संवैधानिक निकाय
ये वे संस्था हैं जिनका उल्लेख भारत के संविधान में किया गया है और इसलिए इन्हें स्वतंत्र और अधिक शक्तिशाली माना जाता है।
उदाहरण:
चुनाव आयोग - अनुच्छेद 324
संघ लोक सेवा आयोग - अनुच्छेद 315 से 323
राज्य लोक सेवा आयोग- अनुच्छेद 315 से 323
वित्त आयोग - अनुच्छेद 280
SC आयोग - अनुच्छेद 338
ST आयोग- अनुच्छेद 338 A
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक- अनुच्छेद 148
भारत के महान्यायवादी- अनुच्छेद76
राज्य के महाधिवक्ता - अनुच्छेद 165
वैधानिक आयोग
यह एक ऐसे गैर-संवैधानिक निकाय हैं, जिसे संसद द्वारा स्थापित किया गया है।उदाहरण-
ये संस्थायें देश के संविधान में लिखित नहीं हैं, अर्थात इनके गठन के लिए केंद्र सरकार को संसद में बिल पास करना पड़ता है, अतः वैधानिक निकाय को संसद के अधिनियम द्वारा स्थापित किया जाता है, इनका अस्तित्व और शक्तियां कानून द्वारा ही विनियमित होती हैं।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी)
राष्ट्रीय ओबीसी आयोग
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग
सशस्त्र बल न्यायाधिकरण
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग
राष्ट्रीय विधि आयोग
राष्ट्रीय महिला आयोग
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल
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प्रायः इन शब्दों में सबको कन्फ्यूजन रहता है आज आप सभी कन्फ्यूजन को दूर कर लीजिए।
किसी व्यक्ति या मंत्री को कुछ समय के लिए पद से हटा देना।
यह सुनिश्चित करने के लिए की कार्यवाही उचित तरीके से संचालित हो अध्यक्ष / सभापति को किसी सदस्य को सदन से हटाने के लिए मजबूर करने का अधिकार हैं।
जिस सदस्य को हटाने का आदेश दिया गया है, तुरंत ऐसा करेंगे और शेष दिन की बैठक के दौरान अनुपस्थित रहेंगे।
निलंबित सदस्य कक्ष में प्रवेश नहीं कर सकते या समितियों की बैठक में शामिल नहीं हो सकते
साथ ही वे अपने प्रश्नों का उत्तर पाने का अधिकार खो देते हैं।
इसका मतलब है पद से पूरी तरह हटा या निकाल देना
किसी मंत्री को बर्खास्त या हटाना नैतिक निर्णय का मामला है,कानूनी आवश्यकता का नहीं।
भंग करने का मतलब है कि संसद का सत्र खत्म हो जाए और नई संसद के लिए चुनाव कराए जाएं।
भंग होने पर सभी संसद सदस्यों की सदस्यता एक साथ समाप्त हो जाती है। जैसे- लोकसभा को राष्ट्रपति द्वारा भंग किया जाता है।
इसका मतलब विधेयक का पूरी तरह समाप्त हो जाना।
जो विधेयक लोकसभा से प्रस्तुत होकर निचले सदन में लंबित रह जाता है, उसे सदन के विघटन के साथ ही निरस्त मान लिया जाता है।
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निलंबन-
किसी व्यक्ति या मंत्री को कुछ समय के लिए पद से हटा देना।
यह सुनिश्चित करने के लिए की कार्यवाही उचित तरीके से संचालित हो अध्यक्ष / सभापति को किसी सदस्य को सदन से हटाने के लिए मजबूर करने का अधिकार हैं।
जिस सदस्य को हटाने का आदेश दिया गया है, तुरंत ऐसा करेंगे और शेष दिन की बैठक के दौरान अनुपस्थित रहेंगे।
निलंबित सदस्य कक्ष में प्रवेश नहीं कर सकते या समितियों की बैठक में शामिल नहीं हो सकते
साथ ही वे अपने प्रश्नों का उत्तर पाने का अधिकार खो देते हैं।
बर्खास्त-
इसका मतलब है पद से पूरी तरह हटा या निकाल देना
किसी मंत्री को बर्खास्त या हटाना नैतिक निर्णय का मामला है,कानूनी आवश्यकता का नहीं।
भंग-
भंग करने का मतलब है कि संसद का सत्र खत्म हो जाए और नई संसद के लिए चुनाव कराए जाएं।
भंग होने पर सभी संसद सदस्यों की सदस्यता एक साथ समाप्त हो जाती है। जैसे- लोकसभा को राष्ट्रपति द्वारा भंग किया जाता है।
निरस्त-
