🔳 पर्यावरण संबंधी महत्त्वपूर्ण दिवस
🪸विश्व आर्द्रभूमि दिवस - 02 फरवरी
🦥विश्व वन्यजीव दिवस - 03 मार्च
🌳 अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस - 21 मार्च
💧विश्व जल दिवस - 22 मार्च
🌚विश्व मौसम विज्ञान दिवस - 23 मार्च
🌍पृथ्वी दिवस - 22 अप्रैल
🪷अंतर्राष्ट्रीय जैविक विविधता दिवस - 22 मई
🌻विश्व पर्यावरण दिवस - 05 जून
💦विश्व महासागर दिवस - 08 जून
🌊अंतर्राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन दिवस - 21 जून
🌥ओजोन दिवस - 16 सितम्बर
🦧विश्व पशु दिवस - 4 अक्टूबर
🐬विश्व मत्स्य पालन दिवस - 21 नवंबर
🐾विश्व मृदा दिवस - 05 दिसम्बर
🌘अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस - 11 दिसंबर
#Impfacts #prelims #UPPCSpre2024
*🟢Member of Collective Security Treaty Organization(CSTO)*
✅ *Tricks:-* KKR's BAT
✅K - Kazakhstan
✅K - Kyrgyzstan
✅R - Russia
✅B - Belarus
✅A - Armenia
✅T - Tajikistan
Note : Always remember Turkmenistan is like Switzerland avoid any international group and follow positive neutrality.
✅ *Tricks:-* KKR's BAT
✅K - Kazakhstan
✅K - Kyrgyzstan
✅R - Russia
✅B - Belarus
✅A - Armenia
✅T - Tajikistan
Note : Always remember Turkmenistan is like Switzerland avoid any international group and follow positive neutrality.
👍1
केन्द्रीय गृहमंत्री ने एक अहम फैसले में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में पांच नए जिले बनाये जाने की घोषणा की है. केंद्र सरकार ने लद्दाख में ज़ांस्कर, द्रास, शाम, नुब्रा और चांगथांग नामक पांच नए जिलों का गठन करने का निर्णय लिया है. फिलहाल लद्दाख में केवल दो जिले हैं - लेह और कारगिल. दोनों जिलों के पास अपनी स्वायत्त जिला परिषदें हैं, जो उन्हें संचालित करती हैं. नए जिलों के गठन के बाद, लद्दाख में कुल मिलाकर सात जिले हो जाएंगे.
*Technical Recession*
⚛Consecutively two quarters of economic contraction.
⚛It lasts for a shorter period of time.
⚛It is mainly used to snapshot the trends in GDP.
⚛Only GDP is the criteria to measure technical recession.
⚛Recession — Slowdown or a massive contraction in economic activities for a long enough period.
⚛Consecutively two quarters of economic contraction.
⚛It lasts for a shorter period of time.
⚛It is mainly used to snapshot the trends in GDP.
⚛Only GDP is the criteria to measure technical recession.
⚛Recession — Slowdown or a massive contraction in economic activities for a long enough period.
👍1
ब्रह्मपुत्र नदी:
📌दाहिनी ओर से मिलने वाली नदियां:
📍सुबनसिरी
📍कामेंग
📍मानस
📍संकोश
📍रैंडक
📍जलढाका
📍तीस्ता
📌बायीं ओर से मिलने वाली नदियां:
📍सियांग
📍दिबांग
📍लोहित
📍बूढ़ी दिहांग
📍घनसीरी
📍कोपिली
#river #geo
लंबाई –2900 किलोमीटर (भारत में 916 KM)
उद्गम: चेमायुंगडूंग ग्लेशियर
📌दाहिनी ओर से मिलने वाली नदियां:
📍सुबनसिरी
📍कामेंग
📍मानस
📍संकोश
📍रैंडक
📍जलढाका
📍तीस्ता
📌बायीं ओर से मिलने वाली नदियां:
📍सियांग
📍दिबांग
📍लोहित
📍बूढ़ी दिहांग
