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सुरकोटदा (कच्छ, गुजरात)
उत्खननकर्ता एवं वर्ष: जगपति जोशी (1964)
प्रमुख साक्ष्य: घोड़े की अस्थियों के अवशेष, कलश शवाधान (Pot Burial), तराजू का पलड़ा।
राखीगढ़ी (घग्घर नदी, हरियाणा)
उत्खननकर्ता एवं वर्ष: सूरजभान (1969), अमरेंद्र नाथ (1997-2000)
प्रमुख साक्ष्य: भारत में स्थित हड़प्पा सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल, अन्नागार, प्रेमी जोड़े का कंकाल।
#HistoryRevision
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उत्खननकर्ता एवं वर्ष: जगपति जोशी (1964)
प्रमुख साक्ष्य: घोड़े की अस्थियों के अवशेष, कलश शवाधान (Pot Burial), तराजू का पलड़ा।
राखीगढ़ी (घग्घर नदी, हरियाणा)
उत्खननकर्ता एवं वर्ष: सूरजभान (1969), अमरेंद्र नाथ (1997-2000)
प्रमुख साक्ष्य: भारत में स्थित हड़प्पा सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल, अन्नागार, प्रेमी जोड़े का कंकाल।
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लोथल (भोगवा नदी, गुजरात)
उत्खननकर्ता एवं वर्ष: एस. आर. राव (1954-1957)
प्रमुख साक्ष्य: गोदीवाड़ा (Dockyard), चावल की भूसी, युगल शवाधान, फारस की मुहर, अग्निकुंड, मुख्य सड़क पर खुलते दरवाजे।
आलमगीरपुर (हिंडन नदी, उत्तर प्रदेश)
उत्खननकर्ता एवं वर्ष: यज्ञदत्त शर्मा (1958)
प्रमुख साक्ष्य: हड़प्पा सभ्यता का सबसे पूर्वी स्थल, बर्तनों पर सूती कपड़े के निशान, भट्टी के प्रमाण।
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उत्खननकर्ता एवं वर्ष: एस. आर. राव (1954-1957)
प्रमुख साक्ष्य: गोदीवाड़ा (Dockyard), चावल की भूसी, युगल शवाधान, फारस की मुहर, अग्निकुंड, मुख्य सड़क पर खुलते दरवाजे।
आलमगीरपुर (हिंडन नदी, उत्तर प्रदेश)
उत्खननकर्ता एवं वर्ष: यज्ञदत्त शर्मा (1958)
प्रमुख साक्ष्य: हड़प्पा सभ्यता का सबसे पूर्वी स्थल, बर्तनों पर सूती कपड़े के निशान, भट्टी के प्रमाण।
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रोपड़ / रूपनगर (सतलुज नदी, पंजाब)
उत्खननकर्ता एवं वर्ष: यज्ञदत्त शर्मा (1953-1956)
प्रमुख साक्ष्य: स्वतंत्रता के बाद खोजा गया पहला प्रमुख स्थल, मानव के साथ पालतू कुत्ते को दफनाने के प्रमाण, तांबे की कुल्हाड़ी।
कालीबंगा (घग्घर नदी, राजस्थान)
उत्खननकर्ता एवं वर्ष: अमलानंद घोष (1953), बी. बी. लाल एवं बी. के. थापर (1961)
प्रमुख साक्ष्य: जुते हुए खेत का साक्ष्य, हवन कुंड/अग्निवेदिकाएँ, काली चूड़ियाँ, भूकंप के साक्ष्य, अलंकृत ईंटें।
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उत्खननकर्ता एवं वर्ष: यज्ञदत्त शर्मा (1953-1956)
प्रमुख साक्ष्य: स्वतंत्रता के बाद खोजा गया पहला प्रमुख स्थल, मानव के साथ पालतू कुत्ते को दफनाने के प्रमाण, तांबे की कुल्हाड़ी।
कालीबंगा (घग्घर नदी, राजस्थान)
उत्खननकर्ता एवं वर्ष: अमलानंद घोष (1953), बी. बी. लाल एवं बी. के. थापर (1961)
प्रमुख साक्ष्य: जुते हुए खेत का साक्ष्य, हवन कुंड/अग्निवेदिकाएँ, काली चूड़ियाँ, भूकंप के साक्ष्य, अलंकृत ईंटें।
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12 कक्षों वाला अन्नागार, R-37 व H कब्रिस्तान, शंख का बना बैल, स्त्री के गर्भ से निकलता पौधा (उर्वरता की देवी)।
अर्थ: "मृतकों का टीला"।
विशाल स्नानागार (Great Bath), विशाल अन्नागार, कांस्य की नर्तकी, पशुपति महादेव की मुहर, पुरोहित की प्रस्तर मूर्ति।
विश्व का प्राचीनतम गोदीवाड़ा (Dockyard/बंदरगाह), चावल की भूसी, फारस की सील, युगल शवाधान, शतरंज बोर्ड के साक्ष्य।
अर्थ: "काले रंग की चूड़ियां"।
