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2025 में 100/150 वर्ष पूरा करने वाले संस्थान/घटनाएं

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भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) ने पहली बार गिद्धों पर “संकटग्रस्त प्रजातियों का अखिल भारतीय आकलन और निगरानी रिपोर्ट” जारी की

इस देशव्यापी प्रथम सर्वेक्षण में चार अत्यंत संकटग्रस्त (Critically Endangered) गिद्ध प्रजातियों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। ये प्रजातियां हैं- श्वेत पुट्ठे वाले गिद्ध, भारतीय गिद्ध, पतली चोंच वाले गिद्ध और लाल सिर वाले गिद्ध। इस आकलन में प्रजनन करने वाले वयस्क गिद्धों की संख्या का अनुमान लगाया गया है।


रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर

👉भौगोलिक दायरा: सर्वेक्षण में 17 राज्यों के 216 स्थलों पर गिद्धों की उपस्थिति दर्ज की गई है।
👉रेंज क्षेत्र में कमी: देशभर में ऐसे लगभग 70% स्थलों पर गिद्धों के घोंसले नहीं पाए गए हैं, जहां पहले इनकी उपस्थिति होती थी। 
👉संरक्षित क्षेत्रों (PAs) पर निर्भरता: सभी दर्ज किए गए घोंसलों में से 54% संरक्षित क्षेत्रों में पाए गए हैं।
प्रजाति-विशिष्ट निष्कर्ष:
👉भारतीय गिद्ध (Gyps indicus/ जिप्स इंडिकस): यह मुख्य रूप से मध्य प्रदेश और राजस्थान में पाया जाता है। इनकी सबसे बड़ी आबादी मुकुंदरा हिल्स में पाई जाती है। यह ज्यादातर सुरक्षित चट्टानी स्थलों पर रहता है।
👉श्वेत पुट्ठे वाला गिद्ध (Gyps bengalensis/ जिप्स बंगालेंसिस): हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा घाटी में पाया जाता है।
👉पतली चोंच वाला गिद्ध (Gyps tenuirostris/ जिप्स टेनुइरोस्ट्रिस): मुख्य रूप से असम के ऊपरी भाग में प्रजनन करता है।
👉लाल सिर वाला गिद्ध (Sarcogyps calvus/ सरकोजिप्स कैल्वस): यह मध्य प्रदेश में पाया गया जाता है। यह सघन व मानव हस्तक्षेप से मुक्त जंगलों में रहता है। इसकी आबादी अत्यंत कम और बिखरी हुई है।
गिद्ध
📍परिचय: गिद्ध बड़े आकार के मांसभक्षी पक्षी हैं। ये भोजन के लिए मुख्य रूप से मृत जीवों पर निर्भर रहते हैं। ये अधिकतर उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं। भारत में इनकी 9 प्रजातियां मिलती हैं।
महत्त्व: गिद्ध पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने में मदद करते हैं, क्योंकि वे मृत जानवरों के शव खाकर दुर्गंन्ध एवं बीमारियों को फैलने से रोकते हैं।
👉संरक्षण स्थिति: गिद्धों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में शामिल किया गया है।
👉मुख्य खतरे: पर्यावास नष्ट होना, भोजन की कमी, डाइक्लोफेनेक जैसी दवाओं से विषाक्तता, बिजली के तारों से करंट लगना आदि।
📍संरक्षण उपाय:
👉डाइक्लोफेनेक, केटोप्रोफेन और एसिक्लोफेनाक
 जैसी दवाओं पर प्रतिबंध; गिद्ध संरक्षण कार्य योजना (2020–25) का कार्यान्वयन आदि।

#Current #Fact #imp
❤5
भारत में गिद्धों की प्रजातियां।
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पेरू (राजधानी: लीमा)
भारत और पेरू के बीच व्यापार समझौते की 9वें दौर की वार्ता पेरू में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।


भौगोलिक अवस्थिति: 

यह पश्चिमी दक्षिण अमेरिका में स्थित है।
उत्तर में इक्वाडोर व कोलंबिया; पूर्व में ब्राजील; दक्षिण-पूर्व में बोलीविया तथा दक्षिण में चिली से लगती है।

