#ISRO successfully launched CMS-03 onboard its LVM3-M5 (GSLV-MkIII) heavy-lift rocket from श्रीहरिकोटा
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#ISRO successfully launched CMS-03 onboard its LVM3-M5 (GSLV-MkIII) heavy-lift rocket from श्रीहरिकोटा
उद्देश्य: CMS-03 मिशन द्वारा भारत और आसपास के समुद्री इलाकों में बेहतर मल्टी-बैंड संचार सेवाएं देना है।
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अभिलाषाएँ.. अनंत हैं, यथार्थ सीमित है. और मन इन्हीं दोनों के बीच सबसे बड़ा संघर्ष करता है...
Good Night Everyone ♥️🧿🌌
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उसे गुमाँ है कि मेरी उड़ान कुछ कम है
मुझे यक़ीं है कि ये आसमान कुछ कम है
महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 : विजेता... भारत 💐🔥🇮🇳
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केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव के कारण भारत के अर्ध-संघीय ढांचे के समक्ष चुनौतियां उत्पन्न हो रही हैं
GST परिषद और नीति आयोग जैसी संस्थाएं वार्ता के लिए मंच प्रदान करती हैं,। ये संस्थाएं भारत की लोकतांत्रिक सफलता के मूल सिद्धांत "स्वशासन और साझा शासन" को मजबूत करते हैं।
भारत का संवैधानिक ढांचा: शक्ति संतुलन
संघीय विशेषताएं:
लिखित संविधान: भारत का संविधान एक लिखित दस्तावेज है, जिसमें संशोधन की स्पष्ट प्रक्रिया दी गई है।
द्वि-स्तरीय शासन व्यवस्था: शासन प्रणाली दो स्तरों पर संचालित होती है- केंद्र और राज्य स्तर।
द्विसदनीय व्यवस्था: राज्य सभा राज्यों के हितों और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है। यह लोक सभा में संभावित बहुमतवाद (majoritarianism) को नियंत्रित करने का भी काम करती है। इसका अर्थ है कि जब लोक सभा में किसी दल का व्यापक बहुमत होता है, तब भी लोक सभा में बहुमत द्वारा पारित कानून की राज्य सभा में भी जांच-परख की जाती है।
शक्तियों का विभाजन: संविधान की अनुसूची VII के अंतर्गत तीन सूचियों के माध्यम से केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का विभाजन किया गया है।
एकात्मक विशेषताएं
सशक्त केंद्र: शक्तियों का विभाजन केंद्र सरकार के पक्ष में अधिक है। उदाहरण के लिए- समवर्ती सूची में शामिल विषयों पर संसद द्वारा बनाए गए कानूनों को प्राथमिकता दी जाती है।
एकल संविधान और नागरिकता: पूरे देश में सभी नागरिकों पर एक समान कानून और अधिकार लागू होते हैं।
राज्यों पर संसद का प्राधिकार: अनुच्छेद 3 संसद को राज्यों की सहमति के बिना राज्यों के नाम, क्षेत्र और सीमाओं को बदलने का अधिकार देता है।
अन्य: इसमें एकीकृत न्यायपालिका, अखिल भारतीय सेवाएं, आपातकालीन शक्तियां, अंतर्राष्ट्रीय संधियों से संबंधित बाध्यताओं को पूरा करने हेतु संसद द्वारा कानून बनाने का अधिकार, आदि शामिल हैं।
संघीय ढांचे के समक्ष मौजूदा दौर की चुनौतियां
राजकोषीय केंद्रीकरण: उदाहरण के लिए- GST के लागू होने से राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता प्रभावित हुई है।
प्रशासनिक और राजनीतिक केंद्रीकरण: उदाहरण के लिए- कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान आपदा प्रबंधन अधिनियम का उपयोग करके 'राज्यों से न्यूनतम परामर्श' के साथ राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लगाया गया।
अन्य: इसमें राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए विधेयक को रोक कर रखना, केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिश पर कर एवं राजस्व का हस्तांतरण करना, आदि शामिल हैं।