📍घनसीरी
📍कोपिली
#river #geo
👍1
🤟 *सुबह की शुरुआत current affairs के साथ* 🤟
🇮🇳 हाल ही में लद्दाख में *पांच नए जिले* बनाने का एलान किया है।
⭐ हाल ही में पीएम मोदी ने *मजराष्ट्र में* 11 लाख नई *लखपति दीदियों* को प्रमाण-पत्र वितरित किए हैं।
🤟 *चिराग पासवान* 5 साल के लिए फिर से *लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष* चुने गए।
🇺🇸🚀 नासा के दो अंतरिक्ष यात्री, *सुनीता विलियम्स और बैरी विल्मोर* स्पेसएक्स के साथ *फरवरी 2025* में पृथ्वी पर लौटेंगे।
💯 हाल ही में भारत ने अपना पहला पुन: प्रयोज्य हाइब्रिड रॉकेट *RHUMI 1* लॉन्च किया है।
📕 *पीयूष गोयल* ने निवेश, द्विपक्षीय व्यापार पर चर्चा के लिए *सिंगापुर में* शीर्ष कॉर्पोरेट नेताओं से मुलाकात की।
✒ हाल ही में भारत की पहली महिला *राष्ट्रीय रेसिंग चैंपियन डायना पुंडोले* बनीं हैं।
✏ हाल ही में *महाराष्ट्र* यूनिफाइड पेंशन स्कीम लागू करने वाला *पहला राज्य* बन गया है।
💻 हाल ही में भारत के पहले *रीयूजेबल हाइब्रिड रॉकेट* का सफल परीक्षण *चेन्नई* किया गया है।
🏆 हाल ही में एशियाई सर्फिंग चैंपियनशिप 2024 में भारतीय टीम ने *रजत पदक* जीता है।
*पसंद आये तो LIKE जरूर करें*❤
*#daily_current_affairs*
*#current_affairs*
*#today_current_affairs*
🇮🇳 हाल ही में लद्दाख में *पांच नए जिले* बनाने का एलान किया है।
⭐ हाल ही में पीएम मोदी ने *मजराष्ट्र में* 11 लाख नई *लखपति दीदियों* को प्रमाण-पत्र वितरित किए हैं।
🤟 *चिराग पासवान* 5 साल के लिए फिर से *लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष* चुने गए।
🇺🇸🚀 नासा के दो अंतरिक्ष यात्री, *सुनीता विलियम्स और बैरी विल्मोर* स्पेसएक्स के साथ *फरवरी 2025* में पृथ्वी पर लौटेंगे।
💯 हाल ही में भारत ने अपना पहला पुन: प्रयोज्य हाइब्रिड रॉकेट *RHUMI 1* लॉन्च किया है।
📕 *पीयूष गोयल* ने निवेश, द्विपक्षीय व्यापार पर चर्चा के लिए *सिंगापुर में* शीर्ष कॉर्पोरेट नेताओं से मुलाकात की।
✒ हाल ही में भारत की पहली महिला *राष्ट्रीय रेसिंग चैंपियन डायना पुंडोले* बनीं हैं।
✏ हाल ही में *महाराष्ट्र* यूनिफाइड पेंशन स्कीम लागू करने वाला *पहला राज्य* बन गया है।
💻 हाल ही में भारत के पहले *रीयूजेबल हाइब्रिड रॉकेट* का सफल परीक्षण *चेन्नई* किया गया है।
🏆 हाल ही में एशियाई सर्फिंग चैंपियनशिप 2024 में भारतीय टीम ने *रजत पदक* जीता है।
*पसंद आये तो LIKE जरूर करें*❤
*#daily_current_affairs*
*#current_affairs*
*#today_current_affairs*
*प्रसिद्ध केशवानंद भारती वाद (1973) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा कथन सही नहीं हैं?
Anonymous Quiz
0%
1. इस वाद में, उच्चतम न्यायालय द्वारा संविधान की मूल संरचना का सिद्धांत प्रतिपादित किया गया था।
50%
2. इस वाद में, उच्चतम न्यायालय ने उस निर्णय को प्रभावी रखा, जो उसने गोलकनाथ वाद (1967) में दिया था।
17%
3. इस वाद पर निर्णय करने हेतु 13 न्यायाधीशों की एक पीठ गठित की गई थी।
33%
इनमें से कोई नहीं
Secure PCS
*प्रसिद्ध केशवानंद भारती वाद (1973) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा कथन सही नहीं हैं?
