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🔴ऐसे और भी प्रश्न हमारे नोट और टेस्ट सीरीज से आए हैं
खोजने में काफी टाइम लगता है इसलिए थोड़े बहुत भेज दिए हैं।

➡️हम इसलिए नहीं भेजते की देखो मुझे सब पता था इसलिए मैंने पहले लिख दिया था।
भेजने का उद्देश्य यही रहता है कि हम लोग जो कंटेंट देते हैं उसमें पूरी कोशिश रहती है कि ओ परीक्षापयोगी रहे।

धन्यवाद 💐
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सुरकोटदा (कच्छ, गुजरात)

उत्खननकर्ता एवं वर्ष: जगपति जोशी (1964)

प्रमुख साक्ष्य: घोड़े की अस्थियों के अवशेष, कलश शवाधान (Pot Burial), तराजू का पलड़ा।

राखीगढ़ी (घग्घर नदी, हरियाणा)

उत्खननकर्ता एवं वर्ष: सूरजभान (1969), अमरेंद्र नाथ (1997-2000)

प्रमुख साक्ष्य: भारत में स्थित हड़प्पा सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल, अन्नागार, प्रेमी जोड़े का कंकाल।

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लोथल (भोगवा नदी, गुजरात)

उत्खननकर्ता एवं वर्ष: एस. आर. राव (1954-1957)

प्रमुख साक्ष्य: गोदीवाड़ा (Dockyard), चावल की भूसी, युगल शवाधान, फारस की मुहर, अग्निकुंड, मुख्य सड़क पर खुलते दरवाजे।

आलमगीरपुर (हिंडन नदी, उत्तर प्रदेश)

उत्खननकर्ता एवं वर्ष: यज्ञदत्त शर्मा (1958)

प्रमुख साक्ष्य: हड़प्पा सभ्यता का सबसे पूर्वी स्थल, बर्तनों पर सूती कपड़े के निशान, भट्टी के प्रमाण।

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रोपड़ / रूपनगर (सतलुज नदी, पंजाब)

उत्खननकर्ता एवं वर्ष: यज्ञदत्त शर्मा (1953-1956)

प्रमुख साक्ष्य: स्वतंत्रता के बाद खोजा गया पहला प्रमुख स्थल, मानव के साथ पालतू कुत्ते को दफनाने के प्रमाण, तांबे की कुल्हाड़ी।

कालीबंगा (घग्घर नदी, राजस्थान)

उत्खननकर्ता एवं वर्ष: अमलानंद घोष (1953), बी. बी. लाल एवं बी. के. थापर (1961)

प्रमुख साक्ष्य: जुते हुए खेत का साक्ष्य, हवन कुंड/अग्निवेदिकाएँ, काली चूड़ियाँ, भूकंप के साक्ष्य, अलंकृत ईंटें।

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शुभ रात्रि सभी भाईयों बहनों को 🙏❤️
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✅सिंधु घाटी सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता)

1️⃣उत्पत्ति एवं विस्तार

➡️नामकरण: जॉन मार्शल ने सर्वप्रथम इसे 'सिंधु सभ्यता' नाम दिया।

🔴उत्पत्ति मत:
➡️विदेशी उत्पत्ति: मार्टिमर व्हीलर, गार्डन चाइल्ड (मेसोपोटामियाई/सुमेरियन सभ्यता का उपनिवेश)।
➡️स्वदेशी/स्थानीय उत्पत्ति (सर्वमान्य): अमलानंद घोष, रफीक मुगल, डीपी अग्रवाल (सोथी व कोटदीजी जैसी ग्रामीण संस्कृतियों का क्रमिक विकास)।
➡️तिथि निर्धारण (C-14): 2500 ई.पू. – 1750 ई.पू. (परिपक्व काल: 2600 – 1900 ई.पू.)।
➡️भौगोलिक विस्तार (त्रिभुजाकार - लगभग 13 लाख वर्ग किमी):
➡️उत्तरी सीमा: मांडा (जम्मू-कश्मीर) — चिनाब नदी
➡️दक्षिणी सीमा: दायमाबाद (महाराष्ट्र) — प्रवरा/गोदावरी नदी
➡️पूर्वी सीमा: आलमगीरपुर (उत्तर प्रदेश) — हिंडन नदी
➡️पश्चिमी सीमा: सुत्कागेनडोर (बलूचिस्तान, पाक) — दाश्त नदी