निष्कर्ष
नीति आयोग जैसे संस्थान, “टीम इंडिया” की भावना को दर्शाते हुए केंद्र और राज्यों को राष्ट्र निर्माण के समान भागीदार के रूप में जोड़ते हैं। ऐसे संस्थान एक ऐसा सार्थक संतुलन विकसित कर सकते हैं, जो एकता और क्षेत्रीय स्वायत्तता, दोनों के बीच सामंजस्य स्थापित करे तथा उभरती विकासात्मक चुनौतियों का समाधान खोजने में सहायक बने।
#Mains #Fact #Current_affairs #CurrentAffairs #uppcsmains #imp
GST परिषद और नीति आयोग जैसी संस्थाएं वार्ता के लिए मंच प्रदान करती हैं,। ये संस्थाएं भारत की लोकतांत्रिक सफलता के मूल सिद्धांत "स्वशासन और साझा शासन" को मजबूत करते हैं।
भारत का संवैधानिक ढांचा: शक्ति संतुलन
संघीय विशेषताएं:
लिखित संविधान: भारत का संविधान एक लिखित दस्तावेज है, जिसमें संशोधन की स्पष्ट प्रक्रिया दी गई है।
द्वि-स्तरीय शासन व्यवस्था: शासन प्रणाली दो स्तरों पर संचालित होती है- केंद्र और राज्य स्तर।
द्विसदनीय व्यवस्था: राज्य सभा राज्यों के हितों और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है। यह लोक सभा में संभावित बहुमतवाद (majoritarianism) को नियंत्रित करने का भी काम करती है। इसका अर्थ है कि जब लोक सभा में किसी दल का व्यापक बहुमत होता है, तब भी लोक सभा में बहुमत द्वारा पारित कानून की राज्य सभा में भी जांच-परख की जाती है।
शक्तियों का विभाजन: संविधान की अनुसूची VII के अंतर्गत तीन सूचियों के माध्यम से केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का विभाजन किया गया है।
एकात्मक विशेषताएं
सशक्त केंद्र: शक्तियों का विभाजन केंद्र सरकार के पक्ष में अधिक है। उदाहरण के लिए- समवर्ती सूची में शामिल विषयों पर संसद द्वारा बनाए गए कानूनों को प्राथमिकता दी जाती है।
एकल संविधान और नागरिकता: पूरे देश में सभी नागरिकों पर एक समान कानून और अधिकार लागू होते हैं।
राज्यों पर संसद का प्राधिकार: अनुच्छेद 3 संसद को राज्यों की सहमति के बिना राज्यों के नाम, क्षेत्र और सीमाओं को बदलने का अधिकार देता है।
अन्य: इसमें एकीकृत न्यायपालिका, अखिल भारतीय सेवाएं, आपातकालीन शक्तियां, अंतर्राष्ट्रीय संधियों से संबंधित बाध्यताओं को पूरा करने हेतु संसद द्वारा कानून बनाने का अधिकार, आदि शामिल हैं।
संघीय ढांचे के समक्ष मौजूदा दौर की चुनौतियां
राजकोषीय केंद्रीकरण: उदाहरण के लिए- GST के लागू होने से राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता प्रभावित हुई है।
प्रशासनिक और राजनीतिक केंद्रीकरण: उदाहरण के लिए- कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान आपदा प्रबंधन अधिनियम का उपयोग करके 'राज्यों से न्यूनतम परामर्श' के साथ राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लगाया गया।
अन्य: इसमें राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए विधेयक को रोक कर रखना, केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिश पर कर एवं राजस्व का हस्तांतरण करना, आदि शामिल हैं।
निष्कर्ष
नीति आयोग जैसे संस्थान, “टीम इंडिया” की भावना को दर्शाते हुए केंद्र और राज्यों को राष्ट्र निर्माण के समान भागीदार के रूप में जोड़ते हैं। ऐसे संस्थान एक ऐसा सार्थक संतुलन विकसित कर सकते हैं, जो एकता और क्षेत्रीय स्वायत्तता, दोनों के बीच सामंजस्य स्थापित करे तथा उभरती विकासात्मक चुनौतियों का समाधान खोजने में सहायक बने।
#Mains #Fact #Current_affairs #CurrentAffairs #uppcsmains #imp
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‘इंडिया मेरिटाइम वीक 2025’ ने 12 लाख करोड़ रुपये का निवेश सुनिश्चित किया
