👑जुबां कड़वी सही पर दिल साफ़ रखता हूँ …. कौन , कब , कहाँ बदल गया सब का हिसाब रखता हूँ😎
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મશહૂર થઈને ઓળખ ઊભી કરવાનો શોખ મને ક્યાં છે,
મને તો મારા નજીકના લોકો સારી રીતે ઓળખે તોય ઘણું છે...
મને તો મારા નજીકના લોકો સારી રીતે ઓળખે તોય ઘણું છે...
❛हर किसी बात का जवाब नहीं होता हर जाम इश्क में ख़राब नहीं होता यूँ तो झूम लेते है नशे में रहने वाले मगर हर नशे का नाम शराब नहीं होता❜
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लोग कुछ भी कहे, हम वही करेंगे जो हमे अच्छा लगे....क्योंकी वो_वो है और हम_हम है..
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अहमियत हैसियत को मिलती है,
और हम हैं कि जज्बात लिए फिरते हैं।!!!!
काश ये मौहब्बत भी....तलाक सी होती....
तेरे हैं...तेरे हैं...तेरे हैं....कहकर तेरे हो जाते....
और हम हैं कि जज्बात लिए फिरते हैं।!!!!
काश ये मौहब्बत भी....तलाक सी होती....
तेरे हैं...तेरे हैं...तेरे हैं....कहकर तेरे हो जाते....
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*नशे में आने दे ऐ वक्त...!!!*
*होश में रहकर तेरे सब जवाब नहीं दे सकता...!!!*
*होश में रहकर तेरे सब जवाब नहीं दे सकता...!!!*
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ગમે તેટલા *સુવિચાર* મોકલો..સાહેબ,
પણ *_માણસ_ Phone*ની
*Low Battery* સીવાય
કોઈ વાત *Seriously* લેતો જ નથી..!! *Good morning"*
પણ *_માણસ_ Phone*ની
*Low Battery* સીવાય
કોઈ વાત *Seriously* લેતો જ નથી..!! *Good morning"*
आदाब
ग़ज़ल पेशे ख़िदमत है
मोहब्बत सर पे लेकर घूमता हूं।
क़यामत सर पे लेकर घूमता हूं।।
मेरा दिल है किसी दिल की अमानत।
अमानत सर पे लेकर घूमता हूं।।
अगर मिल जाएं तो उन पर उड़ेलूं।
शिकायत सर पे लेकर घूमता हूं।।
न अब तक काम आई मेरे, फिर भी।
शराफ़त सर पे लेकर घूमता हूं।।
बुज़ुर्गों ने जिसे ठोकर में रख्खा।
वो दौलत सर पे लेकर घूमता हूं।।
सियासत पांव में रख्खी है जब से।
हुकूमत सर पे लेकर घूमता हूं।।
बताए ख्वाब की ताबीर कोई।
मैं तुरबत सर पे लेकर घूमता हूं।।
मैं खाऊं ठोकरें लिख्खा है जिसमे।
वो किस्मत सर पे लेकर घूमता हूं।।
बंधी है सर पे दस्तारे अदावत।
अदावत सर पे लेकर घूमता हूं।।
है बेटी बाइसे रहमत जहां में।
मैं रहमत सर पे लेकर घूमता हूं।।
लगाकर नारा-ए-तकबीर राशिद।
मैं नुसरत सर पे लेकर घूमता हूं।।
@Shayari
ग़ज़ल पेशे ख़िदमत है
मोहब्बत सर पे लेकर घूमता हूं।
क़यामत सर पे लेकर घूमता हूं।।
मेरा दिल है किसी दिल की अमानत।
अमानत सर पे लेकर घूमता हूं।।
अगर मिल जाएं तो उन पर उड़ेलूं।
शिकायत सर पे लेकर घूमता हूं।।
न अब तक काम आई मेरे, फिर भी।
शराफ़त सर पे लेकर घूमता हूं।।
बुज़ुर्गों ने जिसे ठोकर में रख्खा।
वो दौलत सर पे लेकर घूमता हूं।।
सियासत पांव में रख्खी है जब से।
हुकूमत सर पे लेकर घूमता हूं।।
बताए ख्वाब की ताबीर कोई।
मैं तुरबत सर पे लेकर घूमता हूं।।
मैं खाऊं ठोकरें लिख्खा है जिसमे।
वो किस्मत सर पे लेकर घूमता हूं।।
बंधी है सर पे दस्तारे अदावत।
अदावत सर पे लेकर घूमता हूं।।
है बेटी बाइसे रहमत जहां में।
मैं रहमत सर पे लेकर घूमता हूं।।
लगाकर नारा-ए-तकबीर राशिद।
मैं नुसरत सर पे लेकर घूमता हूं।।
@Shayari
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*लोग उनके पीछे चलना चाहते हैं जो चाँद पे जाते हैं*
*सफलता तो उनके पीछे चलने में है जिन्होंने चांद के टुकड़े कर दिए*........🌹
*सफलता तो उनके पीछे चलने में है जिन्होंने चांद के टुकड़े कर दिए*........🌹
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ये मत समज के तेरे काबील नही हम
उनसे जाकर पुछ जिन्हे हासिल नही हम
"OriginaL"
Mukhi
उनसे जाकर पुछ जिन्हे हासिल नही हम
"OriginaL"
Mukhi
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कोशिश तो बहुत की थी मैने .... लेकिन कभी कीसीने "मौका" ही नही दीया..... "माँ"
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હવસ" ના ઘોડાની લગામ ખેંચતા શીખી જા દોસ્ત,
કોઇ રથમાં માં સિતા પણ હોઇ શકે....
"આઇ તોળા આશીર્વાદ"
કોઇ રથમાં માં સિતા પણ હોઇ શકે....
"આઇ તોળા આશીર્વાદ"
👍2
બદલાઇ ગયો છું એટલે એકવાર સમજાવી જઇશ....
બાકી' ઠોકી નાંખીશ " કાં " ઠોકાઇ જઇશ........
" OriginaL"
બાકી' ઠોકી નાંખીશ " કાં " ઠોકાઇ જઇશ........
" OriginaL"
विलन की कभी कोइ हीरोइन नहीं होती "जनाब"
सब दुश्मनभी ग़द्दार होते है....."KaBhai"
सब दुश्मनभी ग़द्दार होते है....."KaBhai"
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कुछ लोगों को लगता है
उनकी चालाकी मुझे समज नहीं आती....
पर मैं ख़ामोश हो के देखता हूँ
उन्हें मेरी नज़रों से गिरते हुए....
उनकी चालाकी मुझे समज नहीं आती....
पर मैं ख़ामोश हो के देखता हूँ
उन्हें मेरी नज़रों से गिरते हुए....
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