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कोई भी सरकारी नौकरी जिंदगी से बड़ी नहीं है।
कृपया सरकारी नौकरी को जिंदगी से ऊपर ना रखे आप लोग
मेहनत से पढ़िए जब तक पढ़ सकते हैं फिर सलेक्शन ना हो तो कहीं और देखिए
आपने आसपास घर परिवार में देखिए सबकी सरकारी नौकरी ही थोड़े ना हैं।
हाल ही में दो घटनाएं बहुत ज्यादा आहत की लोगों को
एक IPHONE वाली और दूसरी हरीश भाई की।
प्लिज भाई आप लोग ऐसे कदम कभी नहीं उठाईएगा।😢
कृपया सरकारी नौकरी को जिंदगी से ऊपर ना रखे आप लोग
मेहनत से पढ़िए जब तक पढ़ सकते हैं फिर सलेक्शन ना हो तो कहीं और देखिए
आपने आसपास घर परिवार में देखिए सबकी सरकारी नौकरी ही थोड़े ना हैं।
हाल ही में दो घटनाएं बहुत ज्यादा आहत की लोगों को
एक IPHONE वाली और दूसरी हरीश भाई की।
प्लिज भाई आप लोग ऐसे कदम कभी नहीं उठाईएगा।😢
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इसलिए हम लोग कोई कट ऑफ भी नहीं बताते हैं
हमारी तुक्केबाजी किसी को कितना परेशान कर सकती है हम समझते हैं।
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विटामिन के रासायनिक नाम
📍Trick - रथ एक टॉफी
विटामिन A- रेटिनॉल
विटामिन B- थायमिन
विटामिन C- एस्कॉर्बिक अम्ल
विटामिन D- केल्सीफेरोल
विटामिन E- टोकोफेरोल
विटामिन K- फिलीक्विनोन
B-1 to B-12 विटामिन के रासायनिक नाम
📍Trick - थारा न्यू पैंट पर वसा
B 1- थायमिन
B 2- राइबोफ्लेविन
B 3- नियासिन
B 5- पैंटोथेनिक अम्ल
B 6- पायरीडॉक्सिन
B 7- बायोटिन
B 12- साइनोकोबालामिन
#Trick
📍Trick - रथ एक टॉफी
विटामिन A- रेटिनॉल
विटामिन B- थायमिन
विटामिन C- एस्कॉर्बिक अम्ल
विटामिन D- केल्सीफेरोल
विटामिन E- टोकोफेरोल
विटामिन K- फिलीक्विनोन
B-1 to B-12 विटामिन के रासायनिक नाम
📍Trick - थारा न्यू पैंट पर वसा
B 1- थायमिन
B 2- राइबोफ्लेविन
B 3- नियासिन
B 5- पैंटोथेनिक अम्ल
B 6- पायरीडॉक्सिन
B 7- बायोटिन
B 12- साइनोकोबालामिन
#Trick
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जैव विविधता (Biodiversity) का अर्थ है पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीवों की विभिन्नता और उनकी बहुलता। सरल शब्दों में, किसी निश्चित क्षेत्र में पाए जाने वाले पेड़-पौधों, जीव-जंतुओं, सूक्ष्मजीवों और उनके पारिस्थितिकी तंत्र की विविधता को ही जैव विविधता कहते हैं।
1. जैव विविधता के स्तर (Levels of Biodiversity)
जैव विविधता को मुख्य रूप से तीन स्तरों पर विभाजित किया गया है:
व्हिटेकर (Whittaker) ने इसे तीन श्रेणियों में मापा है:
3. जैव विविधता के 'हॉटस्पॉट' (Biodiversity Hotspots)
यह अवधारणा 1988 में नॉर्मन मायर्स द्वारा दी गई थी। विश्व में कुल 36 हॉटस्पॉट हैं, जिनमें से भारत में मुख्य रूप से 4 क्षेत्र आते हैं:
4. जैव विविधता संरक्षण के तरीके
संरक्षण को दो मुख्य भागों में बांटा गया है:
5. महत्वपूर्ण तथ्य
जैव विविधता दिवस: 22 मई।
जैव विविधता शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग: वाल्टर जी. रोसेन (1985) ने किया।
भारत का जैव विविधता अधिनियम: 2002 में पारित हुआ।
सर्वाधिक जैव विविधता: भूमध्य रेखीय प्रदेशों (Equatorial regions) और उष्णकटिबंधीय वर्षावनों (जैसे- अमेज़न) में पाई जाती है।
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1. जैव विविधता के स्तर (Levels of Biodiversity)
जैव विविधता को मुख्य रूप से तीन स्तरों पर विभाजित किया गया है:
आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity): एक ही प्रजाति के भीतर जीन्स की विभिन्नता (जैसे- आम की सैकड़ों किस्में)।2. जैव विविधता का मापन (Measurement)
प्रजाति विविधता (Species Diversity): एक क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों की संख्या (जैसे- शेर, हाथी, हिरण का एक साथ होना)।
पारिस्थितिकी तंत्र विविधता (Ecosystem Diversity): विभिन्न प्रकार के आवासों की विविधता (जैसे- मरुस्थल, वर्षावन, और मैंग्रोव)।
व्हिटेकर (Whittaker) ने इसे तीन श्रेणियों में मापा है:
अल्फा (α) विविधता: एक ही समुदाय या पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर की विविधता।
बीटा (β) विविधता: दो अलग-अलग समुदायों के बीच प्रजातियों का अंतर।
गामा (γ) विविधता: एक पूरे भौगोलिक क्षेत्र (जैसे- पूरा देश) की कुल विविधता।
3. जैव विविधता के 'हॉटस्पॉट' (Biodiversity Hotspots)
यह अवधारणा 1988 में नॉर्मन मायर्स द्वारा दी गई थी। विश्व में कुल 36 हॉटस्पॉट हैं, जिनमें से भारत में मुख्य रूप से 4 क्षेत्र आते हैं:
पश्चिमी घाट (Western Ghats) - सबसे महत्वपूर्ण।
पूर्वी हिमालय (Eastern Himalayas)।
इंडो-बर्मा क्षेत्र।
सुंडालैंड (निकोबार द्वीप समूह सहित)।
4. जैव विविधता संरक्षण के तरीके
संरक्षण को दो मुख्य भागों में बांटा गया है:
स्व-स्थाने (In-situ): जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में ही बचाना।
उदाहरण: राष्ट्रीय उद्यान (National Parks), वन्यजीव अभयारण्य (Wild Life Sanctuaries), बायोस्फीयर रिजर्व।
बाह्य-स्थाने (Ex-situ): जीवों को उनके प्राकृतिक आवास से बाहर ले जाकर संरक्षित करना।
उदाहरण: चिड़ियाघर (Zoo), बॉटनिकल गार्डन, बीज बैंक (Seed Bank), जीन बैंक।
5. महत्वपूर्ण तथ्य
जैव विविधता दिवस: 22 मई।
जैव विविधता शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग: वाल्टर जी. रोसेन (1985) ने किया।
भारत का जैव विविधता अधिनियम: 2002 में पारित हुआ।
सर्वाधिक जैव विविधता: भूमध्य रेखीय प्रदेशों (Equatorial regions) और उष्णकटिबंधीय वर्षावनों (जैसे- अमेज़न) में पाई जाती है।
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LOWER PCS 2026 कटऑफ सर्वे
https://forms.gle/ZdUZmMkH46zDbBDn6
ईमानदारी से अपने अंक ऑफिशियल उत्तर कुंजी से मिलाकर बताएं, omr सीट से देखकर ही उत्तर कुंजी मिलाएं। न स्वयं को मूर्ख बनाए न हमको!! गलत नम्बर बताकर आपका चयन नहीं होगा। इसलिए बढ़ा चढ़ाकर अपने अंक न बताएं। गोपनीयता बनाए रखने के लिए नाम बदल सकते हैं आप परंतु नंबर सही ही बताना।
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उत्तर_प्रदेश_आबकारी_से_संबंधित_महत्वपूर्ण_विविध_उपबंध_एवं_नीतियां.pdf
1.6 MB
थ्योरी और MCQ
इस पीडीएफ में 👇
उत्तर प्रदेश आबकारी से संबंधित महत्वपूर्ण विविध उपबंध एवं नीतियां
संयुक्त प्रान्त आबकारी अधिनियम-1910 (यथासंशोधित) एवं शीरा, अल्कोहल तथा अन्य मादक पदार्थों की सामान्य जानकारी, आबकारी से संबंधित महत्वपूर्ण शासनादेश एवं उत्तर प्रदेश आबकारी नीति 2025-26 |
आबकारी सिपाही परीक्षा के लिए रामबाण PDF👌
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Waiting List के लिए कल पूरे प्रदेश से अभ्यर्थी लखनऊ पहुंच रहे है आप भी इस अंतिम लड़ाई में जरूर शामिल हो और इस अभियान को सफल बनाए..