प्रधान मंत्री ने समुद्री अमृत काल विज़न 2047 के अंतर्गत ग्लोबल मरीन लीडर बनने की दिशा में भारत के समुद्री क्षेत्रक को मजबूत करने के लिए निम्नलिखित पहलों का भी अनावरण किया:
स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता: तेल और गैस संबंधी सार्वजनिक उपक्रमों ने 59 जहाज निर्माण हेतु 47,800 करोड़ रुपये के ऑर्डर जारी किए हैं।
शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) ने 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश के साथ 2047 तक अपने बेड़े को 216 जहाजों तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
भारत के समुद्री क्षेत्रक की उपलब्धियां
भारत की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण: मात्रा के हिसाब से भारत का लगभग 95% व्यापार और मूल्य के हिसाब से लगभग 70% व्यापार समुद्री मार्गों से होता है।
पत्तन की क्षमता बढ़कर दोगुनी हुई: यह 2014 में लगभग 1,400 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) थी, जो 2024-2025 में बढ़कर 2,762 MMTPA हो गई।
जहाज के औसत टर्नअराउंड समय में कमी: 2014 में यह औसतन 93 घंटे था, जो 2025 में घटकर केवल 48 घंटे रह गया। इससे वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार हुआ है।
भारत में जहाज संचालन संबंधी कार्यबल (सीफेरर वर्कफोर्स): यह 2014 में 1.25 लाख से बढ़कर 2025 में 3 लाख से अधिक हो गया। यह वैश्विक सीफेरर वर्कफोर्स का 12% है। इससे भारत प्रशिक्षित सीफेरर वर्कफोर्स के विश्व के शीर्ष तीन आपूर्तिकर्ताओं में से एक बन गया है।
कानून द्वारा प्रोत्साहन: मर्चेंट शिपिंग एक्ट, 2025, तटीय पोत-परिवहन अधिनियम, 2025, भारतीय पत्तन अधिनियम, 2025 जैसे विभिन्न कानूनों के माध्यम से समुद्री क्षेत्रक को बढ़ावा मिला है।
भारत के समुद्री क्षेत्रक को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए प्रमुख कदम
मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030: भारत को एक वैश्विक समुद्री महाशक्ति बनाने के लिए इसके तहत 10 प्रमुख विषयों की पहचान की गई, जैसे- पत्तन संबंधी अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स संबंधी दक्षता आदि।
समुद्री अमृत काल विज़न 2047: इसके तहत जहाज निर्माण, क्रूज पर्यटन, कौशल विकास आदि के लिए 70 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का लक्ष्य रखा गया है।
सागरमाला: इसके तहत लॉजिस्टिक्स की लागत में कटौती, रोजगार सृजन आदि पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
ग्रीन टग प्रोग्राम: इसके तहत 2040 तक 100 पर्यावरण अनुकूल टग्स तैनात करने का लक्ष्य रखा गया है।
समुद्री सुरक्षा फ्रेमवर्क: यह महासागर (MAHASAGAR), एक्ट ईस्ट पॉलिसी, हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी आदि सहित रणनीतिक फ्रेमवर्क के माध्यम से मुक्त, खुली और समावेशी समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देता है।
महासागर (MAHASAGAR) से आशय है; म्यूच्यूअल एंड हॉलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजंस।
प्रधान मंत्री ने समुद्री अमृत काल विज़न 2047 के अंतर्गत ग्लोबल मरीन लीडर बनने की दिशा में भारत के समुद्री क्षेत्रक को मजबूत करने के लिए निम्नलिखित पहलों का भी अनावरण किया:
स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता: तेल और गैस संबंधी सार्वजनिक उपक्रमों ने 59 जहाज निर्माण हेतु 47,800 करोड़ रुपये के ऑर्डर जारी किए हैं।
शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) ने 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश के साथ 2047 तक अपने बेड़े को 216 जहाजों तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
भारत के समुद्री क्षेत्रक की उपलब्धियां
भारत की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण: मात्रा के हिसाब से भारत का लगभग 95% व्यापार और मूल्य के हिसाब से लगभग 70% व्यापार समुद्री मार्गों से होता है।
पत्तन की क्षमता बढ़कर दोगुनी हुई: यह 2014 में लगभग 1,400 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) थी, जो 2024-2025 में बढ़कर 2,762 MMTPA हो गई।
जहाज के औसत टर्नअराउंड समय में कमी: 2014 में यह औसतन 93 घंटे था, जो 2025 में घटकर केवल 48 घंटे रह गया। इससे वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार हुआ है।
भारत में जहाज संचालन संबंधी कार्यबल (सीफेरर वर्कफोर्स): यह 2014 में 1.25 लाख से बढ़कर 2025 में 3 लाख से अधिक हो गया। यह वैश्विक सीफेरर वर्कफोर्स का 12% है। इससे भारत प्रशिक्षित सीफेरर वर्कफोर्स के विश्व के शीर्ष तीन आपूर्तिकर्ताओं में से एक बन गया है।
कानून द्वारा प्रोत्साहन: मर्चेंट शिपिंग एक्ट, 2025, तटीय पोत-परिवहन अधिनियम, 2025, भारतीय पत्तन अधिनियम, 2025 जैसे विभिन्न कानूनों के माध्यम से समुद्री क्षेत्रक को बढ़ावा मिला है।
भारत के समुद्री क्षेत्रक को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए प्रमुख कदम
मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030: भारत को एक वैश्विक समुद्री महाशक्ति बनाने के लिए इसके तहत 10 प्रमुख विषयों की पहचान की गई, जैसे- पत्तन संबंधी अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स संबंधी दक्षता आदि।
समुद्री अमृत काल विज़न 2047: इसके तहत जहाज निर्माण, क्रूज पर्यटन, कौशल विकास आदि के लिए 70 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का लक्ष्य रखा गया है।
सागरमाला: इसके तहत लॉजिस्टिक्स की लागत में कटौती, रोजगार सृजन आदि पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
ग्रीन टग प्रोग्राम: इसके तहत 2040 तक 100 पर्यावरण अनुकूल टग्स तैनात करने का लक्ष्य रखा गया है।
समुद्री सुरक्षा फ्रेमवर्क: यह महासागर (MAHASAGAR), एक्ट ईस्ट पॉलिसी, हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी आदि सहित रणनीतिक फ्रेमवर्क के माध्यम से मुक्त, खुली और समावेशी समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देता है।
महासागर (MAHASAGAR) से आशय है; म्यूच्यूअल एंड हॉलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजंस।
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प्रधान मंत्री ने आर्य समाज की स्थापना के 150 वर्ष पूरे होने पर इसके योगदानों पर प्रकाश डाला
आर्य समाज के बारे में
स्थापना: 1875 में स्वामी दयानंद सरस्वती ने बॉम्बे (वर्तमान मुंबई) में की थी।
धार्मिक सुधार:
स्वामी दयानंद सरस्वती ने मूर्तिपूजा और कर्मकांडीय पूजा की निंदा की, तथा सभी मनुष्यों के प्रति सम्मान एवं श्रद्धा का उपदेश दिया।
उन्होंने वेदों को अचूक प्रमाण के रूप में स्वीकार किया था। उन्होंने 'वेदों की ओर लौटो' का आह्वान किया था।
सामाजिक सुधार:
वंशानुगत जाति व्यवस्था और अस्पृश्यता (छुआछूत) का विरोध किया।
सभी जातियों के लिए वैदिक शिक्षा का समर्थन किया था। दयानंद सरस्वती ने बाल विवाह और विधवा महिलाओं के बहिष्कृत स्थिति में रहने का विरोध किया था। इसके अलावा, उन्होंने महिलाओं की शिक्षा के लिए अभियान भी चलाया था।
