भारतीय सेना के लिए पहला स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और निर्मित सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (SDRs) किसके द्वारा विकसित किए गए हैं?
By whom have the first indigenously designed and manufactured Software Defined Radios (SDRs) for the Indian Army been developed?
By whom have the first indigenously designed and manufactured Software Defined Radios (SDRs) for the Indian Army been developed?
Anonymous Quiz
12%
Hindustan Aeronautics Limited (HAL)
79%
Defence Research and Development Organisation (DRDO)
7%
Bharat Dynamics Limited (BDL)
2%
Indian Space Research Organisation (ISRO)
👍2❤1
ठाकुर ज़ी (बाँके बिहारी) की जरी पोशाक को मिला GI टैग
इससे पूर्व मथुरा के स्थानीय मिठाई पेड़े और सांझी कला को मिल चुका है GI टैग
#Upspecial
इससे पूर्व मथुरा के स्थानीय मिठाई पेड़े और सांझी कला को मिल चुका है GI टैग
#Upspecial
❤5👍1
प्रसिद्द मूर्तिकार राम वी सुतार को मिला महाराष्ट्र का सर्वोच्च नागरिक सम्मान "महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार"
#Current #Fact #awards
#Current #Fact #awards
❤7👍2
Forwarded from Secure PCS
UPPCS Pre 2026 के लिए रणनीति।
सबसे पहले कम से कम 5 साल के आयोग द्वारा कराए गए सभी एग्जाम के प्रश्न पत्र अच्छे से सॉल्व कीजिए।
इसके बाद सामान्य अध्ययन के जो मैटेरियल आपके पास है उसको अपने समयानुसार टाइम टेबल बनाकर पढ़ना शुरू कीजिए कि इस हफ्ते मुझे ये पढ़ना है अगले हफ्ते मुझे ये पढ़ना है।
GS पढ़ने के साथ साथ प्रैक्टिस के लिए घटनाचक्र लगाइए इससे हरेक टॉपिक अच्छे से तैयार होता रहेगा और एक अलग ही कॉन्फिडेंस आएगा अधिकांश लोग यही करते हैं।
अब एक सवाल है कि अधिकांश लोग यही करते हैं तो लोग फेल क्यों हो जाते हैं।
फेल पास डिसाइड करता है करेंट अफेयर्स इसलिए नहीं की बिना इसके सलेक्शन नही होगा बल्कि इसलिए कि लोग डेली करेंट अफेयर्स पढ़ते नहीं हैं और एक्जाम के 30 दिन पहले मार्केट में कम्पाइलेशन आता है और पूरी भीड़ उसे ही जम के पढ़ना शुरू करती है और करेंट अफेयर्स तैयार कर लेती है लेकिन वह इस करेंट के चक्कर में यह भूल जाती है कि जिस GS को पिछले कई महीने से तैयार किया था वह आंखों से ओझल हो गया। और फिर एक्जाम में दो विकल्प में कन्फ्यूजन होता है और फिर चलता है 50– 50 का खेल जो कि रिस्की होता है।
इसलिए अंत समय में दिक्कत ना हो इसलिए इस चैनल पर जो करेंट अफेयर्स भेजा जा रहा है उसका अध्ययन करते रहिए और नोट भी बनाईए खुद के बनाए नोट कितना महत्वपूर्ण हैं यह नोट बनाने के बाद रिवीजन टाइम पता चलेगा।
प्रश्न;Secure Pcs के करेंट अफेयर्स में ऐसा क्या है कि हमें पढ़ना चाहिए?