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108 मीटर लंबी मधुबनी पेंटिंग ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
मिथिला चित्रकला के नाम दर्ज हुई एक और नई उपलब्धि।
160+ कलाकारों ने 48 घंटे की निरंतर साधना से रामचरितमानस के 51 प्रमुख प्रसंगों को चित्रित किया।
#SPCurrentAffairs
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अंतिम मुकाबला: नौवें और आखिरी दौर में प्रणेश ने सफेद मोहरों से खेलते हुए जर्मनी के वादिम पेट्रोव्स्की को हराया।
स्कोर: उन्होंने 9 राउंड में कुल 7 अंक हासिल किए और टाई-ब्रेक के आधार पर शीर्ष स्थान पर कब्जा किया।
रैंकिंग: 2673 की लाइव रेटिंग वाले प्रणेश तमिलनाडु के कराईकुडी के रहने वाले हैं।
बधाई: हंगरी स्थित भारतीय दूतावास ने उन्हें इस शानदार उपलब्धि पर बधाई दी है।
किस्में: इस स्वदेशी बीज की दो किस्में 'कृष्णा459' (Krisna459) और 'गोदावरी234' (Godari234) हैं।
लॉन्च: इसका शुभारंभ 24 अगस्त 2026 को उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर और मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की उपस्थिति में हुआ।
विकासकर्ता: इसे स्थानीय कंपनी [Gourmet Popcornica] द्वारा विकसित किया गया है।
फायदा: इससे भारत की पॉपकॉर्न मक्का आयात पर निर्भरता कम होगी और किसानों की आय बढ़ेगी।
प्रधानमंत्री राहत (PM-RAHAT) योजना का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 13 फरवरी 2026 को किया गया था।
सरकार ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों को गोल्डन आवर के दौरान 1.5 लाख रुपए तक का नकद उपचार प्रदान करने के लिए पीएम राहत (Road Accident Victim Hospitalization and Assured Treatment: PM RAHAT) योजना शुरू की है।
दुर्घटना की तारीख से 7 दिनों की अवधि के लिए प्रति पीड़ित ₹1.5 लाख तक का कैशलेस उपचार।
कार्यान्वयन: यह सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की एक पहल है।
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UPPCS PRE BATCH SCHEDULE.pdf
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➡️ SECURE PCS — UPPCS टेस्ट सीरीज एवं सम्पूर्ण अध्ययन कार्यक्रम
➡️ इस बैच से जुड़ने के लिए UPPCS लिखकर भेजें
https://t.me/SecurePcs/28385
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वैदिक काल (1500 ई.पू. – 600 ई.पू.)
