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COP30: वैश्विक जलवायु शिखर सम्मेलन शुरू

10 नवंबर, 2025 को ब्राजील के बेलेम में 30वां संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP30) प्रारंभ हुआ, जो ग्लोबल साउथ के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।
#Current #Fact
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वैश्विक जलवायु परिवर्तन की गंभीर स्थिति और भारत पर इसके विशिष्ट प्रभाव

ग्लोबल वार्मिंग की चेतावनी

रिकॉर्ड तापमान: WMO की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से अगस्त 2025 तक सतह के पास का औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक औसत से 1.42° सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है।
पेरिस लक्ष्यों का उल्लंघन: दुनिया 1.5° सेल्सियस की वैश्विक वार्मिंग सीमा के करीब पहुंच रही है, जिसे पेरिस समझौते में निर्धारित किया गया था। वर्ष 2024 में तापमान 1.5° सेल्सियस का आंकड़ा पार कर गया था।

सबसे गर्म दशक: 2015 से 2025 तक के 11 वर्षों को 176 साल के अवलोकन रिकॉर्ड में सबसे गर्म अवधि रहने का अनुमान है।

अंतर्राष्ट्रीय कार्यवाही (ब्राजील में COP 30)

ब्राजील में वार्षिक संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन (COP 30) को एक महत्वपूर्ण बैठक के रूप में देखा जा रहा है। इसका मुख्य ध्यान नए वादे करने के बजाय मौजूदा जलवायु संरक्षण प्रतिबद्धताओं के कार्यान्वयन पर रहेगा।

भारत पर प्रभाव और प्रतिक्रिया

चरम मौसमी घटनाएँ: भारत में लू (heat waves) और बादल फटने जैसी चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि देखी गई है। फरवरी 2025, भारत में 125 वर्षों में सबसे गर्म और सबसे सूखा महीना था।

भारत की प्रतिबद्धता: भारत जलवायु कार्रवाई में सक्रिय रहा है और उसने वर्ष 2030 तक अपने ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन की तीव्रता को 2005 के जीडीपी स्तर की तुलना में 45% तक कम करने का लक्ष्य रखा है।

मिशन मौसम: IMD, जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से निपटने के लिए "मिशन मौसम" लागू कर रहा है। इस योजना का लक्ष्य सटीक और समय पर पूर्व चेतावनी देने के लिए अपने रडार नेटवर्क को बढ़ाकर 126 और अवलोकन चौकियों को 116 करना है।

वैश्विक नेतृत्व: भारत को जलवायु कार्रवाई में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित किया जा रहा है, विशेष रूप से मिशन LiFE (Lifestyle for Environment) और कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेज़िलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर (CDRI) जैसी पहलों के माध्यम से।

📍आर्थिक परिणाम
जलवायु परिवर्तन भारत की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण खतरा पैदा करता है।
अनुमान है कि 1.5° सेल्सियस तापमान वृद्धि से चावल की उपज 6-10% और गेहूं का उत्पादन 10% तक कम हो सकता है।
मजबूत पूर्व चेतावनी प्रणालियों में निवेश करना लागत प्रभावी है: खर्च किए गए प्रत्येक $1 से आर्थिक नुकसान को रोकने में $10 का लाभ होने का अनुमान है।

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वैश्विक जलवायु परिवर्तन की गंभीर स्थिति और भारत पर इसके विशिष्ट प्रभाव ग्लोबल वार्मिंग की चेतावनी रिकॉर्ड तापमान: WMO की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से अगस्त 2025 तक सतह के पास का औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक औसत से 1.42° सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। पेरिस…
प्रश्न: वैश्विक जलवायु स्थिति 2025 की रिपोर्टों ने पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने की चुनौतियों को रेखांकित किया है। भारत की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था और तटीय क्षेत्रों पर जलवायु परिवर्तन के संभावित प्रभावों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। साथ ही, इन प्रभावों को कम करने के लिए भारत द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों पर भी प्रकाश डालिए। (लगभग 250 शब्द)
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डेविड स्ज़ाले (David Szalay), पहले हंगेरियन-ब्रिटिश लेखक ने अपने उपन्यास ‘फ्लेश’ (Flesh) के लिए 2025 का बुकर पुरस्कार जीता है

बुकर पुरस्कार के बारे में

यह एकल कथा साहित्य के लिए दिया जाने वाला विश्व का अग्रणी साहित्यिक पुरस्कार है। इसकी स्थापना 1969 में ब्रिटेन में हुई थी।

इसके विजेता को 50,000 पाउंड तथा प्रत्येक शॉर्टलिस्ट लेखक को 2,500 पाउंड प्रदान किए जाते हैं।

भारत एवं भारतीय मूल के बुकर पुरस्कार विजेता 

‘फ्री स्टेट’ के लिए बनाम नायपॉल को 
‘मिडनाइट्स चिल्ड्रन’ के लिए सलमान रुश्दी को 
‘द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स’ के लिए अरुंधति रॉय को 
‘द इनहेरिटेंस ऑफ लॉस’ के लिए किरण देसाई को 
‘द व्हाइट टाइगर’ के लिए अरविंद अडिगा को 