उत्तर: Secure Pcs नियमित करेंट अफेयर्स प्रेषित करने के साथ साथ विभिन्न आयोगों द्वारा हाल ही में आयोजित परीक्षा में पूछे गए करेंट अफेयर के प्रश्नों को भी सॉल्व करवाता है जिससे एक आईडिया भी लगता रहे कि एग्जाम में करेंट के इस टॉपिक से कैसा प्रश्न बन सकता है। और करेंट अफेयर्स पर मजबूत पकड़ बनती रहे।
अगर आप इस मंच से जुड़े रहें हैं तो आपने इस बात का अनुभव स्वयं किया होगा।
जो लोग बार बार प्री में फेल हो जा रहे हैं वह लोग भी यही रणनीति फॉलो करें
अमूमन क्या होता है सबको लगता है ये तो तैयार है ये तो मुझे आता है और पढ़ते नहीं हैं और एक्जाम में सब तुक्का लगाना पड़ता है। इसलिए खूब पढ़िए रिवीजन जरूर करिए नहीं तो सब बेकार है।
धन्यवाद 💐♥️
Team Secure Pcs
मैं यह मानता हूं कि आपने इतिहास भूगोल... थोड़ा बहुत पढ़ा है,सबसे पहले कम से कम 5 साल के आयोग द्वारा कराए गए सभी एग्जाम के प्रश्न पत्र अच्छे से सॉल्व कीजिए।
इसके बाद सामान्य अध्ययन के जो मैटेरियल आपके पास है उसको अपने समयानुसार टाइम टेबल बनाकर पढ़ना शुरू कीजिए कि इस हफ्ते मुझे ये पढ़ना है अगले हफ्ते मुझे ये पढ़ना है।
GS पढ़ने के साथ साथ प्रैक्टिस के लिए घटनाचक्र लगाइए इससे हरेक टॉपिक अच्छे से तैयार होता रहेगा और एक अलग ही कॉन्फिडेंस आएगा अधिकांश लोग यही करते हैं।
अब एक सवाल है कि अधिकांश लोग यही करते हैं तो लोग फेल क्यों हो जाते हैं।
फेल पास डिसाइड करता है करेंट अफेयर्स इसलिए नहीं की बिना इसके सलेक्शन नही होगा बल्कि इसलिए कि लोग डेली करेंट अफेयर्स पढ़ते नहीं हैं और एक्जाम के 30 दिन पहले मार्केट में कम्पाइलेशन आता है और पूरी भीड़ उसे ही जम के पढ़ना शुरू करती है और करेंट अफेयर्स तैयार कर लेती है लेकिन वह इस करेंट के चक्कर में यह भूल जाती है कि जिस GS को पिछले कई महीने से तैयार किया था वह आंखों से ओझल हो गया। और फिर एक्जाम में दो विकल्प में कन्फ्यूजन होता है और फिर चलता है 50– 50 का खेल जो कि रिस्की होता है।
इसलिए अंत समय में दिक्कत ना हो इसलिए इस चैनल पर जो करेंट अफेयर्स भेजा जा रहा है उसका अध्ययन करते रहिए और नोट भी बनाईए खुद के बनाए नोट कितना महत्वपूर्ण हैं यह नोट बनाने के बाद रिवीजन टाइम पता चलेगा।
प्रश्न;Secure Pcs के करेंट अफेयर्स में ऐसा क्या है कि हमें पढ़ना चाहिए?
उत्तर: Secure Pcs नियमित करेंट अफेयर्स प्रेषित करने के साथ साथ विभिन्न आयोगों द्वारा हाल ही में आयोजित परीक्षा में पूछे गए करेंट अफेयर के प्रश्नों को भी सॉल्व करवाता है जिससे एक आईडिया भी लगता रहे कि एग्जाम में करेंट के इस टॉपिक से कैसा प्रश्न बन सकता है। और करेंट अफेयर्स पर मजबूत पकड़ बनती रहे।
अगर आप इस मंच से जुड़े रहें हैं तो आपने इस बात का अनुभव स्वयं किया होगा।
जो लोग बार बार प्री में फेल हो जा रहे हैं वह लोग भी यही रणनीति फॉलो करें
अमूमन क्या होता है सबको लगता है ये तो तैयार है ये तो मुझे आता है और पढ़ते नहीं हैं और एक्जाम में सब तुक्का लगाना पड़ता है। इसलिए खूब पढ़िए रिवीजन जरूर करिए नहीं तो सब बेकार है।
एक बात गांठ बांध लीजिए कि आप फेल इसलिए नहीं हो रहे हैं कि सामने वाला बहुत पढ़ रहा है आप फेल इसलिए हो रहे हैं क्योंकि आप नहीं पढ़ रहे हैं।
धन्यवाद 💐♥️
Team Secure Pcs
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विश्व डायबिटीज़ (मधुमेह) दिवस - 14 नवंबर
थीम - जीवन के विभिन्न चरणों में मधुमेह
अगर इलाज ना किया जाए तो डायबिटीज़ से यह समस्याएँ हो सकती हैं: अंधापन किडनी खराब होना दिल का दौरा स्ट्रोक पैर का हिस्सा काटने की नौबत