2️⃣ प्रमुख पुरास्थल एवं उनकी विशेषताएँ

➡️हड़प्पा (रावी नदी, पंजाब-पाक | दयाराम साहनी, 1921):
12 कक्षों वाला अन्नागार, R-37 व H कब्रिस्तान, शंख का बना बैल, स्त्री के गर्भ से निकलता पौधा (उर्वरता की देवी)।

➡️मोहनजोदड़ो (सिंधु नदी, सिंध-पाक | आर. डी. बनर्जी, 1922):
अर्थ: "मृतकों का टीला"।
विशाल स्नानागार (Great Bath), विशाल अन्नागार, कांस्य की नर्तकी, पशुपति महादेव की मुहर, पुरोहित की प्रस्तर मूर्ति।

➡️लोथल (भोगवा नदी, गुजरात | एस. आर. राव):
विश्व का प्राचीनतम गोदीवाड़ा (Dockyard/बंदरगाह), चावल की भूसी, फारस की सील, युगल शवाधान, शतरंज बोर्ड के साक्ष्य।

➡️कालीबंगा (घग्घर नदी, राजस्थान | अमलानंद घोष / बी.के. थापर):
अर्थ: "काले रंग की चूड़ियां"।
जुते हुए खेत (दोहरी फसल), अग्निकुंड (अग्निवेदियां), भूकंप के साक्ष्य, कच्ची ईंटों के मकान।
➡️धोलावीरा (लूणी/मनहर नदी, गुजरात | जे. पी. जोशी / आर. एस. बिष्ट):
नगर 3 भागों में विभक्त (दुर्ग, मध्यम, निचला नगर), उन्नत जल प्रबंधन (Water Reservoirs), 10 चिह्नों वाला सूचना-पट्ट (Signboard)।
➡️चन्हूदड़ों (सिंधु नदी, पाक | एन. जी. मजूमदार):
एकमात्र दुर्ग-विहीन शहर, मनके (Beads) बनाने का कारखाना, लिपस्टिक व काजल के साक्ष्य, बिल्ली का पीछा करते कुत्ते के पदचिह्न।
➡️बनावली (हरियाणा | आर. एस. बिष्ट):
मिट्टी का बना खिलौना हल, उत्तम किस्म के जौ, जल निकासी प्रणाली का अभाव।
➡️राखीगढ़ी (हरियाणा | अमरेंद्र नाथ):
भारत में स्थित सिंधु सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल।
➡️सुरकोटदा (गुजरात | जे. पी. जोशी):
घोड़े की अस्थियां, तराजू का पलड़ा, कलश शवाधान (Pot Burial)।

3️⃣ नगर नियोजन एवं जल निकासी व्यवस्था

ग्रिड प्रणाली (Grid System / Chessboard Pattern): सड़कें एक-दूसरे को समकोण (90°) पर काटती थीं।
➡️दो भागों में विभाजन:
➡️पश्चिमी टीला (Citadel/दुर्ग): ऊंचाई पर स्थित, प्रशासनिक वर्ग व विशिष्ट लोगों हेतु प्राचीर से घिरा।
➡️पूर्वी टीला (Lower Town/निचला नगर): सामान्य जनता, व्यापारियों और कारीगरों के लिए।
➡️मकानों की बनावट: दरवाजे व खिड़कियां मुख्य सड़क पर न खुलकर पीछे गलियों में खुलते थे (अपवाद: लोथल, जहां मुख्य सड़क पर खुलते थे)।
➡️ईंटें: पक्की व धूप में सुखाई गई ईंटें प्रयुक्त; मानक अनुपात 4 : 2 : 1 (लंबाई : चौड़ाई : ऊंचाई)।
➡️जल निकासी व्यवस्था (Drainage System):
समकालीन विश्व में अद्वितीय।
घरों का गंदा पानी सड़क की मुख्य ढकी हुई नालियों से जुड़ता था, जिनमें सफाई के लिए सोखता-गड्ढे (Manholes/Sump pits) बने थे।

4️⃣कला एवं वास्तुकला

➡️वास्तुकला: उपयोगितावादी दृष्टिकोण (Utilitarian) प्रमुख था; किसी भव्य महल या मंदिर के साक्ष्य नहीं मिलते।
विशाल स्नानागार (मोहनजोदड़ो): जिप्सम और बिटुमेन (डामर) का लेप कर वाटरप्रूफिंग की गई थी। यह संभवतः धार्मिक स्नान हेतु प्रयुक्त होता था।
➡️विशाल अन्नागार: मोहनजोदड़ो की सबसे बड़ी इमारत, जो उन्नत अनाज भंडारण क्षमता को दर्शाती है।