सीमावर्ती जल निकाय: इसके पश्चिम में प्रशांत महासागर स्थित है।

भौगोलिक विशेषताएं: 
पेरू तीन लंबवत क्षेत्रों में विभाजित है: कोस्टा (तटीय मैदान), सिएरा (एंडीज उच्चभूमि) और अमेज़ोनिया (सेल्वा क्षेत्र)।

सबसे ऊंची चोटी: माउंट हुआसकरन (6,768 मीटर)।
टिटिकाका झील: इसका प्रसार बोलीविया में भी है। यह विश्व की सबसे ऊंची नौगम्य झील है (12,500 फीट)।

अर्थव्यवस्था (भारतीय उद्योग परिसंघ के अनुसार)

पेरू लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई क्षेत्र में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बनकर उभरा है।
भारत पेरू के सोने और तांबे का एक प्रमुख आयातक है।

पेरू कई क्षेत्रीय समूहों से भी सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है। यह SICA (मध्य अमेरिकी एकीकरण प्रणाली) का एक पर्यवेक्षक, मर्कोसुर का एक एसोसिएट सदस्य, और पैसिफ़िक एलायंस का एक पूर्ण सदस्य है।
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वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 पर FAC की सिफारिशें

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की वन सलाहकार समिति (FAC) ने वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 के उल्लंघन पर दंडात्मक प्रावधानों में तर्कसंगतता और एकरूपता लाने की सिफारिश की है।


मुख्य सिफारिशें

दंडात्मक प्रतिपूरक वनीकरण: जिस वन क्षेत्र में उल्लंघन हुआ है, उसी के बराबर क्षेत्रफल पर दंडात्मक प्रतिपूरक वनीकरण किया जाना चाहिए। 
दंडात्मक प्रतिपूरक वनीकरण, उस कानूनी रूप से अनिवार्य प्रतिपूरक वनीकरण के अतिरिक्त होता है, जो किसी वन भूमि के गैर-वन उपयोग के कारण उस पर लागू होता है।
दंडात्मक प्रतिपूरक वनीकरण और दंडात्मक NPV उपायों के बीच तालमेल स्थापित करना।
NPV (निवल वर्तमान मूल्य) का अर्थ है, वन क्षेत्र से मिलने वाली पर्यावरणीय सेवाओं का आर्थिक मूल्य, जिसे गैर-वन प्रयोजन के लिए वन भूमि के उपयोग के बदले चुकाया जाता है।

#Current #Fact
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प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY)

कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (MSDE) ने PMKVY के 178 प्रशिक्षण भागीदारों को ब्लैकलिस्ट कर दिया।

प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के बारे में

यह कौशल प्रमाणन के लिए एक प्रमुख योजना है। इसे भारतीय युवाओं को बेहतर आजीविका प्राप्त करने हेतु उद्योग-संबंधी कौशल प्रशिक्षण प्राप्त करने में मदद करने के लिए शुरू किया गया है।

मंत्रालय: कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय।

आरंभ: 2015 में शुरू हुई थी।

वर्तमान स्थिति: वर्तमान में, इसका चौथा चरण यानी प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना 4.0 (PMKVY 4.0) लागू है।

घटक: इसमें अल्पकालिक प्रशिक्षण {राष्ट्रीय कौशल पात्रता फ्रेमवर्क (NSQF) के अनुरूप कोर्सेज़}, विशेष परियोजनाएं, और पूर्व अधिगम की मान्यता शामिल हैं।

भौगोलिक कवरेज: योजना के तहत आकांक्षी, पिछड़े, सीमावर्ती, जनजातीय और वामपंथी उग्रवाद (LWE) से प्रभावित जिलों पर विशेष ध्यान दिया जाता है
#Current #Fact #currentaffairs
❤4
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG)

हाल ही में, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने अधिक केंद्रीकरण के लिए दो नए विशेष संवर्गों (cadres) के सृजन को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसमें केंद्रीय राजस्व लेखा परीक्षा (CRA) संवर्ग और केंद्रीय व्यय लेखा परीक्षा (CEA) शामिल हैं।

 
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के बारे में

प्रकृति: संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत स्थापित संवैधानिक निकाय। 
नियुक्ति: राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर एवं मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा नियुक्त करता है।  

