Q.31 सर्वप्रथम किस समिति की अनुशंसा पर पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा देने हेतु विधेयक तैयार किए थे-
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6%
गॉड गिल समिति
20%
पीके थूगन समिति 1989
46%
Ml सिंघवी समिति
29%
अशोक मेहता समिति
व्याख्या
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राजीव गांधी की सरकार द्वारा 1989 में पंचायती राज संस्थाओं और नगर पालिकाओं को संवैधानिक दर्जा देने हेतु क्रमशः 64वा और 65 वा संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में लाया गया था, परन्तु यह विधेयक लोकसभा में पारित होने के बाद उनकी संघीय व्यवस्था में केंद्र सरकार के बढ़ते दखल के मुद्दे पर यह राज्यसभा में पारित नहीं हो पाया।
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अनुच्छेद 71:- राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से सम्बंधित विवादित विषय। 71(1) राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से उत्पन्न या संसक्त सभी शंकाओं और विवादों की जांच और विनिश्चय उच्चतम न्यायालय द्वारा किया जाएगा और उसका विनिश्चय अंतिम होगा। (2) यदि…
अनुच्छेद 72:-
72(1) राष्ट्रपति को, किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराए गए किसी व्यक्ति के दंड को क्षमा, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की अथवा दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण की--
(क) उन सभी मामलों में, जिनमें दंड या दंडादेश सेना न्यायालय ने दिया है,
(ख) उन सभी मामलों में, जिनमें दंड या दंडादेश ऐसे विषय संबंधी किसी विधि के विरुद्ध अपराध के लिए दिया गया है जिस विषय तक संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार है,
(ग) उन सभी मामलों में, जिनमें दंडादेश, मृत्यु दंडादेश है, शक्ति होगी।
(2) खंड (1) के उपखंड (क) की कोई बात संघ के सशस्त्र बलों के किसी आफिसर की सेना न्यायालय द्वारा पारित दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण की विधि द्वारा प्रदत्त शक्ति पर प्रभाव नहीं डालेगी।
(3) खंड (1) के उपखंड (ग) की कोई बात तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन किसी राज्य के राज्यपाल* द्वारा प्रयोक्तव्य मृत्यु दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण की शक्ति पर प्रभाव नहीं डालेगी।
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राष्ट्रपति की क्षमादान आदि की शक्ति।
72(1) राष्ट्रपति को, किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराए गए किसी व्यक्ति के दंड को क्षमा, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की अथवा दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण की--
(क) उन सभी मामलों में, जिनमें दंड या दंडादेश सेना न्यायालय ने दिया है,
(ख) उन सभी मामलों में, जिनमें दंड या दंडादेश ऐसे विषय संबंधी किसी विधि के विरुद्ध अपराध के लिए दिया गया है जिस विषय तक संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार है,
(ग) उन सभी मामलों में, जिनमें दंडादेश, मृत्यु दंडादेश है, शक्ति होगी।
(2) खंड (1) के उपखंड (क) की कोई बात संघ के सशस्त्र बलों के किसी आफिसर की सेना न्यायालय द्वारा पारित दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण की विधि द्वारा प्रदत्त शक्ति पर प्रभाव नहीं डालेगी।
(3) खंड (1) के उपखंड (ग) की कोई बात तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन किसी राज्य के राज्यपाल* द्वारा प्रयोक्तव्य मृत्यु दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण की शक्ति पर प्रभाव नहीं डालेगी।
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अनुच्छेद 72:- राष्ट्रपति की क्षमादान आदि की शक्ति। 72(1) राष्ट्रपति को, किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराए गए किसी व्यक्ति के दंड को क्षमा, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की अथवा दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण की-- (क) उन सभी मामलों में, जिनमें…
अनुच्छेद 73:-
73(1) इस संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुए, संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार--
(क) जिन विषयों के संबंध में संसद को विधि बनाने की शक्ति है उन तक, और
