Secure PCS
नामांकन और चुनाव जब, भारत सरकार अधिनियम 1935 के प्रावधानों के तहत, संयुक्त प्रांत में विधान परिषद अस्तित्व में आई, तो इसमें 60 सदस्य शामिल थे 26 जनवरी 1950 को, उत्तर प्रदेश राज्य की विधान परिषद (विधान परिषद) की कुल सदस्यता 60 से बढ़ाकर 72 कर दी गई। संविधान…
संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम 1956 के साथ, विधान परिषद की सीटे बढ़ाकर 108 कर दी गई।
https://t.me/uppsczone/14006
https://t.me/uppsczone/14006
👍5
Secure PCS
मूल कर्तव्य - अनुच्छेद 51 (क) Join 📌 @UppscZone
आज RPSC PRO में आया था
कहां से बनाओगे सवाल
आगे आगे आयोग चला पीछे पीछे हम चल पड़े😄😄😄
कहां से बनाओगे सवाल
आगे आगे आयोग चला पीछे पीछे हम चल पड़े😄😄😄
Secure PCS
https://t.me/uppsczone/7157
इसके ऊपर के सभी पॉलिटी के प्रश्न HPSC में पूछे गए थे जिनमें से एक दो प्रश्न इस चैनल पर सीधे नहीं मिले हैं
बाकी प्रश्न यहीं से छपा है 🥳
बाकी प्रश्न यहीं से छपा है 🥳
🔥4
RPSC PRO में भी polity के सभी प्रश्न यहां से हैं एक दो प्रश्न के अलावा
Secure PCS
🎯भारत पाक के बीच विभिन्न ऑपरेशन 🌀 1965 में पाकिस्तान द्वारा ऑपरेशन डेजर्ट हॉक , ऑपरेशन जिब्राल्टर और ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम तथा इनके जवाब में भारत द्वारा ऑपरेशन अब्लेज & ऑपरेशन रिडले शुरू किया गया। 🌀ऑपरेशन ‘ट्राइडेंट’ और ऑपरेशन पायथन के तहत भारतीय नौसेना ने…
🌀ऑपरेशन बंदर (2019) भारतीय वायुसेना ने जम्मू-कश्मीर के पुलवामा हमले के जवाब में पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शिविर पर हवाई हमला किया।
https://t.me/uppsczone/15172
https://t.me/uppsczone/15172
एक भी एग्जाम बच के नहीं जा पा रहे हैं क्योंकि यहां के एडमिन ने भी चैनल में S 400 लगा दिए हैं जो डिटेक्ट करके सभी प्रश्न को निपटा दे रहा है।
बने रहिए हमारे साथ 🎯♥️
【Join 📌 @UppscZone】
बने रहिए हमारे साथ 🎯♥️
【Join 📌 @UppscZone】
🔥4
चीन अब अंतरिक्ष में बनाएगा सुपर कंप्यूटर, सेटेलाइट लॉन्च।
#Prelims_Special #Current_affairs
【Join 🎯🌀 @UppscZone】
#Prelims_Special #Current_affairs
【Join 🎯🌀 @UppscZone】
👍4
Secure PCS
अनुच्छेद 96:- जब अध्यक्ष व उपाध्यक्ष को हटाने का संकल्प विचाराधीन हो तब उसका पीठासीन अधिकारी न होना। 96 (1) लोकसभा की किसी बैठक में, जब अध्यक्ष को उसके पद से हटाने का संकल्प विचाराधीन है तब अध्यक्ष, या जब उपाध्यक्ष को उसके पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन…
अनुच्छेद 97:-
राज्य सभा के सभापति और उपसभापति को तथा लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को, ऐसे वेतन और भत्तों का जो संसद, विधि द्वारा, नियत करे और जब तक इस निमित्त इस प्रकार उपबंध नहीं किया जाता है तब तक ऐसे वेतन और भत्तों का, जो दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं, संदाय किया जाएगा।
अनुच्छेद 98:-
98 (1) संसद के प्रत्येक सदन का पृथक् सचिवीय कर्मचारिवृंद होगा;
परन्तु इस खंड की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह संसद के दोनों सदनों के लिए सम्मिलित पदों के सृजन को निवारित करती है।
(2) संसद, विधि द्वारा, संसद के प्रत्येक सदन के सचिवीय कर्मचारिवृंद में भर्ती का और नियुक्त व्यक्तियों की सेवा की शर्तों का विनियमन कर सकेगी।
(3) जब तक संसद खंड (2) के अधीन उपबंध नहीं करती है तब तक राष्ट्रपति, यथास्थिति, लोकसभा अध्यक्ष या राज्य सभा के सभापति से परामर्श करने के पश्चात् लोकसभा के या राज्य सभा के सचिवीय कर्मचारिवृंद में भर्ती के और नियुक्त व्यक्तियों की सेवा की शर्तों के विनियमन के लिए नियम बना सकेगा और इस प्रकार बनाए गए नियम उक्त खंड के अधीन बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए प्रभावी होंगे।
अनुच्छेद 99:-
संसद के प्रत्येक सदन का प्रत्येक सदस्य अपना स्थान ग्रहण करने से पहले, राष्ट्रपति या उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त व्यक्ति के समक्ष, तीसरी अनुसूची के इस प्रयोजन के लिए दिए गए प्रारूप के अनुसार, शपथ लेगा या प्रतिज्ञान करेगा और उस पर अपने हस्ताक्षर करेगा।
अनुच्छेद 100:-
100 (1)इस संविधान में यथा अन्यथा उपबंधित के सिवाय, प्रत्येक सदन की बैठक में या सदनों की संयुक्त बैठक में सभी प्रश्नों का अवधारण, अध्यक्ष को अथवा सभापति या अध्यक्ष के रूप में कार्य करने वाले व्यक्ति को छोड़कर, उपस्थिति और मत देने वाले सदस्यों के बहुमत से किया जाएगा।
