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🎯लाउडस्पीकर का उपयोग किसी धर्म का जरूरी हिस्सा नहीं

डॉ. महेश विजय बेडेकर बनाम महाराष्ट्र, 2018 के
मामले में मुम्बई हाइकोर्ट ने निर्णय दिया कि लाउडस्पीकर का उपयोग करना संविधान के अनुच्छेद 25 या 19 (1) (a) के तहत किसी धर्म का आवश्यक आचरण नहीं है।
मुम्बई हाइकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के चर्च ऑफ गॉड केस (2000) के निर्णय का हवाला देकर कहा कि लाउडस्पीकर का उपयोग मौलिक अधिकारों के दायरे में नहीं है।

Currentaffairs
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Forwarded from Secure PCS
तटरेखा की पुनर्गणना गई :
Recalculated Coastline


▪️संदर्भ: गृह मंत्रालय के अनुसार, भारत की तटरेखा पांच दशकों में लगभग आधी होकर 1970 में 7,516 किमी से बढ़कर 2023-24 में 11,098 किमी हो गई है।

भारत की पुनर्गणना की गई तटरेखा के बारे में:

पुरानी बनाम नई लंबाई: समुद्र तट की लंबाई 7,516 किमी (1970) से बढ़कर 11,098 किमी (2023-24) हो गई, जो 47.6% की वृद्धि को दर्शाता है।

संशोधित मापदंड: अद्यतन कार्यप्रणाली में खाड़ियों, मुहाना, प्रवेशद्वार और अन्य भू-आकृति विज्ञान संबंधी विशेषताओं को शामिल किया गया है, जो पुराने सीधी-रेखा मापन दृष्टिकोण का स्थान ले रहा है।

अग्रणी राज्य:

गुजरात: 1,214 किमी से बढ़कर 2,340 किमी हुआ, सबसे अधिक योगदान।

पश्चिम बंगाल: 357% की उल्लेखनीय वृद्धि, 157 किमी से 721 किमी तक।

तमिलनाडु: संशोधित कर 1,068 किमी किया गया, जो आंध्र प्रदेश के 1,053 किमी से आगे निकल गया।

पुडुचेरी: 4.9 किमी (10.4%) की कमी, एक दुर्लभ संकुचन को दर्शाता है।

सबसे छोटी वृद्धि: केरल, केवल 30 किमी (5%) की वृद्धि के साथ।

मंत्रालय: पुनर्गणना राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा समन्वयक के मार्गदर्शन में गृह मंत्रालय (एमएचए) के तहत की गई थी।

Methodology Update:


राष्ट्रीय जल सर्वेक्षण कार्यालय और भारतीय सर्वेक्षण विभाग के आंकड़ों के आधार पर।

सटीक माप के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों का उपयोग करता है, जो समुद्र तट की गतिशील समझ प्रदान करता है।

#GEOGRAPHY
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Forwarded from Secure PCS (@UppscZone)
🎯गृह मंत्रालयः भारत की तटरेखा पुनर्गणना में 53 वर्षों में 48% बढ़ी।।

»तटीय अभिवृद्धि और क्षरण को मापने के लिए नए संदर्भों पर आधारित गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की तटरेखा पांच दशकों में 1970 में 7,516 किमी से बढ़कर 2023-24 में 11,098 किमी हो गई है, जो नई माप पद्धतियों के कारण संभव हो पाया है। गुजरात और बंगाल में सबसे अधिक वृद्धि देखी गई,जबकि पुड्डुचेरी की तटरेखा 10.4% सिकुड़ गई।

»गुजरात की पुनर्गणना की गई तटरेखा ने इस वृद्धि में सबसे अधिक योगदान दिया है, जो 1970 में 1,214 किमी से बढ़कर पिछले 53 वर्षों में लगभग दोगुनी होकर 2,340 किमी हो गयी है।

»इस अवधि के दौरान प्रतिशत के लिहाज से प. बंगाल में सबसे अधिक प्रतिशत वृद्धि हुई -157 किमी से 721 किमी तक 357% की वृद्धि।