बानू मुश्ताक को ‘हार्ट लैंप’ के लिए अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार 2025 मिला है। कन्नड़ भाषा की इस लघु कथा संग्रह का अंग्रेजी में अनुवाद दीपा भस्थी ने किया है। इसके लिए लेखक एवं अनुवादक दोनों को पुरस्कार स्वरूप 50,000 पाउंड की पुरस्कार राशि प्रदान की गयी है।

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सीज़नवॉच के अनुसार, विगत कुछ वर्षों में इंडियन लेबर्नम वृक्षों के फूल सामान्य से पहले ही खिलने लगे हैं। सीज़नवॉच वृक्षों के फीनोलॉजी (Phenology- फलोद्गदिकी) पर नजर रखने वाली एक नागरिक विज्ञान परियोजना है।

इंडियन लेबर्नम के बारे में

इंडियन लेबर्नम (कैसिया फिस्टुला) को उत्तर भारत में ‘अमलतास’ और दक्षिण भारत में ‘कनीकोना’ कहा जाता है। यह फैबेसी (Fabaceae) कुल का एक पुष्पीय पौधा है।

इसे गोल्डन शावर ट्री, पर्जिंग फिस्टुला, पुडिंग-पाइप ट्री के नाम से भी जाना जाता है। यह भारत का मूल वृक्ष है। कैसिया केरल व दिल्ली का राजकीय वृक्ष है। 

यह मध्यम से लेकर विशाल पर्णपाती वृक्ष है जो 10 से 20 मीटर (लगभग 30 से 65 फीट) तक की ऊँचाई तक पहुँच सकता है। यह भारतीय उपमहाद्वीप की मूल प्रजाति है किंतु यह दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य-पूर्व सहित एशिया के अन्य भागों में भी पाया जाता है।

इसे प्राय: दुनिया भर के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में सजावटी वृक्ष के रूप में उगाया जाता है।

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एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन 2025

31 अक्तूबर, 2025 को दक्षिण कोरिया के ग्योंगजू (Gyeongju) शहर में एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन 2025 का आयोजन हुआ। यह सम्मेलन विशेष रूप से अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक समझौते के कारण सुर्खियों में रहा।


एपेक सम्मलेन 2025 के बारे में

स्थान : ग्योंगजू, दक्षिण कोरिया; पहली बार इस ऐतिहासिक शहर ने APEC सम्मेलन की मेज़बानी की।

थीम : ‘Building a Sustainable Tomorrow: Connect, Innovate, Prosper’ अर्थात ‘टिकाऊ भविष्य का निर्माण: जुड़ाव, नवाचार, समृद्धि’

मुख्य फोकस : कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), जनसंख्या असंतुलन एवं हरित प्रौद्योगिकी सहयोग

उद्देश्य 
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना
AI और जनसंख्या असंतुलन पर क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना
आर्थिक एकीकरण और नवाचार आधारित विकास को गति देना
वैश्विक आपूर्ति शृंखला की स्थिरता सुनिश्चित करना


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एपेक (APEC) 

परिचय : APEC (Asia-Pacific Economic Cooperation) एक क्षेत्रीय संगठन है जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त एवं स्वतंत्र व्यापार तथा आर्थिक एकीकरण को प्रोत्साहित करता है। 
स्थापना : वर्ष 1989 में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री बॉब हॉक के सुझाव पर स्थापित। 

पहली बैठक : कैनबरा (ऑस्ट्रेलिया) में 

मुख्यालय : सिंगापुर

प्रकृति : गैर-बाध्यकारी, सर्वसम्मति-आधारित दृष्टिकोण पर कार्यरत

सदस्य देश (कुल 21) : ऑस्ट्रेलिया, ब्रुनेई, कनाडा, चिली, चीन, हांगकांग (चीन), इंडोनेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, मैक्सिको, न्यूजीलैंड, पापुआ न्यू गिनी, पेरू, फिलीपींस, रूस, सिंगापुर, चाइनीज ताइपे (ताइवान), थाईलैंड, अमेरिका, वियतनाम

अधिस्थगन नीति : वर्ष 1997 से APEC ने नई सदस्यता पर अधिस्थगन लागू रखा है।

महत्व : APEC क्षेत्र में विश्व जी.डी.पी. का लगभग 60%, व्यापार का आधा और जनसंख्या का 40% हिस्सा (2.9 अरब लोग)

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उत्तर प्रदेश अपना 76वां जिला बनाएगा

उत्तर प्रदेश सरकार ने दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि स्वरूप राज्य का 76वां जिला बनाने की प्रक्रिया की घोषणा की है , जिसका नाम कल्याण सिंह नगर रखा जाएगा।
प्रस्तावित जिला अलीगढ़ और बुलंदशहर के कुछ हिस्सों को मिलाकर बनाया जाएगा।

प्रमुख बिंदु

कल्याण सिंह (1932–2021):
उनका जन्म 5 जनवरी, 1932 को अतरौली, अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश) में हुआ था।

वे दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे , पहली बार 1991 से 1992 तक और फिर 1997 से 1999 तक ।