सभापति या अध्यक्ष , अथवा उस रूप में कार्य करने वाला व्यक्ति प्रथमतः मत नहीं देगा, किन्तु मत बराबर होने की दशा में उसका निर्णायक मत होगा और वह उसका प्रयोग करेगा।
(2) संसद के किसी सदन की सदस्यता में कोई रिक्ति होने पर भी, उस सदन को कार्य करने की शक्ति होगी और यदि बाद में यह पता चलता है कि कोई व्यक्ति, जो ऐसा करने का हकदार नहीं था, कार्यवाहियों में उपस्थित रहा है या उसने मत दिया है या अन्यथा भाग लिया है तो भी संसद की कोई कार्यवाही विधिमान्य होगी।
(3) जब तक संसद विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे तब तक संसद के प्रत्येक सदन का अधिवेशन गठित करने के लिए गणपूर्ति सदन के सदस्यों की कुल संख्या का दसवां भाग होगी।
(4) यदि सदन के अधिवेशन में किसी समय गणपूर्ति नहीं है तो सभापति या अध्यक्ष अथवा उस रूप में कार्य करने वाले व्यक्ति का यह कर्तव्य होगा कि वह सदन को स्थगित कर दे या अधिवेशन को तब तक के लिए निलंबित कर दे जब तक गणपूर्ति नहीं हो जाती है।
#ARTICLES #POLITY #PRELIMS
【Join 📌 @UppscZone】
सभापति व उपसभापति तथा अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के वेतन व भत्ते।
राज्य सभा के सभापति और उपसभापति को तथा लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को, ऐसे वेतन और भत्तों का जो संसद, विधि द्वारा, नियत करे और जब तक इस निमित्त इस प्रकार उपबंध नहीं किया जाता है तब तक ऐसे वेतन और भत्तों का, जो दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं, संदाय किया जाएगा।
अनुच्छेद 98:-
संसद का सचिवालय।
98 (1) संसद के प्रत्येक सदन का पृथक् सचिवीय कर्मचारिवृंद होगा;
परन्तु इस खंड की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह संसद के दोनों सदनों के लिए सम्मिलित पदों के सृजन को निवारित करती है।
(2) संसद, विधि द्वारा, संसद के प्रत्येक सदन के सचिवीय कर्मचारिवृंद में भर्ती का और नियुक्त व्यक्तियों की सेवा की शर्तों का विनियमन कर सकेगी।
(3) जब तक संसद खंड (2) के अधीन उपबंध नहीं करती है तब तक राष्ट्रपति, यथास्थिति, लोकसभा अध्यक्ष या राज्य सभा के सभापति से परामर्श करने के पश्चात् लोकसभा के या राज्य सभा के सचिवीय कर्मचारिवृंद में भर्ती के और नियुक्त व्यक्तियों की सेवा की शर्तों के विनियमन के लिए नियम बना सकेगा और इस प्रकार बनाए गए नियम उक्त खंड के अधीन बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए प्रभावी होंगे।
अनुच्छेद 99:-
सदस्यों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान।
संसद के प्रत्येक सदन का प्रत्येक सदस्य अपना स्थान ग्रहण करने से पहले, राष्ट्रपति या उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त व्यक्ति के समक्ष, तीसरी अनुसूची के इस प्रयोजन के लिए दिए गए प्रारूप के अनुसार, शपथ लेगा या प्रतिज्ञान करेगा और उस पर अपने हस्ताक्षर करेगा।
अनुच्छेद 100:-
सदनों में मतदान, रिक्तियों के होते हुवे भी सदनों के कार्य करने की शक्ति व गणपूर्ति।
100 (1)इस संविधान में यथा अन्यथा उपबंधित के सिवाय, प्रत्येक सदन की बैठक में या सदनों की संयुक्त बैठक में सभी प्रश्नों का अवधारण, अध्यक्ष को अथवा सभापति या अध्यक्ष के रूप में कार्य करने वाले व्यक्ति को छोड़कर, उपस्थिति और मत देने वाले सदस्यों के बहुमत से किया जाएगा।
सभापति या अध्यक्ष , अथवा उस रूप में कार्य करने वाला व्यक्ति प्रथमतः मत नहीं देगा, किन्तु मत बराबर होने की दशा में उसका निर्णायक मत होगा और वह उसका प्रयोग करेगा।
(2) संसद के किसी सदन की सदस्यता में कोई रिक्ति होने पर भी, उस सदन को कार्य करने की शक्ति होगी और यदि बाद में यह पता चलता है कि कोई व्यक्ति, जो ऐसा करने का हकदार नहीं था, कार्यवाहियों में उपस्थित रहा है या उसने मत दिया है या अन्यथा भाग लिया है तो भी संसद की कोई कार्यवाही विधिमान्य होगी।
(3) जब तक संसद विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे तब तक संसद के प्रत्येक सदन का अधिवेशन गठित करने के लिए गणपूर्ति सदन के सदस्यों की कुल संख्या का दसवां भाग होगी।
(4) यदि सदन के अधिवेशन में किसी समय गणपूर्ति नहीं है तो सभापति या अध्यक्ष अथवा उस रूप में कार्य करने वाले व्यक्ति का यह कर्तव्य होगा कि वह सदन को स्थगित कर दे या अधिवेशन को तब तक के लिए निलंबित कर दे जब तक गणपूर्ति नहीं हो जाती है।
#ARTICLES #POLITY #PRELIMS
【Join 📌 @UppscZone】
👍1