5️⃣मूर्तिकला एवं मुहरें

धातु मूर्तियां (Lost Wax Technique / भ्रष्ट मोम पद्धति):
मोहनजोदड़ो की 10.5 सेमी कांस्य नर्तकी (Dancing Girl)।
दायमाबाद से तांबे का रथ।
➡️प्रस्तर (पत्थर) मूर्तियां: मोहनजोदड़ो से प्राप्त सेलखड़ी (Steatite) की दाढ़ी वाले पुरोहित राजा की मूर्ति।
➡️मृण्मूर्तियां (Terracotta Figurines): मिट्टी की पकी हुई मूर्तियां (खिलौने, पशु-पक्षी, मातृदेवी); ये चिकोटी पद्धति (Pinch method) से बनी थीं।
➡️मुहरें (Seals):
अधिकांश मुहरें सेलखड़ी (Steatite) की बनी थीं और चौकोर/वर्गाकार थीं।
सर्वाधिक अंकन एकश्रृंगी बैल (Unicorn) का मिलता है (गाय और घोड़े का अंकन मुहरों पर नहीं है)।
पशुपति मुहर (मोहनजोदड़ो): त्रिमुखी योगी; दाईं ओर हाथी व बाघ, बाईं ओर गैंडा व भैंसा, तथा नीचे 2 हिरण।

6️⃣धार्मिक जीवन

➡️लौकिक दृष्टिकोण: धर्म था, लेकिन राजनीति या समाज पर पुरोहिती दबदबा नहीं था।
➡️मातृदेवी की उपासना: समाज में मातृशक्ति का प्रमुख स्थान।
➡️पशुपति शिव / आद्य-शिव: रुद्र रूप में पूजा।
प्रकृति पूजा: पीपल का वृक्ष, नाग, जल, सूर्य एवं अग्नि (कालीबंगा, लोथल में अग्निकुंड)।
➡️लिंग एवं योनि पूजा: उर्वरता और प्रजनन क्षमता के प्रतीक के रूप में।
➡️पुनर्जन्म में विश्वास: शवाधान विधियां:
पूर्ण शवाधान (Full Burial)
आंशिक शवाधान (Fractional Burial)
दाह संस्कार (Cremation)

7️⃣ सामाजिक एवं आर्थिक जीवन

➡️समाज का स्वरूप: मातृसत्तात्मक (संभावित, मातृदेवी की अधिकता के आधार पर)।
➡️सामाजिक वर्ग: विद्वान, योद्धा (सुरक्षाकर्मी), व्यापारी/शिल्पी, तथा श्रमिक।
➡️खान-पान एवं पहनावा: शाकाहारी व मांसाहारी दोनों; सूती एवं ऊनी वस्त्रों का प्रयोग।
➡️आभूषण: स्त्री व पुरुष दोनों आभूषण पहनते थे।
➡️मनोरंजन: पासा खेलना, शिकार करना, मुर्गों की लड़ाई, नृत्य।

8️⃣ कृषि एवं व्यापार
कृषि:
➡️9 फसलों के साक्ष्य: गेहूं, जौ, राई, मटर, तिल, सरसों, कपास, खजूर, चावल (लोथल/रंगपुर)।
➡️विश्व में कपास का प्रथम उत्पादन हड़प्पावासियों ने किया, जिसे यूनानी 'सिंडन' (Sindon) कहते थे।
➡️पशुपालन: बैल, भैंस, भेड़, बकरी, कुत्ता, सुअर, हाथी, ऊंट (कालीबंगा)।

➡️आंतरिक एवं बाह्य व्यापार:
वस्तु-विनिमय प्रणाली (Barter System) आधारित (सिक्कों का प्रचलन नहीं था)।
➡️आयातित कच्चा माल:
➡️तांबा: खेतड़ी (राजस्थान) एवं ओमान
➡️चांदी व टिन: अफगानिस्तान एवं ईरान
➡️सोना: कोलार (कर्नाटक) एवं अफगानिस्तान
➡️लाजवर्द (Lapis Lazuli): बदख्शां (अफगानिस्तान)
➡️सेलखड़ी: राजस्थान, गुजरात
➡️विदेशी व्यापार: मेसोपोटामियाई सुमेरियन लेखों में हड़प्पा क्षेत्र के लिए 'मेलुहा' शब्द, दिलमुन (बहरीन) और माकन (ओमान) मध्यस्थ बंदरगाह थे।

