अनुच्छेद 75 पूरी तरह से मंत्रिपरिषद और भारत के प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी, शपथ, स्थिति, आवंटन और वेतन और अंत में कर्तव्यों से संबंधित है।
जिला योजना समिति संवैधानिक निकाय नहीं है, बल्कि यह एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) है जिसे 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के तहत अनुच्छेद 243ZD में प्रावधानित किया गया है। यानी यह संविधान में उल्लेखित है, पर इसे संवैधानिक निकाय नहीं माना जाता जैसे कि चुनाव आयोग या सुप्रीम कोर्ट।
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इनमे से कौनसा सही सुमेलित नही है?
(वाद - निर्णय)
1. केशवानंद भारती केस - प्रस्तावना संविधान का एक भाग है। 2. गोलकनाथ - अनुच्छेद 368 के तहत मूल अधिकारो मे संशोधन किया जा सकता है। 3. शंकरी प्रसाद - अनुच्छेद 13 की कोई बात संविधान संशोधन पर लागू नही होती।
(वाद - निर्णय)
1. केशवानंद भारती केस - प्रस्तावना संविधान का एक भाग है। 2. गोलकनाथ - अनुच्छेद 368 के तहत मूल अधिकारो मे संशोधन किया जा सकता है। 3. शंकरी प्रसाद - अनुच्छेद 13 की कोई बात संविधान संशोधन पर लागू नही होती।
गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य (1967):
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि संसद को मौलिक अधिकारों में संशोधन करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि मौलिक अधिकार संविधान का मूल हिस्सा हैं और उन्हें संशोधित नहीं किया जा सकता।
बाद में, केशवानंद भारती मामला (1973) में यह निर्णय आंशिक रूप से पलट दिया गया, और कहा गया कि संसद संविधान में संशोधन कर सकती है लेकिन "संविधान की मूल संरचना" को नहीं बदल सकती।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि संसद को मौलिक अधिकारों में संशोधन करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि मौलिक अधिकार संविधान का मूल हिस्सा हैं और उन्हें संशोधित नहीं किया जा सकता।
बाद में, केशवानंद भारती मामला (1973) में यह निर्णय आंशिक रूप से पलट दिया गया, और कहा गया कि संसद संविधान में संशोधन कर सकती है लेकिन "संविधान की मूल संरचना" को नहीं बदल सकती।