(ख) किसी संधि या करार के आधार पर भारत सरकार द्वारा प्रयोक्तव्य अधिकारों, प्राधिकार और के प्रयोग तक होगा;
परंतु इस संविधान में या संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि में अभिव्यक्त रूप से यथा उपबंधित के सिवाय, उपखंड (क) में निर्दिष्ट कार्यपालिका शक्ति का विस्तार किसी राज्य में ऐसे विषयों तक नहीं होगा जिनके संबंध में उस राज्य के विधान-मंडल को भी विधि बनाने की शक्ति है।
(2) जब तक संसद अन्यथा उपबंध न करे तब तक इस अनुच्छेद में किसी बात के होते हुए भी, कोई राज्य और राज्य का कोई अधिकारी या प्राधिकारी उन विषयों में, जिनके संबंध में संसद को उस राज्य के लिए विधि बनाने की शक्ति है, ऐसी कार्यपालिका शक्ति का या कृत्यों का प्रयोग कर सकेगा जिनका प्रयोग वह राज्य या उसका अधिकारी या प्राधिकारी इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले कर सकता था।
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संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार।
73(1) इस संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुए, संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार--
(क) जिन विषयों के संबंध में संसद को विधि बनाने की शक्ति है उन तक, और
(ख) किसी संधि या करार के आधार पर भारत सरकार द्वारा प्रयोक्तव्य अधिकारों, प्राधिकार और के प्रयोग तक होगा;
परंतु इस संविधान में या संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि में अभिव्यक्त रूप से यथा उपबंधित के सिवाय, उपखंड (क) में निर्दिष्ट कार्यपालिका शक्ति का विस्तार किसी राज्य में ऐसे विषयों तक नहीं होगा जिनके संबंध में उस राज्य के विधान-मंडल को भी विधि बनाने की शक्ति है।
(2) जब तक संसद अन्यथा उपबंध न करे तब तक इस अनुच्छेद में किसी बात के होते हुए भी, कोई राज्य और राज्य का कोई अधिकारी या प्राधिकारी उन विषयों में, जिनके संबंध में संसद को उस राज्य के लिए विधि बनाने की शक्ति है, ऐसी कार्यपालिका शक्ति का या कृत्यों का प्रयोग कर सकेगा जिनका प्रयोग वह राज्य या उसका अधिकारी या प्राधिकारी इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले कर सकता था।
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कल मूल अधिकार(PYQ) रिवीजन चलेगा 【Join 📌 @UppscZone】
📚मूल अधिकार:-
🎯भाग:-3 {अनुच्छेद12-35}
🎯संख्या:- मूल संविधान में 7
🎯वर्तमान में संख्या:- 6 [संपत्ति का मूल अधिकार 44 वें संविधान संशोधन 1978 द्वारा मौलिक अधिकार के रूप में समाप्त] (अनुच्छेद 31)
🎯प्रकृति:- नकारात्मक।(व्यक्तिवादी)
🎯प्रभावित:- अमेरिका के संविधान से।
🎯संशोधन:- संसद द्वारा अनुच्छेद 368 के तहत बिना मूल ढांचे में परिवर्तन किए।
🎯संरक्षण या सुरक्षा:-
➖सर्वोच्च न्यायालय अनुच्छेद 32
➖उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226
🌀समानता का अधिकार:-
[अनुच्छेद 14-18]
इसमें कानून के समक्ष समानता, धर्म, वंश, जाति लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध तथा रोज़गार के संबंध में समान अवसर शामिल है।
🌀स्वतंत्रता का अधिकार:-
[अनुच्छेद 19-22]
भाषा और विचार प्रकट करने की स्वतंत्रता का अधिकार, एकत्र होने संघ या यूनियन बनाने, आने-जाने, निवास करने और कोई भी जीविकोपार्जन एवं व्यवसाय करने की स्वतंत्रता का अधिकार (इनमें से कुछ अधिकार राज्य की सुरक्षा, विदेशों के साथ भिन्नतापूर्ण संबंध, सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता और नैतिकता के तहत दिये जाते हैं)।
🌀शोषण के विरुद्ध अधिकार:-
[अनुच्छेद 23-24]
इसमें बेगार, बाल श्रम और मनुष्यों के व्यापार का निषेध किया गया है।
🌀धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार:
[अनुच्छेद 25-28]
आस्था एवं अंत:करण की स्वतंत्रता, किसी भी धर्म का अनुयायी बनना, उस पर विश्वास करना एवं धर्म का प्रचार करना इसमें शामिल हैं।
🌀सांस्कृतिक तथा शिक्षा संबंधी अधिकार:
[अनुच्छेद 29-30]
किसी भी वर्ग के नागरिकों को अपनी संस्कृति सुरक्षित रखने, भाषा या लिपि बचाए रखने और अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद की शैक्षिक संस्थाएँ चलाने का अधिकार।
🌀संवैधानिक उपचारों का अधिकार:
[अनुच्छेद 32]
मौलिक अधिकार के प्रवर्तन के लिये संवैधानिक उपचार का अधिकार।
