विश्व मानक दिवस प्रत्येक वर्ष 14 अक्टूबर को मनाया जाता है
इसका उद्देश्य मानकों के महत्व को उजागर करना है।
यह दिवस मानक बनाने वाली संस्थाओं की भूमिका को भी उजागर करता है।
यह उपभोक्ताओं, व्यापारियों और उद्योगों को मानकों की उपयोगिता के बारे में जागरूक करता है।
विश्व मानक दिवस 2024 की थीम 'बेहतर दुनिया के लिए साझा दृष्टि' रखी गई है।
इस दिवस की शुरुआत वर्ष 1970 में हुई थी।
इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानकों के महत्व को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया था।
#day
Join 📌 @UppscZone
इसका उद्देश्य मानकों के महत्व को उजागर करना है।
यह दिवस मानक बनाने वाली संस्थाओं की भूमिका को भी उजागर करता है।
यह उपभोक्ताओं, व्यापारियों और उद्योगों को मानकों की उपयोगिता के बारे में जागरूक करता है।
विश्व मानक दिवस 2024 की थीम 'बेहतर दुनिया के लिए साझा दृष्टि' रखी गई है।
इस दिवस की शुरुआत वर्ष 1970 में हुई थी।
इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानकों के महत्व को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया था।
#day
Join 📌 @UppscZone
👍2
जम्मू-कश्मीर में सरकार गठन की तैयारी तेज, 6 साल बाद हटा राष्ट्रपति शासन
रविवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा अधिसूचना जारी करते ही जम्मू-कश्मीर से राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया, जिससे केंद्र शासित प्रदेश में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया है।
#election
Join 📌 @UppscZone
रविवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा अधिसूचना जारी करते ही जम्मू-कश्मीर से राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया, जिससे केंद्र शासित प्रदेश में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया है।
#election
Join 📌 @UppscZone
👍3
Secure PCS
जम्मू-कश्मीर में सरकार गठन की तैयारी तेज, 6 साल बाद हटा राष्ट्रपति शासन रविवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा अधिसूचना जारी करते ही जम्मू-कश्मीर से राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया, जिससे केंद्र शासित प्रदेश में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया है। …
राष्ट्रपति शासन का मतलब है कि राज्य सरकार का निलंबन हो जाए और केंद्र सरकार सीधे राज्य का शासन करे, इस दौरान राज्यपाल उस राज्य का संवैधानिक प्रमुख बन जाता है और केंद्र सरकार राज्य पर प्रश्न उठाने के लिए उसे नियुक्त करती है, राष्ट्रपति शासन के दौरान विधानसभा या तो भंग हो जाती है या सत्रावसान हो जाता है, जबकि उनका विघटन नहीं होता, ऐसी स्थिति में निर्वाचन आयोग को छह महीने के भीतर फिर से चुनाव कराने होते हैं,
किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन की घोषणा के बाद स्थानीय निकायों का विघटन होना ज़रूरी नहीं है, दरअसल स्थानीय निकाय जैसे नगर पालिकाएं और पंचायतें स्वतंत्र संवैधानिक निकाय हैं ,और उनका कामकाज सीधे राज्य सरकार से जुड़ा नहीं है, राष्ट्रपति शासन के दौरान केंद्र सरकार इन निकायों का प्रशासन अपने हाथ में ले सकती है, लेकिन यह अनिवार्य नहीं है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत, राष्ट्रपति किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन की घोषणा कर सकते हैं, अगर उन्हें लगता है कि राज्य का शासन संविधान के प्रावधानों के मुताबिक नहीं चल रहा, राष्ट्रपति या तो राज्यपाल की रिपोर्ट पर या बिना रिपोर्ट के भी ऐसा कर सकते हैं। राष्ट्रपति शासन की घोषणा को संसद द्वारा उसके लागू होने की तारीख से दो महीने के अंदर साधारण बहुमत से मंज़ूरी देनी होती है।
Join 📌 @UppscZone
किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन की घोषणा के बाद स्थानीय निकायों का विघटन होना ज़रूरी नहीं है, दरअसल स्थानीय निकाय जैसे नगर पालिकाएं और पंचायतें स्वतंत्र संवैधानिक निकाय हैं ,और उनका कामकाज सीधे राज्य सरकार से जुड़ा नहीं है, राष्ट्रपति शासन के दौरान केंद्र सरकार इन निकायों का प्रशासन अपने हाथ में ले सकती है, लेकिन यह अनिवार्य नहीं है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत, राष्ट्रपति किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन की घोषणा कर सकते हैं, अगर उन्हें लगता है कि राज्य का शासन संविधान के प्रावधानों के मुताबिक नहीं चल रहा, राष्ट्रपति या तो राज्यपाल की रिपोर्ट पर या बिना रिपोर्ट के भी ऐसा कर सकते हैं। राष्ट्रपति शासन की घोषणा को संसद द्वारा उसके लागू होने की तारीख से दो महीने के अंदर साधारण बहुमत से मंज़ूरी देनी होती है।
Join 📌 @UppscZone
👍2
किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा के निम्नलिखित में से कौन-से परिणामों का होना आवश्यक नहीं है?