🔴 काल विभाजन और भौगोलिक विस्तार
ऋग्वैदिक काल (1500–1000 ई.पू.):
आर्यों का मूल निवास सप्त-सैंधव प्रदेश (सिंधु, सरस्वती, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, सतलुज का क्षेत्र) था।
सर्वाधिक महत्वपूर्ण नदी सिंधु तथा सर्वाधिक पवित्र नदी सरस्वती (देवीतमा/नदीतमा) मानी गई। गंगा का उल्लेख केवल एक बार और यमुना का तीन बार मिलता है।
उत्तर वैदिक काल (1000–600 ई.पू.):
आर्यों का विस्तार पूरब की ओर गंगा-यमुना दोआब और सदानीरा (गंडक) तक हुआ (शतपथ ब्राह्मण में विदेह माधव की कथा)।
अतरंजीखेड़ा (उत्तर प्रदेश) से लगभग 1000 ई.पू. के लोहे के प्राचीनतम साक्ष्य मिले, जिससे कृषि व युद्ध में क्रांतिकारी बदलाव आया।
राजनीतिक व्यवस्था
इकाइयों का क्रम: कुल (मुखिया: कुलपति)➡️ ग्राम (ग्रामणी)➡️ विश (विशपति)➡️ जन (गोप/राजन) ➡️ राष्ट्र (उत्तर वैदिक काल में जन 'जनपद' बने)।
🔴 कबीलाई संस्थाएं:
सभा: श्रेष्ठ एवं वृद्ध लोगों की संस्था।
समिति: आम जनता की केंद्रीय संस्था (अध्यक्ष को 'ईशान' कहा जाता था)।
विदथ: सबसे प्राचीन जनपरिषद, जिसमें सैनिक व धार्मिक कार्य होते थे।
गण: कुलीनों की संस्था।
नोट: ऋग्वैदिक काल में महिलाएं सभा और विदथ में भाग लेती थीं, उत्तर वैदिक काल में उनका प्रवेश बंद हो गया।
दशराज्ञ युद्ध (ऋग्वेद का 7वां मंडल): परुष्णी (रावी) नदी के तट पर सुदास (भारत जन) और 10 राजाओं (5 आर्य + 5 अनार्य) के संघ के बीच हुआ, जिसमें सुदास विजयी रहे।
🔴 उत्तर वैदिक प्रशासनिक अधिकारी (रत्निन - संख्या 12):
पुरोहित: राजा का मुख्य सलाहकार
सेनानी: सेनापति
भागदुघ: कर वसूलने वाला अधिकारी
संग्रहीतृ: कोषाध्यक्ष
सूत: राजा का सारथी
अक्षवाप: पासे के खेल में राजा का साथी/लेखा अधिकारी
पालागल: राजा का मित्र/दूत
महिषी: मुख्य रानी
#HistoryRevision
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ऋग्वैदिक काल (1500–1000 ई.पू.):
आर्यों का मूल निवास सप्त-सैंधव प्रदेश (सिंधु, सरस्वती, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, सतलुज का क्षेत्र) था।
सर्वाधिक महत्वपूर्ण नदी सिंधु तथा सर्वाधिक पवित्र नदी सरस्वती (देवीतमा/नदीतमा) मानी गई। गंगा का उल्लेख केवल एक बार और यमुना का तीन बार मिलता है।
उत्तर वैदिक काल (1000–600 ई.पू.):
आर्यों का विस्तार पूरब की ओर गंगा-यमुना दोआब और सदानीरा (गंडक) तक हुआ (शतपथ ब्राह्मण में विदेह माधव की कथा)।
अतरंजीखेड़ा (उत्तर प्रदेश) से लगभग 1000 ई.पू. के लोहे के प्राचीनतम साक्ष्य मिले, जिससे कृषि व युद्ध में क्रांतिकारी बदलाव आया।
राजनीतिक व्यवस्था
इकाइयों का क्रम: कुल (मुखिया: कुलपति)
सभा: श्रेष्ठ एवं वृद्ध लोगों की संस्था।
समिति: आम जनता की केंद्रीय संस्था (अध्यक्ष को 'ईशान' कहा जाता था)।
विदथ: सबसे प्राचीन जनपरिषद, जिसमें सैनिक व धार्मिक कार्य होते थे।
गण: कुलीनों की संस्था।
नोट: ऋग्वैदिक काल में महिलाएं सभा और विदथ में भाग लेती थीं, उत्तर वैदिक काल में उनका प्रवेश बंद हो गया।