अवधि: 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक (जो भी पहले हो)।

पद से हटाना: राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है। इसे पद से केवल उसी रीति से और उन्ही आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस रीति से तथा जिन आधारों पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है। 

वेतन व सेवा की शर्तें: CAG का वेतन और सेवा शर्तें संसद द्वारा तय किए जाते हैं। साथ ही, उसकी नियुक्ति के बाद इन शर्तों में उसके अहित के लिए कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता। 
 
व्यय: प्रशासनिक लागत, वेतन, भत्ते और पेंशन भारत की संचित निधि से दिए जाते हैं।

#Current #Fact
❤3
स्टेट ऑफ द क्लाइमेट अपडेट फॉर COP-30

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने “स्टेट ऑफ द क्लाइमेट अपडेट फॉर COP-30” रिपोर्ट जारी की।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर
वर्ष 2025 अब तक दर्ज दूसरा या तीसरा सबसे गर्म वर्ष रहने की संभावना है। 

वर्ष 2025 सहित पिछले 11 वर्ष मानव इतिहास के सबसे गर्म 11 वर्ष रहे हैं।
यह दर्शाता है कि दुनिया पेरिस समझौते के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने की राह पर नहीं है।

वर्ष 2015 से 2025 तक का समय पिछले 176 वर्षों में सबसे गर्म 11 सालों की अवधि रही। 

कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), मीथेन (CH₄) और नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O) की वायुमंडलीय सांद्रता 2024 में अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी और 2025 में भी बढ़ रही है।

नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार हो रहा है और जलवायु कार्रवाई योजनाएं अब विज्ञान आधारित जलवायु सेवाओं पर अधिक निर्भर होती जा रही हैं।

#Current #Fact
❤4
अब्राहम अकॉर्ड्स

हाल ही में, अमेरिकी राष्ट्रपति ने पुष्टि की है कि कजाकिस्तान अब्राहम अकॉर्ड्स का हिस्सा होगा।


अब्राहम अकॉर्ड्स के बारे में

उद्देश्य: इजरायल और विविध तथाकथित उदारवादी अरब देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाकर मध्य पूर्व में तनाव को कम करना, ताकि इजरायल के साथ इन देशों के औपचारिक राजनयिक, व्यापारिक व सुरक्षा संबंध सुनिश्चित हो सकें। 

इस समझौते का नाम बाइबिल के अब्राहम के नाम पर रखा गया है, जिसे यहूदी और अरब दोनों ही अपना साझा पूर्वज एवं बंधुत्व का प्रतीक मानते हैं। 

उत्पत्ति: अब्राहम समझौता पर सितंबर 2020 में इज़रायल, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन ने हस्ताक्षर किए थे। बाद में मोरक्को भी इस समझौते में शामिल हुआ। 

#Current #Fact
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Important Current Affairs ✍️♥️

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बेहतरीन इंसान हमेशा सीखता है क्योंकि उसे पता है दुनिया में कोई भी चीज 100% नहीं होती।♥️✍️

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कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान को IUCN द्वारा "GOOD" रैंक का दर्जा दिया गया

अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) ने हाल ही में प्राकृतिक विश्व धरोहर स्थलों की अपनी नवीनतम वैश्विक समीक्षा में कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान को "GOOD" रैंक का दर्जा दिया है। यह यह रेटिंग प्राप्त करने वाला एकमात्र भारतीय उद्यान है, जबकि पश्चिमी घाट और सुंदरबन जैसे अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र गंभीर चिंताओं का सामना कर रहे हैं।

कंचनजंगा, जिसे आधिकारिक तौर पर कंचनजंगा बायोस्फीयर रिजर्व के रूप में जाना जाता है, भारत का पहला "मिश्रित" यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, जिसे 2016 में प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक महत्व के संयोजन के लिए मान्यता दी गई थी।