1.राज्य विधानसभा का विघटन
2.राज्य के मंत्रिपरिषद् का हटाया जाना। 3.स्थानीय निकायों का विघटन।
1.राज्य विधानसभा का विघटन
2.राज्य के मंत्रिपरिषद् का हटाया जाना। 3.स्थानीय निकायों का विघटन।
Anonymous Quiz
18%
(a) केवल 1 और 2
45%
(b) केवल 1 और 3
0%
(c) केवल 2 और 3
36%
(d) 1, 2 और 3
जब किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है तो राष्ट्रपति को निम्न असाधारण शक्तियाँ प्राप्त होती हैं, को हैं -
Anonymous Quiz
10%
वह राज्य सरकार के कार्यों और राज्यपाल या राज्य के कार्यकारी प्राधिकरण में निहित शक्तियों को ले सकता
10%
वह घोषणा कर सकता है कि राज्य विधायिका की शक्तियों का प्रयोग संसद द्वारा किया जाना है।
0%
वह राज्य में किसी निकाय से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के निलंबन सहित अन्य सभी जरूरी कदम उठा सकता
80%
उपरोक्त सभी
निम्न में से कौन से वें संशोधन अधिनियम में यह प्रावधान किया था कि "अनुच्छेद 356 को अंतिम और निर्णायक रूप से लागू करने में राष्ट्रपति की संतुष्टि, जिसे किसी भी आधार पर किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जाएगी"-
Anonymous Quiz
0%
38वें संविधान संशोधन अधिनियम 1975
17%
40वें संविधान संशोधन अधिनियम 1976
50%
42वें संविधान संशोधन अधिनियम 1976
33%
44वें संविधान संशोधन अधिनियम 1978
निम्न में से किस मामले में सर्वोच्च न्यायालय के एक ऐतिहासिक निर्णय ने अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग को बहुत हद तक प्रतिबंधित कर दिया था -
Anonymous Quiz
50%
एस.आर. बोम्मई मामला
0%
गोलकनाथ मामला
40%
केशवानंद भारती मामला
10%
सज्जन सिंह मामला
Secure PCS
निम्न में से कौन से वें संशोधन अधिनियम में यह प्रावधान किया था कि "अनुच्छेद 356 को अंतिम और निर्णायक रूप से लागू करने में राष्ट्रपति की संतुष्टि, जिसे किसी भी आधार पर किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जाएगी"-
न्यायिक समीक्षा का दायरा:
वर्ष 1975 के 38वें संशोधन अधिनियम ने अनुच्छेद 356 को अंतिम और निर्णायक रूप से लागू करने में राष्ट्रपति की संतुष्टि, जिसे किसी भी आधार पर किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जाएगी।
लेकिन इस प्रावधान को बाद में 1978 के 44वें संशोधन अधिनियम द्वारा हटा दिया गया था, जिसका अर्थ था कि राष्ट्रपति की संतुष्टि न्यायिक समीक्षा से परे नहीं है।
Join 📌 @UppscZone
वर्ष 1975 के 38वें संशोधन अधिनियम ने अनुच्छेद 356 को अंतिम और निर्णायक रूप से लागू करने में राष्ट्रपति की संतुष्टि, जिसे किसी भी आधार पर किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जाएगी।
लेकिन इस प्रावधान को बाद में 1978 के 44वें संशोधन अधिनियम द्वारा हटा दिया गया था, जिसका अर्थ था कि राष्ट्रपति की संतुष्टि न्यायिक समीक्षा से परे नहीं है।
Join 📌 @UppscZone
Secure PCS
निम्न में से किस मामले में सर्वोच्च न्यायालय के एक ऐतिहासिक निर्णय ने अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग को बहुत हद तक प्रतिबंधित कर दिया था -
व्याख्या
एस.आर. बोम्मई मामला, 1994 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के इस ऐतिहासिक निर्णय ने अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग को बहुत हद तक प्रतिबंधित कर दिया। न्यायालय ने निर्णय सुनाया कि राष्ट्रपति शासन केवल संवैधानिक तंत्र के विघटन की स्थिति में ही लागू किया जाना चाहिये, न कि केवल कानून और व्यवस्था के मुद्दों के लिये।
इसने यह भी अभिनिर्धारित किया कि इस प्रकार के अध्यारोपण न्यायिक समीक्षा के अधीन हैं, तथा यह सुनिश्चित किया गया कि अनुच्छेद 356 का प्रयोग राजनीतिक उद्देश्यों के लिये नहीं किया जाएगा।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि संवैधानिक तंत्र के असफल हो जाने का अर्थ है कि राज्य में प्रशासन का संचालन वास्तव में असंभव है, न कि कोई साधारण समस्या।