दशराज्ञ युद्ध (ऋग्वेद का 7वां मंडल): परुष्णी (रावी) नदी के तट पर सुदास (भारत जन) और 10 राजाओं (5 आर्य + 5 अनार्य) के संघ के बीच हुआ, जिसमें सुदास विजयी रहे।
पुरोहित: राजा का मुख्य सलाहकार
सेनानी: सेनापति
भागदुघ: कर वसूलने वाला अधिकारी
संग्रहीतृ: कोषाध्यक्ष
सूत: राजा का सारथी
अक्षवाप: पासे के खेल में राजा का साथी/लेखा अधिकारी
पालागल: राजा का मित्र/दूत
महिषी: मुख्य रानी
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वर्ण व्यवस्था:
ऋग्वेद के 10वें मंडल के पुरुष सूक्त में पहली बार चारों वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) की उत्पत्ति विराट पुरुष के अंगों से बताई गई।
ऋग्वैदिक काल में वर्ण कर्म-आधारित था, उत्तर वैदिक काल में यह जन्म-आधारित और कठोर हो गया।
परिवार: पितृसत्तात्मक समाज, संयुक्त परिवार प्रणाली।
ऋग्वैदिक काल में स्थिति उत्कृष्ट थी; बाल विवाह, सती प्रथा, पर्दा प्रथा नहीं थी; विधवा विवाह और नियोग प्रथा मान्य थी।
विदुषी महिलाएं: अपाला, घोषा, लोपामुद्रा, विश्ववारा, सिकता (ऋग्वैदिक); गार्गी, मैत्रेयी (उत्तर वैदिक; वृहदारण्यक उपनिषद में याज्ञवल्क्य-गार्गी संवाद)।
अमाजू: जीवन भर अविवाहित रहने वाली कन्याएं।
आश्रम व्यवस्था (उत्तर वैदिक काल): जाबालोपनिषद में पहली बार चारों आश्रमों (ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, संन्यास) का उल्लेख मिलता है।
विवाह के प्रकार (8 प्रकार): ब्रह्म, दैव, आर्ष, प्राजापत्य (प्रशंसित); असुर, गंधर्व, राक्षस, पिशाच (निंदित)।
अनुलोम विवाह: उच्च वर्ण का पुरुष + निम्न वर्ण की स्त्री।
प्रतिलोम विवाह: उच्च वर्ण की स्त्री + निम्न वर्ण का पुरुष।
प्रमुख संस्कार: कुल 16 संस्कार (गर्भाधान से अंत्येष्टि तक; उपनयन संस्कार द्वारा द्विज की उपाधि)।
ऋग्वैदिक अर्थव्यवस्था: मुख्य आधार पशुपालन था, कृषि गौण थी।
गाय: सबसे मूल्यवान संपत्ति (अघन्या - न मारने योग्य); अधिकांश युद्ध गायों के लिए हुए जिन्हें गविष्टि कहा गया।
माप की इकाइयां: गव्यूति (दूरी), गोधूलि (समय)।
संपत्ति का धनी व्यक्ति गोमत कहलाता था।
धातु: अयस (तांबा या कांसा)।
लोहा (श्याम अयस / कृष्ण अयस) के उपयोग से जंगलों की सफाई और गहरी जुताई संभव हुई।
तांबे को लोहित अयस कहा गया।
व्यापार हेतु विनिमय के साथ-साथ निष्क, शतमान, पाद, कृष्णल जैसी तौल की इकाइयों का प्रचलन बढ़ा।
मुख्य फसलें: ब्रीहि (चावल), यव (जौ), गोधूम (गेहूं), माष (उड़द)।
कर व्यवस्था: ऋग्वैदिक काल में कर बलि (स्वेच्छा से दिया जाने वाला उपहार) था, जो उत्तर वैदिक काल में नियमित और अनिवार्य कर बन गया।
ऋग्वैदिक देवमंडल:
इंद्र (पुरंदर - दुर्गों को तोड़ने वाला): सर्वोच्च देवता, 250 सूक्त समर्पित (युद्ध व वर्षा के देवता)।
अग्नि: 200 सूक्त समर्पित (मनुष्य और ईश्वर के बीच मध्यस्थ)।
वरुण: जल एवं ऋतु (नैतिक नियमों - ऋत) के देवता (ऋतस्य गोपा)।
सोम: वनस्पति के देवता (9वां मंडल पूर्णतः समर्पित)।
मारुत: आंधी-तूफान के देवता; पूषण: पशुओं के देवता (ऋग्वैदिक काल)।
