उपर्युक्त अनुच्छेद को पढ़ने में महज एक मिनट लगेगा इसीलिए एक मिनट का समय निकालकर उसे जरूर पढ़ें और एक्जाम में अपने एक से दो अंक सुनिश्चित करें।
एक एक करके पढ़ेंगे तो धीरे धीरे सब याद हो जाएगा नहीं तो एक साथ पढ़ने पर कन्फ्यूजन और डिप्रेशन ही होगा।🎯💐
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571 लोग हो गए हैं इसीलिए 71 अनुच्छेद करा दिया गया है जैसे जैसे ये संख्या बढ़ती रहेगी वैसे वैसे और भी अनुच्छेद कराते रहेंगे और आप लोग दोहराते रहिएगा ठीक है 🎯♥️
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स्वराज पार्टी का गठन
🌀मोतीलाल नेहरू के साथ-साथ बंगाल के चितरंजन दास (1870-1925 ई.) ने भी इस पार्टी के नेतृत्व में भागीदारी की।
🌀1923 ई. में स्वराज पार्टी ने 'केन्द्रीय लेजिस्लेटिव असेंबली' का चुनाव लड़ा।
🌀पार्टी ने परिषद में रहकर सरकार विरोधी आन्दोलन के ज़रिये सरकारी नीति में बाधा डालने और ब्रिटिश शासन को पटरी से उतारने का लक्ष्य बनाया।
🌀हालाँकि गाँधीजी का असहयोग आन्दोलन ही कांग्रेस की प्राथमिक रणनीति बना रहा।
🌀कांग्रेस असहयोग आन्दोलन को वापस लेना नहीं चाहती थी, क्योंकि इस आन्दोलन को भारी सफलता प्राप्त हो रही थी।
🌀विश्वयुद्ध के बाद के सुधारों में वास्तविक आंशिक सहयोग उन कांग्रेस नेताओं की वैकल्पिक नीति बन गया, जो कम रूढ़िवादी हिन्दू या अधिक धर्मनिरपेक्ष विचाराधारा के थे।
🌀1923 ई. में 'केन्द्रीय लेजिस्लेटिव एसेंबली' में स्वराजियों ने 40 से अधिक सीटें जीतीं। इतनी सीटें जीतने पर भी उनकी संख्या कभी भी
🌀इतनी नहीं रही कि वे अंग्रेज़ों को ऐसा विधेयक पारित करने से रोक सकते, जिसे अंग्रेज़ आन्तरिक व्यवस्था बनाये रखने के लिए ज़रूरी समझते थे।
#History #Revision
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स्वराज पार्टी ब्रिटिश भारत में स्वतंत्रता संग्राम के समय बना एक प्रमुख राजनीतिक दल था। इस दल ने भारतीयों के लिये अधिक से अधिक स्व-शासन तथा राजनीतिक स्वतंत्रता की प्राप्ति के लिये कार्य किया था। स्वराज पार्टी को उत्तर भारत के सम्पन्न वकीलों में से एक मोतीलाल नेहरू (1861-1931 ई.) ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर से शुरू किया था। 'स्वराज' शब्द का वास्तविक अर्थ है- 'अपना स्वयं का शासन'।
🌀मोतीलाल नेहरू के साथ-साथ बंगाल के चितरंजन दास (1870-1925 ई.) ने भी इस पार्टी के नेतृत्व में भागीदारी की।
🌀1923 ई. में स्वराज पार्टी ने 'केन्द्रीय लेजिस्लेटिव असेंबली' का चुनाव लड़ा।
🌀पार्टी ने परिषद में रहकर सरकार विरोधी आन्दोलन के ज़रिये सरकारी नीति में बाधा डालने और ब्रिटिश शासन को पटरी से उतारने का लक्ष्य बनाया।
🌀हालाँकि गाँधीजी का असहयोग आन्दोलन ही कांग्रेस की प्राथमिक रणनीति बना रहा।
🌀कांग्रेस असहयोग आन्दोलन को वापस लेना नहीं चाहती थी, क्योंकि इस आन्दोलन को भारी सफलता प्राप्त हो रही थी।
🌀विश्वयुद्ध के बाद के सुधारों में वास्तविक आंशिक सहयोग उन कांग्रेस नेताओं की वैकल्पिक नीति बन गया, जो कम रूढ़िवादी हिन्दू या अधिक धर्मनिरपेक्ष विचाराधारा के थे।
🌀1923 ई. में 'केन्द्रीय लेजिस्लेटिव एसेंबली' में स्वराजियों ने 40 से अधिक सीटें जीतीं। इतनी सीटें जीतने पर भी उनकी संख्या कभी भी
🌀इतनी नहीं रही कि वे अंग्रेज़ों को ऐसा विधेयक पारित करने से रोक सकते, जिसे अंग्रेज़ आन्तरिक व्यवस्था बनाये रखने के लिए ज़रूरी समझते थे।
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साइमन कमीशन
