📍घटनाचक्र आई दृष्टि करेंट अफेयर्स Day 13
पृष्ठ संख्या: ‘183 से 187'’
नेगेटिव मार्किंग: 1/3
समय: कल रात्रि 9:00 बजे।
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भाग 2. ( अनुच्छेद 5 से 11 )(नागरिकता) अनुच्छेद 5:- " संविधान के प्रारंभ पर नागरिकता"। इस संविधान के प्रारंभ पर प्रत्येक व्यक्ति जिसका भारत के राज्यक्षेत्र में अधिवास है और— (क) जो भारत के राज्यक्षेत्र में जन्मा था, या (ख) जिसके माता या पिता में से कोई भारत…
अनुच्छेद 12:-
राज्य की परिभाषा
अनुच्छेद 13:-
मूल अधिकारों से असंगत विधियां एवम उनका अल्पीकरण:-
13(1) इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले भारत के राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त सभी विधियाँ उस मात्रा तक शून्य होंगी जिस तक वे इस भाग के उपबंधों से असंगत हैं।
(2) राज्य ऐसी कोई विधि नहीं बनाएगा जो इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों को छीनती है या न्यून करती है और इस खंड के उल्लंघन में बनाई गई प्रत्येक विधि उल्लंघन की मात्रा तक शून्य होगी।
(3) इस अनुच्छेद में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,--
(क) ''विधि'' के अंतर्गत भारत के राज्यक्षेत्र में विधि का बल रखने वाला कोई अध्यादेश, आदेश, उपविधि, नियम, विनियम, अधिसूचना, रूढ़ि या प्रथा है ;
(ख) ''प्रवृत्त विधि'' के अंतर्गत भारत के राज्यक्षेत्र में किसी विधान-मंडल या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा इस संविधान के प्रारंभ से पहले पारित या बनाई गई विधि है जो पहले ही निरसित नहीं कर दी गई है, चाहे ऐसी कोई विधि या उसका कोई भाग उस समय पूर्णतया या विशिष्ट क्षेत्रों में प्रवर्तन में नहीं है।
[(4) इस अनुच्छेद की कोई बात अनुच्छेद 368 के अधीन किए गए इस संविधान के किसी संशोधन को लागू नहीं होगी।]*
अनुच्छेद 14 :-
विधि के समक्ष समता:-
राज्य, भारत के राज्यक्षेत्र में किसी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता से या विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा।
अनुच्छेद 15:-
धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर राज्य कोई विभेद नहीं करेगा।
#Articles_Series
राज्य की परिभाषा
अनुच्छेद 13:-
मूल अधिकारों से असंगत विधियां एवम उनका अल्पीकरण:-
13(1) इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले भारत के राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त सभी विधियाँ उस मात्रा तक शून्य होंगी जिस तक वे इस भाग के उपबंधों से असंगत हैं।
(2) राज्य ऐसी कोई विधि नहीं बनाएगा जो इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों को छीनती है या न्यून करती है और इस खंड के उल्लंघन में बनाई गई प्रत्येक विधि उल्लंघन की मात्रा तक शून्य होगी।
(3) इस अनुच्छेद में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,--
(क) ''विधि'' के अंतर्गत भारत के राज्यक्षेत्र में विधि का बल रखने वाला कोई अध्यादेश, आदेश, उपविधि, नियम, विनियम, अधिसूचना, रूढ़ि या प्रथा है ;
(ख) ''प्रवृत्त विधि'' के अंतर्गत भारत के राज्यक्षेत्र में किसी विधान-मंडल या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा इस संविधान के प्रारंभ से पहले पारित या बनाई गई विधि है जो पहले ही निरसित नहीं कर दी गई है, चाहे ऐसी कोई विधि या उसका कोई भाग उस समय पूर्णतया या विशिष्ट क्षेत्रों में प्रवर्तन में नहीं है।
[(4) इस अनुच्छेद की कोई बात अनुच्छेद 368 के अधीन किए गए इस संविधान के किसी संशोधन को लागू नहीं होगी।]*
अनुच्छेद 14 :-
विधि के समक्ष समता:-
राज्य, भारत के राज्यक्षेत्र में किसी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता से या विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा।
अनुच्छेद 15:-
धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर राज्य कोई विभेद नहीं करेगा।
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#Articles_Series के अंतर्गत भेजे जा रहे अनुच्छेद का एक बार अध्ययन कर लिया कीजिए आप लोग 👍🌹
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कन्फ्यूजन वाले पर्यायवाची शब्द
शशिधर - शंकर
शशधर - चंद्रमा
अंब - आम
अंबु - जल
कमलासन - ब्रह्ममा
कमलासना - लक्ष्मी
अचला - पृथ्वी
अचल - पर्वत
विपुला - पृथ्वी
विपुल - हिमालय
शशिधर - शंकर
शशधर - चंद्रमा
अंब - आम
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कमलासना - लक्ष्मी
अचला - पृथ्वी
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विपुला - पृथ्वी
विपुल - हिमालय
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लक्ष्मी जी के पर्यायवाची
कमला, सिंधुसुता, श्री, रमा, हरिप्रिया, चंचला, चपला, विष्णुवल्लभा, इन्दिरा, भार्गवी, पद्मा, पद्मासना, क्षीरोदतनया, लोकमाता, समुद्रजा, विष्णुप्रिया, कमलासना, कमलालया
बिजली और लक्ष्मी दोनों का ही पर्यायवाची ( चंचला, चपला ) होता है |
