Anonymous Quiz
16%
गोदावरी
37%
कृष्णा
42%
कावेरी
5%
महानदी
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29%
महानदी
33%
कृष्णा
29%
कावेरी
10%
गोदावरी
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें-
1-शिवनाथ और हसदेव महानदी की सहायक नदियाँ हैं।
2- पारादीप बंदरगाह वहां स्थित है जहां महानदी बंगाल की खाड़ी से मिलती है। सही विकल्प चुनें- 【Join 📌 @UppscZone】
1-शिवनाथ और हसदेव महानदी की सहायक नदियाँ हैं।
2- पारादीप बंदरगाह वहां स्थित है जहां महानदी बंगाल की खाड़ी से मिलती है। सही विकल्प चुनें- 【Join 📌 @UppscZone】
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14%
केवल 1 सही है
24%
केवल 2 सही है
62%
1 और 2 दोनों सही हैं
0%
1 और 2 दोनों गलत हैं
👍3
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नवंबर, 2023 से आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले बच्चों (3 से 6 वर्ष तक) के लिए हाट कुक्ड मील योजना का प्रारंभ किया गया।
योजना का क्रियान्वयन किस विभाग के समन्वय से किया जा रहा है ?
योजना का क्रियान्वयन किस विभाग के समन्वय से किया जा रहा है ?
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27%
बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा बेसिक शिक्षा विभाग
8%
पंचायती राज विभाग
23%
नगर विकास तथा खाद्य एवं रसद विभाग
42%
उपरोक्त सभी
0%
उपरोक्त में से कोई नहीं
👍3
जस्टिस गवई होंगे अगले CJI -
जन्म - 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती।
जस्टिस गवई ने 1985 में कानूनी करियर शुरू किया।
1987 में बॉम्बे हाईकोर्ट में स्वतंत्र प्रैक्टिस शुरू की थी।
1992 में अतिरिक्त सरकारी अभियोजक जस्टिस गवई ने संवैधानिक और प्रशासनिक कानून पर ध्यान केंद्रित किया।
अगस्त 1992 में उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में सहायक सरकारी वकील और अतिरिक्त सरकारी अभियोजक नियुक्त किया गया। बाद में वह उसी बेंच के लिए 2000 में सरकारी वकील और सरकारी अभियोजक बन गए।
2003 को बॉम्बे हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था और वह 2005 में स्थायी न्यायाधीश बने।
उन्हें 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किया गया था।
दिसंबर 2023 में सर्वसम्मति से पूर्ववर्ती राज्य जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के केंद्र के फैसले को बरकरार रखा जाना, राजनीतिक फंडिंग के लिए चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द करना, और 2016 के 1,000 और 500 रुपए मूल्यवर्ग के नोटों को बंद करने के फैसले को मंजूरी देना जैसे संविधान पीठ के अहम फैसलों में जस्टिस गवई शामिल रहे।
जन्म - 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती।
जस्टिस गवई ने 1985 में कानूनी करियर शुरू किया।
1987 में बॉम्बे हाईकोर्ट में स्वतंत्र प्रैक्टिस शुरू की थी।
1992 में अतिरिक्त सरकारी अभियोजक जस्टिस गवई ने संवैधानिक और प्रशासनिक कानून पर ध्यान केंद्रित किया।
अगस्त 1992 में उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में सहायक सरकारी वकील और अतिरिक्त सरकारी अभियोजक नियुक्त किया गया। बाद में वह उसी बेंच के लिए 2000 में सरकारी वकील और सरकारी अभियोजक बन गए।
2003 को बॉम्बे हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था और वह 2005 में स्थायी न्यायाधीश बने।
उन्हें 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किया गया था।