🌀साइमन कमीशन की नियुक्ति ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने सर जॉन साइमन के नेतृत्व में की थी। इस कमीशन में सात सदस्य थे, जो सभी ब्रिटेन की संसद के मनोनीत सदस्य थे। यही कारण था कि इसे 'श्वेत कमीशन' कहा गया।
🌀साइमन कमीशन की घोषणा 8 नवम्बर, 1927 ई. को की गई। कमीशन को इस बात की जाँच करनी थी कि क्या भारत इस लायक़ हो गया है कि यहाँ लोगों को संवैधानिक अधिकार दिये जाएँ।
🌀इस कमीशन में किसी भी भारतीय को शामिल नहीं किया गया, जिस कारण इसका बहुत ही तीव्र विरोध हुआ।
🌀आयोग के विरोध के कारण लखनऊ में जवाहर लाल नेहरू, गोविन्द बल्लभ पंत आदि ने लाठियों खाई। लाहौर में लाठी की गहरी चोट के कारण लाला लाजपत राय की 1928 ई. में मृत्यु हो गई।
🌀मरने से पहले लाला लाजपत राय का यह कथन ऐतिहासिक सिद्ध हुआ कि "मेरे ऊपर जो लाठियों के प्रहार किये गए हैं, वही एक दिन ब्रिटिश साम्राज्य के ताबूत (शवपेटी) की आखिरी कील सावित होगा।"
🌀 'साइमन कमीशन ने 27 मई, 1930 ई. को अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसकी सिफारिशें इस प्रकार हैं-
#History #Revision
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🌀साइमन कमीशन की नियुक्ति ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने सर जॉन साइमन के नेतृत्व में की थी। इस कमीशन में सात सदस्य थे, जो सभी ब्रिटेन की संसद के मनोनीत सदस्य थे। यही कारण था कि इसे 'श्वेत कमीशन' कहा गया।
🌀साइमन कमीशन की घोषणा 8 नवम्बर, 1927 ई. को की गई। कमीशन को इस बात की जाँच करनी थी कि क्या भारत इस लायक़ हो गया है कि यहाँ लोगों को संवैधानिक अधिकार दिये जाएँ।
🌀इस कमीशन में किसी भी भारतीय को शामिल नहीं किया गया, जिस कारण इसका बहुत ही तीव्र विरोध हुआ।
🌀आयोग के विरोध के कारण लखनऊ में जवाहर लाल नेहरू, गोविन्द बल्लभ पंत आदि ने लाठियों खाई। लाहौर में लाठी की गहरी चोट के कारण लाला लाजपत राय की 1928 ई. में मृत्यु हो गई।
🌀मरने से पहले लाला लाजपत राय का यह कथन ऐतिहासिक सिद्ध हुआ कि "मेरे ऊपर जो लाठियों के प्रहार किये गए हैं, वही एक दिन ब्रिटिश साम्राज्य के ताबूत (शवपेटी) की आखिरी कील सावित होगा।"
🌀 'साइमन कमीशन ने 27 मई, 1930 ई. को अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसकी सिफारिशें इस प्रकार हैं-
»1919 ई. के 'भारत सरकार अधिनियम' के तहत लागू की गई द्वैध शासन व्यवस्था को समाप्त कर उत्तरदायी शासन की स्थाना हो।
»भारत के लिए संघीय संविधान होना चाहिए।
»केन्द्र में भारतीयों के लिए संघीय संविधान होना चाहिए।
»केन्द्र में कोई भी उत्तरदायित्व न प्रदान किया जाए।
»उच्च न्यायालय को भारत सरकार के नियंत्रण में कर दिया जाए।
»वर्मा (वर्तमान म्यांमार) को भारत से विलग किया जाए तथा उड़ीसा एवं सिंध को अलग प्रदेश का दर्जा दिया जाए।
»प्रान्तीय विधानमण्डलों में सदस्यों की संख्या को बढ़ाया जाए।
»गवर्नर व गवर्नर जनरल अल्पसंख्यक जातियों के हितों के प्रति विशेष ध्यान रखें।
»प्रत्येक 10 वर्ष बाद पुनरीक्षण के लिए एक संविधान आयोग की नियुक्ति की व्यवस्था को समाप्त कर दिया जाए तथा भारत के लिए एक ऐसा लचीला संविधान बनाया जाए जो स्वयं से विकसित हो।
#History #Revision
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Secure PCS
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना के स्थान पर न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई ने आधिकारिक रूप से भारत के मुख्य न्यायाधीश का पदभार संभाल लिया है।