9️⃣ लिपि एवं पुरातात्त्विक स्रोत

➡️लिपि की प्रकृति: भावचित्रात्मक (Pictographic); कुल 400 के करीब चिह्न।
➡️लेखन शैली: बोस्ट्रोफेडन (Boustrophedon) — पहली पंक्ति दाएं से बाएं, दूसरी पंक्ति बाएं से दाएं।
➡️पठन स्थिति: अभी तक अपठित (Un-deciphered)।
➡️सभ्यता का काल वर्ग: आद्य-ऐतिहासिक काल (Proto-Historic Period) — लिखित साक्ष्य मौजूद हैं लेकिन पढ़े नहीं जा सके हैं।
➡️माप-तौल: घनाकार बाट; 16 के गुणक पर आधारित (1, 2, 4, 8, 16, 32, 64...)।

1️⃣0️⃣सिंधु सभ्यता से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

➡️कांस्य युगीन सभ्यता: तांबा + टिन (9:1) मिलाकर कांसा बनाने की विधि जानते थे।
➡️लोहे से अनभिज्ञ: हड़प्पावासी लोहे (Iron) धातु से पूरी तरह अपरिचित थे (लोहा उत्तर-वैदिक काल में आया)।
➡️मंदिरों का अभाव: पूजा-अर्चना के साक्ष्य हैं, परंतु किसी औपचारिक मंदिर संरचना का प्रमाण नहीं मिलता।
➡️युद्धप्रियता का अभाव: तलवार, ढाल या सुरक्षात्मक कवच नहीं मिले; शांतिप्रिय व्यापारी समाज था।
➡️पतन के कारण:
बाढ़ (मार्शल, मैके)
जलवायु परिवर्तन व सूखा (अमलानंद घोष, स्टीन)
आर्यों का आक्रमण (व्हीलर, गार्डन चाइल्ड - अब अमान्य)
पारिस्थितिक असंतुलन (फेयरसर्विस)

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ब्राजील 24 जून से 25 जुलाई 2027 तक होने वाले 10वें फीफा महिला विश्व कप 2027 की मेजबानी करेगा।
यह दक्षिण अमेरिका महाद्वीप में आयोजित होने वाला पहला महिला फुटबॉल विश्व कप होगा।

मुख्य बातें
तारीख:
24 जून से 25 जुलाई 2027
संस्करण: 10वां
टीमें: 32
मैच और वेन्यू: कुल 64 मैच ब्राजील के 8 अलग-अलग शहरों (जैसे रियो डी जेनेरियो, साओ पाउलो, ब्राजीलिया आदि) के स्टेडियमों में खेले जाएंगे।

विशेष मैच: प्रसिद्ध मार्कना स्टेडियम (Maracanã) में टूर्नामेंट का उद्घाटन मैच और फाइनल मुकाबला होगा।

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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के नागपुर स्थित National Bureau of Soil Survey and Land Use Planning (NBSS&LUP) ने जुलाई 2026 में भारत का पहला डिजिटल मृदा बनावट (Soil Texture) मानचित्र जारी किया है। यह नक्शा देश भर में हेक्टेयर स्तर पर सटीक डिजिटल मिट्टी डेटा प्रदान करता है।


मुख्य विशेषताएँ

हेक्टेयर-स्तरीय डेटा: यह मानचित्र देश के हर हिस्से का हेक्टेयर-स्तर का डिजिटल वर्गीकरण देता है।

तकनीक: इसे सैटेलाइट डेटा, रिमोट सेंसिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाया गया है।

किसानों को लाभ: किसान अपने खेत की मिट्टी के हिसाब से सही फसल चुन सकते हैं।

उपयोग और महत्व

कृषि योजना: गाँव के स्तर पर खेती की योजना बनाने में मदद मिलती है।

जल प्रबंधन: मिट्टी की बनावट से पानी के बहाव और नमी का पता चलता है, जिससे सिंचाई आसान होती है।

संसाधन आवंटन: सरकारी एजेंसियाँ इसके जरिए सही जगह पर सही संसाधन भेज सकती हैं।

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राष्ट्रीय खेल पुरस्कार, 2025☑️
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