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भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है, जिसकी ग्लोबल मछली उत्पादन में लगभग 8% हिस्सेदारी है। India is the second largest fish producing country with around 8% share in global fish production. अंतर्देशीय मत्स्य पालन (Inland fisheries) - नदियों…
Pre+ Mains Dono point of view se imp hai ye.
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भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है, जिसकी ग्लोबल मछली उत्पादन में लगभग 8% हिस्सेदारी है। India is the second largest fish producing country with around 8% share in global fish production. अंतर्देशीय मत्स्य पालन (Inland fisheries) - नदियों…
भारत में मत्स्य उत्पादन की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालते हुए, अंतर्देशीय मत्स्य पालन (Inland Fisheries) के महत्व और समुद्री मत्स्य पालन (Marine Fisheries) की तुलना में इसके उच्च योगदान के कारणों का विश्लेषण कीजिए।
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भारत में मत्स्य उत्पादन की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालते हुए, अंतर्देशीय मत्स्य पालन (Inland Fisheries) के महत्व और समुद्री मत्स्य पालन (Marine Fisheries) की तुलना में इसके उच्च योगदान के कारणों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर:
🇮🇳 भारत में मत्स्य उत्पादन की वर्तमान स्थिति
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है, जिसकी वैश्विक मछली उत्पादन में लगभग 8% की हिस्सेदारी है। यह क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और पोषण में महत्वपूर्ण योगदान देता है, साथ ही लाखों लोगों को आजीविका प्रदान करता है।
अंतर्देशीय मत्स्य पालन का महत्व और उच्च योगदान
प्रस्तुत आँकड़ों (PIB) के अनुसार, भारत में अंतर्देशीय मत्स्य पालन (175 लाख टन), समुद्री मत्स्य पालन (44 लाख टन) की तुलना में चार गुना से अधिक है, जो इसके प्रभुत्व को दर्शाता है।
उच्च योगदान के कारण और महत्व:
विशाल मीठे पानी के संसाधन: भारत में नदियों, झीलों, तालाबों, जलाशयों और नहरों का एक विशाल नेटवर्क है। जलाशय आधारित मत्स्य पालन और तालाबों/टैंकों में मछली पालन (Aquaculture) के लिए अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध हैं।
नियंत्रित और सघन पालन: अंतर्देशीय मत्स्य पालन मुख्य रूप से कृत्रिम जल निकायों (जैसे तालाब, टैंक) में होता है, जहाँ मछली पालन एक नियंत्रित और सघन प्रक्रिया है। इसमें वैज्ञानिक तकनीकों (जैसे उन्नत बीज, पूरक आहार) का उपयोग कर प्रति इकाई क्षेत्र उत्पादकता (Productivity) को बढ़ाया जा सकता है।
समुद्री संसाधनों पर दबाव में कमी: बढ़ती वैश्विक मांग के कारण समुद्री संसाधनों पर अत्यधिक दबाव है, जिससे मछली के स्टॉक में कमी आ रही है। इसकी तुलना में, अंतर्देशीय जल कृषि (Aquaculture) निरंतर और विश्वसनीय उत्पादन सुनिश्चित करती है।
ग्रामीण आजीविका और पहुंच: अंतर्देशीय मत्स्य पालन ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों छोटे और सीमांत किसानों तथा मछुआरों को स्थानीय स्तर पर रोज़गार और आय का स्रोत प्रदान करता है, जिससे गरीबी उन्मूलन में मदद मिलती है।
सरकारी पहल: 'नीली क्रांति' (Blue Revolution) जैसी सरकारी योजनाओं ने अंतर्देशीय जल कृषि के विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है, जिससे इसका उत्पादन तेजी से बढ़ा है।
अंतर्देशीय मत्स्य पालन की यह वृद्धि भारत को एक स्थायी और विश्वसनीय खाद्य स्रोत प्रदान करने में निर्णायक भूमिका निभाती है।
🇮🇳 भारत में मत्स्य उत्पादन की वर्तमान स्थिति
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है, जिसकी वैश्विक मछली उत्पादन में लगभग 8% की हिस्सेदारी है। यह क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और पोषण में महत्वपूर्ण योगदान देता है, साथ ही लाखों लोगों को आजीविका प्रदान करता है।
अंतर्देशीय मत्स्य पालन का महत्व और उच्च योगदान