*_व्याख्या_*
कथन 1 सही हैः केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य वाद (वर्ष 1973) भारत के इतिहास में एक ऐतिहासिक मामला है, क्योंकि इसके निर्णय में, उच्चतम न्यायालय ने संविधान की मूल संरचना का सिद्धांत प्रतिपादित किया था।
• भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एस. एम. सीकरी ने संक्षेप में निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से अपने निर्णय को प्रस्तुत कियाः (1) गोलकनाथ वाद में बहुमत का निर्णय सही नहीं था और इसे निरस्त कर दिया जाना चाहिए। इस प्रकार, उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 1967 के गोलकनाथ वाद में दिए गए निर्णय को प्रभावी नहीं रखा। इसलिए कथन 2 सही नहीं है।
(2) अनुच्छेद 388 में प्रयुक्त संशोधन शब्द संसद को संविधान के भाग II सहित इसके अन्य उपबंधों को परिवर्तित, निरसित अथवा रद्द करने के लिए प्राधिकृत करता है। हालांकि, संविधान की मूल संरचना को नष्ट नहीं किया जा सकता है।
(3) अनुच्छेद 368 में संशोधन की शक्ति पर कोई अंतर्निहित और लक्षित सीमाएँ आरोपित नहीं की गई हैं। (
4) 24वां, 25वां और 29वां संशोधन अपनी संपूर्णता के साथ मान्य हैं।
(5) अनुच्छेद 31 (2) के अनुसार, कोई संपत्ति, सार्वजनिक प्रयोजन के लिए ही और केवल ऐसी विधि के प्राधिकार से अनिवार्यतः अर्जित या अधिग्रहित की जाएगी, अन्यथा नहीं और ऐसी किसी विधि किसी न्यायालय में इस आधार पर प्रश्नगत नहीं की जाएगी।
(6) अनुच्छेद 31C के अनुसार, जहाँ विधि किसी संपत्ति के स्वामित्व का या कब्जा रखने के अधिकार का अंतरण राज्य या किसी ऐसे निगम को, जो कि राज्य के स्वामित्व या नियंत्रण के अधीन है, करने के लिए उपबंध नहीं करती है वहाँ, इस बात के होते हुए भी कि वह किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से वंचित करती है, उसकी बाबत यह नहीं समझा जाएगा कि वह संपत्ति के अनिवार्य अर्जन या अधिग्रहण के लिए उपबंध करती है।
• प्राधिकार और एक पूर्व निर्णय का प्रभाव (अनुच्छेद 141) न्यायाधीशों की संख्या पर निर्भर करता है। सामान्यतः न्यायालय के किसी भी निर्णय को निरस्त करने के लिए एक संवैधानिक पीठ में उस निर्णय में शामिल न्यायाधीशों की संख्या के बराबर या उस संख्या से अधिक न्यायाधीश होने चाहिए। गोलकनाथ वाद में गठित पीठ में 11 न्यायाधीश सम्मिलित थे, इसलिए इस वाद के समाधान के लिए मुख्य न्यायाधीश सीकरी ने 13 न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ का गठन करने का निर्णय किया, जो इस तरह की सबसे बड़ी पीठ थी। इसलिए कथन 3 सही है।
JOIN US @UPPSCZONE
कथन 1 सही हैः केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य वाद (वर्ष 1973) भारत के इतिहास में एक ऐतिहासिक मामला है, क्योंकि इसके निर्णय में, उच्चतम न्यायालय ने संविधान की मूल संरचना का सिद्धांत प्रतिपादित किया था।
• भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एस. एम. सीकरी ने संक्षेप में निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से अपने निर्णय को प्रस्तुत कियाः (1) गोलकनाथ वाद में बहुमत का निर्णय सही नहीं था और इसे निरस्त कर दिया जाना चाहिए। इस प्रकार, उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 1967 के गोलकनाथ वाद में दिए गए निर्णय को प्रभावी नहीं रखा। इसलिए कथन 2 सही नहीं है।
(2) अनुच्छेद 388 में प्रयुक्त संशोधन शब्द संसद को संविधान के भाग II सहित इसके अन्य उपबंधों को परिवर्तित, निरसित अथवा रद्द करने के लिए प्राधिकृत करता है। हालांकि, संविधान की मूल संरचना को नष्ट नहीं किया जा सकता है।
(3) अनुच्छेद 368 में संशोधन की शक्ति पर कोई अंतर्निहित और लक्षित सीमाएँ आरोपित नहीं की गई हैं। (
4) 24वां, 25वां और 29वां संशोधन अपनी संपूर्णता के साथ मान्य हैं।
(5) अनुच्छेद 31 (2) के अनुसार, कोई संपत्ति, सार्वजनिक प्रयोजन के लिए ही और केवल ऐसी विधि के प्राधिकार से अनिवार्यतः अर्जित या अधिग्रहित की जाएगी, अन्यथा नहीं और ऐसी किसी विधि किसी न्यायालय में इस आधार पर प्रश्नगत नहीं की जाएगी।
(6) अनुच्छेद 31C के अनुसार, जहाँ विधि किसी संपत्ति के स्वामित्व का या कब्जा रखने के अधिकार का अंतरण राज्य या किसी ऐसे निगम को, जो कि राज्य के स्वामित्व या नियंत्रण के अधीन है, करने के लिए उपबंध नहीं करती है वहाँ, इस बात के होते हुए भी कि वह किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से वंचित करती है, उसकी बाबत यह नहीं समझा जाएगा कि वह संपत्ति के अनिवार्य अर्जन या अधिग्रहण के लिए उपबंध करती है।
• प्राधिकार और एक पूर्व निर्णय का प्रभाव (अनुच्छेद 141) न्यायाधीशों की संख्या पर निर्भर करता है। सामान्यतः न्यायालय के किसी भी निर्णय को निरस्त करने के लिए एक संवैधानिक पीठ में उस निर्णय में शामिल न्यायाधीशों की संख्या के बराबर या उस संख्या से अधिक न्यायाधीश होने चाहिए। गोलकनाथ वाद में गठित पीठ में 11 न्यायाधीश सम्मिलित थे, इसलिए इस वाद के समाधान के लिए मुख्य न्यायाधीश सीकरी ने 13 न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ का गठन करने का निर्णय किया, जो इस तरह की सबसे बड़ी पीठ थी। इसलिए कथन 3 सही है।
JOIN US @UPPSCZONE
👍2
संविधान के निर्माण और आम कानूनों को लागू करने के अलावा संविधान सभा ने निम्न कार्य भी किएः (निम्न तथ्यों को बहुत अच्छे से याद कर ले)
• संविधान सभा ने मई 1949 में राष्ट्रमंडल में भारत की सदस्यता का सत्यापन किया।
• संविधान सभा ने 22 जुलाई, 1947 को राष्ट्रीय ध्वज को अपनाया।
• संविधान सभा ने 24 जनवरी, 1950 को राष्ट्रीय गान को अपनाया।
• संविधान सभा ने 24 जनवरी, 1950 को राष्ट्रीय गीत को अपनाया।
• संविधान सभा ने 24 जनवरी, 1950 को डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में चुना।
👍1
कालक्रम की दृष्टि से निम्नलिखित घटनाओं में से कौनसी अंतिम थी?
Anonymous Quiz
11%
होम रूल आन्दोलन
0%
जलियावाला बाग
22%
खिलाफत आंदोलन
67%
मोपला विद्रोह
UPPCS, BPSC 2024 एवं UPSC 2025, में 2-3 प्रश्न आने की प्रबल संभावना
• रंगपुर विद्रोह - 1783
• नील विद्रोह - 1859-60