इसका मतलब विधेयक का पूरी तरह समाप्त हो जाना।
जो विधेयक लोकसभा से प्रस्तुत होकर निचले सदन में लंबित रह जाता है, उसे सदन के विघटन के साथ ही निरस्त मान लिया जाता है।
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प्रसादपर्यंत
यह शब्दावली मौलिक अधिकारों के अधीन है। इसमें बिना नोटिस दिये किसी की सेवाओं को किसी भी समय समाप्त करने की शक्ति होती है।
जैसे -
राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है।
अनुच्छेद 155
इसके अनुसार किसी राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है।
अनुच्छेद 310
इसके अनुसार सिविल सेवक (रक्षा सेवाओं, सिविल सेवाओं, अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्य अथवा केंद्र/राज्य के तहत सैन्य पदों अथवा नागरिक पदों पर नियुक्त कर्मी) राष्ट्रपति अथवा राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं।
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लाभ का पद -
संविधान में अनुच्छेद 102(1)(a) तथा अनुच्छेद 191(1)(a) में लाभ के पद का उल्लेख किया गया है, किंतु लाभ के पद को परिभाषित नहीं किया गया है।
विधायिका सरकार को नियंत्रित करती है, इस नियंत्रण को कम करने के लिये विधायकों को खुश करने एवं लाभ पहुँचाने हेतु उन्हें लाभ के कुछ पद प्रदान कर दिए जाते हैं।
जैसे - विधायको को संसदीय सचिव बना देते हैं, जो पद लाभ का पद हैं।
इस प्रकार विधायिका और कार्यपालिका के बीच शक्ति के पृथक्करण के सिद्धांत को कमजो़र किया जा सकता है।
Note
- पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान आदि ने अपनी विधानसभाओं में कानून बनाकर संसदीय सचिव के पद को लाभ के पद से बाहर रखने के लिये कानून का निर्माण किया है।
संवैधानिक प्रावधान
अनुच्छेद 102(1)(a) के अंतर्गत संसद सदस्यों के लिये तथा अनुच्छेद 191(1)(a) के तहत राज्य विधानसभा के सदस्यों के लिये ऐसे किसी अन्य पद पर को धारण करने की मनाही है जहाँ वेतन, भत्ते या अन्य दूसरी तरह के सरकारी लाभ मिलते हों।
अगर कोई सांसद/विधायक किसी लाभ के पद पर आसीन पाया जाता है तो संसद या संबंधित विधानसभा में उसकी सदस्यता को अयोग्य करार दिया जा सकता है।
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मंत्रिपरिषद और मंत्रिमंडल में अंतर
1.मंत्रिपरिषद का संविधान में मूलत: वर्णन अनुच्छेद- 74, 75, 78 में हैं, जबकि मंत्रिमंडल शब्द मूल संविधान में नहीं था, इसे 44वें संविधान संशोधन 1978 में अनुच्छेद 352 जोड़ा गया था।
2.मंत्री परिषद एक बड़ा निकाय है जिसमें 70 से 75 मंत्री होते हैं, जबकि मंत्रिमंडल मंत्रिपरिषद का ही लघु निकाय है, जिसमें 15 से 20 मंत्री होते हैं।
3.मंत्रिपरिषद में तीनों प्रकार के मंत्री आते हैं - कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री, उप मंत्री जबकि मंत्रिमंडल में केवल कैबिनेट मंत्री आते हैं।
4.संवैधानिक व सैद्धांतिक रूप से समस्त शक्तियां मंत्रिपरिषद को सौंप दी गई है, पर यह कागजी निकाय है जबकि व्यवहार में इनका प्रयोग मंत्रिमंडल करता है।
5. मंत्रिमंडल द्वारा किए गए निर्णय का क्रियान्वयन मंत्रिपरिषद करती है।
6.मंत्रिमंडल निर्णय करता है, मंत्रिपरिषद को निर्देश देता है तथा निगरानी करता है।
7.मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदाई होती है, तथा मंत्रिमंडल मंत्रिपरिषद की लोकसभा प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व को लागू करती
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नोट: ये प्रश्न लगभग लोग पूछ लेते हैं कि मंत्रिपरिषद और मंत्रिमंडल में अंतर बताओ।
अब आप बता लेंगे न?