प्रस्तुत आँकड़ों (PIB) के अनुसार, भारत में अंतर्देशीय मत्स्य पालन (175 लाख टन), समुद्री मत्स्य पालन (44 लाख टन) की तुलना में चार गुना से अधिक है, जो इसके प्रभुत्व को दर्शाता है।
उच्च योगदान के कारण और महत्व:
विशाल मीठे पानी के संसाधन: भारत में नदियों, झीलों, तालाबों, जलाशयों और नहरों का एक विशाल नेटवर्क है। जलाशय आधारित मत्स्य पालन और तालाबों/टैंकों में मछली पालन (Aquaculture) के लिए अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध हैं।
नियंत्रित और सघन पालन: अंतर्देशीय मत्स्य पालन मुख्य रूप से कृत्रिम जल निकायों (जैसे तालाब, टैंक) में होता है, जहाँ मछली पालन एक नियंत्रित और सघन प्रक्रिया है। इसमें वैज्ञानिक तकनीकों (जैसे उन्नत बीज, पूरक आहार) का उपयोग कर प्रति इकाई क्षेत्र उत्पादकता (Productivity) को बढ़ाया जा सकता है।
समुद्री संसाधनों पर दबाव में कमी: बढ़ती वैश्विक मांग के कारण समुद्री संसाधनों पर अत्यधिक दबाव है, जिससे मछली के स्टॉक में कमी आ रही है। इसकी तुलना में, अंतर्देशीय जल कृषि (Aquaculture) निरंतर और विश्वसनीय उत्पादन सुनिश्चित करती है।
ग्रामीण आजीविका और पहुंच: अंतर्देशीय मत्स्य पालन ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों छोटे और सीमांत किसानों तथा मछुआरों को स्थानीय स्तर पर रोज़गार और आय का स्रोत प्रदान करता है, जिससे गरीबी उन्मूलन में मदद मिलती है।
सरकारी पहल: 'नीली क्रांति' (Blue Revolution) जैसी सरकारी योजनाओं ने अंतर्देशीय जल कृषि के विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है, जिससे इसका उत्पादन तेजी से बढ़ा है।
अंतर्देशीय मत्स्य पालन की यह वृद्धि भारत को एक स्थायी और विश्वसनीय खाद्य स्रोत प्रदान करने में निर्णायक भूमिका निभाती है।
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उत्तर: 🇮🇳 भारत में मत्स्य उत्पादन की वर्तमान स्थिति भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है, जिसकी वैश्विक मछली उत्पादन में लगभग 8% की हिस्सेदारी है। यह क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और पोषण में महत्वपूर्ण योगदान देता है, साथ ही लाखों…
इस उत्तर को एक बार दो बार तीन बार... बार बार पढ़िए और फिर उत्तर लिखने का प्रयास कीजिए ऐसा करने से आप धीरे धीरे बढ़िया उत्तर लिखना सीख जाएंगे
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भारत की अवनी लेखरा ने दुबई में 2025 पैरा शूटिंग विश्व कप में स्वर्ण पदक जीता
शूटिंग में भारत की अवनी लेखरा ने अल ऐन, दुबई में आयोजित 2025 पैरा शूटिंग विश्व कप की महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग SH1 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता।
उन्होंने स्वीडन की एना बेसनन को पछाड़ते हुए खिताब अपने नाम किया।
Important ✔️
शूटिंग में भारत की अवनी लेखरा ने अल ऐन, दुबई में आयोजित 2025 पैरा शूटिंग विश्व कप की महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग SH1 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता।
उन्होंने स्वीडन की एना बेसनन को पछाड़ते हुए खिताब अपने नाम किया।
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भारत अमेरिका में 10 वर्षीय रक्षा करार।
भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने प्रमुख रक्षा भागीदारी के लिए 10 वर्षीय फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए
यह फ्रेमवर्क मलेशिया के कुआलालंपुर में आयोजित 12वें आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) के दौरान हस्ताक्षरित किया गया। इसका उद्देश्य रक्षा सहयोग को मजबूत बनाने के लिए एकीकृत विज़न और नीतिगत दिशा प्रदान करना है।
इससे पहले, 2005-15 और 2015-25 की अवधि के लिए भी इसी तरह के फ्रेमवर्क्स पर हस्ताक्षर किए गए थे।
भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग के बारे में
संस्थागत और मूलभूत फ्रेमवर्क
शीर्ष वार्ता: 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता।
बुनियादी समझौते:
लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (LEMOA): इस पर 2016 में हस्ताक्षर किए गए थे। यह परस्पर लॉजिस्टिक्स सहायता को सक्षम बनाने पर केंद्रित है।