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🎯भाग:-3 {अनुच्छेद12-35}
🎯संख्या:- मूल संविधान में 7
🎯वर्तमान में संख्या:- 6 [संपत्ति का मूल अधिकार 44 वें संविधान संशोधन 1978 द्वारा मौलिक अधिकार के रूप में समाप्त] (अनुच्छेद 31)
🎯प्रकृति:- नकारात्मक।(व्यक्तिवादी)
🎯प्रभावित:- अमेरिका के संविधान से।
🎯संशोधन:- संसद द्वारा अनुच्छेद 368 के तहत बिना मूल ढांचे में परिवर्तन किए।
🎯संरक्षण या सुरक्षा:-
➖सर्वोच्च न्यायालय अनुच्छेद 32
➖उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226
🌟छ्ह मौलिक अधिकार:-
🌀समानता का अधिकार:-
[अनुच्छेद 14-18]
इसमें कानून के समक्ष समानता, धर्म, वंश, जाति लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध तथा रोज़गार के संबंध में समान अवसर शामिल है।
🌀स्वतंत्रता का अधिकार:-
[अनुच्छेद 19-22]
भाषा और विचार प्रकट करने की स्वतंत्रता का अधिकार, एकत्र होने संघ या यूनियन बनाने, आने-जाने, निवास करने और कोई भी जीविकोपार्जन एवं व्यवसाय करने की स्वतंत्रता का अधिकार (इनमें से कुछ अधिकार राज्य की सुरक्षा, विदेशों के साथ भिन्नतापूर्ण संबंध, सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता और नैतिकता के तहत दिये जाते हैं)।
🌀शोषण के विरुद्ध अधिकार:-
[अनुच्छेद 23-24]
इसमें बेगार, बाल श्रम और मनुष्यों के व्यापार का निषेध किया गया है।
🌀धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार:
[अनुच्छेद 25-28]
आस्था एवं अंत:करण की स्वतंत्रता, किसी भी धर्म का अनुयायी बनना, उस पर विश्वास करना एवं धर्म का प्रचार करना इसमें शामिल हैं।
🌀सांस्कृतिक तथा शिक्षा संबंधी अधिकार:
[अनुच्छेद 29-30]
किसी भी वर्ग के नागरिकों को अपनी संस्कृति सुरक्षित रखने, भाषा या लिपि बचाए रखने और अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद की शैक्षिक संस्थाएँ चलाने का अधिकार।
🌀संवैधानिक उपचारों का अधिकार:
[अनुच्छेद 32]
मौलिक अधिकार के प्रवर्तन के लिये संवैधानिक उपचार का अधिकार।
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मूल अधिकार के सम्बंध में असत्य हैं -
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20%
न्याय अयोग्य
24%
न्यायालय द्वारा परिवर्तनीय
24%
प्रकृति मूलतः नकारात्मक
33%
इन पर प्रतिबन्ध केवल आपात परिस्थितियों में
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राष्ट्रीय आपातकाल के समय राष्ट्रपति अनुच्छेद ... को छोड़कर अन्य मूलअधिकारों का निलंबन कर सकता हैं -
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18%
अनुच्छेद 19, 20
56%
अनुच्छेद 20, 21
9%
अनुच्छेद 21, 22
18%
अनुच्छेद 19, 21
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अनुच्छेद 32 के तहत ,अनुच्छेद 20,21 के निलंबन के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं।
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मूल अधिकार होते हैं -
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22%
केवल नकारात्मक
9%
केवल सकारात्मक
58%
नकारात्मक और सकारात्मक दोनों
11%
स्थायी
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मूल अधिकार के सम्बंध में असत्य हैं -
Anonymous Quiz
11%
सीमित होते हैं
33%
अस्थाई होते हैं
16%
अधित्याग किया जा सकता
40%
व्यक्ति मूल अधिकारों का स्वेच्छा से त्याग नहीं कर सकता
निम्न में से कौन सा वाद मूल अधिकारों के अधित्याग के सिद्धांत से संबंधित हैं -
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4%
एम नागराज वाद
57%
ओल्गा टेलिस वाद
13%
सज्जन सिंह वाद
26%
शंकरी प्रसाद वाद
भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में न्यायिक पुनरावलोकन का उल्लेख किया गया है -
Anonymous Quiz
26%
अनुच्छेद 21
39%
अनुच्छेद 13
9%
अनुच्छेद 14
26%
कहीं नहीं
अनुच्छेद 16(2) में जिन आधारों पर विभेद नही किया जाएगा उनमें सम्मिलित नहीं हैं
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5%
धर्म
24%
मूलवंश
10%
जाति
10%
लिंग
52%
वर्ग
किस वाद में पांच न्यायधीशों की पीठ ने कहा कि' शिक्षा प्रदान करना एक व्यवसाय या व्यापार नही माना जा सकता?'
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16%
P.A.इनामदार केस
42%
दिनेश कुमार केस
32%
मोहिनी जैन केस
11%
उन्नीकृष्णन केस