• पाबना विद्रोह - 1873-76
• दक्कन विद्रोह - 1874-75
• मुंडा विद्रोह - 1899-1900
• मोपला विद्रोह(1836 प्रथम चरण )
• मोपला विद्रोह ( 1921 द्वितीय चरण)
• होम रूल आंदोलन - 1916
• चम्पारण सत्याग्रह- 1917
• अहमदाबाद मिल मजदूरों का आंदोलन - 1918
• खेड़ा सत्याग्रह- 1918
• रौलेट एक्ट - 1919
• जलियांवाला बाग हत्याकांड- 13 अप्रैल 1919
• खिलाफत आंदोलन - 23 नवंबर 1919
• असहयोग आंदोलन- 1920-21
• चौरी - चौरा कांड- 4 फरवरी 1922
• गाँधी-दास पैक्ट- 1924
• काकोरी कांड- 9 अगस्त 1925
• साइमन कमीशन - 1927-28
• सविनय अवज्ञा आंदोलन- 1930
• प्रथम गोल मेज सम्मेलन- 12 नवंबर 1930
• गांधी- इरविन समझौता - 5 मार्च 1931
• द्वितीय गोलमेज सम्मेलन- 7 दिसंबर 1931
• तृतीय गोलमेज सम्मेलन- 17 नवंबर 1932
• पूना पैक्ट - सितंबर 1932
• अगस्त प्रस्ताव - 8 अगस्त 1940
• क्रिप्स प्रस्ताव - 11 मार्च 1942
• भारत छोड़ो आंदोलन - अगस्त 1942
• वेवेल योजना तथा शिमला सम्मेलन - 1945
• कैबिनेट मिशन- 1946
• संविधान सभा का चुनाव - जुलाई 1946
• रंगपुर विद्रोह - 1783
• नील विद्रोह - 1859-60
• पाबना विद्रोह - 1873-76
• दक्कन विद्रोह - 1874-75
• मुंडा विद्रोह - 1899-1900
• मोपला विद्रोह(1836 प्रथम चरण )
• मोपला विद्रोह ( 1921 द्वितीय चरण)
• होम रूल आंदोलन - 1916
• चम्पारण सत्याग्रह- 1917
• अहमदाबाद मिल मजदूरों का आंदोलन - 1918
• खेड़ा सत्याग्रह- 1918
• रौलेट एक्ट - 1919
• जलियांवाला बाग हत्याकांड- 13 अप्रैल 1919
• खिलाफत आंदोलन - 23 नवंबर 1919
• असहयोग आंदोलन- 1920-21
• चौरी - चौरा कांड- 4 फरवरी 1922
• गाँधी-दास पैक्ट- 1924
• काकोरी कांड- 9 अगस्त 1925
• साइमन कमीशन - 1927-28
• सविनय अवज्ञा आंदोलन- 1930
• प्रथम गोल मेज सम्मेलन- 12 नवंबर 1930
• गांधी- इरविन समझौता - 5 मार्च 1931
• द्वितीय गोलमेज सम्मेलन- 7 दिसंबर 1931
• तृतीय गोलमेज सम्मेलन- 17 नवंबर 1932
• पूना पैक्ट - सितंबर 1932
• अगस्त प्रस्ताव - 8 अगस्त 1940
• क्रिप्स प्रस्ताव - 11 मार्च 1942
• भारत छोड़ो आंदोलन - अगस्त 1942
• वेवेल योजना तथा शिमला सम्मेलन - 1945
• कैबिनेट मिशन- 1946
• संविधान सभा का चुनाव - जुलाई 1946
JOIN US @UPPSCZONE
👍1
कुछ समुद्री शैवाल सूक्ष्म होते हैं, जैसे कि फाइटोप्लांकटन जो पानी के स्तंभ में निलंबित रहते हैं और अधिकांश समुद्री खाद्य श्रृंखलाओं के लिए आधार प्रदान करते हैं। कुछ बहुत बड़े होते हैं, जैसे कि विशाल केल्प जो प्रचुर मात्रा में "जंगलों" में उगते हैं और समुद्र के तल पर अपनी जड़ों से पानी के नीचे रेडवुड की तरह ऊंचे होते हैं।
अधिकांश मध्यम आकार के होते हैं, लाल, हरे, भूरे और काले रंग के होते हैं, और लगभग हर जगह समुद्र तटों और तटरेखाओं पर बेतरतीब ढंग से बह जाते हैं।