1.मंत्रिपरिषद का संविधान में मूलत: वर्णन अनुच्छेद- 74, 75, 78 में हैं, जबकि मंत्रिमंडल शब्द मूल संविधान में नहीं था, इसे 44वें संविधान संशोधन 1978 में अनुच्छेद 352 जोड़ा गया था।
2.मंत्री परिषद एक बड़ा निकाय है जिसमें 70 से 75 मंत्री होते हैं, जबकि मंत्रिमंडल मंत्रिपरिषद का ही लघु निकाय है, जिसमें 15 से 20 मंत्री होते हैं।
3.मंत्रिपरिषद में तीनों प्रकार के मंत्री आते हैं - कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री, उप मंत्री जबकि मंत्रिमंडल में केवल कैबिनेट मंत्री आते हैं।
4.संवैधानिक व सैद्धांतिक रूप से समस्त शक्तियां मंत्रिपरिषद को सौंप दी गई है, पर यह कागजी निकाय है जबकि व्यवहार में इनका प्रयोग मंत्रिमंडल करता है।
5. मंत्रिमंडल द्वारा किए गए निर्णय का क्रियान्वयन मंत्रिपरिषद करती है।
6.मंत्रिमंडल निर्णय करता है, मंत्रिपरिषद को निर्देश देता है तथा निगरानी करता है।
7.मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदाई होती है, तथा मंत्रिमंडल मंत्रिपरिषद की लोकसभा प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व को लागू करती
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नोट: ये प्रश्न लगभग लोग पूछ लेते हैं कि मंत्रिपरिषद और मंत्रिमंडल में अंतर बताओ।
अब आप बता लेंगे न?
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A.सामान्य बहुमत
उपस्थिति व मतदान का बहुमत (50%+1)
उदाहरण - लोकसभा कुल 543
मान लीजिए उपस्थित हुए 500
मतदान में भाग लिया 400 तो इसका 50%+1होगा - 201✔️
B.प्रभावी बहुमत
तात्कालिक समस्त सदस्यों का बहुमत (50%+1)
उदाहरण - लोकसभा कुल 543
माना इनमें से (मौत ,जेल ,अयोग्य)13 रिक्त है, तो तात्कालिक सदस्य होंगे - 530 इसका (50%+1) होगा - 266✔️
C.पूर्ण /निरपेक्ष बहुमत :-
सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत (50%+1)
उदाहरण -
लोकसभा कुल 543 का 50%+1 होगा - 272✔️
D.विशेष बहुमत (4प्रकार )
1.सदन में उपस्थित वह मतदान करने वालों का दो तिहाई बहुमत
उदाहरण - राज्यसभा
कुल सदस्य 245
माना उपस्थित हुए 110
मतदान किया 100
तो 100का 2/3= 66✔️
2.सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत व उपस्थित व मतदान का 2/3 बहुमत।
उदाहरण -
कुल सदस्य संख्या 543 तो इसका बहुमत (50%+1) - 272
माना उपस्थित 510 और मतदान किया 500 ने तो 500 का 2/3 = 333✔️
3.कुल सदस्य संख्या का बहुमत व उपस्थिति व मतदान का 2/3 बहुमत साथ ही आधे राज्यों के विधानमंडलों का अनुसमर्थन(साधारण बहुमत- 50%1)उदाहरण:
संविधान संशोधन (अनुच्छेद 368) ✔️
ऊपर (2नंबर) वाला समान ही होगा केवल आधे राज्यों से साधारण बहुमत से पारित होना जरूरी है।
4.लोकसभा की कुल सदस्य संख्या का 2/3 बहुमत
जैसे - लोकसभा कुल सदस्य 543 का 2/3 = 362 ✔️
उदाहरण -
राष्ट्रपति पर महाभियोग (अनुच्छेद 61)
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#_Article_16 :-लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता
📌अनुच्छेद16(1):-
राज्य के अधीन किसी पद पर नियुक्ति से संबंधित विषयों में सभी नागरिकों के लिए अवसर की समता होगी।
📌अनुच्छेद16(2):-
राज्य के अधीन किसी नियोजन या पद के संबंध में केवल धर्म, मूल वंश ,जाति ,लिंग ,जन्म स्थान, निवास या इनमें से किसी के आधार पर न तो कोई नागरिक अपात्र होगा और न उनसे विभेद किया जाएगा.