कम्युनिकेशंस कंपैटिबिलिटी एंड सिक्योरिटी एग्रीमेंट (COMCASA): इस पर 2018 में हस्ताक्षर किए गए थे। यह भारत को सुरक्षित संचार उपकरण प्राप्त करने की अनुमति देता है।
औद्योगिक सुरक्षा समझौता (ISA): इस पर 2019 में हस्ताक्षर किए गए थे।
बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट (BECA): इस पर 2020 में हस्ताक्षर किए गए थे। यह भू-स्थानिक जानकारी के आदान-प्रदान को सुगम बनाता है।
रणनीतिक और नीतिगत स्तंभ
स्थिति: अमेरिका ने 2016 में भारत को प्रमुख रक्षा भागीदार (MDP) के रूप में नामित किया था।
व्यापार सुविधा: अमेरिका ने 2018 में भारत को स्ट्रैटेजिक ट्रेड ऑथॉराइज़ेशन (STA) टियर-1 का दर्जा दिया था।
रक्षा उद्योग और प्रौद्योगिकी
व्यापार की मात्रा: दोनों देशों के बीच रक्षा खरीद 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है।
भारत की रक्षा उत्पाद सूची में अमेरिकी मूल के महत्वपूर्ण रक्षा उत्पाद शामिल हैं, जैसे- C-130J, C-17 एवं P-8I विमान, और अपाचे, चिनूक व सीहॉक हेलीकॉप्टर।
प्रौद्योगिकी को बढ़ावा: प्रौद्योगिकी और सह-उत्पादन में तेजी लाने के लिए रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप (2023) तैयार किया गया है।
नवाचार इकोसिस्टम: स्टार्ट-अप्स और उद्योग को जोड़ने के लिए इंडस एक्स (डिफेन्स एक्सेलरेशन इकोसिस्टम) की शुरुआत की गई है।
नई पहलों की घोषणा: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उद्योग की भागीदारी और स्वायत्त प्रणालियों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए स्वायत्त प्रणाली उद्योग गठबंधन (ASIA) पहल आरंभ की गई है।
परिचालन अंतर-संचालनीयता
द्विपक्षीय अभ्यास: युद्ध अभ्यास (थल सेना), वज्र प्रहार (विशेष बल), कोप इंडिया (वायु सेना) आदि।
बहुपक्षीय अभ्यास: मालाबार (भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की नौसेनाओं का अभ्यास)।
यह फ्रेमवर्क मलेशिया के कुआलालंपुर में आयोजित 12वें आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) के दौरान हस्ताक्षरित किया गया। इसका उद्देश्य रक्षा सहयोग को मजबूत बनाने के लिए एकीकृत विज़न और नीतिगत दिशा प्रदान करना है।
इससे पहले, 2005-15 और 2015-25 की अवधि के लिए भी इसी तरह के फ्रेमवर्क्स पर हस्ताक्षर किए गए थे।
भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग के बारे में
संस्थागत और मूलभूत फ्रेमवर्क
शीर्ष वार्ता: 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता।
बुनियादी समझौते:
लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (LEMOA): इस पर 2016 में हस्ताक्षर किए गए थे। यह परस्पर लॉजिस्टिक्स सहायता को सक्षम बनाने पर केंद्रित है।
कम्युनिकेशंस कंपैटिबिलिटी एंड सिक्योरिटी एग्रीमेंट (COMCASA): इस पर 2018 में हस्ताक्षर किए गए थे। यह भारत को सुरक्षित संचार उपकरण प्राप्त करने की अनुमति देता है।
औद्योगिक सुरक्षा समझौता (ISA): इस पर 2019 में हस्ताक्षर किए गए थे।
बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट (BECA): इस पर 2020 में हस्ताक्षर किए गए थे। यह भू-स्थानिक जानकारी के आदान-प्रदान को सुगम बनाता है।
रणनीतिक और नीतिगत स्तंभ
स्थिति: अमेरिका ने 2016 में भारत को प्रमुख रक्षा भागीदार (MDP) के रूप में नामित किया था।
व्यापार सुविधा: अमेरिका ने 2018 में भारत को स्ट्रैटेजिक ट्रेड ऑथॉराइज़ेशन (STA) टियर-1 का दर्जा दिया था।
रक्षा उद्योग और प्रौद्योगिकी
व्यापार की मात्रा: दोनों देशों के बीच रक्षा खरीद 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है।
भारत की रक्षा उत्पाद सूची में अमेरिकी मूल के महत्वपूर्ण रक्षा उत्पाद शामिल हैं, जैसे- C-130J, C-17 एवं P-8I विमान, और अपाचे, चिनूक व सीहॉक हेलीकॉप्टर।
प्रौद्योगिकी को बढ़ावा: प्रौद्योगिकी और सह-उत्पादन में तेजी लाने के लिए रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप (2023) तैयार किया गया है।
नवाचार इकोसिस्टम: स्टार्ट-अप्स और उद्योग को जोड़ने के लिए इंडस एक्स (डिफेन्स एक्सेलरेशन इकोसिस्टम) की शुरुआत की गई है।
