अनुच्छेद -153 : राज्यपाल का पद
इसमें राज्यपाल के पद का उल्लेख मिलता है।
मूल संविधान में यह व्यवस्था की गई की प्रत्येक राज्य में एक राज्यपाल होगा, परन्तु 7वें संविधान संशोधन 1956 द्वारा यह प्रावधान किया गया कि एक ही व्यक्ति को दो या दो से अधिक राज्यों का संयुक्त राज्यपाल बनाया जा सकता है अर्थात इस अनुच्छेद की कोई बात एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों के लिए राज्यपाल नियुक्त किए जाने से निवारित नहीं करेगी।
स्मरणीय तथ्य :
7वें संविधान संशोधन 1956 द्वारा निम्नलिखित प्रावधान किए गए :
राज्यों की श्रेणियाँ A, B, C, D समाप्त कर दी गई। (भाग-7, अनुच्छेद 238 निरसित कर दिया)
एक व्यक्ति को दो या दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है।
लोकसभा की सीटें 500 से बढ़कर 525 की गई।
राजप्रमुख के स्थान पर राज्यपाल का पद प्रारम्भ।
राजस्थान के प्रथम राजप्रमुख सवाई मानसिंह (30 मार्च, 1949)
राजस्थान के प्रथम राज्यपाल-गुरुमुख निहालसिंह (नियुक्ति आदेश 25 अक्टूबर, 1956, पदभार ग्रहण 1 नवम्बर, 1956 को किया)
#PMI
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इसमें राज्यपाल के पद का उल्लेख मिलता है।
मूल संविधान में यह व्यवस्था की गई की प्रत्येक राज्य में एक राज्यपाल होगा, परन्तु 7वें संविधान संशोधन 1956 द्वारा यह प्रावधान किया गया कि एक ही व्यक्ति को दो या दो से अधिक राज्यों का संयुक्त राज्यपाल बनाया जा सकता है अर्थात इस अनुच्छेद की कोई बात एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों के लिए राज्यपाल नियुक्त किए जाने से निवारित नहीं करेगी।
स्मरणीय तथ्य :
7वें संविधान संशोधन 1956 द्वारा निम्नलिखित प्रावधान किए गए :
राज्यों की श्रेणियाँ A, B, C, D समाप्त कर दी गई। (भाग-7, अनुच्छेद 238 निरसित कर दिया)
एक व्यक्ति को दो या दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है।
लोकसभा की सीटें 500 से बढ़कर 525 की गई।
राजप्रमुख के स्थान पर राज्यपाल का पद प्रारम्भ।
राजस्थान के प्रथम राजप्रमुख सवाई मानसिंह (30 मार्च, 1949)
राजस्थान के प्रथम राज्यपाल-गुरुमुख निहालसिंह (नियुक्ति आदेश 25 अक्टूबर, 1956, पदभार ग्रहण 1 नवम्बर, 1956 को किया)
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अनुच्छेद - 154 : राज्य की कार्यपालिका शक्ति
अनुच्छेद 154 (1) राज्य की कार्यपालिका का संवैधानिक प्रमुख राज्यपाल होता है।
राज्यपाल अपनी शक्तियों का प्रयोग स्वयं या अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करता है।
नोट :-
यहाँ अधीनस्थ अधिकारियों से तात्पर्य-मुख्यमंत्री व राज्य मंत्रिपरिषद् से है।
राज्य का संवैधानिक प्रमुख राज्यपाल। राज्य का राजनैतिक प्रमुख-मुख्यमंत्री राज्य का सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी-मुख्य सचिव।
अनुच्छेद 154 (2) इस अनुच्छेद की कोई बात-
(क) किसी विद्यमान विधि द्वारा, किसी अन्य प्राधिकारी को प्रदान किए गए कृत्य (कार्य) राज्यपाल को अंतरित करने वाली नहीं समझी जाएगी।
(ख) राज्यपाल के अधीनस्थ किसी प्राधिकारी को विधि द्वारा कृत्य (कार्य) प्रदान करने से संसद या राज्य विधानमण्डल को निवारित नहीं करेगी।
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अनुच्छेद - 155 : राज्यपाल की नियुक्ति
राज्य के राज्यपाल को राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा नियुक्त करेगा।
राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा केन्द्रीय मंत्रिपरिषद् की सलाह से की जाती है।