सुंदरी और दुर्गा दोनों का पर्यायवाची मीनाक्षी होता है |
कमला, सिंधुसुता, श्री, रमा, हरिप्रिया, चंचला, चपला, विष्णुवल्लभा, इन्दिरा, भार्गवी, पद्मा, पद्मासना, क्षीरोदतनया, लोकमाता, समुद्रजा, विष्णुप्रिया, कमलासना, कमलालया
बिजली और लक्ष्मी दोनों का ही पर्यायवाची ( चंचला, चपला ) होता है |
सुंदरी और दुर्गा दोनों का पर्यायवाची मीनाक्षी होता है |
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संविधान की उद्देशिका
संविधान सभा में उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत - 13 दिसंबर, 1946 को (पं. जवाहर लाल नेहरू द्वारा)
संविधान सभा द्वारा उद्देश्य प्रस्ताव अंगीकृत - 22 जनवरी, 1947 को
भारतीय संविधान की उद्देशिका संविधान निर्माताओं के विचारों को जानने की कुंजी है।
भारतीय संविधान की उद्देशिका का विचार संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से लिया गया है जबकि भाषा ऑस्ट्रेलिया के संविधान से ली गयी है।
उद्देशिका की विषय वस्तु
संविधान सभा में उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत - 13 दिसंबर, 1946 को (पं. जवाहर लाल नेहरू द्वारा)
संविधान सभा द्वारा उद्देश्य प्रस्ताव अंगीकृत - 22 जनवरी, 1947 को
भारतीय संविधान की उद्देशिका संविधान निर्माताओं के विचारों को जानने की कुंजी है।
भारतीय संविधान की उद्देशिका का विचार संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से लिया गया है जबकि भाषा ऑस्ट्रेलिया के संविधान से ली गयी है।
उद्देशिका की विषय वस्तु
हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को :
सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर, 1949 ई. (मिति मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष सप्तमी, संवत् दो हजार छह विक्रमी) को एतद्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
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भारत का संवैधानिक विकास 1773 to 1833
1773 का रेगुलेटिंग एक्ट -
1786 का अधिनियम -
1793 का चार्टर अधिनियम -
1813 का चार्टर अधिनियम -
1833 का चार्टर एक्ट -
1773 का रेगुलेटिंग एक्ट -
इसके द्वारा बंगाल के गवर्नर को बंगाल का गवर्नर जनरल पद नाम दिया गया और उसकी मदद हेतु चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया जिसका कार्यकाल 5 वर्ष रखा गया वारेन हेस्टिंग्स प्रथम गवर्नर जनरल तथा फ्रांसिस , क्लेवरिंग , मानसन और बारवेल काउंसिल के सदस्य नियुक्त किए गए इसी अधिनियम के तहत कोलकाता में 1774 में एक सुप्रीम कोर्ट की स्थापना हुई थी जिसमें एलिजा इमपे मुख्य न्यायाधीश बने इस अधिनियम ने कंपनी के कर्मचारियों पर निजी व्यापार करने तथा भारतीयों से उपहार लेने पर प्रतिबंध लगा दिया |
√ 1784 का पिट्स इंडिया एक्ट -
इसके द्वारा कंपनी के व्यापारिक और राजनीतिक कार्य को पृथक कर दिया गया और राजनीतिक मामलों के प्रबंध हेतु नियंत्रण बोर्ड की स्थापना हुई |
1786 का अधिनियम -
इसके द्वारा गवर्नर जनरल को विशेष परिस्थितियों में अपने परिषद के निर्णय को निरस्त करने या लागू करने का अधिकार दिया गया साथ ही गवर्नर जनरल को प्रधान सेनापति की भी शक्ति दी गई यह दोनों ही अधिकार कार्नवालिस को प्राप्त हुए |
1793 का चार्टर अधिनियम -
कंपनी के अधिकार को इसने 20 वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया |
1813 का चार्टर अधिनियम -
इसके द्वारा पहली बार भारतीयों की शिक्षा पर प्रतिवर्ष एक लाख रुपए खर्च करने का उपबंध किया गया और कंपनी के भारतीय व्यापार के एकाधिकार को खत्म कर दिया गया यद्यपि चीन के साथ तथा चाय के व्यापार पर एकाधिकार बना रहा इंग्लिश मिशनरियों को भारत में कार्य करने की अनुमति दी गई और 20 वर्षों हेतु पुनः इन क्षेत्रों का राजस्व कंपनी को सौंप दिया गया।
1833 का चार्टर एक्ट -
इसके द्वारा बंगाल गवर्नर जनरल को संपूर्ण भारत का गवर्नर जनरल बना दिया गया | लॉर्ड विलियम बेंटिक भारत के प्रथम गवर्नर जनरल थे अब कंपनी के समस्त व्यापारिक कार्य को समाप्त कर दिया गया आगे अब उसे भविष्य में मात्र राजनीतिक कार्य ही करने थे | गवर्नर जनरल की परिषद में अब एक कानूनी सदस्य(चौथे सदस्य) के रूप में मैकाले को नियुक्त किया गया इस अधिनियम के तहत सपरिषद गवर्नर जनरल पूरे भारत हेतु कानून बन सकता था इस अधिनियम में नियुक्ति के लिए योग्यता संबंधी मानदंड अपनाकर भेदभाव को समाप्त कर दिया गया | इस अधिनियम ने भारत वासियों को अपने देश में प्रशासन में कुछ हिस्सा लेना संभव बनाया |
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📍कबड्डी विश्व कप 2025
📍6th एशियाई महिला कबड्डी चैंपियनशिप 2025
📍पांचवा खेलो इंडिया शीतकालीन खेल 2025
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📍6th एशियाई महिला कबड्डी चैंपियनशिप 2025
📍पांचवा खेलो इंडिया शीतकालीन खेल 2025
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