दिसंबर 2023 में सर्वसम्मति से पूर्ववर्ती राज्य जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के केंद्र के फैसले को बरकरार रखा जाना, राजनीतिक फंडिंग के लिए चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द करना, और 2016 के 1,000 और 500 रुपए मूल्यवर्ग के नोटों को बंद करने के फैसले को मंजूरी देना जैसे संविधान पीठ के अहम फैसलों में जस्टिस गवई शामिल रहे।
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निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
1.केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा में स्थित है। 2.उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ में है। 3.उत्तर प्रदेश राज्य हिन्दी संस्थान वाराणसी में है
1.केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा में स्थित है। 2.उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ में है। 3.उत्तर प्रदेश राज्य हिन्दी संस्थान वाराणसी में है
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3%
केवल 1 और 2
13%
केवल 2
28%
केवल 2 और 3
6%
केवल 1 और 3
50%
उपरोक्त सभी।
👍4
भगवद्गीता और नाट्यशास्त्र को यूनेस्को के विश्व स्मृति रजिस्टर में शामिल किया गया।
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👍1
नाटकीय कला पर प्रसिद्ध ग्रंथ 'नाट्यशास्त्र' ___ द्वारा लिखा गया था।
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75%
भरत मुनि
3%
हर्ष वर्धन
22%
विष्णु शर्मा
0%
कालिदास
👍2
नाट्यशास्त्र प्रदर्शन कलाओं पर एक संस्कृत ग्रंथ है। मूलग्रंथ ऋषि भरत मुनि को समर्पित है, और इसका पहला पूर्ण संकलन 200 ईसा पूर्व और 200 सीई के बीच है, लेकिन अनुमान 500 ईसा पूर्व और 500 सीई के बीच भिन्न होता है।
नाट्यशास्त्र
नाट्यशास्त्र, पूर्ण भरत नाट्यशास्त्र में, शास्त्रीय संस्कृत रंगमंच के सभी पहलुओं से संबंधित नाटकीय कलाओं पर एक विस्तृत ग्रंथ और पुस्तिका है।
ऐसा माना जाता है कि इसे पौराणिक ब्राह्मण ऋषि और पुजारी भरत (200 ईसा पूर्व-200 ईस्वी) द्वारा लिखा गया था।
इसके कई अध्यायों में नृत्य, संगीत, राजनीति और सामान्य सौंदर्यशास्त्र सहित नाटक की शास्त्रीय भारतीय अवधारणा में सन्निहित सभी विविध कलाओं का विस्तृत उपचार है।
इसे पांचवें वेद के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि इसे ऋग्वेद से शब्द, सामवेद से संगीत, यजुर्वेद से इशारों और अथर्ववेद से भावनाओं को लेकर विकसित किया गया है।
भरत मुनि
भरत मुनि एक प्राचीन भारतीय नाटककार और संगीतविद् थे, जिन्होंने नाट्य शास्त्र, प्राचीन भारतीय नाट्यशास्त्र और इतिहासलेखन, विशेष रूप से संस्कृत थिएटर पर एक सैद्धांतिक ग्रंथ लिखा था।
»भरत को भारतीय नाट्य कला रूपों का जनक माना जाता है।
»वह 200 ईसा पूर्व और 200 सीई के बीच की तारीख है, लेकिन अनुमान 500 ईसा पूर्व और 500 सीई के बीच भिन्न होता है।
»भरत मुनि द्वारा नाट्य शास्त्र और नंदिकेश्वर द्वारा "अभिनय दर्पण" को भरतनाट्यम का मूल स्रोत माना जाता है
#Current_affairs #Prelims2025 #MCQ
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नाट्यशास्त्र
नाट्यशास्त्र, पूर्ण भरत नाट्यशास्त्र में, शास्त्रीय संस्कृत रंगमंच के सभी पहलुओं से संबंधित नाटकीय कलाओं पर एक विस्तृत ग्रंथ और पुस्तिका है।
ऐसा माना जाता है कि इसे पौराणिक ब्राह्मण ऋषि और पुजारी भरत (200 ईसा पूर्व-200 ईस्वी) द्वारा लिखा गया था।