थीम - जीवन के विभिन्न चरणों में मधुमेह
अगर इलाज ना किया जाए तो डायबिटीज़ से यह समस्याएँ हो सकती हैं: अंधापन किडनी खराब होना दिल का दौरा स्ट्रोक पैर का हिस्सा काटने की नौबत
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UPSI OFFICIAL EXAM DATE 2025
UPSI मृतक आश्रित कोटे के लिए परीक्षा 13 दिसंबर को आफलाइन संपन्न होगी
https://t.me/SecurePcs
UPSI मृतक आश्रित कोटे के लिए परीक्षा 13 दिसंबर को आफलाइन संपन्न होगी
https://t.me/SecurePcs
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Forwarded from Secure PCS
Secure Pcs Handwritten Current Affairs .pdf
8.3 MB
Handwritten Current Affairs Note. November (Part-1)
आपका समर्थन इस पहल को जीवित रखने और आगे बढ़ाने में मदद करेगा।
इसलिए अधिक से अधिक लोग को इस मंच से जोड़ें जिससे यह पहल निरंतर चलती रहे।
धन्यवाद 💐
Team Secure Pcs
आपका समर्थन इस पहल को जीवित रखने और आगे बढ़ाने में मदद करेगा।
इसलिए अधिक से अधिक लोग को इस मंच से जोड़ें जिससे यह पहल निरंतर चलती रहे।
धन्यवाद 💐
Team Secure Pcs
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भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद भारत की विदेश नीति से सम्बन्धित है?
★Secure Pcs
★Secure Pcs
Anonymous Quiz
11%
अनुच्छेद 380
39%
अनुच्छेद 351
4%
अनुच्छेद 60
46%
अनुच्छेद 51
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भारतीय संविधान की निम्न दी गई अनुसूचियों में से कौन-सी एक राज्यों के नामों की सूची तथा उनके राज्य क्षेत्रों का ब्योरा देती है?
Anonymous Quiz
54%
पहली
19%
दूसरी
19%
तीसरी
9%
चौधी
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Secure PCS
संसाधनों की सीमा। https://t.me/SecurePcs
लेख का सारांश: संसाधनों का संरक्षण
यह लेख वर्तमान उपभोक्तावादी संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन से उत्पन्न गंभीर चुनौतियों पर प्रकाश डालता है।
मूल समस्या: मनुष्य आज एक ऐसी जीवनशैली जी रहा है जहाँ वह अपनी मूलभूत आवश्यकताओं को जाने बिना ही, केवल विज्ञापन और दूसरों की देखा-देखी में, घर और जीवन में अनावश्यक चीज़ों का अंबार लगा रहा है। यह प्रवृत्ति भौतिकवाद और दिखावे पर आधारित है, जिससे संसाधनों का अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग (दोहन) हो रहा है।
परिणाम: इस अत्यधिक दोहन के कारण आज पृथ्वी पर खनिज, पानी, हवा, ऊर्जा और अन्य प्राकृतिक संसाधनों की संख्या तेजी से कम हो रही है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो भविष्य में इन संसाधनों का उपलब्ध होना बहुत मुश्किल हो जाएगा।
आवश्यकता: लेखक 'वैश्विक जिम्मेदारी' की बात करते हुए कहता है कि हमें अपनी जीवन-शैली को बदलना होगा। हमें चीजों के सीमित उपयोग को महत्व देना होगा और यह समझना होगा कि केवल चीजें बटोरने से ही जीवन सुखमय नहीं बनता।
समाधान:
आवश्यकता की पहचान: हमें अपनी वास्तविक और मूलभूत ज़रूरतों को पहचानना होगा।
ज्ञान का प्रसार: जो लोग इस बात को समझते हैं, उन्हें अपनी जीवन-शैली में बदलाव लाकर दूसरों के सामने एक उदाहरण पेश करना होगा।
नैतिक शिक्षा: बच्चों को शुरुआत से ही साधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना सिखानी होगी।
दीर्घकालिक सोच: संसाधनों के संरक्षण को वर्तमान और भावी पीढ़ियों के कल्याण के लिए एक सतत और जीवनभर चलने वाला प्रयास बनाना होगा।