नई पहलों की घोषणा: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उद्योग की भागीदारी और स्वायत्त प्रणालियों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए स्वायत्त प्रणाली उद्योग गठबंधन (ASIA) पहल आरंभ की गई है।
परिचालन अंतर-संचालनीयता
द्विपक्षीय अभ्यास: युद्ध अभ्यास (थल सेना), वज्र प्रहार (विशेष बल), कोप इंडिया (वायु सेना) आदि।
बहुपक्षीय अभ्यास: मालाबार (भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की नौसेनाओं का अभ्यास)।
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भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने प्रमुख रक्षा भागीदारी के लिए 10 वर्षीय फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए यह फ्रेमवर्क मलेशिया के कुआलालंपुर में आयोजित 12वें आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) के दौरान हस्ताक्षरित किया गया। इसका उद्देश्य रक्षा सहयोग…
Mukhya Pariksha ke liye fayademand ✔️
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#ISRO successfully launched CMS-03 onboard its LVM3-M5 (GSLV-MkIII) heavy-lift rocket from श्रीहरिकोटा
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#ISRO successfully launched CMS-03 onboard its LVM3-M5 (GSLV-MkIII) heavy-lift rocket from श्रीहरिकोटा
उद्देश्य: CMS-03 मिशन द्वारा भारत और आसपास के समुद्री इलाकों में बेहतर मल्टी-बैंड संचार सेवाएं देना है।
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अभिलाषाएँ.. अनंत हैं, यथार्थ सीमित है. और मन इन्हीं दोनों के बीच सबसे बड़ा संघर्ष करता है...
Good Night Everyone ♥️🧿🌌
Good Night Everyone ♥️🧿🌌
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उसे गुमाँ है कि मेरी उड़ान कुछ कम है
मुझे यक़ीं है कि ये आसमान कुछ कम है
महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 : विजेता... भारत 💐🔥🇮🇳
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केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव के कारण भारत के अर्ध-संघीय ढांचे के समक्ष चुनौतियां उत्पन्न हो रही हैं
GST परिषद और नीति आयोग जैसी संस्थाएं वार्ता के लिए मंच प्रदान करती हैं,। ये संस्थाएं भारत की लोकतांत्रिक सफलता के मूल सिद्धांत "स्वशासन और साझा शासन" को मजबूत करते हैं।
भारत का संवैधानिक ढांचा: शक्ति संतुलन
संघीय विशेषताएं:
लिखित संविधान: भारत का संविधान एक लिखित दस्तावेज है, जिसमें संशोधन की स्पष्ट प्रक्रिया दी गई है।
द्वि-स्तरीय शासन व्यवस्था: शासन प्रणाली दो स्तरों पर संचालित होती है- केंद्र और राज्य स्तर।
द्विसदनीय व्यवस्था: राज्य सभा राज्यों के हितों और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है। यह लोक सभा में संभावित बहुमतवाद (majoritarianism) को नियंत्रित करने का भी काम करती है। इसका अर्थ है कि जब लोक सभा में किसी दल का व्यापक बहुमत होता है, तब भी लोक सभा में बहुमत द्वारा पारित कानून की राज्य सभा में भी जांच-परख की जाती है।
शक्तियों का विभाजन: संविधान की अनुसूची VII के अंतर्गत तीन सूचियों के माध्यम से केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का विभाजन किया गया है।
एकात्मक विशेषताएं
सशक्त केंद्र: शक्तियों का विभाजन केंद्र सरकार के पक्ष में अधिक है। उदाहरण के लिए- समवर्ती सूची में शामिल विषयों पर संसद द्वारा बनाए गए कानूनों को प्राथमिकता दी जाती है।
एकल संविधान और नागरिकता: पूरे देश में सभी नागरिकों पर एक समान कानून और अधिकार लागू होते हैं।
राज्यों पर संसद का प्राधिकार: अनुच्छेद 3 संसद को राज्यों की सहमति के बिना राज्यों के नाम, क्षेत्र और सीमाओं को बदलने का अधिकार देता है।
अन्य: इसमें एकीकृत न्यायपालिका, अखिल भारतीय सेवाएं, आपातकालीन शक्तियां, अंतर्राष्ट्रीय संधियों से संबंधित बाध्यताओं को पूरा करने हेतु संसद द्वारा कानून बनाने का अधिकार, आदि शामिल हैं।
संघीय ढांचे के समक्ष मौजूदा दौर की चुनौतियां
राजकोषीय केंद्रीकरण: उदाहरण के लिए- GST के लागू होने से राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता प्रभावित हुई है।