स्थानीय भाषा में "समुद्री शैवाल" एक वास्तविक मिथ्या नाम है, क्योंकि खरपतवार एक ऐसा पौधा है जो इतनी तेज़ी से फैलता है कि यह उस निवास स्थान को नुकसान पहुंचा सकता है जहां यह जड़ जमा लेता है। (कुदज़ू पर विचार करें, कुख्यात "मील-ए-मिनट बेल" जो पूरे दक्षिण-पूर्व अमेरिका में जलमार्गों को अवरुद्ध करती है)। समुद्र के स्थिर और स्वतंत्र रूप से तैरने वाले "खरपतवार" न केवल असंख्य समुद्री जीवों के लिए भोजन और निवास दोनों के रूप में अत्यंत आवश्यक हैं, बल्कि वे भूमि-निवासियों, विशेष रूप से मानव प्रजाति को भी कई लाभ प्रदान करते हैं।
समुद्री शैवाल विटामिन, खनिज और फाइबर से भरपूर है, आयोडीन के महत्वपूर्ण स्रोत और स्वादिष्ट भी हो सकता है। कम से कम 1,500 सालों से, जापानी लोग कच्ची मछली, चिपचिपे चावल और अन्य सामग्री को नोरी नामक समुद्री शैवाल में लपेटकर खाते आ रहे हैं। इसका स्वादिष्ट परिणाम सुशी रोल है।
कई समुद्री शैवालों में सूजनरोधी और रोगाणुरोधी तत्व होते हैं। उनके ज्ञात औषधीय प्रभाव हज़ारों सालों से मौजूद हैं; प्राचीन रोम के लोग घावों, जलन और चकत्ते के उपचार के लिए उनका इस्तेमाल करते थे । वास्तविक साक्ष्य यह भी बताते हैं कि प्राचीन मिस्र के लोग स्तन कैंसर के उपचार के लिए उनका इस्तेमाल करते थे।
वास्तव में, कुछ समुद्री शैवाल में शक्तिशाली कैंसर-विरोधी तत्व होते हैं, जिनके बारे में शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि वे अंततः लोगों में घातक ट्यूमर और ल्यूकेमिया के उपचार में प्रभावी साबित होंगे। जबकि जापान में कैंसर की कम दर के लिए लंबे समय से आहार सोया को श्रेय दिया जाता था, अब मजबूत स्वास्थ्य के इस संकेतक का श्रेय आहार समुद्री शैवाल को दिया जाता है।
इन बहुमुखी समुद्री पौधों और शैवाल ने आर्थिक विकास में भी योगदान दिया है। विनिर्माण में उनके कई उपयोगों में से, वे टूथपेस्ट और फलों की जेली जैसे वाणिज्यिक सामानों में प्रभावी बंधन एजेंट (पायसीकारक) हैं, और जैविक सौंदर्य प्रसाधनों और त्वचा देखभाल उत्पादों में लोकप्रिय सॉफ़्नर (एमोलिएंट) हैं।
समुद्री शैवाल का उपयोग किस लिए किया जा सकता है?
प्रसाधन सामग्री
आप बिना सोचे-समझे हर दिन अपनी त्वचा की देखभाल या दांतों की देखभाल के लिए समुद्री शैवाल का इस्तेमाल कर सकते हैं! समुद्री शैवाल सौंदर्य प्रसाधनों जैसे क्रीम, साबुन, शैंपू और टूथपेस्ट में एक लोकप्रिय घटक है, इसके विभिन्न पोषक तत्वों और गुणों के कारण जो त्वचा को लाभ पहुंचा सकते हैं।
समुद्री शैवाल के अर्क तेल उत्पादन को नियंत्रित करने, त्वचा को नमी प्रदान करने और सूजनरोधी गुणों के कारण मुंहासे कम करने और कोलेजन उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं। इसलिए, अगली बार जब आप स्किनकेयर उत्पादों की खरीदारी करें, तो समुद्री शैवाल के अर्क वाले उत्पादों को देखना न भूलें।
दवा
समुद्री शैवाल का इस्तेमाल सदियों से औषधीय उद्देश्यों के लिए भी किया जाता रहा है। इसकी भरपूर पोषक सामग्री इसे श्वसन संबंधी बीमारियों, गठिया, सर्दी और इन्फ्लूएंजा के लिए एक बहुमुखी उपचार बनाती है।
समुद्री शैवाल स्नान का उपयोग मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द, एक्जिमा से राहत पाने और सूजन को कम करने के लिए भी किया जाता है।