राज्यपाल की नियुक्ति का प्रावधान 'कनाडा' से लिया गया है।
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अनुच्छेद 156 : राज्यपाल की पदावधि/कार्यकाल
अनुच्छेद 156 (1): राज्यपाल, राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है।
स्मरणीय तथ्य :
राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है, पदच्युति भी राष्ट्रपति करता है और स्थानान्तरण (Transfer) भी राष्ट्रपति करता है अर्थात राज्यपाल, राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत कार्य करता है। राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत का वास्तविक अर्थ' प्रधानमंत्री या केन्द्रीय मंत्रिपरिषद् के प्रसाद से है। राज्यपाल, महान्यायवादी, प्रधानमंत्री व केन्द्रीय मंत्रिपरिषद् राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत कार्य करते है।
राज्यपाल को हटाने के कारणों/प्रक्रिया का संविधान में उल्लेख नहीं है।
अनुच्छेद 156 (2): राज्यपाल अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को देता है। राज्यपाल का पद रिक्त होने पर उच्च न्यायालय (HC) का मुख्य न्यायाधीश कार्यभार संभालता है।
अनुच्छेद 156 (3): राज्यपाल का कार्यकाल (पदावधि) 5 वर्ष होता है, पदग्रहण की तारीख से।
राज्यपाल को 5 वर्ष से पूर्व भी पद से हटाया जा सकता है। परन्तु राज्यपाल पदावधि/कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी तब तक पद पर बना रहता है, जब तक उसका उत्तराधिकारी पद ग्रहण ना कर ले। राज्यपाल की पुनः नियुक्ति की जा सकती है, कार्यकाल समाप्त होने पर राष्ट्रपति द्वारा उसी राज्य में या अन्य राज्य में।
यद्यपि प्रशासनिक सुधार आयोग की एक सिफारिश के अनुसार राज्यपाल को पुनर्नियुक्ति नहीं दी जानी चाहिए।
नोट :- बी.पी. सिंघल बनाम भारत संघ, 2010 नामक मामले में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से निर्धारित किया कि राज्यपाल को मनमाने आधार पर नहीं हटाया जा सकता। राज्यपालों के स्थानान्तरण का प्रावधान संविधान में नहीं है, परन्तु व्यवहार में राज्यपालों का स्थानान्तरण एक राज्य से दूसरे राज्य में राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है, केन्द्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह से।
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अनुच्छेद - 157 : राज्यपाल पद हेतु अर्हताएँ/ योग्यताएँ
1. भारत का नागरिक होना आवश्यक है। (मूल रूप से अर्थात जन्म से नहीं)
2. न्यूनतम आयु 35 वर्ष होना आवश्यक है।
नोट :- राज्यपाल पद के लिए शैक्षणिक योग्यता व अधिकतम आयु का प्रावधान नहीं है।
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अनुच्छेद - 158 : राज्यपाल पद की सेवा-शर्ते
अनुच्छेद 158 (1): राज्यपाल, संसद या राज्य विधानमण्डल के किसी सदन का सदस्य नहीं होगा और यदि है तो जिस तिथि को राज्यपाल का पद धारण किया जाता है उस तिथि से सदन में उसका स्थान रिक्त माना जाएगा।
अनुच्छेद 158 (2): राज्यपाल अन्य कोई लाभ का पद धारण नहीं करेगा।
अनुच्छेद 158 (3): राज्यपाल के वेतन भत्तों का निर्धारण संसद करती है। राज्यपाल बिना किराया दिए, अपने शासकीय निवासों के उपयोग का हकदार होगा।
राज्यपाल के परिलब्धियों, भत्तों एवं विशेषाधिकारों का उल्लेख दूसरी अनुसूची में है।
अनुच्छेद 158 (3क) : यदि कोई व्यक्ति दो या दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल है तो उसे वह वेतन-भत्ते मिलते है, जिस अनुपात में राष्ट्रपति आदेश द्वारा निर्धारित करे।
यह प्रावधान 7वें संविधान संशोधन 1956 द्वारा किया गया।