जुते हुए खेत (दोहरी फसल), अग्निकुंड (अग्निवेदियां), भूकंप के साक्ष्य, कच्ची ईंटों के मकान।
नगर 3 भागों में विभक्त (दुर्ग, मध्यम, निचला नगर), उन्नत जल प्रबंधन (Water Reservoirs), 10 चिह्नों वाला सूचना-पट्ट (Signboard)।
एकमात्र दुर्ग-विहीन शहर, मनके (Beads) बनाने का कारखाना, लिपस्टिक व काजल के साक्ष्य, बिल्ली का पीछा करते कुत्ते के पदचिह्न।
मिट्टी का बना खिलौना हल, उत्तम किस्म के जौ, जल निकासी प्रणाली का अभाव।
भारत में स्थित सिंधु सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल।
घोड़े की अस्थियां, तराजू का पलड़ा, कलश शवाधान (Pot Burial)।
ग्रिड प्रणाली (Grid System / Chessboard Pattern): सड़कें एक-दूसरे को समकोण (90°) पर काटती थीं।
समकालीन विश्व में अद्वितीय।
घरों का गंदा पानी सड़क की मुख्य ढकी हुई नालियों से जुड़ता था, जिनमें सफाई के लिए सोखता-गड्ढे (Manholes/Sump pits) बने थे।
विशाल स्नानागार (मोहनजोदड़ो): जिप्सम और बिटुमेन (डामर) का लेप कर वाटरप्रूफिंग की गई थी। यह संभवतः धार्मिक स्नान हेतु प्रयुक्त होता था।
धातु मूर्तियां (Lost Wax Technique / भ्रष्ट मोम पद्धति):
मोहनजोदड़ो की 10.5 सेमी कांस्य नर्तकी (Dancing Girl)।
दायमाबाद से तांबे का रथ।
अधिकांश मुहरें सेलखड़ी (Steatite) की बनी थीं और चौकोर/वर्गाकार थीं।
सर्वाधिक अंकन एकश्रृंगी बैल (Unicorn) का मिलता है (गाय और घोड़े का अंकन मुहरों पर नहीं है)।
पशुपति मुहर (मोहनजोदड़ो): त्रिमुखी योगी; दाईं ओर हाथी व बाघ, बाईं ओर गैंडा व भैंसा, तथा नीचे 2 हिरण।
प्रकृति पूजा: पीपल का वृक्ष, नाग, जल, सूर्य एवं अग्नि (कालीबंगा, लोथल में अग्निकुंड)।
पूर्ण शवाधान (Full Burial)
आंशिक शवाधान (Fractional Burial)
दाह संस्कार (Cremation)
कृषि:
वस्तु-विनिमय प्रणाली (Barter System) आधारित (सिक्कों का प्रचलन नहीं था)।
बाढ़ (मार्शल, मैके)
जलवायु परिवर्तन व सूखा (अमलानंद घोष, स्टीन)
आर्यों का आक्रमण (व्हीलर, गार्डन चाइल्ड - अब अमान्य)
पारिस्थितिक असंतुलन (फेयरसर्विस)
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ब्राजील 24 जून से 25 जुलाई 2027 तक होने वाले 10वें फीफा महिला विश्व कप 2027 की मेजबानी करेगा।
यह दक्षिण अमेरिका महाद्वीप में आयोजित होने वाला पहला महिला फुटबॉल विश्व कप होगा।
मुख्य बातें
तारीख: 24 जून से 25 जुलाई 2027
संस्करण: 10वां
टीमें: 32
मैच और वेन्यू: कुल 64 मैच ब्राजील के 8 अलग-अलग शहरों (जैसे रियो डी जेनेरियो, साओ पाउलो, ब्राजीलिया आदि) के स्टेडियमों में खेले जाएंगे।
विशेष मैच: प्रसिद्ध मार्कना स्टेडियम (Maracanã) में टूर्नामेंट का उद्घाटन मैच और फाइनल मुकाबला होगा।
#SPCurrentAffairs
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यह दक्षिण अमेरिका महाद्वीप में आयोजित होने वाला पहला महिला फुटबॉल विश्व कप होगा।
मुख्य बातें
तारीख: 24 जून से 25 जुलाई 2027
संस्करण: 10वां
टीमें: 32
मैच और वेन्यू: कुल 64 मैच ब्राजील के 8 अलग-अलग शहरों (जैसे रियो डी जेनेरियो, साओ पाउलो, ब्राजीलिया आदि) के स्टेडियमों में खेले जाएंगे।
विशेष मैच: प्रसिद्ध मार्कना स्टेडियम (Maracanã) में टूर्नामेंट का उद्घाटन मैच और फाइनल मुकाबला होगा।
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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के नागपुर स्थित National Bureau of Soil Survey and Land Use Planning (NBSS&LUP) ने जुलाई 2026 में भारत का पहला डिजिटल मृदा बनावट (Soil Texture) मानचित्र जारी किया है। यह नक्शा देश भर में हेक्टेयर स्तर पर सटीक डिजिटल मिट्टी डेटा प्रदान करता है।
मुख्य विशेषताएँ