निष्कर्ष: लेखक ज़ोर देता है कि जब तक हम अपनी अनावश्यकताओं को नहीं समझेंगे और विवेकपूर्ण जीवन नहीं जिएंगे, तब तक संसाधनों का सही उपयोग संभव नहीं हो पाएगा।
यह लेख वर्तमान उपभोक्तावादी संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन से उत्पन्न गंभीर चुनौतियों पर प्रकाश डालता है।
मूल समस्या: मनुष्य आज एक ऐसी जीवनशैली जी रहा है जहाँ वह अपनी मूलभूत आवश्यकताओं को जाने बिना ही, केवल विज्ञापन और दूसरों की देखा-देखी में, घर और जीवन में अनावश्यक चीज़ों का अंबार लगा रहा है। यह प्रवृत्ति भौतिकवाद और दिखावे पर आधारित है, जिससे संसाधनों का अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग (दोहन) हो रहा है।
परिणाम: इस अत्यधिक दोहन के कारण आज पृथ्वी पर खनिज, पानी, हवा, ऊर्जा और अन्य प्राकृतिक संसाधनों की संख्या तेजी से कम हो रही है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो भविष्य में इन संसाधनों का उपलब्ध होना बहुत मुश्किल हो जाएगा।
आवश्यकता: लेखक 'वैश्विक जिम्मेदारी' की बात करते हुए कहता है कि हमें अपनी जीवन-शैली को बदलना होगा। हमें चीजों के सीमित उपयोग को महत्व देना होगा और यह समझना होगा कि केवल चीजें बटोरने से ही जीवन सुखमय नहीं बनता।
समाधान:
आवश्यकता की पहचान: हमें अपनी वास्तविक और मूलभूत ज़रूरतों को पहचानना होगा।
ज्ञान का प्रसार: जो लोग इस बात को समझते हैं, उन्हें अपनी जीवन-शैली में बदलाव लाकर दूसरों के सामने एक उदाहरण पेश करना होगा।
नैतिक शिक्षा: बच्चों को शुरुआत से ही साधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना सिखानी होगी।
दीर्घकालिक सोच: संसाधनों के संरक्षण को वर्तमान और भावी पीढ़ियों के कल्याण के लिए एक सतत और जीवनभर चलने वाला प्रयास बनाना होगा।
निष्कर्ष: लेखक ज़ोर देता है कि जब तक हम अपनी अनावश्यकताओं को नहीं समझेंगे और विवेकपूर्ण जीवन नहीं जिएंगे, तब तक संसाधनों का सही उपयोग संभव नहीं हो पाएगा।
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Secure PCS
तकनीक के पैमाने पर महिला शिक्षा। https://t.me/SecurePcs
महिला शिक्षा और तकनीक
📊 शिक्षा और रोज़गार से सम्बंधित तथ्य:
राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा संस्थान (All India Survey on Higher Education - AISHE) 2018-19 के अनुसार, उच्च शिक्षा में महिलाओं का सकल नामांकन अनुपात (GER) 39.4 प्रतिशत था।
उच्च शिक्षा में प्रति 100 पुरुषों पर 97 महिलाएँ नामांकित हैं, जो दर्शाता है कि उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों के लगभग बराबर है।
इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्रों में, महिलाओं का नामांकन 28.7 प्रतिशत और विज्ञान क्षेत्रों में 55.4 प्रतिशत है।
वर्तमान में, 1.5 करोड़ से अधिक लड़कियाँ कम्प्यूटर शिक्षा का प्रशिक्षण ले रही हैं।
🎯 तकनीकी शिक्षा में महिलाएँ:
तकनीकी शिक्षा में महिलाओं का रुझान लगातार बढ़ रहा है। सरकार 'राष्ट्रीय राष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना' और 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसी योजनाओं के माध्यम से इसे प्रोत्साहित कर रही है।
तकनीकी परिदृश्य में महिलाएँ अपनी योग्यता सिद्ध कर चुकी हैं, लेकिन प्रौद्योगिकी और शिक्षा के तेजी से बदलते माहौल को देखते हुए इसमें व्यापक विकास और सुधार की आवश्यकता है।
तकनीकी शिक्षा महिलाओं को उच्च वेतन, बेहतर अवसर और आत्मनिर्भरता प्रदान करने में सहायक है।
तकनीक के उपयोग से महिलाएं अपने बच्चों की शिक्षा में भी बेहतर योगदान दे सकती हैं।
🚧 चुनौतियाँ और सुझाव:
उच्च शिक्षा के विभिन्न चरणों में, जैसे कि प्रवेश, पाठ्यचर्या, और मूल्यांकन, आज भी लैंगिक रूढ़िवादिता और पूर्वाग्रहों का प्रभाव दिखाई देता है, जिसे दूर करने की आवश्यकता है।
महिलाओं को शैक्षिक और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए एक ऐसे व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता है जो उन्हें केवल रोज़गार के लिए नहीं, बल्कि समाज के सक्रिय सदस्य के रूप में तैयार करे।
विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग, कला और गणित (STEAM) जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना, देश के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
इस लेख का मूल संदेश यह है कि महिला शिक्षा में प्रगति हुई है, विशेषकर तकनीक के क्षेत्र में, लेकिन 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने और देश को विकसित बनाने के लिए इस दिशा में निरंतर और गंभीर प्रयास करते रहने की आवश्यकता है।
#Editorial
📊 शिक्षा और रोज़गार से सम्बंधित तथ्य:
राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा संस्थान (All India Survey on Higher Education - AISHE) 2018-19 के अनुसार, उच्च शिक्षा में महिलाओं का सकल नामांकन अनुपात (GER) 39.4 प्रतिशत था।
उच्च शिक्षा में प्रति 100 पुरुषों पर 97 महिलाएँ नामांकित हैं, जो दर्शाता है कि उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों के लगभग बराबर है।
इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्रों में, महिलाओं का नामांकन 28.7 प्रतिशत और विज्ञान क्षेत्रों में 55.4 प्रतिशत है।
वर्तमान में, 1.5 करोड़ से अधिक लड़कियाँ कम्प्यूटर शिक्षा का प्रशिक्षण ले रही हैं।
🎯 तकनीकी शिक्षा में महिलाएँ:
तकनीकी शिक्षा में महिलाओं का रुझान लगातार बढ़ रहा है। सरकार 'राष्ट्रीय राष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना' और 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसी योजनाओं के माध्यम से इसे प्रोत्साहित कर रही है।
तकनीकी परिदृश्य में महिलाएँ अपनी योग्यता सिद्ध कर चुकी हैं, लेकिन प्रौद्योगिकी और शिक्षा के तेजी से बदलते माहौल को देखते हुए इसमें व्यापक विकास और सुधार की आवश्यकता है।
तकनीकी शिक्षा महिलाओं को उच्च वेतन, बेहतर अवसर और आत्मनिर्भरता प्रदान करने में सहायक है।
तकनीक के उपयोग से महिलाएं अपने बच्चों की शिक्षा में भी बेहतर योगदान दे सकती हैं।
🚧 चुनौतियाँ और सुझाव:
उच्च शिक्षा के विभिन्न चरणों में, जैसे कि प्रवेश, पाठ्यचर्या, और मूल्यांकन, आज भी लैंगिक रूढ़िवादिता और पूर्वाग्रहों का प्रभाव दिखाई देता है, जिसे दूर करने की आवश्यकता है।
महिलाओं को शैक्षिक और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए एक ऐसे व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता है जो उन्हें केवल रोज़गार के लिए नहीं, बल्कि समाज के सक्रिय सदस्य के रूप में तैयार करे।
विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग, कला और गणित (STEAM) जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना, देश के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
इस लेख का मूल संदेश यह है कि महिला शिक्षा में प्रगति हुई है, विशेषकर तकनीक के क्षेत्र में, लेकिन 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने और देश को विकसित बनाने के लिए इस दिशा में निरंतर और गंभीर प्रयास करते रहने की आवश्यकता है।
#Editorial
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