अनुच्छेद 158 (4): राज्यपाल की परिलब्धियाँ और वेतन-भत्तों में पदावधि के दौरान अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
स्मरणीय तथ्य :
राज्यपाल को वर्तमान में 3 लाख 50 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है, कर मुक्त (2017) से)
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अनुच्छेद- 159 : राज्यपाल की शपथ/प्रतिज्ञान का उल्लेख
राज्यपाल पदग्रहण से पूर्व शपथ लेता है। राज्यपाल को शपथ संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय (HC) के मुख्य न्यायाधीश द्वारा दिलाई जाती है।
मुख्य न्यायाधीश की अनुपस्थिति में वरिष्ठ न्यायाधीश दिलाता है।
राज्यपाल की शपथ प्रारूप अनुसूची-3 में नहीं मिलता है।
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1. भारत का नागरिक होना आवश्यक है। (मूल रूप से अर्थात जन्म से नहीं)
2. न्यूनतम आयु 35 वर्ष होना आवश्यक है।
नोट :- राज्यपाल पद के लिए शैक्षणिक योग्यता व अधिकतम आयु का प्रावधान नहीं है।
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अनुच्छेद - 158 : राज्यपाल पद की सेवा-शर्ते
अनुच्छेद 158 (1): राज्यपाल, संसद या राज्य विधानमण्डल के किसी सदन का सदस्य नहीं होगा और यदि है तो जिस तिथि को राज्यपाल का पद धारण किया जाता है उस तिथि से सदन में उसका स्थान रिक्त माना जाएगा।
अनुच्छेद 158 (2): राज्यपाल अन्य कोई लाभ का पद धारण नहीं करेगा।
अनुच्छेद 158 (3): राज्यपाल के वेतन भत्तों का निर्धारण संसद करती है। राज्यपाल बिना किराया दिए, अपने शासकीय निवासों के उपयोग का हकदार होगा।
राज्यपाल के परिलब्धियों, भत्तों एवं विशेषाधिकारों का उल्लेख दूसरी अनुसूची में है।
अनुच्छेद 158 (3क) : यदि कोई व्यक्ति दो या दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल है तो उसे वह वेतन-भत्ते मिलते है, जिस अनुपात में राष्ट्रपति आदेश द्वारा निर्धारित करे।
यह प्रावधान 7वें संविधान संशोधन 1956 द्वारा किया गया।
अनुच्छेद 158 (4): राज्यपाल की परिलब्धियाँ और वेतन-भत्तों में पदावधि के दौरान अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
स्मरणीय तथ्य :
राज्यपाल को वर्तमान में 3 लाख 50 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है, कर मुक्त (2017) से)
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अनुच्छेद- 159 : राज्यपाल की शपथ/प्रतिज्ञान का उल्लेख
राज्यपाल पदग्रहण से पूर्व शपथ लेता है। राज्यपाल को शपथ संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय (HC) के मुख्य न्यायाधीश द्वारा दिलाई जाती है।
मुख्य न्यायाधीश की अनुपस्थिति में वरिष्ठ न्यायाधीश दिलाता है।
राज्यपाल की शपथ प्रारूप अनुसूची-3 में नहीं मिलता है।
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अनुच्छेद - 160 कुछ आकस्मिकताओं में राज्यपाल के कर्त्तव्यों का निर्वहन हेतु उपबंध राष्ट्रपति कर सकेगा
राष्ट्रपति ऐसी किसी आकस्मिकता में, जो इस अध्याय में उपबंधित नहीं है, राज्य के राज्यपाल के कृत्यों के निर्वहन के लिए ऐसा उपबंध कर सकेगा जो वह ठीक समझता है।
अनुच्छेद - 161 राज्यपाल की क्षमा करने की शक्ति का उल्लेख है।
क्षमा आदि की तथा कुछ मामलों में दण्डादेश के निलम्बन, परिहार एवं लघुकरण को राज्यपाल की शक्ति।
राज्यपाल ऐसे विषय पर क्षमा कर सकता है, जिस पर राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार हो।