»गुजरात ने सबसे लम्बी तटरेखा वाले राज्य के रूप में अपना स्थान बरकरार रखा है, नये सर्वेक्षण के आधार पर तमिलनाडु ने 1,068 किमी(पूर्व में 906 किमी) की संशोधित लंबाई के साथ आंध्र प्रदेश (1,053किमी) को पीछे छोड़ दिया है।
»केरल ने सबसे कम वृद्धि दर्ज की, जिसने अपने समुद्र तट में 30 किमी (5%)की वृद्धि की।

#Geography
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A. HC में सेवानिवृत्त जजों की नियुक्ति से संबंधित अनुच्छेद 224 (A) को 15वें संविधान संशोधन 1963 द्वारा जोड़ा गया।

B. उच्च न्यायालय में सेवानिवृत्त जजों की पुनः नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संबंधित राज्य के मुख्य न्यायाधीश की पूर्वासहमति से की जाती है।
Anonymous Quiz
6%
केवल कथन B सही हैं।
81%
कथन A और B दोनों सही हैं।
6%
केवल कथन A सही हैं।
6%
कथन A और B दोनों असत्य हैं।‌‌
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A. HC में सेवानिवृत्त जजों की नियुक्ति से संबंधित अनुच्छेद 224 (A) को 15वें संविधान संशोधन 1963 द्वारा जोड़ा गया।

B. उच्च न्यायालय में सेवानिवृत्त जजों की पुनः नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संबंधित राज्य के मुख्य न्यायाधीश की पूर्वासहमति से की जाती है।
अनुच्छेद 224 (A) उच्च न्यायालयों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति

यह अनुच्छेद 15वें संविधान संशोधन 1963 द्वारा जोड़ा गया।
उच्च न्यायालयों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की पुनः नियुक्ति संबंधित राज्य के मुख्य न्यायाधीश द्वारा की जाती है, राष्ट्रपति की पूर्वासहमति से।
सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की पुनः नियुक्ति होने पर उन्हें, राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित वेतन-भते. सभी शक्तियां और विशेषाधिकार प्राप्त होते है लेकिन उन्हें उस न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नहीं समझा जाता है।
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भारतीय संविधान के भाग-6 तथा अध्याय-5 में अनुच्छेद 214 से अनुच्छेद 231 में उच्च न्यायालय की संरचना तथा कार्य का वर्णन किया गया है।

राज्यों के उच्च न्यायालय से संबंधित अनुच्छेदों का संक्षिप्त विवरण निम्नानुसार है-
अनु. 214 :

राज्यों के लिए उच्च न्यायालय।
अनु. 215 :

उच्च न्यायालयों का अभिलेख न्यायालय होना।
अनु. 216 :

उच्च न्यायालयों का गठन।
अनु. 217 :

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति और उसके पद की शर्तें।
अनु. 218 :

उच्चतम न्यायालय से संबंधित कुछ उपबंधों का उच्च न्यायालयों पर लागू होना।
अनु. 219 :

उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान।
अनु. 220 :

स्थायी न्यायाधीश रहने के पश्चात् विधि व्यवसाय पर निबंधन ।
अनु. 221 :

न्यायाधीशों के वेतन।
अनु. 222 :

किसी न्यायाधीश का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय का अंतरण।
अनु. 223 :

कार्यकारी मुख्य न्यायमूर्ति की नियुक्ति।
अनु. 224 :

अपर और कार्यकारी न्यायाधीशों की नियुक्ति ।
अनु. 224क :

उच्च न्यायालयों की बैठकों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति।
अनु. 225 :

विद्यमान उच्च न्यायालयों की अधिकारिता (उच्च न्यायालयों का क्षेत्राधिकार) ।
अनु. 226 :

कतिपय याचिकाएँ जारी करने की उच्च न्यायालय की शक्ति।
अनु. 227 :

सभी न्यायालयों के अधीक्षण की उच्च न्यायालय की शक्ति।
अनु. 228 :