इसके अतिरिक्त, समुद्री शैवाल से प्राप्त कैरेजेनान और एल्गिन्स का उपयोग फार्मास्यूटिकल उत्पादों में बाइंडर, स्टेबलाइजर्स और इमल्सीफायर्स के रूप में किया जाता है, तथा समुद्री शैवाल से प्राप्त पॉलीसैकेराइड्स का उपयोग घावों पर पट्टी बांधने के लिए किया जाता है।
जैव ईंधन
समुद्री शैवाल जैव ईंधन का एक आशाजनक स्रोत है। यह अवायवीय पाचन के लिए उपयुक्त है, जो बायोगैस बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली प्रक्रिया है, और किण्वन, जो इथेनॉल बनाता है। समुद्री शैवाल जैव ईंधन एक अक्षय ऊर्जा स्रोत है जो पर्यावरण में अतिरिक्त उत्सर्जन में योगदान नहीं देता है, क्योंकि इससे निकलने वाला कार्बन पहले से ही वायुमंडल से लिया जाता है।
खाद्य जल कैप्सूल
अधिकांश मध्यम आकार के होते हैं, लाल, हरे, भूरे और काले रंग के होते हैं, और लगभग हर जगह समुद्र तटों और तटरेखाओं पर बेतरतीब ढंग से बह जाते हैं।
स्थानीय भाषा में "समुद्री शैवाल" एक वास्तविक मिथ्या नाम है, क्योंकि खरपतवार एक ऐसा पौधा है जो इतनी तेज़ी से फैलता है कि यह उस निवास स्थान को नुकसान पहुंचा सकता है जहां यह जड़ जमा लेता है। (कुदज़ू पर विचार करें, कुख्यात "मील-ए-मिनट बेल" जो पूरे दक्षिण-पूर्व अमेरिका में जलमार्गों को अवरुद्ध करती है)। समुद्र के स्थिर और स्वतंत्र रूप से तैरने वाले "खरपतवार" न केवल असंख्य समुद्री जीवों के लिए भोजन और निवास दोनों के रूप में अत्यंत आवश्यक हैं, बल्कि वे भूमि-निवासियों, विशेष रूप से मानव प्रजाति को भी कई लाभ प्रदान करते हैं।
समुद्री शैवाल विटामिन, खनिज और फाइबर से भरपूर है, आयोडीन के महत्वपूर्ण स्रोत और स्वादिष्ट भी हो सकता है। कम से कम 1,500 सालों से, जापानी लोग कच्ची मछली, चिपचिपे चावल और अन्य सामग्री को नोरी नामक समुद्री शैवाल में लपेटकर खाते आ रहे हैं। इसका स्वादिष्ट परिणाम सुशी रोल है।
कई समुद्री शैवालों में सूजनरोधी और रोगाणुरोधी तत्व होते हैं। उनके ज्ञात औषधीय प्रभाव हज़ारों सालों से मौजूद हैं; प्राचीन रोम के लोग घावों, जलन और चकत्ते के उपचार के लिए उनका इस्तेमाल करते थे । वास्तविक साक्ष्य यह भी बताते हैं कि प्राचीन मिस्र के लोग स्तन कैंसर के उपचार के लिए उनका इस्तेमाल करते थे।
वास्तव में, कुछ समुद्री शैवाल में शक्तिशाली कैंसर-विरोधी तत्व होते हैं, जिनके बारे में शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि वे अंततः लोगों में घातक ट्यूमर और ल्यूकेमिया के उपचार में प्रभावी साबित होंगे। जबकि जापान में कैंसर की कम दर के लिए लंबे समय से आहार सोया को श्रेय दिया जाता था, अब मजबूत स्वास्थ्य के इस संकेतक का श्रेय आहार समुद्री शैवाल को दिया जाता है।
इन बहुमुखी समुद्री पौधों और शैवाल ने आर्थिक विकास में भी योगदान दिया है। विनिर्माण में उनके कई उपयोगों में से, वे टूथपेस्ट और फलों की जेली जैसे वाणिज्यिक सामानों में प्रभावी बंधन एजेंट (पायसीकारक) हैं, और जैविक सौंदर्य प्रसाधनों और त्वचा देखभाल उत्पादों में लोकप्रिय सॉफ़्नर (एमोलिएंट) हैं।
समुद्री शैवाल का उपयोग किस लिए किया जा सकता है?