किसी विधि के विरुद्ध किए गए अपराध पर सिद्ध दोष ठहराए गए व्यक्ति के दण्ड को क्षमा, प्रविलम्बन, विराम या परिहार करने की अथवा दण्डादेश में निलम्बन, परिहार या लघुकरण की शक्ति राज्यपाल के पास है।
Note -राष्ट्रपति व राज्यपाल दोनों के पास क्षमा करने की शक्ति है, लकिन राज्यपाल के मुकाबले, राष्ट्रपति की अधिक होती है।
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अनुच्छेद - 162 : राज्यपाल की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार
किसी राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार उन विषयों पर होगा जिनके संबंध में उस राज्य के विधानमण्डल को विधि बनाने की शक्ति है।
परन्तु जिस विषय के संबंध में राज्य के विधानमण्डल और संसद दोनों को विधि बनाने की शक्ति है उसमें राज्य की कार्यपालिका संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि द्वारा, संघ या उसके प्राधिकारियों को अभिव्यक्त रूप से प्रदत्त कार्यपालिका शक्ति के अधीन और उससे परिसीमित होगी।
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भारत ने होंडुरास को रविवार को 26 टन मानवीय सहायता भेजी।
हाल ही में आए उष्णकटिबंधीय तूफान 'सारा' ने मध्य अमेरिकी देश में काफी तबाही मचाई है। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "ग्लोबल साउथ के लिए एक विश्वसनीय साझेदार। भारत ने हाल ही में आए उष्णकटिबंधीय तूफान सारा के मद्देनजर होंडुरास को 26 टन मानवीय सहायता भेजी है। "
#Cyclone
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हाल ही में आए उष्णकटिबंधीय तूफान 'सारा' ने मध्य अमेरिकी देश में काफी तबाही मचाई है। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "ग्लोबल साउथ के लिए एक विश्वसनीय साझेदार। भारत ने हाल ही में आए उष्णकटिबंधीय तूफान सारा के मद्देनजर होंडुरास को 26 टन मानवीय सहायता भेजी है। "
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हाल ही में, भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के शोधकर्ताओं ने टैली वन्यजीव अभयारण्य में ज़ेनोफ़्रिस अपातानी नामक एक जंगल में रहने वाले मेंढक की खोज की। टैली वन्यजीव अभयारण्य किस राज्य में स्थित है?
In which state is the Talley Wildlife Sanctuary located?
In which state is the Talley Wildlife Sanctuary located?
Anonymous Quiz
10%
असम
10%
नगालैंड
30%
अंडमान और निकोबार
50%
अरुणाचल प्रदेश
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निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP30) 2027 में भारत में आयोजित होगा।
2. भारत ने 2070 तक शून्य-उत्सर्जन प्राप्त करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। 【Join 📌 @UppscZone】
1. संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP30) 2027 में भारत में आयोजित होगा।
2. भारत ने 2070 तक शून्य-उत्सर्जन प्राप्त करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। 【Join 📌 @UppscZone】
Anonymous Quiz
0%
केवल 1 सही है
40%
केवल 2 सही है
60%
दोनो सही है।
0%
दोनों गलत है।
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PM धन-धान्या कृषी योजना (PMDKY) स्थायी कृषि को बढ़ावा देते हुए खेत की उत्पादकता, सिंचाई और क्रेडिट एक्सेस को बढ़ावा देने के लिए 100 जिलों को लक्षित करती है।
कोई अलग बजट आवंटन के साथ, क्या मौजूदा योजनाएं ग्रामीण खेती को बदलने के लिए पर्याप्त होंगी?
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कोई अलग बजट आवंटन के साथ, क्या मौजूदा योजनाएं ग्रामीण खेती को बदलने के लिए पर्याप्त होंगी?