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में न्यायमूर्ति गवई को शपथ दिलाई।
उनका कार्यकाल 23 नवम्बर 2025 तक रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सूर्यकांत, ए.जी. मसीह, पी.एस. नरसिम्हा, बी.वी. नागरत्ना, बेला त्रिवेदी आदि भी समारोह में उपस्थित थे।
भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में उत्तराधिकार संभालने के बाद, न्यायमूर्ति गवई अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले दूसरे मुख्य न्यायाधीश बने हैं।
इससे पहले न्यायमूर्ति के.जी. बालकृष्णन 2010 में सेवानिवृत्त हुए थे।
इसके साथ ही वे देश के पहले बौद्ध मुख्य न्यायाधीश भी बन गए हैं।
उन्हें 24 मई 2019 को बॉम्बे हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किया गया था।
#POLITY #PRELIMS
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CJI की नियुक्ति हेतु संवैधानिक प्रावधान
संविधान में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की प्रक्रिया को स्पष्ट नहीं किया गया है।
संविधान के अनुच्छेद 124(1) के अनुसार भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा जिसमें भारत के एक मुख्य न्यायाधीश सहित अन्य न्यायाधीश होंगे।
संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
इसके लिये राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय और राज्यों के उच्च न्यायालयों के ऐसे न्यायाधीशों से परामर्श कर सकता है जिन्हें राष्ट्रपति इस प्रयोजन के लिये आवश्यक समझे।
इस प्रकार स्पष्ट संवैधानिक प्रावधानों के अभाव में मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति प्रक्रिया में परंपरा का पालन किया जाता है।
क्या है परम्परा
परंपरानुसार निवर्तमान मुख्य न्यायाधीश अपने उत्तराधिकारी की सिफारिश वरिष्ठता के आधार पर करते हैं।
यह सिफारिश केंद्रीय कानून मंत्री के माध्यम से प्रधानमंत्री को भेजी जाती है, जो राष्ट्रपति को सलाह देते हैं।
वरिष्ठता को आयु के बजाए सेवा वर्षों (कार्यकाल) के आधार पर परिभाषित किया जाता है।
मुख्य न्यायाधीश की सेवानिवृत्त आयु 65 वर्ष है।
1950 में सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना के बाद से अब तक परम्परा का उल्लंघन मात्र दो बार हुआ -
वर्ष 1973 में न्यायमूर्ति ए.एन. रे को वरिष्ठता क्रम में चौथे स्थान पर होने के बावजूद सी.जे.आई. नियुक्त किया गया।
वर्ष 1977 में न्यायमूर्ति एच.आर. खन्ना के वरिष्ठ न्यायाधीश होने के बावजूद न्यायमूर्ति एम.एच. बेग को सी.जे.आई. नियुक्त किया गया था।
शपथ:
प्रत्येक नियुक्त न्यायाधीश को राष्ट्रपति या इस कार्य के लिये नियुक्त व्यक्ति के समक्ष शपथ लेनी होती है और उस पर हस्ताक्षर करने होते हैं।
शपथ में भारत के संविधान, संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखने तथा भय या पक्षपात के बिना कर्त्तव्यों का पालन करने की प्रतिबद्धता शामिल है।
#Polity
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Secure PCS
🌀PET 2025 के लिए फॉर्म भरना शुरू हो गया है। https://upsssc.gov.in/Online_App/IsApplyInPrevious.aspx
इस PET से लोवर PCS, लेखपाल VPO, VDO JUNIOR ASSISTANT etc भर्ती आएगी।
चूंकि 2027 में विधान सभा चुनाव है तो 27 से पहले पूरी भी होगी।
चूंकि 2027 में विधान सभा चुनाव है तो 27 से पहले पूरी भी होगी।
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प्रश्न 1. किस समिति ने भारत में पंचायती राज व्यवस्था के लिए सिफारिश की?