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अभ्यास मालाबार 2025

भारतीय नौसेना का जहाज (आईएनएस) सह्याद्री बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास मालाबार 2025 में भाग लेने के लिए उत्तरी प्रशांत क्षेत्र के गुआम पहुंच गया है ।


प्रमुख बिंदु

मालाबार अभ्यास:

यह एक बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है जिसमें क्वाड ढांचे के तहत भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं ।

इसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संयुक्त समुद्री समन्वय , अंतर-संचालन और परिचालन तत्परता को बढ़ाना है।

आईएनएस सह्याद्रि की भागीदारी भारत के आत्मनिर्भर भारत अभियान और नौसैनिक आत्मनिर्भरता को दर्शाती है ।

गुआम: गुआम का चयन प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती भागीदारी और क्वाड के रणनीतिक लक्ष्यों के साथ संरेखण को रेखांकित करता है।
गुआम पश्चिमी प्रशांत महासागर में एक असंबद्ध अमेरिकी क्षेत्र है, जो फिलीपींस और हवाई के बीच स्थित है

यहां एंडरसन एयर फोर्स बेस और नेवल बेस गुआम जैसे प्रमुख अमेरिकी सैन्य अड्डे स्थित हैं , जो इसे हिंद-प्रशांत सुरक्षा अभियानों के लिए एक रणनीतिक केंद्र बनाता है।

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राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन 2025

केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने भारत के शहरी परिवर्तन में तेजी लाने के लिए यशोभूमि, नई दिल्ली में राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन 2025 का उद्घाटन किया।

दो दिवसीय सम्मेलन का विषय " सतत शहरी विकास और शासन" है, जिसका उद्देश्य शहरी नवाचार, निवेश और शासन पर विचार-विमर्श करना है।

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आईएनएस सह्याद्री:

यह शिवालिक श्रेणी (प्रोजेक्ट 17) निर्देशित मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट है , जिसे भारत की पहली स्टील्थ फ्रिगेट श्रृंखला के भाग के रूप में 2012 में कमीशन किया गया था ।

मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल), मुंबई द्वारा निर्मित , इसे एंटी-एयर, एंटी-सरफेस और एंटी-पनडुब्बी युद्ध सहित बहु-भूमिका संचालन के लिए डिज़ाइन किया गया था।
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Today Important Current Affairs 🧿
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राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन 2025 के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?★Secure Pcs

(1)प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यशोभूमि, नई दिल्ली में इसका उद्घाटन किया।(2)इस दो दिवसीय सम्मेलन का विषय " सतत शहरी विकास और शासन" है
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6%
केवल 1
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केवल 2
67%
1 और 2 दोनों
8%
इनमें से कोई नहीं‌‌
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24%
कोनियाक नगालैंड
32%
लिम्बूस मिजोरम
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प्रश्न: वैश्विक जलवायु स्थिति 2025 की रिपोर्टों ने पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने की चुनौतियों को रेखांकित किया है। भारत की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था और तटीय क्षेत्रों पर जलवायु परिवर्तन के संभावित प्रभावों का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। साथ ही, इन…
वैश्विक जलवायु स्थिति 2025 की रिपोर्टें यह संकेत देती हैं कि वैश्विक तापमान वृद्धि पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 1.5∘C की सीमा को लांघने के कगार पर है, जो पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने में गंभीर चुनौतियों को दर्शाता है।

जलवायु परिवर्तन के भारत की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी प्रभाव पड़ सकते हैं। तापमान बढ़ने से चावल (धान) और गेहूं जैसी मुख्य फसलों की उपज में क्रमशः 6−10% और 10% तक की कमी आ सकती है। इसके अतिरिक्त, अनियमित और तीव्र वर्षा (Heavy Rainfall) के कारण बाढ़ की घटनाओं में वृद्धि और लम्बे समय तक सूखा पड़ने की आवृत्ति बढ़ने से कृषि-उत्पादन और ग्रामीण आजीविकाएँ सीधे तौर पर प्रभावित होंगी।

तटीय क्षेत्र और द्वीप समूह बढ़ते समुद्री जल स्तर (Sea Level Rise) और चक्रवातों की बढ़ती तीव्रता के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। अरब सागर में चक्रवातों की बारंबारता और उनकी विनाशक क्षमता में वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है।

इन प्रभावों को कम करने के लिए भारत ने 'मिशन लाइफ' (LiFE - Lifestyle for Environment) और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) जैसे वैश्विक पहल किए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर, राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन अनुकूलन निधि (NAFCC) के तहत परियोजनाएँ शुरू की गई हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा 'मिशन मौसम' के तहत रडार और अवलोकन प्रणालियों का विस्तार किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य सटीक और समय पर अर्ली वार्निंग सिस्टम (Early Warning System) प्रदान करना है। आपदा रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन (CDRI) के माध्यम से भी लचीलेपन (Resilience) पर ज़ोर दिया जा रहा है।

भारत का लक्ष्य 2030 तक अपने उत्सर्जन की तीव्रता को 45% तक कम करना है, जिससे यह स्पष्ट है कि शमन (Mitigation) और अनुकूलन (Adaptation) दोनों ही भारत की जलवायु रणनीति के केंद्र में हैं।
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