कुछ मामलों में उच्च न्यायालय को अंतरण।
अनु. 229 :

उच्च न्यायालयों के अधिकारी और सेवक तथा व्यय।
अनु. 230 :

उच्च न्यायालयों की अधिकारिता का संघ राज्य क्षेत्रों पर विस्तार।
अनु. 231 :

दो या अधिक राज्यों के लिए एक ही उच्च न्यायालय की स्थापना।


    #articles #Polity #Imp
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हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने आदेश दिया कि प्रत्येक उच्च न्यायालय अनुच्छेद 224A के तहत 2 से 5 तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति कर सकता है, लेकिन स्वीकृत संख्या के कितने प्रतिशत से अधिक नहीं हो?

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22%
10%
26%
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5%
12%‌‌
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🎯तदर्थ न्यायाधीश


सुप्रीम कोर्ट ने लंबित आपराधिक मामलों के निपटान का हवाला देते हुए उच्च न्यायालयों में एड हॉक न्यायाधीशों की नियुक्ति की अपनी पूर्व शर्त में ढील दी


भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना तथा न्यायमूर्ति बी आर गवई एवं सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि अब उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सेवानिवृत न्यायाधीशों की तदर्थ न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति की सिफारिश कर सकते है।
इसके तहत नियुक्त तदर्थ न्यायाधीश मौजूदा न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ में शामिल होकर केवल लंबित आपराधिक अपीलों पर सुनवाई कर सकते है।
इससे पूर्व तदर्थ न्यायाधीश किसी भी प्रकार की अपील की सुनवाई कर सकते थे एवं मामलों से निपटने के लिए अलग-अलग बेंच का हिस्सा हो सकते थे।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने आदेश दिया कि प्रत्येक उच्च न्यायालय अनुच्छेद 224A के तहत 2 से 5 तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति कर सकता है, लेकिन स्वीकृत संख्या के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हो।
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अनुच्छेद 224 के तहत जिस प्रकार उच्च न्यायालय में अपर न्यायाधीश नियुक्त होते है उसी प्रकार किस अनुच्छेद के तहत उच्चतम न्यायालय में तदर्थ न्यायाधीश नियुक्त होते है?
Anonymous Quiz
18%
अनुच्छेद 129
21%
अनुच्छेद 131
25%
अनुच्छेद 126‌‌
37%
अनुच्छेद 127
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निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प सुमेलित नहीं हैं

तद्भव______ तत्सम।
Anonymous Quiz
6%
यहाँ –अत्र
16%
यह– एष
7%
यों– एवम्
70%
सभी सुमेलित हैं।
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निम्नलिखित में से कौन सा कथन सुमेलित नहीं है?

तद्भव__ तत्सम
Anonymous Quiz
16%
भावज भ्रातृजाया
7%
भूख बुभुक्षा
34%
मोती - मृत्तिका।
4%
भगत - भक्त।
39%
सभी सुमेलित हैं।
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निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प सुमेलित नहीं हैं?

तद्भव __तत्सम
Anonymous Quiz
7%
मेढ़क–मण्डूक
14%
महँगा–महार्घ
9%
मूँछ–श्मश्रु
70%
उपर्युक्त सभी सुमेलित हैं।
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निम्नलिखित में से कौन सा कथन सुमेलित नहीं है?

तत्सम ___तद्भव
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6%
भाटक भाड़ा
16%
भूपाल भुवाल
7%
भिक्षा भीख
71%
सभी सुमेलित हैं।
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निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प सुमेलित नहीं है?

तद्भव_____ तत्सम
Anonymous Quiz
9%
हाट हट्ट
55%
हँसी हस्ती।
22%
होली होलिका
14%
हिरन हरिण
🔥4😇1
निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प सुमेलित नहीं है?

तद्भव ___तत्सम
Anonymous Quiz
38%
हिय हरित
22%
हिलना हिल्लन
13%
हरड़ हरीतकी
28%
हरख हर्ष
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