कौन-सा सिद्धांत यह कहता है कि दो बहुत करीब से संबंधित प्रजातियाँ, जो एक ही तरह के संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं, अनिश्चित काल तक एक साथ नहीं रह सकतीं ?
Anonymous Quiz
5%
एलन का नियम
26%
हार्डी-वीनबर्ग सिद्धांत
64%
गॉस का नियम
5%
लीबिग का न्यूनतम नियम
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सही दिशा में की गई प्रैक्टिस और Exam-Oriented Content सफलता की कुंजी है।
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संपूर्ण कार्यक्रम परीक्षा के 1 महीने पहले कंप्लीट हो जाएगा जिससे आपको रिविजन करने का पर्याप्त समय मिलेगा
❤3🥰1
मैंग्रोव वन चक्रवात और सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं के खिलाफ एक प्राकृतिक अवरोधक (Buffer) के रूप में कार्य करते हैं।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Anonymous Quiz
2%
केवल 1
5%
केवल 2
92%
1 और 2 दोनों
1%
इनमें से कोई नहीं
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'नाविक' (NavIC) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा सही है?
Anonymous Quiz
4%
यह नासा (NASA) का एक नया अंतरिक्ष मिशन है।
80%
यह भारत का क्षेत्रीय उपग्रह नेविगेशन सिस्टम है।
15%
यह गहरे समुद्र में अनुसंधान करने वाली एक पनडुब्बी है।
0%
यह 5G नेटवर्क की एक नई तकनीक है।
❤3👍2
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'नाविक' (NavIC) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा सही है?
NavIC (Navigation with Indian Constellation) को इसरो (ISRO) द्वारा विकसित किया गया है।
इसमें 7 उपग्रहों का एक समूह (Constellation) शामिल है। यह भारत की मुख्य भूमि के साथ-साथ इसकी सीमाओं से लगभग 1500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में सटीक स्थिति (Positioning) की जानकारी प्रदान करता है।
इसमें 7 उपग्रहों का एक समूह (Constellation) शामिल है। यह भारत की मुख्य भूमि के साथ-साथ इसकी सीमाओं से लगभग 1500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में सटीक स्थिति (Positioning) की जानकारी प्रदान करता है।
❤4
क्रायोजेनिक इंजन (Cryogenic Engine) में ईंधन के रूप में किसका उपयोग किया जाता है?
Anonymous Quiz
67%
तरल हाइड्रोजन और तरल ऑक्सीजन
10%
तरल नाइट्रोजन और तरल मीथेन
5%
केरोसिन और तरल ऑक्सीजन
17%
केवल ठोस प्रणोदक (Solid Propellant)
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क्रायोजेनिक इंजन (Cryogenic Engine) में ईंधन के रूप में किसका उपयोग किया जाता है?
क्रायोजेनिक इंजन अंतरिक्ष रॉकेटों (जैसे GSLV और LVM3) के ऊपरी चरणों (Upper Stages) में उपयोग होते हैं।
इसमें तरल हाइड्रोजन (-253⁰C) को ईंधन के रूप में और तरल ऑक्सीजन (-183⁰C) को ऑक्सीडाइज़र के रूप में बेहद कम तापमान पर स्टोर करके उपयोग किया जाता है। यह रॉकेट को बहुत अधिक थ्रस्ट (ऊर्जा) प्रदान करता है।
इसमें तरल हाइड्रोजन (-253⁰C) को ईंधन के रूप में और तरल ऑक्सीजन (-183⁰C) को ऑक्सीडाइज़र के रूप में बेहद कम तापमान पर स्टोर करके उपयोग किया जाता है। यह रॉकेट को बहुत अधिक थ्रस्ट (ऊर्जा) प्रदान करता है।
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अक्सर समाचारों में रहने वाली 'CRISPR-Cas9' (क्रिसपर-कैस9) तकनीक का संबंध निम्नलिखित में से किससे है?
Anonymous Quiz
5%
ओजोन परत का क्षरण रोकना
4%
जल शोधन तकनीक
31%
ब्लॉकचेन आधारित क्रिप्टोकरेंसी
60%
जीन एडिटिंग
❤3😍1
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अक्सर समाचारों में रहने वाली 'CRISPR-Cas9' (क्रिसपर-कैस9) तकनीक का संबंध निम्नलिखित में से किससे है?