प्रसाधन सामग्री
आप बिना सोचे-समझे हर दिन अपनी त्वचा की देखभाल या दांतों की देखभाल के लिए समुद्री शैवाल का इस्तेमाल कर सकते हैं! समुद्री शैवाल सौंदर्य प्रसाधनों जैसे क्रीम, साबुन, शैंपू और टूथपेस्ट में एक लोकप्रिय घटक है, इसके विभिन्न पोषक तत्वों और गुणों के कारण जो त्वचा को लाभ पहुंचा सकते हैं।
समुद्री शैवाल के अर्क तेल उत्पादन को नियंत्रित करने, त्वचा को नमी प्रदान करने और सूजनरोधी गुणों के कारण मुंहासे कम करने और कोलेजन उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं। इसलिए, अगली बार जब आप स्किनकेयर उत्पादों की खरीदारी करें, तो समुद्री शैवाल के अर्क वाले उत्पादों को देखना न भूलें।
दवा
समुद्री शैवाल का इस्तेमाल सदियों से औषधीय उद्देश्यों के लिए भी किया जाता रहा है। इसकी भरपूर पोषक सामग्री इसे श्वसन संबंधी बीमारियों, गठिया, सर्दी और इन्फ्लूएंजा के लिए एक बहुमुखी उपचार बनाती है।
समुद्री शैवाल स्नान का उपयोग मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द, एक्जिमा से राहत पाने और सूजन को कम करने के लिए भी किया जाता है।
इसके अतिरिक्त, समुद्री शैवाल से प्राप्त कैरेजेनान और एल्गिन्स का उपयोग फार्मास्यूटिकल उत्पादों में बाइंडर, स्टेबलाइजर्स और इमल्सीफायर्स के रूप में किया जाता है, तथा समुद्री शैवाल से प्राप्त पॉलीसैकेराइड्स का उपयोग घावों पर पट्टी बांधने के लिए किया जाता है।
जैव ईंधन
समुद्री शैवाल जैव ईंधन का एक आशाजनक स्रोत है। यह अवायवीय पाचन के लिए उपयुक्त है, जो बायोगैस बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली प्रक्रिया है, और किण्वन, जो इथेनॉल बनाता है। समुद्री शैवाल जैव ईंधन एक अक्षय ऊर्जा स्रोत है जो पर्यावरण में अतिरिक्त उत्सर्जन में योगदान नहीं देता है, क्योंकि इससे निकलने वाला कार्बन पहले से ही वायुमंडल से लिया जाता है।
खाद्य जल कैप्सूल
समुद्री शैवाल का उपयोग पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग विकल्प बनाने के लिए भी किया जा सकता है। नॉटप्ला, एक टिकाऊ पैकेजिंग कंपनी, ने समुद्री शैवाल से बने 'ऊहो' नामक खाद्य जल कैप्सूल विकसित किए हैं।
ऊहो एक खाद्य, बायोडिग्रेडेबल और स्वादहीन झिल्ली है जिसका उपयोग पानी और अन्य तरल पदार्थों को छोटे कैप्सूल या बुलबुले में संग्रहीत करने के लिए किया जा सकता है। ये कैप्सूल आयोजनों और त्यौहारों पर एकल-उपयोग वाली सर्विंग्स के लिए आदर्श हैं, जहाँ वे हर साल इस्तेमाल की जाने वाली लाखों प्लास्टिक की बोतलों की जगह ले सकते हैं।
ऊहो एक खाद्य, बायोडिग्रेडेबल और स्वादहीन झिल्ली है जिसका उपयोग पानी और अन्य तरल पदार्थों को छोटे कैप्सूल या बुलबुले में संग्रहीत करने के लिए किया जा सकता है। ये कैप्सूल आयोजनों और त्यौहारों पर एकल-उपयोग वाली सर्विंग्स के लिए आदर्श हैं, जहाँ वे हर साल इस्तेमाल की जाने वाली लाखों प्लास्टिक की बोतलों की जगह ले सकते हैं।
UPPSC, BPSC से संबंधित जानकारी, टेस्ट सीरीज या क्लास नोट के लिए आप बता सकते हैं आपको भेज दिया जायेगा
JOIN US @UPPSCZONE
JOIN US @UPPSCZONE
👍1
बैसाखी के सहारे किलिमंजारो फतह करने वाले पहले पुरुष
👉 बिहार के सारण जिले के पर्वतारोही उदय कुमार ने बैसाखी के सहारे किलिमंजारो पर्वत शिखर पर चढ़ाई कर तिरंगा फहराया।
👉 ग्रुप कैप्टन जय किशन के नेतृत्व में कंचनजंगा 2 किलिमंजारो मिशन के तहत यह कीर्तिमान स्थापित किया।
👉 किलिमंजारो अफ्रीकी देश तंजानिया का सबसे ऊंचा शिखर है।
#bpsc # uppsc #mountain #geo
JOIN US @UPPSCZONE
👉 बिहार के सारण जिले के पर्वतारोही उदय कुमार ने बैसाखी के सहारे किलिमंजारो पर्वत शिखर पर चढ़ाई कर तिरंगा फहराया।
👉 ग्रुप कैप्टन जय किशन के नेतृत्व में कंचनजंगा 2 किलिमंजारो मिशन के तहत यह कीर्तिमान स्थापित किया।
👉 किलिमंजारो अफ्रीकी देश तंजानिया का सबसे ऊंचा शिखर है।
#bpsc # uppsc #mountain #geo
JOIN US @UPPSCZONE
👍2