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व्याख्या:
सबसे पहले पंचायती राज व्यवस्था राजस्थान में स्थापित की गई (2 अक्टूबर 1959) जिसके बाद आंध्र प्रदेश ने इस प्रणाली को अपनाया।
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जिला परिषद की बैठक कितने समय में एक बार होना अनिवार्य है
Anonymous Quiz
14%
15 दिन में
17%
1 माह में
56%
3 माह में
14%
30 दिन में
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जिला परिषद की बैठक कितने समय में एक बार होना अनिवार्य है
Anonymous Quiz
0%
15 दिन में
3%
1 माह में
94%
3 माह में
3%
30 दिन में
जिला परिषद के सदस्य तथा उप जिलाप्रमुख अपना इस्तीफा जिला प्रमुख को देते हैं तो जिला प्रमुख अपना इस्तीफा किसे देता है
Anonymous Quiz
35%
उप जिला प्रमुख को
6%
बीडीओ को
55%
मुख्य कार्यकारी अधिकारी को
3%
संभागीय आयुक्त को
वार्ड पंच अपना इस्तीफा किसे देते हैं
Anonymous Quiz
9%
उपसरपंच
59%
सरपंच
18%
BDO को
15%
मुख्य कार्यकारी अधिकारी
उपसरपंच अपना इस्तीफा किसे देता है
Anonymous Quiz
37%
सरपंच
40%
BDO को
17%
प्रधान को
6%
जिला प्रमुख को
स्थानीय स्वशासन किस सूची का विषय है -
Anonymous Quiz
68%
राज्य सूची
27%
समवर्ती सूची
5%
संघ सूची
0%
इनमें से कोई नहीं
प्रशन 28. 73वें संविधान संशोधन 1992 के द्वारा पंचायतों को संवैधानिक दर्जा दिया गया, इस संशोधन द्वारा संविधान में जोड़ा गया था-
Anonymous Quiz
6%
भाग - 9
41%
अनुच्छेद 243-243(O)
13%
11वीं अनुसूची
39%
उपरोक्त सभी
भारत का पहला राज्य जहां पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव हुए -
Anonymous Quiz
75%
राजस्थान
20%
आंध्र प्रदेश
5%
महाराष्ट्र
0%
गुजरात
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व्याख्या
बलवंत राय मेहता समिति की सिफारिश पर सर्वप्रथम 2 अक्टूबर 1959 में नागौर जिले के बगदरी गांव (राजस्थान) से तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का शुभारंभ किया, और 11 अक्टूबर 1959 को आंध्र प्रदेश में पंचायती राज व्यवस्था को लागू किया गया, इस प्रकार पंचायती राज व्यवस्था को लागू करने वाला प्रथम राज्य राजस्थान तथा दूसरा आंध्र प्रदेश बना था, जबकि 11 अक्टूबर 1959 को आंध्रप्रदेश भारत का पहला राज्य बना जहां पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव हुए।
❤2
Q. 30 निम्न में से किस समिति ने त्रि- स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की जगह द्वि- स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की सिफारिश की थी -
Anonymous Quiz
34%
बलवंत राय मेहता समिति
57%
अशोक मेहता समिति
3%
Gvk राव समिति
6%
M l सिंघवी समिति
अशोक मेहता समिति की सिफारिशें -

मेहता समिति ने त्रि स्तरीय ढांचे की जगह द्वि स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की सिफारिश की थी।
जिसमें जिला स्तर पर जिला परिषद तथा इसके नीचे मंडल पंचायत का प्रावधान था।
मंडल पंचायत 15- 20 हजार जनसंख्या वाले ग्राम समूह से मिलकर बनने का प्रावधान था।
पंचायत चुनाव में सभी स्तरों पर राजनीतिक पार्टियों की आधिकारिक भागीदारी हो।
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति को जनसंख्या के अनुपात आरक्षण।
राज्य मंत्रीपरिषद में एक पंचायतराज मंत्री हो।
न्याय पंचायत की स्थापना की जाए।
केंद्र सरकार ने अशोक मेहता समिति की सिफारिशो को मंजूर नहीं किया परंतु तीन राज्यों कर्नाटक, आंध्र प्रदेश तथा पश्चिम बंगाल सरकार ने मेहता समिति की सिफारिशो को लागू किया था।
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Q.31 सर्वप्रथम किस समिति की अनुशंसा पर पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा देने हेतु विधेयक तैयार किए थे-
Anonymous Quiz
6%
गॉड गिल समिति
20%
पीके थूगन समिति 1989
46%
Ml सिंघवी समिति
29%
अशोक मेहता समिति
व्याख्या
राजीव गांधी की सरकार द्वारा 1989 में पंचायती राज संस्थाओं और नगर पालिकाओं को संवैधानिक दर्जा देने हेतु क्रमशः 64वा और 65 वा संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में लाया गया था, परन्तु यह विधेयक लोकसभा में पारित होने के बाद उनकी संघीय व्यवस्था में केंद्र सरकार के बढ़ते दखल के मुद्दे पर यह राज्यसभा में पारित नहीं हो पाया।

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कल मूल अधिकार(PYQ) रिवीजन चलेगा

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अनुच्छेद 71:- राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से सम्बंधित विवादित विषय। 71(1) राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से उत्पन्न या संसक्त सभी शंकाओं और विवादों की जांच और विनिश्चय उच्चतम न्यायालय द्वारा किया जाएगा और उसका विनिश्चय अंतिम होगा। (2) यदि…
अनुच्छेद 72:-

राष्ट्रपति की क्षमादान आदि की शक्ति।



72(1) राष्ट्रपति को, किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराए गए किसी व्यक्ति के दंड को क्षमा, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की अथवा दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण की--
(क) उन सभी मामलों में, जिनमें दंड या दंडादेश सेना न्यायालय ने दिया है,
(ख) उन सभी मामलों में, जिनमें दंड या दंडादेश ऐसे विषय संबंधी किसी विधि के विरुद्ध अपराध के लिए दिया गया है जिस विषय तक संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार है,
(ग) उन सभी मामलों में, जिनमें दंडादेश, मृत्यु दंडादेश है, शक्ति होगी।
(2) खंड (1) के उपखंड (क) की कोई बात संघ के सशस्त्र बलों के किसी आफिसर की सेना न्यायालय द्वारा पारित दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण की विधि द्वारा प्रदत्त शक्ति पर प्रभाव नहीं डालेगी।
(3) खंड (1) के उपखंड (ग) की कोई बात तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन किसी राज्य के राज्यपाल* द्वारा प्रयोक्तव्य मृत्यु दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण की शक्ति पर प्रभाव नहीं डालेगी।

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