शैक्षणिक सुधार: उदाहरण के लिए- 1886 में दयानंद एंग्लो वैदिक (DAV) ट्रस्ट और प्रबंधन की स्थापना की थी। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक और आधुनिक शिक्षा प्रदान करना था।
स्वतंत्रता आंदोलन: प्रमुख सदस्यों में लाला लाजपत राय, भगत सिंह, राम प्रसाद बिस्मिल, मदन लाल ढींगरा, स्वामी श्रद्धानंद, सचिंद्र नाथ सान्याल जैसे स्वतंत्रता सेनानी शामिल थे।
आर्य समाज के सिद्धांतों की समकालीन प्रासंगिकता
सामाजिक समानता: जातिवाद और अस्पृश्यता के विरोध ने भारत के संविधान में निहित समानता एवं न्याय के मूल्यों को सशक्त किया है।
लैंगिक सशक्तीकरण: महिलाओं की शिक्षा और अधिकारों का समर्थन बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसी योजनाओं के अनुरूप है।
शिक्षा और तर्कवाद: DAV संस्थाएं वैज्ञानिक और नैतिक शिक्षा की अपनी विरासत को जारी रखे हुए हैं। यह संविधान के अनुच्छेद 51A(h) के तहत वैज्ञानिक दृष्टिकोण का समर्थन करता है।
अन्य: कर्मकांडों की बजाय नैतिक जीवनयापन पर जोर; धर्मों के बीच सद्भाव पर बल; प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने का समर्थन आदि।
आर्य समाज के बारे में
स्थापना: 1875 में स्वामी दयानंद सरस्वती ने बॉम्बे (वर्तमान मुंबई) में की थी।
धार्मिक सुधार:
स्वामी दयानंद सरस्वती ने मूर्तिपूजा और कर्मकांडीय पूजा की निंदा की, तथा सभी मनुष्यों के प्रति सम्मान एवं श्रद्धा का उपदेश दिया।
उन्होंने वेदों को अचूक प्रमाण के रूप में स्वीकार किया था। उन्होंने 'वेदों की ओर लौटो' का आह्वान किया था।
सामाजिक सुधार:
वंशानुगत जाति व्यवस्था और अस्पृश्यता (छुआछूत) का विरोध किया।
सभी जातियों के लिए वैदिक शिक्षा का समर्थन किया था। दयानंद सरस्वती ने बाल विवाह और विधवा महिलाओं के बहिष्कृत स्थिति में रहने का विरोध किया था। इसके अलावा, उन्होंने महिलाओं की शिक्षा के लिए अभियान भी चलाया था।
शैक्षणिक सुधार: उदाहरण के लिए- 1886 में दयानंद एंग्लो वैदिक (DAV) ट्रस्ट और प्रबंधन की स्थापना की थी। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक और आधुनिक शिक्षा प्रदान करना था।
स्वतंत्रता आंदोलन: प्रमुख सदस्यों में लाला लाजपत राय, भगत सिंह, राम प्रसाद बिस्मिल, मदन लाल ढींगरा, स्वामी श्रद्धानंद, सचिंद्र नाथ सान्याल जैसे स्वतंत्रता सेनानी शामिल थे।
आर्य समाज के सिद्धांतों की समकालीन प्रासंगिकता
सामाजिक समानता: जातिवाद और अस्पृश्यता के विरोध ने भारत के संविधान में निहित समानता एवं न्याय के मूल्यों को सशक्त किया है।
लैंगिक सशक्तीकरण: महिलाओं की शिक्षा और अधिकारों का समर्थन बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसी योजनाओं के अनुरूप है।
शिक्षा और तर्कवाद: DAV संस्थाएं वैज्ञानिक और नैतिक शिक्षा की अपनी विरासत को जारी रखे हुए हैं। यह संविधान के अनुच्छेद 51A(h) के तहत वैज्ञानिक दृष्टिकोण का समर्थन करता है।
अन्य: कर्मकांडों की बजाय नैतिक जीवनयापन पर जोर; धर्मों के बीच सद्भाव पर बल; प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने का समर्थन आदि।
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प्रधान मंत्री ने आर्य समाज की स्थापना के 150 वर्ष पूरे होने पर इसके योगदानों पर प्रकाश डाला आर्य समाज के बारे में स्थापना: 1875 में स्वामी दयानंद सरस्वती ने बॉम्बे (वर्तमान मुंबई) में की थी। धार्मिक सुधार: स्वामी दयानंद सरस्वती ने मूर्तिपूजा और कर्मकांडीय…
Padh lijiye ak baar arya samaj revise ho jayega ✔️
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एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC)