CRISPR-Cas9 एक क्रांतिकारी जीन-एडिटिंग टूल है जो वैज्ञानिकों को डीएनए (DNA) के क्रम को बदलने और जीन के कार्य को संशोधित करने की अनुमति देता है।
'Cas9' एक एंजाइम है जो मॉलिक्यूलर कैंची (Molecular Scissors) की तरह काम करता है, जो डीएनए के विशिष्ट हिस्से को काट सकता है। इसके माध्यम से आनुवंशिक बीमारियों का इलाज खोजने में मदद मिल रही है।
'Cas9' एक एंजाइम है जो मॉलिक्यूलर कैंची (Molecular Scissors) की तरह काम करता है, जो डीएनए के विशिष्ट हिस्से को काट सकता है। इसके माध्यम से आनुवंशिक बीमारियों का इलाज खोजने में मदद मिल रही है।
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रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और भारतीय वायुसेना ने 2 जून 2026 को स्वदेशी रुद्रएम-II (RudraM-II) एयर-टू-सरफेस (हवा से सतह पर मार करने वाली) मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया। इसे ओडिशा के तट पर सुखोई-30 एमकेआई (Su-30MKI) लड़ाकू विमान से सफलतापूर्वक दागा गया।
इस मिसाइल की प्रमुख विशेषताएं और परीक्षण के परिणाम इस प्रकार हैं:
सटीक मारक क्षमता: मिसाइल ने चरम परीक्षण परिस्थितियों में अपने लक्ष्य को सटीकता से भेदकर (पिनपॉइंट एक्यूरेसी) सभी मिशन उद्देश्यों को पूरा किया।
मारक क्षमता और गति: ठोस-ईंधन (सॉलिड-प्रोपेलेंट) पर आधारित इस मिसाइल की रेंज लगभग 300 से 350 किलोमीटर है और इसकी गति मैक 5 से अधिक (हाइपरसोनिक) है।
तकनीकी विशेषता: यह स्वदेशी एंटी-रेडिएशन मिसाइल मुख्य रूप से दुश्मन के रडार, बंकरों और संचार प्रणालियों को नष्ट करने (SEAD अभियानों) के लिए डिज़ाइन की गई है। इसमें मेमोरी लॉकिंग सिस्टम लगा है, जो रडार के बंद होने पर भी उसकी आखिरी लोकेशन को याद रखकर उसे तबाह कर सकता है।
विकास: इस प्रोजेक्ट की नोडल एजेंसी रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) (DRDO की एक प्रयोगशाला) है।
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इस मिसाइल की प्रमुख विशेषताएं और परीक्षण के परिणाम इस प्रकार हैं:
सटीक मारक क्षमता: मिसाइल ने चरम परीक्षण परिस्थितियों में अपने लक्ष्य को सटीकता से भेदकर (पिनपॉइंट एक्यूरेसी) सभी मिशन उद्देश्यों को पूरा किया।
मारक क्षमता और गति: ठोस-ईंधन (सॉलिड-प्रोपेलेंट) पर आधारित इस मिसाइल की रेंज लगभग 300 से 350 किलोमीटर है और इसकी गति मैक 5 से अधिक (हाइपरसोनिक) है।
तकनीकी विशेषता: यह स्वदेशी एंटी-रेडिएशन मिसाइल मुख्य रूप से दुश्मन के रडार, बंकरों और संचार प्रणालियों को नष्ट करने (SEAD अभियानों) के लिए डिज़ाइन की गई है। इसमें मेमोरी लॉकिंग सिस्टम लगा है, जो रडार के बंद होने पर भी उसकी आखिरी लोकेशन को याद रखकर उसे तबाह कर सकता है।
विकास: इस प्रोजेक्ट की नोडल एजेंसी रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) (DRDO की एक प्रयोगशाला) है।
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ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0
हाल ही में गुजरात पुलिस ने 'ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0' नामक राज्यव्यापी कार्रवाई के तहत ₹2,289 करोड़ के साइबर फ्रॉड का खुलासा किया और 913 म्यूल बैंक अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई की।
डेटा स्रोत: गुजरात पुलिस ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP), समन्वय पोर्टल और ‘1930’ साइबर अपराध हेल्पलाइन से डेटा संकलित किया।
रिस्क-स्कोरिंग सिस्टम: म्यूल अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई को अधिक कुशल और सक्रिय बनाने के लिये, 'इंडियन डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉरपोरेशन' (IDPIC) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के तहत एक AI आधारित रिस्क-स्कोरिंग सिस्टम लागू कर रहा है।