Note- हालांकि अनुच्छेद 356 का कई बार दुरुपयोग हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप राजनीतिक एजेंडा और विधि-व्यवस्था बनाए रखने की चिंताओं जैसे विभिन्न कारणों से निर्वाचित राज्य सरकारों को बर्खास्त कर दिया गया था।
Join 📌 @UppscZone
एस.आर. बोम्मई मामला, 1994 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के इस ऐतिहासिक निर्णय ने अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग को बहुत हद तक प्रतिबंधित कर दिया। न्यायालय ने निर्णय सुनाया कि राष्ट्रपति शासन केवल संवैधानिक तंत्र के विघटन की स्थिति में ही लागू किया जाना चाहिये, न कि केवल कानून और व्यवस्था के मुद्दों के लिये।
इसने यह भी अभिनिर्धारित किया कि इस प्रकार के अध्यारोपण न्यायिक समीक्षा के अधीन हैं, तथा यह सुनिश्चित किया गया कि अनुच्छेद 356 का प्रयोग राजनीतिक उद्देश्यों के लिये नहीं किया जाएगा।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि संवैधानिक तंत्र के असफल हो जाने का अर्थ है कि राज्य में प्रशासन का संचालन वास्तव में असंभव है, न कि कोई साधारण समस्या।
Note- हालांकि अनुच्छेद 356 का कई बार दुरुपयोग हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप राजनीतिक एजेंडा और विधि-व्यवस्था बनाए रखने की चिंताओं जैसे विभिन्न कारणों से निर्वाचित राज्य सरकारों को बर्खास्त कर दिया गया था।
Join 📌 @UppscZone
👍2
निम्न कथनों पर विचार करें और नीचे दिए गए कूट से सही कथन का चयन करें -
1.अनुच्छेद 358 और 359 मौलिक अधिकारों पर राष्ट्रीय आपातकाल के प्रभाव का वर्णन करते हैं।
2. राष्ट्रपति शासन और वित्तीय आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकार प्रभावित नहीं होते हैं।
1.अनुच्छेद 358 और 359 मौलिक अधिकारों पर राष्ट्रीय आपातकाल के प्रभाव का वर्णन करते हैं।
2. राष्ट्रपति शासन और वित्तीय आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकार प्रभावित नहीं होते हैं।
Anonymous Quiz
9%
केवल कथन 1 सही
9%
केवल कथन 2 सही
82%
कथन 1और 2 दोनों सही
0%
कोई नहीं
Secure PCS
निम्न कथनों पर विचार करें और नीचे दिए गए कूट से सही कथन का चयन करें -
1.अनुच्छेद 358 और 359 मौलिक अधिकारों पर राष्ट्रीय आपातकाल के प्रभाव का वर्णन करते हैं।
2. राष्ट्रपति शासन और वित्तीय आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकार प्रभावित नहीं होते हैं।
1.अनुच्छेद 358 और 359 मौलिक अधिकारों पर राष्ट्रीय आपातकाल के प्रभाव का वर्णन करते हैं।
2. राष्ट्रपति शासन और वित्तीय आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकार प्रभावित नहीं होते हैं।
अनुच्छेद 358 और 359 मौलिक अधिकारों पर राष्ट्रीय आपातकाल के प्रभाव का वर्णन करते हैं। इन दो प्रावधानों को नीचे समझाया गया है:-
1अनुच्छेद 19 के तहत मौलिक अधिकारों का निलंबन: अनुच्छेद 358 के अनुसार, जब राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की जाती है तो अनुच्छेद 19 के तहत सभी छह मौलिक अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं।
2.अन्य मौलिक अधिकारों का निलंबन: अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान आदेश द्वारा मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु किसी भी अदालत में जाने के अधिकार को निलंबित करने की शक्ति प्राप्त है।
हालाँकि यह ज्ञातव्य है कि राष्ट्रपति शासन और वित्तीय आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकार प्रभावित नहीं होते हैं।
Join 📌 @UppscZone
1अनुच्छेद 19 के तहत मौलिक अधिकारों का निलंबन: अनुच्छेद 358 के अनुसार, जब राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की जाती है तो अनुच्छेद 19 के तहत सभी छह मौलिक अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं।