प्रशासनिक और राजनीतिक केंद्रीकरण: उदाहरण के लिए- कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान आपदा प्रबंधन अधिनियम का उपयोग करके 'राज्यों से न्यूनतम परामर्श' के साथ राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लगाया गया।
अन्य: इसमें राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए विधेयक को रोक कर रखना, केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिश पर कर एवं राजस्व का हस्तांतरण करना, आदि शामिल हैं।
निष्कर्ष
नीति आयोग जैसे संस्थान, “टीम इंडिया” की भावना को दर्शाते हुए केंद्र और राज्यों को राष्ट्र निर्माण के समान भागीदार के रूप में जोड़ते हैं। ऐसे संस्थान एक ऐसा सार्थक संतुलन विकसित कर सकते हैं, जो एकता और क्षेत्रीय स्वायत्तता, दोनों के बीच सामंजस्य स्थापित करे तथा उभरती विकासात्मक चुनौतियों का समाधान खोजने में सहायक बने।
#Mains #Fact #Current_affairs #CurrentAffairs #uppcsmains #imp
GST परिषद और नीति आयोग जैसी संस्थाएं वार्ता के लिए मंच प्रदान करती हैं,। ये संस्थाएं भारत की लोकतांत्रिक सफलता के मूल सिद्धांत "स्वशासन और साझा शासन" को मजबूत करते हैं।
भारत का संवैधानिक ढांचा: शक्ति संतुलन
संघीय विशेषताएं:
लिखित संविधान: भारत का संविधान एक लिखित दस्तावेज है, जिसमें संशोधन की स्पष्ट प्रक्रिया दी गई है।
द्वि-स्तरीय शासन व्यवस्था: शासन प्रणाली दो स्तरों पर संचालित होती है- केंद्र और राज्य स्तर।
द्विसदनीय व्यवस्था: राज्य सभा राज्यों के हितों और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है। यह लोक सभा में संभावित बहुमतवाद (majoritarianism) को नियंत्रित करने का भी काम करती है। इसका अर्थ है कि जब लोक सभा में किसी दल का व्यापक बहुमत होता है, तब भी लोक सभा में बहुमत द्वारा पारित कानून की राज्य सभा में भी जांच-परख की जाती है।
शक्तियों का विभाजन: संविधान की अनुसूची VII के अंतर्गत तीन सूचियों के माध्यम से केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का विभाजन किया गया है।
एकात्मक विशेषताएं
सशक्त केंद्र: शक्तियों का विभाजन केंद्र सरकार के पक्ष में अधिक है। उदाहरण के लिए- समवर्ती सूची में शामिल विषयों पर संसद द्वारा बनाए गए कानूनों को प्राथमिकता दी जाती है।
एकल संविधान और नागरिकता: पूरे देश में सभी नागरिकों पर एक समान कानून और अधिकार लागू होते हैं।
राज्यों पर संसद का प्राधिकार: अनुच्छेद 3 संसद को राज्यों की सहमति के बिना राज्यों के नाम, क्षेत्र और सीमाओं को बदलने का अधिकार देता है।
अन्य: इसमें एकीकृत न्यायपालिका, अखिल भारतीय सेवाएं, आपातकालीन शक्तियां, अंतर्राष्ट्रीय संधियों से संबंधित बाध्यताओं को पूरा करने हेतु संसद द्वारा कानून बनाने का अधिकार, आदि शामिल हैं।
संघीय ढांचे के समक्ष मौजूदा दौर की चुनौतियां
राजकोषीय केंद्रीकरण: उदाहरण के लिए- GST के लागू होने से राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता प्रभावित हुई है।
प्रशासनिक और राजनीतिक केंद्रीकरण: उदाहरण के लिए- कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान आपदा प्रबंधन अधिनियम का उपयोग करके 'राज्यों से न्यूनतम परामर्श' के साथ राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लगाया गया।
अन्य: इसमें राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए विधेयक को रोक कर रखना, केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिश पर कर एवं राजस्व का हस्तांतरण करना, आदि शामिल हैं।
निष्कर्ष
नीति आयोग जैसे संस्थान, “टीम इंडिया” की भावना को दर्शाते हुए केंद्र और राज्यों को राष्ट्र निर्माण के समान भागीदार के रूप में जोड़ते हैं। ऐसे संस्थान एक ऐसा सार्थक संतुलन विकसित कर सकते हैं, जो एकता और क्षेत्रीय स्वायत्तता, दोनों के बीच सामंजस्य स्थापित करे तथा उभरती विकासात्मक चुनौतियों का समाधान खोजने में सहायक बने।
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‘इंडिया मेरिटाइम वीक 2025’ ने 12 लाख करोड़ रुपये का निवेश सुनिश्चित किया