लेन-देन का वर्गीकरण: इस प्रणाली के तहत, प्रत्येक लेन-देन को न्यूनतम जोखिम, मध्यम जोखिम या उच्च जोखिम के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा ताकि संदिग्ध खातों की पहचान की जा सके और बैंक आवश्यक कार्रवाई कर सकें।
सूचना साझाकरण: IDPIC को नोडल एजेंसी बनाया गया है और बैंकों के बीच संदिग्ध खातों के बारे में जानकारी साझा करने के लिये 'mulehunter.ai' नामक एक रजिस्ट्री बनाई गई है।
म्यूल अकाउंट
परिचय: म्यूल अकाउंट ऐसा बैंक अकाउंट होता है, जिसका उपयोग अवैध गतिविधियों को सुगम बनाने के लिये किया जाता है।
मनी म्यूल वह व्यक्ति होता है जो किसी अन्य व्यक्ति की ओर से अवैध रूप से अर्जित धन को हस्तांतरित या स्थानांतरित करता है।
बैंकिंग वलनरेबिलिटी: अंतर्राष्ट्रीय साइबर अपराधी शेल कंपनियों और व्यक्तियों के खातों का उपयोग म्यूल अकाउंट के रूप में करते हैं तथा इसके लिये वे बैंकों द्वारा प्रदान की जाने वाली बल्क पेआउट (एक साथ भारी मात्रा में भुगतान करने की) सुविधा का दुरुपयोग करते हैं।
हाल ही में गुजरात पुलिस ने 'ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0' नामक राज्यव्यापी कार्रवाई के तहत ₹2,289 करोड़ के साइबर फ्रॉड का खुलासा किया और 913 म्यूल बैंक अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई की।
डेटा स्रोत: गुजरात पुलिस ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP), समन्वय पोर्टल और ‘1930’ साइबर अपराध हेल्पलाइन से डेटा संकलित किया।
रिस्क-स्कोरिंग सिस्टम: म्यूल अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई को अधिक कुशल और सक्रिय बनाने के लिये, 'इंडियन डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉरपोरेशन' (IDPIC) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के तहत एक AI आधारित रिस्क-स्कोरिंग सिस्टम लागू कर रहा है।
लेन-देन का वर्गीकरण: इस प्रणाली के तहत, प्रत्येक लेन-देन को न्यूनतम जोखिम, मध्यम जोखिम या उच्च जोखिम के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा ताकि संदिग्ध खातों की पहचान की जा सके और बैंक आवश्यक कार्रवाई कर सकें।
सूचना साझाकरण: IDPIC को नोडल एजेंसी बनाया गया है और बैंकों के बीच संदिग्ध खातों के बारे में जानकारी साझा करने के लिये 'mulehunter.ai' नामक एक रजिस्ट्री बनाई गई है।
म्यूल अकाउंट
परिचय: म्यूल अकाउंट ऐसा बैंक अकाउंट होता है, जिसका उपयोग अवैध गतिविधियों को सुगम बनाने के लिये किया जाता है।
मनी म्यूल वह व्यक्ति होता है जो किसी अन्य व्यक्ति की ओर से अवैध रूप से अर्जित धन को हस्तांतरित या स्थानांतरित करता है।
बैंकिंग वलनरेबिलिटी: अंतर्राष्ट्रीय साइबर अपराधी शेल कंपनियों और व्यक्तियों के खातों का उपयोग म्यूल अकाउंट के रूप में करते हैं तथा इसके लिये वे बैंकों द्वारा प्रदान की जाने वाली बल्क पेआउट (एक साथ भारी मात्रा में भुगतान करने की) सुविधा का दुरुपयोग करते हैं।
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कोविड-19 के दौरान 1 जून 2020 को शुरू की गई प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना (PM SVANidhi) ने 6 सफल वर्ष पूरे कर लिए हैं。इस पहल का मुख्य उद्देश्य रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को बिना किसी गारंटी के आसान कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) ऋण प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
आवासन और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) द्वारा शुरू की गई इस योजना की अवधि मार्च 2030 तक बढ़ा दी गई है।