1,784 वर्ग किलोमीटर में फैला यह स्थल निचली ऊँचाई पर धुंध भरे उपोष्णकटिबंधीय जंगलों से लेकर 8,586 मीटर ऊँचे माउंट कंचनजंगा के बर्फीले शिखर तक फैला है, जो दुनिया की तीसरी सबसे ऊँची चोटी है।
#Current #Fact
❤9👍4
महुआडांर भेड़िया अभयारण्य : देश का पहला और एकमात्र वुल्फ सेंचुरी (लातेहार, झारखंड)
#Current #Fact
❤5👍1
📍Project Vishnu (विष्णु )
By: DRDO
★Project Vishnu DRDO का एक उन्नत रक्षा कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य Hypersonic मिसाइल तकनीक विकसित करना है

एक स्क्रामजेट आधारित हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल

📍विशेषता:
Speed: Up to Mach 8 (approximately 11,000 km/h or 3 km/s)
★Range: 1,500–2,500 km
#Current #Fact
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“कृषि में डीप-टेक क्रांति को आकार देना” शीर्षक से एक रिपोर्ट किस संस्थान ने जारी की?★Secure Pcs

1.कृषि खाद्य संगठन 2.विश्व बैंक 3.विश्व आर्थिक मंच (WEF)
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42%
केवल 1 और 2
8%
केवल 2
20%
केवल 3
30%
उपर्युक्त सभी।
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“कृषि में डीप-टेक क्रांति को आकार देना” शीर्षक से एक रिपोर्ट किस संस्थान ने जारी की?★Secure Pcs

1.कृषि खाद्य संगठन 2.विश्व बैंक 3.विश्व आर्थिक मंच (WEF)
विश्व आर्थिक मंच (WEF) ने “कृषि में डीप-टेक क्रांति को आकार देना” शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की


यह रिपोर्ट WEF एआई फॉर एग्रीकल्चर इनिशिएटिव (AI4AI) ने जारी की है। 
AI4AI कृषि प्रौद्योगिकी संबंधी समाधानों को आगे बढ़ाने और वैश्विक खाद्य प्रणालियों के रूपांतरण में तेजी लाने के लिए सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रक के भागीदारों को एक साथ लाता है।
कृषि क्षेत्रक में मुख्य चुनौतियां


कृषि क्षेत्रक के कार्यबल में गिरावट: इसके लिए जिम्मेदार कारणों में निम्नलिखित शामिल हैं-
गाँव से शहरों की ओर प्रवास करना तथा वृद्ध होती किसान आबादी के कारण श्रम की उपलब्धता में कमी।

जलवायु परिवर्तन और चरम मौसमी घटनाएं:
यदि उत्सर्जन में कटौती नहीं की जाती है, तो वर्ष 2100 तक प्रमुख खाद्य फसलों से वैश्विक कैलोरी उत्पादन में 24% तक की कमी आ सकती है।
प्राकृतिक संसाधनों का क्षरण:
ताजा जल का 70 प्रतिशत तक कृषि में उपयोग होता है। इसके अतिरिक्त, 71 प्रतिशत जलभृत (aquifers) रिक्त हो चुके हैं। 
कुल मृदा में से एक-तिहाई मृदा निम्नीकृत हो चुकी है। साथ ही, 2050 तक 90 प्रतिशत उपरिमृदा (topsoil) का क्षरण होने की संभावना है।

 
रिपोर्ट में रेखांकित किए गए ‘कृषि में डीप टेक के प्रमुख उपयोग’ के मामले
इंटेलो लैब्स (Intello Labs) का AI और कंप्यूटर विज़न-आधारित समाधान ‘फ्रूटसॉर्ट’: यह एडवांस्ड कैमरों और मशीन लर्निंग का उपयोग करके ताजा उपज का तेजी से विश्लेषण करता है और दोषों की पहचान करता है।
प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY): यह दक्षतापूर्ण फसल बीमा के लिए रिमोट सेंसिंग (उपग्रह इमेजरी) के साथ-साथ उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले ड्रोन्स और एक समर्पित मोबाइल ऐप का उपयोग करता है।
इंफोसिस का "5G.NATURAL" कार्यक्रम: यह विशेष रूप से फसल कटाई के लिए स्वचालित हार्वेस्टिंग मशीनों का एक ऐसा तंत्र बनाने पर केंद्रित है, जिसकी- 
क्षमता में वृद्धि की जा सके, 
जिसके घटकों को आसानी से असेम्बल किया जा सके तथा 
जो बुद्धिमत्तापूर्ण रूप से कार्य कर सके।
URVARA/उर्वरा परियोजना: बूममित्रा ने कार्बन की निगरानी, ​​रिपोर्टिंग और सत्यापन (MRV) के लिए वाइटल एग्रीकल्चर रीजेनेरेशन एंड एडेप्टेशन (URVARA/उर्वरा) परियोजना शुरू की है।
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किस संस्थान ने ‘वित्तीय क्षेत्रक मूल्यांकन कार्यक्रम (FSAP)’ रिपोर्ट जारी की है?★Secure Pcs
Anonymous Quiz
14%
विश्व आर्थिक मंच
27%
विश्व बैंक
43%
वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन
16%
उपर्युक्त सभी
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विश्व बैंक ने ‘वित्तीय क्षेत्रक मूल्यांकन कार्यक्रम (FSAP)’ रिपोर्ट जारी की है