📌अनुच्छेद16(1)व(2 ):-
किसी भी नागरिक के साथ केवल धर्म ,मूल वंश जाति, लिंग, जन्म स्थान ,निवास के आधार पर सरकारी नौकरी में भेदभाव नहीं किया जाएगा
📌अनुच्छेद16(3):-
सरकारी नौकरियों में संसद निवास स्थान के आधार पर भेदभाव की इजाजत दे सकती है ,पर राज्य विधान मंडल ऐसा नहीं कर सकता।
📌अनुच्छेद16(4):-
पिछड़े वर्ग को सरकारी नौकरियों में आरक्षण(SC ST OBC)
नोट:अनुच्छेद16(3)व(4)लोक नियोजन में अवसर की समता के अपवाद
📌अनुच्छेद16(4)A:-
SC, ST को सरकारी नौकरियों की पदोन्नति आरक्षण।
📌अनुच्छेद16(5):-
धर्म के आधार पर विभेद की राज्य को अनुमति देता है।
📌अनुच्छेद16(6):-
आर्थिक रूप से कमजोर(EWS)को सरकारी नौकरियों में 10% आरक्षण(103वा संविधान संशोधन 2019)
#Source__Bare_act
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सलाह परामर्श सिफारिश में अंतर
✅सलाह व्यक्तिगत मार्गदर्शन होती हैं,जो अनुभव पर आधारित होती हैं।
सलाह ज्ञान के दायरे में नहीं आती जबकि समझदारी के दायरे आती है।
यानि कि जिसको सलाह दी जा रही है वह माने या न माने वो उसकी समझ पर निर्भर करता है।
जबकि -
मंत्रीपरिषद द्वारा राष्ट्रपति को दी गई सलाह राष्ट्रपति को मानना बाध्यकारी है, क्योंकि यहां नीति निर्माण में यह जरूरी हो जाता है।
सलाह किसी को दी जाती है ,जबकि परामर्श किया जाता है।
✅परामर्श का अर्थ होता है मार्गदर्शन प्रदान करना -
जैसे -
प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति से मंत्रियों के विभागों के आवंटन के लिए परामर्श करता है।
✅सिफारिश किसी विशेष कार्यवाही के लिए औपचारिक प्रस्ताव या समर्थन होता हैं। यानी कि आपको वह करना चाहिए जो आपको सिफारिश देने वाला अनुरोध करें
जैसे -
राष्ट्रपति सारे विधाई कार्य प्रधानमंत्री की सिफारिश पर करते हैं।
प्रधानमंत्री राष्ट्रपति से मंत्रियों को हटाने संबंधित सिफारिश करता है।
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इंडिया , ब्राजील तथा साउथ अफ्रीका का संयुक्त नौ सैन्य अभ्यास इबसामार - IBSAMAR 8 - दक्षिण अफ्रीका के साइमन टाउन में सम्पन्न हुआ ।
इसमे भारत के आईएनएस तलवार ने भाग लिया।
#current_affairs
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इबसामार -8 (IBSAMAR - 2024) नामक नौसेना अभ्यास के बारे में असत्य विकल्प चुनिये-
1. यह दक्षिण अफ्रीका में आयोजित हुआ। 2. इसमे भारत के ' INS तलवार' ने भाग लिया।
1. यह दक्षिण अफ्रीका में आयोजित हुआ। 2. इसमे भारत के ' INS तलवार' ने भाग लिया।
Anonymous Quiz
33%
1 और 2 दोनों
22%
केवल 1
11%
केवल 2
33%
न तो 1 न ही 2
👍2
एशियाई विकास बैंक(Asian Development Bank):–
🔸19 दिसम्बर 1966" को स्थापना।
क्षेत्रीय विकास बैंक" के रूप में।
🔸सदस्य–68(49 Indo-pacific क्षेत्र से+19 गैर-क्षेत्रीय सदस्य)।
०भारत इसका संस्थापक सदस्य है।
०सबसे बड़े शेयरधारक:–
1.जापान(15.677%)।
2.यूएसए(15.567%)।
3.चीन(6.473%)।
4 भारत (5.812%)।
०मुख्यालय–मनीला(फिलीपींस)।
०मुख्य उद्देश्य–आर्थिक विकास, गरीबी उन्मूलन, क्षेत्रीय सहयोग।
#PrelimsFacts
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🔸19 दिसम्बर 1966" को स्थापना।
क्षेत्रीय विकास बैंक" के रूप में।
🔸सदस्य–68(49 Indo-pacific क्षेत्र से+19 गैर-क्षेत्रीय सदस्य)।
०भारत इसका संस्थापक सदस्य है।
०सबसे बड़े शेयरधारक:–
1.जापान(15.677%)।
2.यूएसए(15.567%)।
3.चीन(6.473%)।
4 भारत (5.812%)।
०मुख्यालय–मनीला(फिलीपींस)।
०मुख्य उद्देश्य–आर्थिक विकास, गरीबी उन्मूलन, क्षेत्रीय सहयोग।
#PrelimsFacts
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👍3
भारत की शास्त्रीय भाषाएं
#prelims #upsc #uppcs #currentaffairs
विस्तृत जानकारी
PIB संदर्भ
प्रश्न
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