📍प्रांतीय प्रशासन
अकबर 1580
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अकबर 1580
* साम्राज्य को 12 सूबों में विभाजित किया गया (आगे तीन सूबे और जुड़ कर कुल 15 हो गए)शाहजहां
* सुबा > सरकार > परगना महाल
एक और प्रशासनिक इकाई चकला अर्थात परनना के समूह को जोड़ा गया।
चकला > परगना महल
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सूबेदार
दीवान
बख्शी
दरोगा-ए-डाक
वाकिया नवीस / वाकिया निगार
सवानिह निगार
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* किसी प्रांत का राज्यपाल
* सीधे सम्राट द्वारा नियुक्ता
* कार्यकालः 3 वर्ष
दीवान
* राजस्व विभाग का प्रमुखा
* स्वतंत्र अधिकारी तथा केंद्र के प्रति जवाबदेह।
* राजकोष में जमा राशियों का विवरण दर्ज करने के लिए उसके द्वारा रोजनामचा (दैनिक रजिस्टर) तैयार किया जाता था।
बख्शी
मीर बख्शी द्वारा किए गए कार्यों के समान लेकिन प्रांतों के स्तर परा
दरोगा-ए-डाक
राजकीय डाक प्रणाली का प्रमुख
वाकिया नवीस / वाकिया निगार
* डाक प्रणाली का हिस्सा।
* इसका कर्तव्य महत्वपूर्ण सूचना सीधे सम्राट को देना था।
सवानिह निगार
यह गुप्त सेवाओं का हिस्सा था तथा सम्राट को गोपनीय रिपोर्ट भेजता था।
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📍स्थानीय प्रशासन
सरकार के स्तर पर 2 महत्वपूर्ण अधिकारी
परगना प्रशाशन:
ग्राम प्रशासन
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सरकार > परबना (तहसील) > मोजा (गांव)
सरकार के स्तर पर 2 महत्वपूर्ण अधिकारी
फौजदार : सरकार का मुखिया, कानून-व्यवस्था की समस्या का ध्यान रखना, राजस्व संग्रह के मामलों में अमलगुजार की भी मदद करना।
अमलगुजार/आमिलः राजस्व संग्रह का आकलन और पर्यवेक्षणा यह प्रांतीय दीवान को प्राप्तियां और व्यय का विवरण भेजता था।
थानेदार: धाने का मुखिया था जहाँ सेजा तैजात होती थी। इसे फौजदार के अधीन रखा गया था।
परगना प्रशाशन:
शिकवारः परथना का कार्यकारी अधिकारी, राजस्व वसूली में आमिलों की सहायता करता था। आमिल परणना स्तर पर राजस्व वसूली का कार्य।
कानूनगो: अपने क्षेत्र में भूमि से संबंधित सभी अभिलेखों को रखता था। परनना में होने वाली विभिन्न फसलों का विवरण रखता था।
ग्राम प्रशासन
मुकद्दम/मंडल ग्राम प्रधान
पटवारी ग्राम राजस्व अभिलेखों के रखरखाव से संबंधित था।
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रानी वेलु नाच्चियार को ब्रिटिश औपनिवेशिक सत्ता के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली पहली रानी के रूप में जाना जाता है।
वे 1780 में अंग्रेज़ों से निडर होकर लड़ी और उन्हें परास्त किया. उन्हें तमिलनाडु के लोग आज भी वीरमंगई अर्थात बहादुर रानी के नाम से जानते हैं.
जयंती पर सादर नमन 💐🙏
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वे 1780 में अंग्रेज़ों से निडर होकर लड़ी और उन्हें परास्त किया. उन्हें तमिलनाडु के लोग आज भी वीरमंगई अर्थात बहादुर रानी के नाम से जानते हैं.
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