FSAP रिपोर्ट में भारत से आग्रह किया गया है कि वह अपने वित्तीय क्षेत्रक में सुधारों को तेज करे ताकि वह 2047 तक 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के दीर्घकालिक लक्ष्य को प्राप्त कर सके।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु;

वित्तीय प्रणाली मजबूत है: रिपोर्ट के अनुसार भारत की वित्तीय प्रणाली अब और अधिक मजबूत और विविधतापूर्ण हो गई है। 

पिछली FSAP रिपोर्ट के बाद से भारत का पूंजी बाजार (इक्विटी, सरकारी बॉन्ड और कॉर्पोरेट बॉण्ड) सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 144 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 175 प्रतिशत हो गया है। 

इस वृद्धि में राज्य की प्रमुख भूमिका बनी हुई है।

डिजिटल प्रौद्योगिकी की बड़ी भूमिका: डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) ने वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता, कार्यकुशलता और वित्तीय समावेशन में व्यापक सुधार किया है।

विनियामक व्यवस्था में सुधार: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा किए गए सुधारों से पर्यवेक्षण में सुधार हुआ है।

हालांकि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) की कार्य-प्रणाली की निगरानी और वित्तीय संकट से निपटने के स्तर पर चुनौतियां बनी हुई हैं।
सहकारी बैंकों को भी विनियामक संस्थाओं के पर्यवेक्षण के

अधिकार-क्षेत्र
 में लाया गया है। साथ ही, वित्तीय बाजारों की सुरक्षा और विनियमन से जुड़े नियमों को सख्त बनाया गया है। विश्व बैंक की रिपोर्ट में इन सभी उपायों की प्रशंसा की गई है। 

वित्तीय बाजार का विकास: कॉरपोरेट बॉण्ड और अवसंरचनाओं के वित्तपोषण से संबंधित  वित्तीय बाज़ार अब भी परिपक्व नहीं हुए हैं। निवेशक अभी भी सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश को ही प्राथमिकता देते हैं।

कर लगाने में असमानताएं: ऋण (debt) लिखतों और इक्विटी के बीच असमान कर-प्रणाली से बॉण्ड बाजार में निवेश हतोत्साहित होती है।
गौरतलब है कि भारत में इक्विटी (शेयरों) से होने वाले मुनाफे पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (Long-term capital gains: LTCG) कर आम तौर पर बॉण्ड या अन्य निवेशों की तुलना में कम है।

निम्नलिखित सुधार किए जाने चाहिए:
निजी क्षेत्र से पूंजी जुटाने पर बल देना चाहिए: लंबी अवधि के निवेशकों को आकर्षित करने के लिए बॉण्ड और प्रतिभूतिकरण  (securitisation) बाजारों को मजबूत करना चाहिए।

NBFCs के विनियमन में सुधार करना चाहिए: NBFCs के वर्गीकरण वाले स्केल-आधारित फ्रेमवर्क में आवश्यक सुधार करके इन्हें बेहतर वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना चाहिए।

डिजिटल और वित्तीय सुधारों का एकीकरण करना चाहिए: फिनटेक यानी वित्तीय प्रौद्योगिकी से जुड़े नवाचारों को वित्तीय समावेशन के व्यापक लक्ष्यों की प्राप्ति से जोड़कर देखना चाहिए।