इंद्र और वरुण का महत्व घटा; प्रजापति (सृष्टि के निर्माता) सर्वोच्च बने, साथ ही रुद्र (पशुओं/संहारक के देवता) और विष्णु (पालक) प्रमुख हुए। पूषण अब शूद्रों के देवता बने।
राजसूय यज्ञ: राजा के राज्याभिषेक के समय, दिव्य शक्ति प्राप्त करने हेतु (इसमें राजा 12 रत्निनों के घर जाता था)।
अश्वमेध यज्ञ: साम्राज्य विस्तार और सार्वभौम सत्ता स्थापित करने हेतु (घोड़ा छोड़े जाने वाला यज्ञ)।
वाजपेय यज्ञ: राजा के शक्ति प्रदर्शन और रथ दौड़ का आयोजन, जिसमें राजा का रथ विजयी होता था।
अग्निष्टोम यज्ञ: अग्नि को सोमरस अर्पित कर पशुबलि दिया जाने वाला एकदिवसीय यज्ञ।
चार वेद (संहिता):
ऋग्वेद: 10 मंडल, 1,028 सूक्त (1,017 साकल + 11 बालखिल्य), 10,580 ऋचाएं। तीसरे मंडल में विश्वामित्र रचित गायत्री मंत्र (सूर्य देव सविता को समर्पित) है।
पुरोहित: होतृ/होता।
सामवेद: 1,875 छंद (अधिकांश ऋग्वेद से), भारतीय संगीत के 7 स्वरों (सा-रे-गा-मा...) का उद्गम।
पुरोहित: उद्गातृ/उद्गाता।
यजुर्वेद: यज्ञीय कर्मकांड, गद्य और पद्य दोनों में रचित। दो भाग: शुक्ल यजुर्वेद (वाजसनेयी संहिता) और कृष्ण यजुर्वेद।
पुरोहित: अध्वर्यु।
अथर्ववेद: 20 कांड, 731 सूक्त; औषधि, तंत्र-मंत्र, जादू-टोना, विवाह और गृह निर्माण। इसमें सभा और समिति को प्रजापति की दो पुत्रियां कहा गया है।
पुरोहित: ब्रह्मा।
ऋग्वेद➡️ उपवेद: आयुर्वेद | ब्राह्मण: ऐतरेय, कौषीतकि
सामवेद➡️ उपवेद: गंधर्ववेद | ब्राह्मण: पंचविंश (तांड्य), षडविंश, जैमिनीय
यजुर्वेद➡️ उपवेद: धनुर्वेद | ब्राह्मण: शतपथ (सबसे बड़ा व प्राचीन), तैत्तिरीय
अथर्ववेद➡️ उपवेद: शिल्पवेद | ब्राह्मण: गोपथ
आरण्यक: रहस्यवादी चिंतन; वनों में पढ़े जाने के कारण आरण्यक कहलाए (अथर्ववेद का कोई आरण्यक नहीं है)।
उपनिषद (वेदांत): संख्या 108; दार्शनिक ज्ञान का चरम।
मुण्डकोपनिषद: भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य "सत्यमेव जयते"। इसमें यज्ञ की तुलना 'टूटी नाव' से की गई है।
कठोपनिषद: यम और नचिकेता का संवाद।
छांदोग्य उपनिषद: तीन आश्रमों का प्रथम उल्लेख, कृष्ण का घोर अंगिरस के शिष्य रूप में प्रथम उल्लेख, देवकी पुत्र वर्णन।
वृहदारण्यक उपनिषद: "तमसो मा ज्योतिर्गमय" और याज्ञवल्क्य-गार्गी संवाद।
वेदांग (संख्या 6): शिक्षा (उच्चारण), कल्प (कर्मकांड), व्याकरण (भाषा विज्ञान), निरुक्त (शब्द व्युत्पत्ति), छंद (पद्य माप), ज्योतिष (खगोल विज्ञान)।
सांख्य दर्शन: कपिल मुनि (सबसे प्राचीन दर्शन)
योग दर्शन: महर्षि पतंजलि
न्याय दर्शन: महर्षि गौतम
वैशेषिक दर्शन: महर्षि कणाद (उलूक)
पूर्व मीमांसा: महर्षि जैमिनी
उत्तर मीमांसा (वेदांत): महर्षि बादरायण
वितस्ता: झेलम
अस्किनी: चिनाब
परुष्णी: रावी
विपाशा: व्यास
शुतुद्रि: सतलुज
सदानीरा: गंडक
दृषद्वती: घग्घर (चितंग)
कुभा: काबुल
क्रुमु: कुर्रम
सुवास्तु: स्वात
गोमती: गोमल
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बहुत काम की चीज है
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