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आवासन और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) द्वारा शुरू की गई इस योजना की अवधि मार्च 2030 तक बढ़ा दी गई है।
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'मेगा साइंस विज़न-2035 (जलवायु अनुसंधान) रिपोर्ट'
नोडल संस्था: यह रिपोर्ट भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु को नोडल एजेंसी बनाकर तैयार की गई है।
अध्यक्षता: इसे प्रो. एस.के. सतीश की अध्यक्षता वाले विशेषज्ञ समूह ने देश के 3,000 से अधिक वैज्ञानिकों से चर्चा कर तैयार किया है।
रिपोर्ट किसे सौंपी गई? भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) के कार्यालय को।
महत्व: पहले 'मेगा साइंस विज़न' का उपयोग केवल परमाणु विज्ञान या उच्च-ऊर्जा भौतिकी के लिए होता था, लेकिन पहली बार इसका विस्तार जलवायु विज्ञान, पारिस्थितिकी (Ecology) और खगोल विज्ञान (Astronomy) में किया गया है।
मुख्य चिंता: वैज्ञानिक उपकरणों में आत्मनिर्भरता की कमी
विदेशी निर्भरता: रिपोर्ट का सबसे गंभीर निष्कर्ष यह है कि भारत जलवायु अनुसंधान (Climate Research) के लिए जरूरी उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक उपकरणों के निर्माण में आत्मनिर्भर नहीं है। हम बड़े पैमाने पर आयात (Import) पर निर्भर हैं।
डेटा की विश्वसनीयता पर सवाल: कई बार शोध संस्थान विदेशी उपकरणों के कार्य सिद्धांतों (Working Principles) और सीमाओं को समझे बिना उनका उपयोग करते हैं। नियमित कैलिब्रेशन (जांच) न होने से इन उपकरणों से मिले आंकड़ों की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
प्रयोगशाला से बाजार तक दूरी: भारत ने कई स्वदेशी तकनीकें बनाई हैं—जैसे राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा विकसित समुद्री प्रोफाइलिंग फ्लोट्स और IMD/ISRO द्वारा विकसित स्वचालित मौसम केंद्र (AWS)। लेकिन इनका व्यापक व्यावसायिक उत्पादन (Commercial Production) नहीं हो सका।
आठ (8) प्रमुख राष्ट्रीय परियोजनाओं का प्रस्ताव
जलवायु विज्ञान और अनुसंधान को मजबूत करने के लिए रिपोर्ट में 8 बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रमों का सुझाव दिया गया है:
राष्ट्रीय अवलोकन नेटवर्क (National Observation Network)
स्वदेशी सेंसर विकास (Indigenous Sensor Development)
उपग्रह मिशन (Satellite Missions)
उन्नत जलवायु मॉडलिंग (Advanced Climate Modeling)
क्षेत्रीय अनुसंधान अभियान (Regional Research Campaigns)
कार्बन-तटस्थता अध्ययन (Carbon-Neutrality Studies)
अनुकूलन विज्ञान (Adaptation Science)
जलवायु लचीलापन निर्माण (Climate Resilience Building)
इन सभी की निगरानी के लिए एक उच्च स्तरीय शीर्ष समिति (Apex Committee) बनाने की सिफारिश की गई है।
जलवायु और स्वास्थ्य वेधशाला (Climate & Health Observatory)
जलवायु परिवर्तन का सीधा असर जन-स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। रिपोर्ट ने पूरे देश में एक "जलवायु एवं स्वास्थ्य वेधशाला" स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है, जो जलवायु से होने वाली बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं का डेटा जुटाएगी और निगरानी करेगी।
नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण पर संतुलित दृष्टिकोण
भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करना है। रिपोर्ट कहती है कि यह जरूरी है, लेकिन इस परिवर्तन के कारण प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ने वाले दीर्घकालिक पर्यावरणीय प्रभावों का भी वैज्ञानिक आकलन होना चाहिए।