2.अन्य मौलिक अधिकारों का निलंबन: अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान आदेश द्वारा मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु किसी भी अदालत में जाने के अधिकार को निलंबित करने की शक्ति प्राप्त है।
हालाँकि यह ज्ञातव्य है कि राष्ट्रपति शासन और वित्तीय आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकार प्रभावित नहीं होते हैं।
Join 📌 @UppscZone
👍2
अनुच्छेद 352 में किस संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा आंतरिक अशांति के स्थान पर सशस्त्र विद्रोह शब्द का प्रयोग किया गया?
Anonymous Quiz
0%
35 वा
20%
42 वा
50%
44 वा
20%
52 वा
10%
अनुत्तरित प्रश्न
Secure PCS
अनुच्छेद 352 में किस संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा आंतरिक अशांति के स्थान पर सशस्त्र विद्रोह शब्द का प्रयोग किया गया?
व्याख्या
अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकता है, जब भारत या उसके एक हिस्से की सुरक्षा को युद्ध या बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह से खतरा हो।
राष्ट्रपति युद्ध या सशस्त्र विद्रोह या बाह्य आक्रमण की वास्तविक घटना से पहले ही राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकता है।
जब 'युद्ध' या 'बाह्य आक्रमण' के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की जाती है, तो इसे 'बाह्य आपातकाल' के रूप में जाना जाता है।
दूसरी ओर, जब 'सशस्त्र विद्रोह' के आधार पर आपातकाल की घोषणा की जाती है, तो इसे 'आंतरिक आपातकाल' के रूप में जाना जाता है।
'सशस्त्र विद्रोह' शब्द को 44वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में जोड़ा गया था। इस शब्द से पहले इसे ‘आंतरिक अशांति’ के रूप में जाना जाता था।
Join 📌 @UppscZone
अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकता है, जब भारत या उसके एक हिस्से की सुरक्षा को युद्ध या बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह से खतरा हो।
राष्ट्रपति युद्ध या सशस्त्र विद्रोह या बाह्य आक्रमण की वास्तविक घटना से पहले ही राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकता है।
जब 'युद्ध' या 'बाह्य आक्रमण' के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की जाती है, तो इसे 'बाह्य आपातकाल' के रूप में जाना जाता है।
दूसरी ओर, जब 'सशस्त्र विद्रोह' के आधार पर आपातकाल की घोषणा की जाती है, तो इसे 'आंतरिक आपातकाल' के रूप में जाना जाता है।
'सशस्त्र विद्रोह' शब्द को 44वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में जोड़ा गया था। इस शब्द से पहले इसे ‘आंतरिक अशांति’ के रूप में जाना जाता था।
Join 📌 @UppscZone
👍2
निम्न में से कौन सा कथन आपातकालीन प्रावधान के संबंध में सही नहीं हैं -
Anonymous Quiz
0%
ये प्रावधान केंद्र सरकार को किसी भी असामान्य स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम बनाते हैं।
13%
भारतीय संविधान में आपातकालीन प्रावधान भारत सरकार अधिनियम 1935 से लिये गए हैं।
13%
आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों का निलंबन वीमर (जर्मन) संविधान से लिया गया है।
75%
आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों का निलंबन कनाडा के संविधान से लिया गया है।
👍1
निम्न में से किस आधार पर किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता हैं -
1.जब राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार चलने में सक्षम न हो।
2.जब भी कोई राज्य केंद्र के किसी निर्देश का पालन करने या उसे लागू करने में विफल रहता हो।
1.जब राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार चलने में सक्षम न हो।