इसके कई अध्यायों में नृत्य, संगीत, राजनीति और सामान्य सौंदर्यशास्त्र सहित नाटक की शास्त्रीय भारतीय अवधारणा में सन्निहित सभी विविध कलाओं का विस्तृत उपचार है।
इसे पांचवें वेद के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि इसे ऋग्वेद से शब्द, सामवेद से संगीत, यजुर्वेद से इशारों और अथर्ववेद से भावनाओं को लेकर विकसित किया गया है।
भरत मुनि
भरत मुनि एक प्राचीन भारतीय नाटककार और संगीतविद् थे, जिन्होंने नाट्य शास्त्र, प्राचीन भारतीय नाट्यशास्त्र और इतिहासलेखन, विशेष रूप से संस्कृत थिएटर पर एक सैद्धांतिक ग्रंथ लिखा था।
»भरत को भारतीय नाट्य कला रूपों का जनक माना जाता है।
»वह 200 ईसा पूर्व और 200 सीई के बीच की तारीख है, लेकिन अनुमान 500 ईसा पूर्व और 500 सीई के बीच भिन्न होता है।
»भरत मुनि द्वारा नाट्य शास्त्र और नंदिकेश्वर द्वारा "अभिनय दर्पण" को भरतनाट्यम का मूल स्रोत माना जाता है
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UNESCO का पूरा नाम है United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन)। यह संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है, जिसकी स्थापना 16 नवंबर 1945 को हुई थी।
उद्देश्य:
UNESCO का मुख्य उद्देश्य विश्व में:
शिक्षा को बढ़ावा देना
वैज्ञानिक सहयोग को प्रोत्साहित करना
संस्कृति और विरासत की रक्षा करना
स्वतंत्रता, शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना है
मुख्य कार्य:
शिक्षा में सहयोग – जैसे 'शिक्षा सबके लिए' (Education for All) अभियान।
सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण – जैसे विश्व धरोहर स्थलों (World Heritage Sites) की सूची बनाना और उनकी सुरक्षा करना।
वैज्ञानिक अनुसंधान में सहयोग – जल, जैव विविधता, पर्यावरण संरक्षण आदि के क्षेत्र में।
स्वतंत्र मीडिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बढ़ावा देना।
मुख्यालय:
UNESCO का मुख्यालय पेरिस, फ्रांस में स्थित है।
भारत और UNESCO:
भारत 1946 से UNESCO का सदस्य है।
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उद्देश्य:
UNESCO का मुख्य उद्देश्य विश्व में:
शिक्षा को बढ़ावा देना
वैज्ञानिक सहयोग को प्रोत्साहित करना
संस्कृति और विरासत की रक्षा करना
स्वतंत्रता, शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना है
मुख्य कार्य:
शिक्षा में सहयोग – जैसे 'शिक्षा सबके लिए' (Education for All) अभियान।
सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण – जैसे विश्व धरोहर स्थलों (World Heritage Sites) की सूची बनाना और उनकी सुरक्षा करना।
वैज्ञानिक अनुसंधान में सहयोग – जल, जैव विविधता, पर्यावरण संरक्षण आदि के क्षेत्र में।
स्वतंत्र मीडिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बढ़ावा देना।
मुख्यालय:
UNESCO का मुख्यालय पेरिस, फ्रांस में स्थित है।
भारत और UNESCO:
भारत 1946 से UNESCO का सदस्य है।
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#ROARO
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विश्व विरासत दिवस, 2025 : 18 अप्रैल
विषय : 'आपदा एवं संघर्ष से खतरे में धरोहर।'
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रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) NTPC (नॉन-टेक्निकल पॉपुलर कैटेगरी) परीक्षा 9 जून 2025 से प्रारंभ होगी।
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★पहली दुग्ध सहकारी समिति:
1917 में इलाहाबाद के कटरा में स्थापित की गई।
★पहला दुग्ध संघ:
1938 में लखनऊ दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ की स्थापना।
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1917 में इलाहाबाद के कटरा में स्थापित की गई।
★पहला दुग्ध संघ:
1938 में लखनऊ दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ की स्थापना।
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मातृत्व, शिशु एवं बालिका मदद योजना
(1) पंजीकृत महिला श्रमिक या पुरुष कर्मकार की पत्नी को प्रसव हेतु रु॰ 6000/- एक मुश्त देय |
पात्रता की शर्ते – सभी पंजीकृत महिला श्रमिक या पुरुष कर्मकार की पत्नी को अधिकतम दो प्रसवों तक ही देय होगा | पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिक को हित लाभ के रूप में उसकी श्रेणी के अनुसार निर्धारित न्यूनतम वेतन की दर से तीन माहों के वेतन के समतुल्य धनराशि देय होगी |
आवेदन की प्रक्रिया – श्रमिक द्वारा अपना आवेदन जन सुविधा केंद्र/ श्रम विभाग मे बायो मेट्रिक कराते हुये एक वर्ष के अंदर करना होगा |
(2) पंजीकृत महिला श्रमिक या पुरुष कर्मकार को पुत्र होने पर रु॰ 20000/- तथा पुत्री होने पर रु॰ 25000/- देय
पात्रता की शर्ते – शिशु हितलाभ के अंतर्गत प्रथम दो संतानों तक हितलाभ देय |
आवेदन की प्रक्रिया – श्रमिक द्वारा अपना आवेदन जन सुविधा केंद्र / श्रम विभाग मे एक वर्ष के अंदर करना होगा |
(3) पंजीकृत महिला श्रमिक या पुरुष कर्मकार को पहली बालिका को अथवा दूसरी बालिका होने पर उसे भी रु ॰ 25000/- से रु॰ 50000/- तक सावधि जमा के रूप मे देय |
पात्रता की शर्ते – पहली बालिका को अथवा दूसरी बालिका होने पर दूसरी को भी उक्त हितलाभ के रूप मे सावधि जमा करायी जाती है जो बालिका के 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर देय होगी |
आवेदन की प्रक्रिया – निर्माण श्रमिक एक वर्ष तक बोर्ड का सदस्य रहने के पश्चात जन सुविधा /श्रम विभाग मे आवेदन कर सकते है |
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(1) पंजीकृत महिला श्रमिक या पुरुष कर्मकार की पत्नी को प्रसव हेतु रु॰ 6000/- एक मुश्त देय |
पात्रता की शर्ते – सभी पंजीकृत महिला श्रमिक या पुरुष कर्मकार की पत्नी को अधिकतम दो प्रसवों तक ही देय होगा | पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिक को हित लाभ के रूप में उसकी श्रेणी के अनुसार निर्धारित न्यूनतम वेतन की दर से तीन माहों के वेतन के समतुल्य धनराशि देय होगी |
आवेदन की प्रक्रिया – श्रमिक द्वारा अपना आवेदन जन सुविधा केंद्र/ श्रम विभाग मे बायो मेट्रिक कराते हुये एक वर्ष के अंदर करना होगा |
(2) पंजीकृत महिला श्रमिक या पुरुष कर्मकार को पुत्र होने पर रु॰ 20000/- तथा पुत्री होने पर रु॰ 25000/- देय
पात्रता की शर्ते – शिशु हितलाभ के अंतर्गत प्रथम दो संतानों तक हितलाभ देय |
आवेदन की प्रक्रिया – श्रमिक द्वारा अपना आवेदन जन सुविधा केंद्र / श्रम विभाग मे एक वर्ष के अंदर करना होगा |
(3) पंजीकृत महिला श्रमिक या पुरुष कर्मकार को पहली बालिका को अथवा दूसरी बालिका होने पर उसे भी रु ॰ 25000/- से रु॰ 50000/- तक सावधि जमा के रूप मे देय |
पात्रता की शर्ते – पहली बालिका को अथवा दूसरी बालिका होने पर दूसरी को भी उक्त हितलाभ के रूप मे सावधि जमा करायी जाती है जो बालिका के 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर देय होगी |
आवेदन की प्रक्रिया – निर्माण श्रमिक एक वर्ष तक बोर्ड का सदस्य रहने के पश्चात जन सुविधा /श्रम विभाग मे आवेदन कर सकते है |
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