वर्ष 2025 का एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन दक्षिण कोरिया के ग्योंगजू शहर में आयोजित किया गया।
APEC के बारे में:
स्थापना: APEC की स्थापना 1989 में की गई थी।
सचिवालय: सिंगापुर में स्थित है।
सदस्य देश: APEC के 21 सदस्य देश हैं-
ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, चिली, चीन, इंडोनेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, मैक्सिको, संयुक्त राज्य अमेरिका आदि।
भारत: भारत APEC का सदस्य नहीं है, लेकिन इसे "पर्यवेक्षक (Observer)" का दर्जा प्राप्त है।
उद्देश्य: APEC का उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक सक्रिय और सामंजस्यपूर्ण समुदाय का निर्माण करना है, जो मुक्त और खुले व्यापार एवं निवेश का समर्थन करे तथा आर्थिक एकीकरण व सहयोग को बढ़ावा दे।
#CurrentAffairs #Current #Fact
वर्ष 2025 का एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन दक्षिण कोरिया के ग्योंगजू शहर में आयोजित किया गया।
APEC के बारे में:
स्थापना: APEC की स्थापना 1989 में की गई थी।
सचिवालय: सिंगापुर में स्थित है।
सदस्य देश: APEC के 21 सदस्य देश हैं-
ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, चिली, चीन, इंडोनेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, मैक्सिको, संयुक्त राज्य अमेरिका आदि।
भारत: भारत APEC का सदस्य नहीं है, लेकिन इसे "पर्यवेक्षक (Observer)" का दर्जा प्राप्त है।
उद्देश्य: APEC का उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक सक्रिय और सामंजस्यपूर्ण समुदाय का निर्माण करना है, जो मुक्त और खुले व्यापार एवं निवेश का समर्थन करे तथा आर्थिक एकीकरण व सहयोग को बढ़ावा दे।
#CurrentAffairs #Current #Fact
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आइबेरियन लिंक्स (Iberian Lynx)
स्पेन में विश्व का पहला सफेद आइबेरियन लिंक्स देखा गया।
IUCN स्थिति: वल्नरेबल (Vulnerable)।
CITES: परिशिष्ट-I में सूचीबद्ध।
प्राकृतिक पर्यावास: आश्रय के लिए घनी झाड़ियां और शिकार के लिए खुले चारागाह। खरगोशों की अधिकता इसके पर्यावास का आवश्यक घटक है।
व्यवहार: मुख्य रूप से संध्याचर (crepuscular) और रात्रिचर (nocturnal) होते हैं।
प्रमुख खतरे: खरगोशों की आबादी में गिरावट, पर्यावास का नुकसान।
#Current #Fact #Environment #ecology #habitat
स्पेन में विश्व का पहला सफेद आइबेरियन लिंक्स देखा गया।
IUCN स्थिति: वल्नरेबल (Vulnerable)।
CITES: परिशिष्ट-I में सूचीबद्ध।
प्राकृतिक पर्यावास: आश्रय के लिए घनी झाड़ियां और शिकार के लिए खुले चारागाह। खरगोशों की अधिकता इसके पर्यावास का आवश्यक घटक है।
व्यवहार: मुख्य रूप से संध्याचर (crepuscular) और रात्रिचर (nocturnal) होते हैं।
प्रमुख खतरे: खरगोशों की आबादी में गिरावट, पर्यावास का नुकसान।
#Current #Fact #Environment #ecology #habitat
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अभ्यास त्रिशूल
अभ्यास त्रिशूल के बारे में
उद्देश्य: भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना की संयुक्त परिचालन क्षमता एवं रणनीतिक तैयारियों को समझना।
यह अभ्यास एक ऐसा मंच प्रदान करेगा, जिससे यह प्रदर्शित किया जा सकेगा कि स्वदेशी रक्षा प्रणालियों को भारत के परिचालन ढांचे में कैसे एकीकृत किया जा रहा है।
#Current #CurrentAffairs #Fact #imp
भारत ने पाकिस्तान से लगी पश्चिमी सीमा पर गुजरात और राजस्थान में एक बड़ा त्रि-सेवा अभ्यास 'अभ्यास त्रिशूल' शुरू किया।