2.जब भी कोई राज्य केंद्र के किसी निर्देश का पालन करने या उसे लागू करने में विफल रहता हो।
Anonymous Quiz
33%
केवल कथन 1
11%
केवल कथन 2
44%
कथन 1और 2 दोनों
11%
कोई नहीं
👍1
Secure PCS
निम्न में से किस आधार पर किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता हैं -
1.जब राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार चलने में सक्षम न हो।
2.जब भी कोई राज्य केंद्र के किसी निर्देश का पालन करने या उसे लागू करने में विफल रहता हो।
1.जब राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार चलने में सक्षम न हो।
2.जब भी कोई राज्य केंद्र के किसी निर्देश का पालन करने या उसे लागू करने में विफल रहता हो।
व्याख्या
'राष्ट्रपति शासन लगाने का आधार:
राष्ट्रपति शासन को अनुच्छेद 356 के तहत दो आधारों पर घोषित किया जा सकता है:-
1.अनुच्छेद 356 राष्ट्रपति को राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा जारी करने का अधिकार देता है, यदि राज्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें किसी राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार चलने में सक्षम न हो तो राष्ट्रपति अनुच्छेद 356 का उपयोग कर राष्ट्रपति शासन लगा सकता है।
2.अनुच्छेद 365 के अनुसार, जब भी कोई राज्य केंद्र के किसी निर्देश का पालन करने या उसे लागू करने में विफल रहता है, तो राष्ट्रपति के लिये यह मानना वैध होगा कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें राज्य की सरकार संविधान
Join 📌 @UppscZone
'राष्ट्रपति शासन लगाने का आधार:
राष्ट्रपति शासन को अनुच्छेद 356 के तहत दो आधारों पर घोषित किया जा सकता है:-
1.अनुच्छेद 356 राष्ट्रपति को राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा जारी करने का अधिकार देता है, यदि राज्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें किसी राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार चलने में सक्षम न हो तो राष्ट्रपति अनुच्छेद 356 का उपयोग कर राष्ट्रपति शासन लगा सकता है।
2.अनुच्छेद 365 के अनुसार, जब भी कोई राज्य केंद्र के किसी निर्देश का पालन करने या उसे लागू करने में विफल रहता है, तो राष्ट्रपति के लिये यह मानना वैध होगा कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें राज्य की सरकार संविधान
Join 📌 @UppscZone
👍2
राष्ट्रपति शासन लगाने की घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा इसके जारी होने की तारीख से कितने समय के भीतर अनुमोदित किया जाना चाहिये-
Anonymous Quiz
21%
2 माह
7%
4 माह
57%
6 माह
14%
3 माह
👍1
Fact - सबसे ज्यादा राष्ट्रपति शासन इंदिरा गांधी के समय लगा (51बार)
Fact - इंद्र कुमार गुजराल के काल में एक भी राष्ट्रपति शासन नहीं लगा।
Fact - सबसे ज्यादा राष्ट्रपति शासन मणिपुर में लगाया गया (10 बार)
Fact- तेलंगाना ,छत्तीसगढ़ में एक भी राष्ट्रपति शासन नहीं लगा
Fact - राजस्थान में चार बार राष्ट्रपति शासन लग चुका है।
Join 📌 @UppscZone
👍4
Secure PCS
जम्मू-कश्मीर में सरकार गठन की तैयारी तेज, 6 साल बाद हटा राष्ट्रपति शासन रविवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा अधिसूचना जारी करते ही जम्मू-कश्मीर से राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया, जिससे केंद्र शासित प्रदेश में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया है। …
राष्ट्रपति शासन चर्चा में आया था तो इससे जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य और प्रश्न करा दिए गए जिससे कि अगर कोई प्रश्न परीक्षा में आए तो समस्या ना हो। उम्मीद है आपको करेंट अफेयर से स्टैटिक को जोड़कर बताई गई जानकारी पसंद आई होगी।
Join 📌 @UppscZone
Join 📌 @UppscZone
❤4