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कथन A सत्रावसान राज्यपाल करता हैं जबकि सत्र स्थगन विधानसभा अध्यक्ष करता हैं।
कथन B सत्रावसान में सत्र समाप्त नहीं होता केवल उसे दिन की बैठक स्थगित होती हैं जबकि स्थगन में में सत्र के साथ-साथ बैठक भी समाप्त हो जाती हैं।
कथन B सत्रावसान में सत्र समाप्त नहीं होता केवल उसे दिन की बैठक स्थगित होती हैं जबकि स्थगन में में सत्र के साथ-साथ बैठक भी समाप्त हो जाती हैं।
Anonymous Quiz
40%
केवल A सही है।
10%
केवल B सही है।
50%
A और B दोनों सही हैं।
0%
दोनों गलत हैं।
0%
अनुत्तरित प्रश्न।
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Secure PCS
अनुच्छेद 167-इसमें मुख्यमंत्री के संवैधानिक कर्त्तव्यों का उल्लेख मिलता है।
मुख्यमंत्री का कर्त्तव्य बनता है कि वह राज्यपाल को निम्न मामलो में सूचना देगा माँगने पर या बिना माँगे भी -
अनुच्छेद 167(1)- राज्य के कार्यों के प्रशासन संबंधी और विधान विषयक प्रस्थापनाओं संबंधी मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करें।
अनुच्छेद 167(2)- राज्य के कार्यों के प्रशासन संबंधी और विधान विषयक प्रस्थापनाओं ससंबंधी जो जानकारी राज्यपाल मांगे, वह दे।
अनुच्छेद 167(3)- किसी विषय को जिस पर किसी मंत्री ने विनिश्चय कर दिया है, किन्तु मंत्रिपरिषद् ने विचार नहीं किया है, राज्यपाल द्वारा अपेक्षा किए जाने पर मंत्रिपरिषद् के समक्ष विचार के लिए रखे।
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मुख्यमंत्री का कर्त्तव्य बनता है कि वह राज्यपाल को निम्न मामलो में सूचना देगा माँगने पर या बिना माँगे भी -
अनुच्छेद 167(1)- राज्य के कार्यों के प्रशासन संबंधी और विधान विषयक प्रस्थापनाओं संबंधी मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करें।
अनुच्छेद 167(2)- राज्य के कार्यों के प्रशासन संबंधी और विधान विषयक प्रस्थापनाओं ससंबंधी जो जानकारी राज्यपाल मांगे, वह दे।
अनुच्छेद 167(3)- किसी विषय को जिस पर किसी मंत्री ने विनिश्चय कर दिया है, किन्तु मंत्रिपरिषद् ने विचार नहीं किया है, राज्यपाल द्वारा अपेक्षा किए जाने पर मंत्रिपरिषद् के समक्ष विचार के लिए रखे।
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दार्जिलिंग चिड़ियाघर में भारत का पहला वन्यजीव बायोबैंक खुला
भारत ने वन्यजीव संरक्षण में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग स्थित पद्मजा नायडू हिमालयन प्राणी उद्यान (PNHZP) में देश के पहले चिड़ियाघर-आधारित बायोबैंक की स्थापना की है।
#Current_affairs #Prelims2025
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भारत ने वन्यजीव संरक्षण में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग स्थित पद्मजा नायडू हिमालयन प्राणी उद्यान (PNHZP) में देश के पहले चिड़ियाघर-आधारित बायोबैंक की स्थापना की है।
#Current_affairs #Prelims2025
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रोहिणी विधायक विजेंद्र गुप्ता दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष चुने गए।
दिल्ली विधानसभा में आतिशी विपक्ष की नेता होंगी।
AAP विधायक दल ने पूर्व CM को चुना।
आज से असेंबली का पहला सेशन।
#Current_affairs #Prelims2025
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दिल्ली विधानसभा में आतिशी विपक्ष की नेता होंगी।
AAP विधायक दल ने पूर्व CM को चुना।
आज से असेंबली का पहला सेशन।
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केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस
24 फरवरी
केन्द्रीय उत्पाद शुल्क देश में निर्मित वस्तुओं पर लगाया जाने वाला एक अप्रत्यक्ष कर है।
उत्पाद शुल्क कर (जिसे कभी-कभी उत्पाद शुल्क भी कहा जाता है) देश के भीतर उत्पादित वस्तुओं पर लगाया जाने वाला एक प्रकार का कर है (सीमा शुल्क के विपरीत, जो देश के बाहर से आने वाले सामानों पर लगाया जाता है)। यह किसी वस्तु के उत्पादन या बिक्री पर लगने वाला कर है।
इस कर को अब केंद्रीय मूल्य वर्धित कर (CENVAT) के रूप में जाना जाता है। विनिर्मित सभी वस्तुओं पर शुल्क का भुगतान करना अनिवार्य है, जब तक कि छूट न मिले।
उत्पाद शुल्क के प्रकार
भारत में तीन अलग-अलग प्रकार के केंद्रीय उत्पाद शुल्क मौजूद हैं-
मूल उत्पाद शुल्क - मूल उत्पाद शुल्क, 1944 के 'केंद्रीय उत्पाद शुल्क और नमक अधिनियम की धारा 3 के तहत भारत में उत्पादित या निर्मित नमक के अलावा सभी उत्पाद शुल्क योग्य वस्तुओं पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क टैरिफ अधिनियम, 1985 की अनुसूची में निर्धारित दरों पर लगाया जाता है, जो भारत में मूल उत्पाद शुल्क की श्रेणी आता है।
अतिरिक्त उत्पाद शुल्क - 1957 के 'अतिरिक्त उत्पाद शुल्क अधिनियम' की धारा 3 इस अधिनियम की अनुसूची में सूचीबद्ध वस्तुओं के संबंध में उत्पाद शुल्क के आरोप और संग्रहण की अनुमति देती है। यह कर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच साझा किया जाता है और बिक्री कर के बजाय वसूला जाता है।
विशेष उत्पाद शुल्क - वित्त अधिनियम, 1978 की धारा 37 के अनुसार, केंद्रीय उत्पाद शुल्क और नमक अधिनियम, 1944 के तहत मूल उत्पाद शुल्क के अनुरूप, कराधान के अंतर्गत आने वाले सभी उत्पाद शुल्क योग्य वस्तुओं पर विशेष उत्पाद शुल्क लगाया जाता है। इसलिये, प्रत्येक वर्ष वित्त अधिनियम बताता है कि विशेष उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा या नहीं, और अंततः प्रासंगिक वित्तीय वर्ष के दौरान एकत्र किया जाएगा।
कर उत्पाद शुल्क का भुगतान करने का दायित्व हमेशा सामान के निर्माता पर होता है।
तीन प्रकार की पार्टियाँ हैं जिन्हें निर्माता माना जा सकता है-
»वे जो व्यक्तिगत रूप से संबंधित वस्तुओं का निर्माण करते हैं।
»वे जो भाड़े के श्रमिकों को नियोजित करके वस्तुओं का निर्माण करवाते हैं।
»वे जो अन्य पार्टियों द्वारा वस्तुओं का निर्माण करवाते हैं।
#Current_affairs #Prelims2025 #day
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24 फरवरी
केन्द्रीय उत्पाद शुल्क देश में निर्मित वस्तुओं पर लगाया जाने वाला एक अप्रत्यक्ष कर है।
उत्पाद शुल्क कर (जिसे कभी-कभी उत्पाद शुल्क भी कहा जाता है) देश के भीतर उत्पादित वस्तुओं पर लगाया जाने वाला एक प्रकार का कर है (सीमा शुल्क के विपरीत, जो देश के बाहर से आने वाले सामानों पर लगाया जाता है)। यह किसी वस्तु के उत्पादन या बिक्री पर लगने वाला कर है।
इस कर को अब केंद्रीय मूल्य वर्धित कर (CENVAT) के रूप में जाना जाता है। विनिर्मित सभी वस्तुओं पर शुल्क का भुगतान करना अनिवार्य है, जब तक कि छूट न मिले।
उत्पाद शुल्क के प्रकार
भारत में तीन अलग-अलग प्रकार के केंद्रीय उत्पाद शुल्क मौजूद हैं-
मूल उत्पाद शुल्क - मूल उत्पाद शुल्क, 1944 के 'केंद्रीय उत्पाद शुल्क और नमक अधिनियम की धारा 3 के तहत भारत में उत्पादित या निर्मित नमक के अलावा सभी उत्पाद शुल्क योग्य वस्तुओं पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क टैरिफ अधिनियम, 1985 की अनुसूची में निर्धारित दरों पर लगाया जाता है, जो भारत में मूल उत्पाद शुल्क की श्रेणी आता है।