प्रधान मंत्री ने समुद्री अमृत काल विज़न 2047 के अंतर्गत ग्लोबल मरीन लीडर बनने की दिशा में भारत के समुद्री क्षेत्रक को मजबूत करने के लिए निम्नलिखित पहलों का भी अनावरण किया:
स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता: तेल और गैस संबंधी सार्वजनिक उपक्रमों ने 59 जहाज निर्माण हेतु 47,800 करोड़ रुपये के ऑर्डर जारी किए हैं।
शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) ने 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश के साथ 2047 तक अपने बेड़े को 216 जहाजों तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
भारत के समुद्री क्षेत्रक की उपलब्धियां
भारत की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण: मात्रा के हिसाब से भारत का लगभग 95% व्यापार और मूल्य के हिसाब से लगभग 70% व्यापार समुद्री मार्गों से होता है।
पत्तन की क्षमता बढ़कर दोगुनी हुई: यह 2014 में लगभग 1,400 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) थी, जो 2024-2025 में बढ़कर 2,762 MMTPA हो गई।
जहाज के औसत टर्नअराउंड समय में कमी: 2014 में यह औसतन 93 घंटे था, जो 2025 में घटकर केवल 48 घंटे रह गया। इससे वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार हुआ है।
भारत में जहाज संचालन संबंधी कार्यबल (सीफेरर वर्कफोर्स): यह 2014 में 1.25 लाख से बढ़कर 2025 में 3 लाख से अधिक हो गया। यह वैश्विक सीफेरर वर्कफोर्स का 12% है। इससे भारत प्रशिक्षित सीफेरर वर्कफोर्स के विश्व के शीर्ष तीन आपूर्तिकर्ताओं में से एक बन गया है।
कानून द्वारा प्रोत्साहन: मर्चेंट शिपिंग एक्ट, 2025, तटीय पोत-परिवहन अधिनियम, 2025, भारतीय पत्तन अधिनियम, 2025 जैसे विभिन्न कानूनों के माध्यम से समुद्री क्षेत्रक को बढ़ावा मिला है।
भारत के समुद्री क्षेत्रक को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए प्रमुख कदम
मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030: भारत को एक वैश्विक समुद्री महाशक्ति बनाने के लिए इसके तहत 10 प्रमुख विषयों की पहचान की गई, जैसे- पत्तन संबंधी अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स संबंधी दक्षता आदि।
समुद्री अमृत काल विज़न 2047: इसके तहत जहाज निर्माण, क्रूज पर्यटन, कौशल विकास आदि के लिए 70 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का लक्ष्य रखा गया है।
सागरमाला: इसके तहत लॉजिस्टिक्स की लागत में कटौती, रोजगार सृजन आदि पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
ग्रीन टग प्रोग्राम: इसके तहत 2040 तक 100 पर्यावरण अनुकूल टग्स तैनात करने का लक्ष्य रखा गया है।
समुद्री सुरक्षा फ्रेमवर्क: यह महासागर (MAHASAGAR), एक्ट ईस्ट पॉलिसी, हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी आदि सहित रणनीतिक फ्रेमवर्क के माध्यम से मुक्त, खुली और समावेशी समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देता है।
महासागर (MAHASAGAR) से आशय है; म्यूच्यूअल एंड हॉलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजंस।
प्रधान मंत्री ने समुद्री अमृत काल विज़न 2047 के अंतर्गत ग्लोबल मरीन लीडर बनने की दिशा में भारत के समुद्री क्षेत्रक को मजबूत करने के लिए निम्नलिखित पहलों का भी अनावरण किया:
स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता: तेल और गैस संबंधी सार्वजनिक उपक्रमों ने 59 जहाज निर्माण हेतु 47,800 करोड़ रुपये के ऑर्डर जारी किए हैं।
शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) ने 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश के साथ 2047 तक अपने बेड़े को 216 जहाजों तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
भारत के समुद्री क्षेत्रक की उपलब्धियां
भारत की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण: मात्रा के हिसाब से भारत का लगभग 95% व्यापार और मूल्य के हिसाब से लगभग 70% व्यापार समुद्री मार्गों से होता है।
पत्तन की क्षमता बढ़कर दोगुनी हुई: यह 2014 में लगभग 1,400 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) थी, जो 2024-2025 में बढ़कर 2,762 MMTPA हो गई।