हेक्टेयर-स्तरीय डेटा: यह मानचित्र देश के हर हिस्से का हेक्टेयर-स्तर का डिजिटल वर्गीकरण देता है।
तकनीक: इसे सैटेलाइट डेटा, रिमोट सेंसिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाया गया है।
किसानों को लाभ: किसान अपने खेत की मिट्टी के हिसाब से सही फसल चुन सकते हैं।
उपयोग और महत्व
कृषि योजना: गाँव के स्तर पर खेती की योजना बनाने में मदद मिलती है।
जल प्रबंधन: मिट्टी की बनावट से पानी के बहाव और नमी का पता चलता है, जिससे सिंचाई आसान होती है।
संसाधन आवंटन: सरकारी एजेंसियाँ इसके जरिए सही जगह पर सही संसाधन भेज सकती हैं।
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हेक्टेयर-स्तरीय डेटा: यह मानचित्र देश के हर हिस्से का हेक्टेयर-स्तर का डिजिटल वर्गीकरण देता है।
तकनीक: इसे सैटेलाइट डेटा, रिमोट सेंसिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाया गया है।
किसानों को लाभ: किसान अपने खेत की मिट्टी के हिसाब से सही फसल चुन सकते हैं।
उपयोग और महत्व
कृषि योजना: गाँव के स्तर पर खेती की योजना बनाने में मदद मिलती है।
जल प्रबंधन: मिट्टी की बनावट से पानी के बहाव और नमी का पता चलता है, जिससे सिंचाई आसान होती है।
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आगामी UPPCS प्री परीक्षा के लिए अद्यतित एवं परीक्षापयोगी कार्यक्रम की शुरुआत कल से हो रही है।
रजिस्ट्रेशन लगातार जारी है💐
रजिस्ट्रेशन लगातार जारी है💐
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Lower Pcs ऐसा प्रेमी था जो प्यार UPSSSC वालों से किया लेकिन शादी UPSC वालों से कर लिया। 😇
नया सॉन्ग रिलीज😐
पेपर मे तूने यह क्या पूछ लिया दिल यह दीवाना घबड़ाने लगा
पेपर में सवाल मिले इस तरह, exam हाल में मन डरने लगा
सवाल कठिन हो गया मैं डरने लगा , पेन omr पर गिरी गोला भरने लगा
छा रहा है अजब सा नशा
नया सॉन्ग रिलीज
पेपर मे तूने यह क्या पूछ लिया दिल यह दीवाना घबड़ाने लगा
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सवाल कठिन हो गया मैं डरने लगा , पेन omr पर गिरी गोला भरने लगा
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मेकॉन लिमिटेड (MECON)
पूर्ण नाम: मेटलरजिकल एंड इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स (इंडिया) लिमिटेड
स्थापना एवं मुख्यालय: स्थापना वर्ष 1959; मुख्यालय रांची (झारखंड)
प्रशासनिक नियंत्रण: इस्पात मंत्रालय (भारत सरकार) के अंतर्गत
नवीनतम दर्जा: केंद्रीय इस्पात मंत्रालय द्वारा 'मिनीरत्न श्रेणी-I' का दर्जा प्रदान किया गया
वित्तीय स्थिति (31 मार्च, 2026 तक): लगातार तीन वर्षों तक लाभ और ₹535.42 करोड़ की सकारात्मक शुद्ध संपत्ति (Net Worth) दर्ज
मुख्य लाभ: कंपनी बोर्ड की वित्तीय और परिचालन संबंधी स्वायत्तता (Financial & Operational Autonomy) में वृद्धि, जिससे निर्णय व पूंजीगत निवेश में तेजी आएगी
पूर्ण नाम: मेटलरजिकल एंड इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स (इंडिया) लिमिटेड
स्थापना एवं मुख्यालय: स्थापना वर्ष 1959; मुख्यालय रांची (झारखंड)
प्रशासनिक नियंत्रण: इस्पात मंत्रालय (भारत सरकार) के अंतर्गत
नवीनतम दर्जा: केंद्रीय इस्पात मंत्रालय द्वारा 'मिनीरत्न श्रेणी-I' का दर्जा प्रदान किया गया
वित्तीय स्थिति (31 मार्च, 2026 तक): लगातार तीन वर्षों तक लाभ और ₹535.42 करोड़ की सकारात्मक शुद्ध संपत्ति (Net Worth) दर्ज
मुख्य लाभ: कंपनी बोर्ड की वित्तीय और परिचालन संबंधी स्वायत्तता (Financial & Operational Autonomy) में वृद्धि, जिससे निर्णय व पूंजीगत निवेश में तेजी आएगी
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