सुधारों की गति जारी रखनी चाहिए: वित्तीय क्षेत्रक की विनियामक संस्थाओं के बीच समन्वय बढ़ाना चाहिए ताकि वित्तीय बाज़ार की स्थिरता और विकास सुनिश्चित हो सके।

हरित क्षेत्रक की परियोजनाओं में वित्तपोषण (Green Finance) को बढ़ावा देना चाहिए: निम्न-कार्बन उत्सर्जन वाली परियोजनाओं में वित्त पोषण बढ़ाने और निवेशकों के जोखिम को कम करने के लिए विकास वित्त संस्थानों (Development Finance Institutions – DFIs) का उपयोग करना चाहिए। 


वित्तीय क्षेत्रक मूल्यांकन कार्यक्रम (FSAP) के बारे में 

शुरुआत: FSAP की शुरुआत 1999 में हुई थी। यह विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का संयुक्त कार्यक्रम है।
संचालन: विकसित अर्थव्यवस्थाओं में FSAP का संचालन IMF द्वारा किया जाता है, जबकि विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में इसे विश्व बैंक और IMF द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया जाता है।
भारत का पिछला FSAP वर्ष 2017 में किया गया था।


#Current #Fact #CurrentAffairs
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भारत ट्रॉपिकल फ़ॉरेस्ट्स फॉरएवर फैसिलिटी (TFFF) में एक पर्यवेक्षक के रूप में शामिल होने के लिए तैयार है



ट्रॉपिकल फ़ॉरेस्ट्स फॉरएवर फैसिलिटी (Tropical Forests Forever Facility: TFFF) क्या है?

शुरुआत: इस पहल को ब्राजील ने शुरू किया है। 
परिचय: यह ब्राजील के बेलेम में COP-30 के अवसर पर स्थापित एक वैश्विक कोष है। इसका गठन वन संरक्षण को एक व्यवहार्य आर्थिक मॉडल बनाने के लिए दीर्घकालिक वित्त प्रदान करने हेतु किया गया है।

उद्देश्य: उष्णकटिबंधीय वन वाले देशों (TFCs) को उनके मौजूदा वनों को बनाए रखने के लिए वार्षिक भुगतान करना। इससे वन संरक्षण और विस्तार को प्रोत्साहित किया जा सकेगा। 

वित्त-पोषण तंत्र: यह कोष सार्वजनिक और निजी निवेश के मिश्रण के माध्यम से लगभग 125 बिलियन डॉलर जुटाने का प्रयास करेगा। 
इन निवेशों से उत्पन्न प्रतिफलों का उपयोग उन राष्ट्रों को भुगतान करने के लिए किया जाएगा, जो अपने वनों का सफलतापूर्वक संरक्षण कर रहे हैं।
20-25% तक सार्वजनिक निवेश और 70-80% तक निजी निवेश जुटाया जाएगा। 

पात्रता: TFFF उष्णकटिबंधीय वन वाले 70 से अधिक देशों का समर्थन कर सकता है। इन्हें कुछ मानदंडों को पूरा करना होगा, जैसे: 
वनों की कटाई दर वार्षिक रूप से 0.5% से कम होनी चाहिए; 
देशज लोगों और स्थानीय समुदायों को संसाधनों का उचित आवंटन किया जाना चाहिए, आदि।

वन संरक्षण का महत्त्व

जलवायु विनियमन: ग्लोबल फॉरेस्ट वॉच के अनुसार, सामूहिक रूप से वन प्रति वर्ष लगभग 7.6 बिलियन टन CO₂ अवशोषित करते हैं। इससे वैश्विक तापन को धीमा करने में मदद मिलती है।

जैव विविधता हॉटस्पॉट: WWF के अनुसार, उष्णकटिबंधीय वन पृथ्वी की सतह के केवल 7% हिस्से पर फैले हुए हैं, लेकिन इनमें विश्व की 50% जैव विविधता मौजूद है।

मृदा संरक्षण: वन मृदा अपरदन को कम करते हैं और ढलानों को स्थिर करके बाढ़ की तीव्रता को रोकते हैं।