जहाज के औसत टर्नअराउंड समय में कमी: 2014 में यह औसतन 93 घंटे था, जो 2025 में घटकर केवल 48 घंटे रह गया। इससे वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार हुआ है।
भारत में जहाज संचालन संबंधी कार्यबल (सीफेरर वर्कफोर्स): यह 2014 में 1.25 लाख से बढ़कर 2025 में 3 लाख से अधिक हो गया। यह वैश्विक सीफेरर वर्कफोर्स का 12% है। इससे भारत प्रशिक्षित सीफेरर वर्कफोर्स के विश्व के शीर्ष तीन आपूर्तिकर्ताओं में से एक बन गया है।
कानून द्वारा प्रोत्साहन: मर्चेंट शिपिंग एक्ट, 2025, तटीय पोत-परिवहन अधिनियम, 2025, भारतीय पत्तन अधिनियम, 2025 जैसे विभिन्न कानूनों के माध्यम से समुद्री क्षेत्रक को बढ़ावा मिला है।
भारत के समुद्री क्षेत्रक को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए प्रमुख कदम
मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030: भारत को एक वैश्विक समुद्री महाशक्ति बनाने के लिए इसके तहत 10 प्रमुख विषयों की पहचान की गई, जैसे- पत्तन संबंधी अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स संबंधी दक्षता आदि।
समुद्री अमृत काल विज़न 2047: इसके तहत जहाज निर्माण, क्रूज पर्यटन, कौशल विकास आदि के लिए 70 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का लक्ष्य रखा गया है।
सागरमाला: इसके तहत लॉजिस्टिक्स की लागत में कटौती, रोजगार सृजन आदि पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
ग्रीन टग प्रोग्राम: इसके तहत 2040 तक 100 पर्यावरण अनुकूल टग्स तैनात करने का लक्ष्य रखा गया है।
समुद्री सुरक्षा फ्रेमवर्क: यह महासागर (MAHASAGAR), एक्ट ईस्ट पॉलिसी, हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी आदि सहित रणनीतिक फ्रेमवर्क के माध्यम से मुक्त, खुली और समावेशी समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देता है।
महासागर (MAHASAGAR) से आशय है; म्यूच्यूअल एंड हॉलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजंस।
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प्रधान मंत्री ने आर्य समाज की स्थापना के 150 वर्ष पूरे होने पर इसके योगदानों पर प्रकाश डाला
आर्य समाज के बारे में
स्थापना: 1875 में स्वामी दयानंद सरस्वती ने बॉम्बे (वर्तमान मुंबई) में की थी।
धार्मिक सुधार:
स्वामी दयानंद सरस्वती ने मूर्तिपूजा और कर्मकांडीय पूजा की निंदा की, तथा सभी मनुष्यों के प्रति सम्मान एवं श्रद्धा का उपदेश दिया।
उन्होंने वेदों को अचूक प्रमाण के रूप में स्वीकार किया था। उन्होंने 'वेदों की ओर लौटो' का आह्वान किया था।
सामाजिक सुधार:
वंशानुगत जाति व्यवस्था और अस्पृश्यता (छुआछूत) का विरोध किया।
सभी जातियों के लिए वैदिक शिक्षा का समर्थन किया था। दयानंद सरस्वती ने बाल विवाह और विधवा महिलाओं के बहिष्कृत स्थिति में रहने का विरोध किया था। इसके अलावा, उन्होंने महिलाओं की शिक्षा के लिए अभियान भी चलाया था।
शैक्षणिक सुधार: उदाहरण के लिए- 1886 में दयानंद एंग्लो वैदिक (DAV) ट्रस्ट और प्रबंधन की स्थापना की थी। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक और आधुनिक शिक्षा प्रदान करना था।
स्वतंत्रता आंदोलन: प्रमुख सदस्यों में लाला लाजपत राय, भगत सिंह, राम प्रसाद बिस्मिल, मदन लाल ढींगरा, स्वामी श्रद्धानंद, सचिंद्र नाथ सान्याल जैसे स्वतंत्रता सेनानी शामिल थे।
आर्य समाज के सिद्धांतों की समकालीन प्रासंगिकता
सामाजिक समानता: जातिवाद और अस्पृश्यता के विरोध ने भारत के संविधान में निहित समानता एवं न्याय के मूल्यों को सशक्त किया है।
लैंगिक सशक्तीकरण: महिलाओं की शिक्षा और अधिकारों का समर्थन बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसी योजनाओं के अनुरूप है।
शिक्षा और तर्कवाद: DAV संस्थाएं वैज्ञानिक और नैतिक शिक्षा की अपनी विरासत को जारी रखे हुए हैं। यह संविधान के अनुच्छेद 51A(h) के तहत वैज्ञानिक दृष्टिकोण का समर्थन करता है।
अन्य: कर्मकांडों की बजाय नैतिक जीवनयापन पर जोर; धर्मों के बीच सद्भाव पर बल; प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने का समर्थन आदि।
आर्य समाज के बारे में
स्थापना: 1875 में स्वामी दयानंद सरस्वती ने बॉम्बे (वर्तमान मुंबई) में की थी।
धार्मिक सुधार:
स्वामी दयानंद सरस्वती ने मूर्तिपूजा और कर्मकांडीय पूजा की निंदा की, तथा सभी मनुष्यों के प्रति सम्मान एवं श्रद्धा का उपदेश दिया।
उन्होंने वेदों को अचूक प्रमाण के रूप में स्वीकार किया था। उन्होंने 'वेदों की ओर लौटो' का आह्वान किया था।
सामाजिक सुधार:
वंशानुगत जाति व्यवस्था और अस्पृश्यता (छुआछूत) का विरोध किया।
सभी जातियों के लिए वैदिक शिक्षा का समर्थन किया था। दयानंद सरस्वती ने बाल विवाह और विधवा महिलाओं के बहिष्कृत स्थिति में रहने का विरोध किया था। इसके अलावा, उन्होंने महिलाओं की शिक्षा के लिए अभियान भी चलाया था।
शैक्षणिक सुधार: उदाहरण के लिए- 1886 में दयानंद एंग्लो वैदिक (DAV) ट्रस्ट और प्रबंधन की स्थापना की थी। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक और आधुनिक शिक्षा प्रदान करना था।
स्वतंत्रता आंदोलन: प्रमुख सदस्यों में लाला लाजपत राय, भगत सिंह, राम प्रसाद बिस्मिल, मदन लाल ढींगरा, स्वामी श्रद्धानंद, सचिंद्र नाथ सान्याल जैसे स्वतंत्रता सेनानी शामिल थे।
आर्य समाज के सिद्धांतों की समकालीन प्रासंगिकता
सामाजिक समानता: जातिवाद और अस्पृश्यता के विरोध ने भारत के संविधान में निहित समानता एवं न्याय के मूल्यों को सशक्त किया है।
लैंगिक सशक्तीकरण: महिलाओं की शिक्षा और अधिकारों का समर्थन बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसी योजनाओं के अनुरूप है।
शिक्षा और तर्कवाद: DAV संस्थाएं वैज्ञानिक और नैतिक शिक्षा की अपनी विरासत को जारी रखे हुए हैं। यह संविधान के अनुच्छेद 51A(h) के तहत वैज्ञानिक दृष्टिकोण का समर्थन करता है।
अन्य: कर्मकांडों की बजाय नैतिक जीवनयापन पर जोर; धर्मों के बीच सद्भाव पर बल; प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने का समर्थन आदि।
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प्रधान मंत्री ने आर्य समाज की स्थापना के 150 वर्ष पूरे होने पर इसके योगदानों पर प्रकाश डाला आर्य समाज के बारे में स्थापना: 1875 में स्वामी दयानंद सरस्वती ने बॉम्बे (वर्तमान मुंबई) में की थी। धार्मिक सुधार: स्वामी दयानंद सरस्वती ने मूर्तिपूजा और कर्मकांडीय…
Padh lijiye ak baar arya samaj revise ho jayega ✔️
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एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC)
वर्ष 2025 का एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन दक्षिण कोरिया के ग्योंगजू शहर में आयोजित किया गया।
APEC के बारे में:
स्थापना: APEC की स्थापना 1989 में की गई थी।
सचिवालय: सिंगापुर में स्थित है।
सदस्य देश: APEC के 21 सदस्य देश हैं-
ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, चिली, चीन, इंडोनेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, मैक्सिको, संयुक्त राज्य अमेरिका आदि।
भारत: भारत APEC का सदस्य नहीं है, लेकिन इसे "पर्यवेक्षक (Observer)" का दर्जा प्राप्त है।
उद्देश्य: APEC का उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक सक्रिय और सामंजस्यपूर्ण समुदाय का निर्माण करना है, जो मुक्त और खुले व्यापार एवं निवेश का समर्थन करे तथा आर्थिक एकीकरण व सहयोग को बढ़ावा दे।
#CurrentAffairs #Current #Fact
वर्ष 2025 का एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन दक्षिण कोरिया के ग्योंगजू शहर में आयोजित किया गया।
APEC के बारे में:
स्थापना: APEC की स्थापना 1989 में की गई थी।
सचिवालय: सिंगापुर में स्थित है।
सदस्य देश: APEC के 21 सदस्य देश हैं-
ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, चिली, चीन, इंडोनेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, मैक्सिको, संयुक्त राज्य अमेरिका आदि।
भारत: भारत APEC का सदस्य नहीं है, लेकिन इसे "पर्यवेक्षक (Observer)" का दर्जा प्राप्त है।
उद्देश्य: APEC का उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक सक्रिय और सामंजस्यपूर्ण समुदाय का निर्माण करना है, जो मुक्त और खुले व्यापार एवं निवेश का समर्थन करे तथा आर्थिक एकीकरण व सहयोग को बढ़ावा दे।
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