अतिरिक्त उत्पाद शुल्क - 1957 के 'अतिरिक्त उत्पाद शुल्क अधिनियम' की धारा 3 इस अधिनियम की अनुसूची में सूचीबद्ध वस्तुओं के संबंध में उत्पाद शुल्क के आरोप और संग्रहण की अनुमति देती है। यह कर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच साझा किया जाता है और बिक्री कर के बजाय वसूला जाता है।
विशेष उत्पाद शुल्क - वित्त अधिनियम, 1978 की धारा 37 के अनुसार, केंद्रीय उत्पाद शुल्क और नमक अधिनियम, 1944 के तहत मूल उत्पाद शुल्क के अनुरूप, कराधान के अंतर्गत आने वाले सभी उत्पाद शुल्क योग्य वस्तुओं पर विशेष उत्पाद शुल्क लगाया जाता है। इसलिये, प्रत्येक वर्ष वित्त अधिनियम बताता है कि विशेष उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा या नहीं, और अंततः प्रासंगिक वित्तीय वर्ष के दौरान एकत्र किया जाएगा।
कर उत्पाद शुल्क का भुगतान करने का दायित्व हमेशा सामान के निर्माता पर होता है।
तीन प्रकार की पार्टियाँ हैं जिन्हें निर्माता माना जा सकता है-
»वे जो व्यक्तिगत रूप से संबंधित वस्तुओं का निर्माण करते हैं।
»वे जो भाड़े के श्रमिकों को नियोजित करके वस्तुओं का निर्माण करवाते हैं।
»वे जो अन्य पार्टियों द्वारा वस्तुओं का निर्माण करवाते हैं।
#Current_affairs #Prelims2025 #day
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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल “इन्वेस्ट एमपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) 2025” के लिए पूरी तरह से तैयार है जो 24-25 फरवरी को आयोजित की जाएगी। भोपाल के प्रसिद्ध बड़े तालाब में “इन्वेस्ट एमपी GIS” का तैरता हुआ लोगो भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस समिट में दुनियाभर के 60 देशों के उद्योगपति, 13 देशों के राजदूत और 6 उच्चायुक्त शामिल होंगे।
#IN_NEWS
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👍5
इन्वेस्ट एमपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) 2025 का आयोजन मध्यप्रदेश के किस शहर में किया जाएगा?
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Anonymous Quiz
17%
जबलपुर
11%
इंदौर
72%
भोपाल
0%
ग्वालियर
👍4
पूर्णिमा देवी बर्मन
टाइम मैगजीन की वूमन ऑफ द ईयर 2025 की सूची में शामिल
असम की वन्यजीव वैज्ञानिक,
डॉ. पूर्णिमा देवी बर्मन को लुप्तप्राय ग्रेटर एडजुटेंट सारस (जिसे स्थानीय रूप से हरगिला कहाँ जाता है) के संरक्षण हेतु किए गए कार्यों के
लिये जाना जाता है। उन्होंने 'हरगिला आर्मी नामक एक महिला-केंद्रित आंदोलन की स्थापना की, जो इन पक्षियों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास की रक्षा के लिये कार्यरत है।
#IMP
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टाइम मैगजीन की वूमन ऑफ द ईयर 2025 की सूची में शामिल
असम की वन्यजीव वैज्ञानिक,
डॉ. पूर्णिमा देवी बर्मन को लुप्तप्राय ग्रेटर एडजुटेंट सारस (जिसे स्थानीय रूप से हरगिला कहाँ जाता है) के संरक्षण हेतु किए गए कार्यों के
लिये जाना जाता है। उन्होंने 'हरगिला आर्मी नामक एक महिला-केंद्रित आंदोलन की स्थापना की, जो इन पक्षियों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास की रक्षा के लिये कार्यरत है।
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बजट 2024 में चर्चा में रहा " पूर्वोदय प्लान " में निम्नलिखित में से कौन सा राज्य शामिल नहीं है ?
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Anonymous Quiz
0%
आंध्र प्रदेश
14%
झारखंड
9%
बिहार
18%
पश्चिम बंगाल
5%
ओडिसा
55%
सभी शामिल हैं।
👍4