अभ्यास त्रिशूल के बारे में
उद्देश्य: भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना की संयुक्त परिचालन क्षमता एवं रणनीतिक तैयारियों को समझना।
यह अभ्यास एक ऐसा मंच प्रदान करेगा, जिससे यह प्रदर्शित किया जा सकेगा कि स्वदेशी रक्षा प्रणालियों को भारत के परिचालन ढांचे में कैसे एकीकृत किया जा रहा है।
#Current #CurrentAffairs #Fact #imp
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आल्फवेन तरंगें
आल्फवेन तरंगों के बारे में
ये प्लाज़्मा में उत्पन्न होने वाली चुंबकीय तरंगें होती हैं, जो सूर्य की चुंबकीय रेखाओं के साथ-साथ चलती हैं। ये तरंगें प्लाज्मा को एक तरफ से दोलन (oscillation) कराती हैं।
ये तरंगें प्लाज्मा (या विद्युत चालक द्रव) की स्थिति में उत्पन्न होती हैं। ये तरंगें तब बनती हैं, जब प्लाज्मा के भीतर मौजूद चुंबकीय क्षेत्र और विद्युत धाराएं परस्पर क्रिया करती हैं। इस क्रिया के कारण प्लाज्मा के आयन (ions) दोलन करते हैं, जिससे आल्फवेन तरंगों का निर्माण होता है।
ऐसा माना जाता है कि ये तरंगें सूर्य की सतह से कोरोना तक ऊर्जा का वहन करती हैं, जो इसके अत्यधिक उच्च तापमान में योगदान करती है।
महत्त्व: कोरोनल हीटिंग, सौर पवन त्वरण, बेहतर अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान आदि।
#CurrentAffairs #Current #Fact
एक हालिया अध्ययन में विशिष्ट लाल और नीले डॉप्लर शिफ्ट्स का खुलासा हुआ। इसने सूर्य के कोरोना में आल्फवेन तरंगों की उपस्थिति की पुष्टि की।
आल्फवेन तरंगों के बारे में
ये प्लाज़्मा में उत्पन्न होने वाली चुंबकीय तरंगें होती हैं, जो सूर्य की चुंबकीय रेखाओं के साथ-साथ चलती हैं। ये तरंगें प्लाज्मा को एक तरफ से दोलन (oscillation) कराती हैं।
ये तरंगें प्लाज्मा (या विद्युत चालक द्रव) की स्थिति में उत्पन्न होती हैं। ये तरंगें तब बनती हैं, जब प्लाज्मा के भीतर मौजूद चुंबकीय क्षेत्र और विद्युत धाराएं परस्पर क्रिया करती हैं। इस क्रिया के कारण प्लाज्मा के आयन (ions) दोलन करते हैं, जिससे आल्फवेन तरंगों का निर्माण होता है।
ऐसा माना जाता है कि ये तरंगें सूर्य की सतह से कोरोना तक ऊर्जा का वहन करती हैं, जो इसके अत्यधिक उच्च तापमान में योगदान करती है।
महत्त्व: कोरोनल हीटिंग, सौर पवन त्वरण, बेहतर अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान आदि।
#CurrentAffairs #Current #Fact
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रिएक्शन आप लोग एकदम नहीं देते हैं।
ऐसे ही अगर आप लोग ठान लें कि अब से फालतू का समय भी बर्बाद नहीं करूंगा/करूंगी फिर तो कल्याण ही हो जाएगा।😇
ऐसे ही अगर आप लोग ठान लें कि अब से फालतू का समय भी बर्बाद नहीं करूंगा/करूंगी फिर तो कल्याण ही हो जाएगा।😇
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1935 के अधिनियम के उपरांत, 1937 में हुए चुनावों में गठित कांग्रेस मंत्रिमंडलों का कार्यकाल था-
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Anonymous Quiz
3%
20 माह
45%
24 माह
35%
22 माह
16%
28 माह
👍3
अपनी किस कार्यकारिणी कमेटी में कांग्रेस ने भू-स्वामित्व को समाप्त करने की नीति अपनाई?@SecurePcs
A कार्यकारिणी कमेटी 1937 B कार्यकारिणी कमेटी, 1942 D कार्यकारिणी कमेटी 1945 C कार्यकारिणी कमेटी, 1946
A कार्यकारिणी कमेटी 1937 B कार्यकारिणी कमेटी, 1942 D कार्यकारिणी कमेटी 1945 C कार्यकारिणी कमेटी, 1946
Anonymous Quiz
22%
A
39%
B
29%
C
10%
D
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Anonymous Quiz
13%
B
32%
A
49%
C
6%
D
🥰2👍1