रिपोर्ट ने "प्रदूषक भुगतान करे" (Polluter Pays Principle) को प्रभावी ढंग से लागू करने और कार्बन उत्सर्जन की सामाजिक लागत का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने की वकालत की है।
भविष्य की चुनौतियां (Scientific Gaps)SecurePcs
पैलियोक्लाइमेट अध्ययन की कमी: भारत में प्राचीन जलवायु (Paleoclimate) के अध्ययन बहुत सीमित हैं, जिससे मानसून के दीर्घकालिक इतिहास को समझना कठिन हो जाता है।
विशेषज्ञों की कमी: पर्यावरणीय महामारी विज्ञान (Environmental Epidemiology) और उन्नत जलवायु विज्ञान के क्षेत्रों में प्रशिक्षित मानव संसाधन (Experts) की भारी कमी है।
ग्लेशियरों का पिघलना और महासागरीय धाराओं में बदलाव जैसे 'क्लाइमेट टिपिंग पॉइंट्स' पर अधिक शोध की आवश्यकता है।
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11वीं क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक
आयोजन: 26 मई, 2026 को नई दिल्ली में
डोमेन अवेयरनेस बढ़ाने के लिए बैठक के दौरान पहली बार इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम सर्विलांस कोलैबोरेशन (IPMSC) शुरू किया गया है, जिसका शुरुआती फोकस हिंद महासागर क्षेत्र पर है।
आयोजन: 26 मई, 2026 को नई दिल्ली में
डोमेन अवेयरनेस बढ़ाने के लिए बैठक के दौरान पहली बार इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम सर्विलांस कोलैबोरेशन (IPMSC) शुरू किया गया है, जिसका शुरुआती फोकस हिंद महासागर क्षेत्र पर है।
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डाक विभाग और वायुसेना पहुचायेंगे नीट यूजी प्रश्नपत्रों को केंद्र तक 👍❤️
कोरोना की याद आ गई जब अफवाह उड़ी थी कि हेलीकॉप्टर से सैनीटाइजर छिड़काव होगा😂
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केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ जितेंद्र सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ लखनऊ में नए क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (आरएमसी) का शुभारंभ किया।
#UP_SPECIAL
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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने भव्य पोर्टल का शुभारंभ किया
राज्यों में औद्योगिक पार्कों के प्रतिस्पर्धी विकास को बढ़ावा देने के लिए भव्य योजना: श्री पीयूष गोयल
अवसंरचना, सुधारों और डिजिटल कनेक्टिविटी पर सरकार के फोकस ने विकास के लिए मजबूत आधार तैयार किया है: श्री गोयल
भव्य पार्कों में स्टार्ट-अप, डीप-टेक, अनुसंधान एवं विकास और नवाचार-आधारित उद्यमों के लिए समर्पित स्थान शामिल होंगे: श्री पीयूष गोयल
बीआईएस, ईआईए और एफएसएसएआई के सहयोग से भव्य पार्कों में आधुनिक परीक्षण सुविधाएं विकसित की जाएंगी: श्री गोयल
एनआईसीडीसी समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भव्य योजना के कार्यान्वयन और निगरानी का नेतृत्व करेगा
राज्यों में औद्योगिक पार्कों के प्रतिस्पर्धी विकास को बढ़ावा देने के लिए भव्य योजना: श्री पीयूष गोयल
अवसंरचना, सुधारों और डिजिटल कनेक्टिविटी पर सरकार के फोकस ने विकास के लिए मजबूत आधार तैयार किया है: श्री गोयल
भव्य पार्कों में स्टार्ट-अप, डीप-टेक, अनुसंधान एवं विकास और नवाचार-आधारित उद्यमों के लिए समर्पित स्थान शामिल होंगे: श्री पीयूष गोयल
बीआईएस, ईआईए और एफएसएसएआई के सहयोग से भव्य पार्कों में आधुनिक परीक्षण सुविधाएं विकसित की जाएंगी: श्री गोयल
एनआईसीडीसी समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भव्य योजना के कार्यान्वयन और निगरानी का नेतृत्व करेगा
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