अन्य: वनों से लकड़ी, रबड़ आदि के व्यापार के जरिए आर्थिक मूल्य प्राप्त होता है; वन आजीविका संबंधी और सांस्कृतिक समर्थन प्रदान करते हैं; ये औषधीय संसाधन उपलब्ध कराते हैं; वर्षा व जल विज्ञान चक्र बनाए रखने में मदद करते हैं आदि।

वन संरक्षण हेतु अन्य वैश्विक पहलें

जैव  विविधता अभिसमय (1992): यह पारिस्थितिक-तंत्रों के संरक्षण व सतत उपयोग और लाभों के न्यायसंगत बंटवारे को प्रोत्साहित करता है।

संयुक्त राष्ट्र REDD+ (2008): यह वनों की कटाई को कम करने और कार्बन भंडारण-क्षमता बढ़ाने के लिए विकासशील देशों को वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करता है।

बॉन चैलेंज (2011): इसके तहत वर्ष 2030 तक 350 मिलियन हेक्टेयर निम्नीकृत वनों को पुनर्स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

पेरिस समझौता (2015): यह वनों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के प्रमुख साधन के रूप में मान्यता देता है।
#Current #Fact
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उच्चतम न्यायालय ने प्रमुख सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने पर निर्देश जारी किए


हाल ही में, उच्चतम न्यायालय ने कहा कि कई प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं बार-बार घटित हो रही हैं। इस तरह की घटनाएं केवल लोक-स्वास्थ्य की समस्या भर नहीं हैं, बल्कि ये संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत इंसान की सुरक्षा से जुड़ा विषय भी हैं।  


उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देश

शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, परिवहन केंद्र जैसे प्रत्येक परिसर के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करें। ये अधिकारी इन परिसरों के रखरखाव और निगरानी की जिम्मेदारी संभालेंगे। 
जिला मजिस्ट्रेट यह सुनिश्चित करेंगे कि ऐसे परिसरों में पर्याप्त बाड़बंदी व चारदीवारी हो और इनमें गेट लगे हों। इससे इन परिसरों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। 
स्थानीय नगर निकाय और पंचायतें नियमित रूप से या प्रत्येक तीन महीने में कम-से-कम एक बार इन परिसरों का निरीक्षण करेंगे।
सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में एंटी-रेबीज वैक्सीन और इम्युनोग्लोब्युलिन का पर्याप्त भंडार हर समय अनिवार्य रूप से उपलब्ध होना चाहिए।
अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू करें ताकि बचा हुआ भोजन या अपशिष्ट जानवरों को आकर्षित न करे। 

भारत में आवारा कुत्तों से जुड़ी समस्याएं  
कुल संख्या: 2019 की पशुधन गणना के अनुसार भारत में लगभग 1.5 करोड़ आवारा कुत्ते हैं।

कुत्तों के काटने के मामले: राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) के अनुसार 2024 में कुत्तों के काटने के लगभग 37 लाख मामले दर्ज किए गए थे।

रेबीज संक्रमण: विश्व में रेबीज से होने वाली कुल मौतों में 36% भारत में दर्ज की जाती हैं।

रेबीज से मृत्यु का मामला: भारत में रेबीज से होने वाली लगभग 96% मौतें कुत्तों के काटने से होती हैं।

भारत में आवारा कुत्तों से निपटने से संबंधित प्रावधान और उठाए गए कदम
संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 243(W) के अनुसार, नगरपालिकाओं का दायित्व है कि वे आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करें।
अनुच्छेद 51A (g) के तहत नागरिकों का मूल कर्तव्य है कि वे “प्राणीमात्र के प्रति दया भाव रखें।”
पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 के तहत ‘पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023’ जारी किए गए हैं। इन नियमों में आवारा कुत्तों को “पकड़ो–बधियाकरण करो–टीकाकरण करो–और छोड़ दो” (Capture–Sterilize–Vaccinate–Release, CSVR) मॉडल अपनाया गया है।

वर्ष 2030 तक भारत में ‘कुत्तों के काटने से रेबीज संक्रमण उन्मूलन पर राष्ट्रीय कार्य-योजना (NAPRE)’ लागू की गई है।
यह कार्य-योजना केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की पहल है।
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