Narration…
Saregama Bhakti
Bhagwat Geeta chapter 2

1 hour daily Listen Bhagwat Geeta
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