Anonymous Quiz
4%
पुंछी समिति
11%
सिंघवी समिति
80%
बलवंतराय मेहता समिति
4%
इनमें से कोई नहीं
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प्रश्न 2. पंचायती राज व्यवस्था में सभी स्तरों पर महिलाओं के लिए कितने पद आरक्षित हैं?
Anonymous Quiz
77%
1/3
15%
1/2
8%
¼
0%
इनमें से कोई नहीं
प्रश्न 3. 73वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में कौन सी अनुसूची जोड़ी गई?
Anonymous Quiz
9%
7वाँ
28%
9वाँ
61%
11वाँ
2%
इनमें से कोई नहीं
प्रश्न 4. कौन सा अनुच्छेद पंचायती राज से संबंधित है?
Anonymous Quiz
73%
अनुच्छेद 243
11%
अनुच्छेद 324
11%
अनुच्छेद 124
5%
इनमें से कोई नहीं
प्रश्न 5. निम्नलिखित में से कौन सी व्यवस्था प्रत्यक्ष चुनाव के आधार पर स्थापित की गई है?
Anonymous Quiz
0%
ब्लॉक समिति
24%
जिला परिषद
76%
ग्राम पंचायत
0%
इनमें से कोई नहीं
प्रश्न 6. भारत की पंचायती राज व्यवस्था में कितने स्तर हैं?
Anonymous Quiz
0%
एक स्तरीय
3%
दो-स्तरीय
95%
त्रिस्तरीय
3%
इनमें से कोई नहीं
73वें संविधान संशोधन अधिनियम के संबंध में सत्य कथन है/हैं-
(1) इसे वर्ष 1992 में राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली थी।
(2) इसके तहत संविधान में भाग 9 जोड़ा गया था। (3) इसके तहत 11वीं अनुसूची जोड़ी गई जिसमें पंचायतों के लिए 19 विषयों की सूची की व्यवस्था की गई।
(1) इसे वर्ष 1992 में राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली थी।
(2) इसके तहत संविधान में भाग 9 जोड़ा गया था। (3) इसके तहत 11वीं अनुसूची जोड़ी गई जिसमें पंचायतों के लिए 19 विषयों की सूची की व्यवस्था की गई।
Anonymous Quiz
27%
केवल 1 और 2
16%
केवल 2
30%
केवल 1 और 3
27%
1, 2 और 3
प्रश्न 8 : पंचायती राज कब लागू हुआ?
Anonymous Quiz
76%
2 अक्टूबर, 1959
16%
2 नवंबर, 1959
5%
2 दिसंबर, 1959
3%
इनमें से कोई नहीं
प्रश्न 9 : 73 वां संविधान संशोधन कब हुआ था?
Anonymous Quiz
66%
24 अप्रैल 1993 को
24%
24 मई 1993 को
8%
24 जून 1993 को
3%
इनमें से कोई नहीं
प्रश्न 10 : पंचायत कितने प्रकार की होती है?
Anonymous Quiz
92%
तीन प्रकार के
3%
चार प्रकार के
5%
पांच प्रकार के
0%
इनमें से कोई नहीं