मुग़ल साम्राज्य (छह प्रमुख शासक)
📍जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर 1526-1530
📍ई. नसिर-उद-दीन मुहम्मद हुमायूँ 1530-1540 और 1555-1556 ई.
📍अबुल फतह जलाल-उद-दीन मुहम्मद अकबर 1556-1605 ई.
📍नूर-उद-दीन मुहम्मद सलीम जहाँगीर 1605-1627 ई.
📍शहाब-उद-दीन मुहम्मद खुर्रम शाहजहाँ 1627-1658 ई.
📍मुही-उद-दीन मुहम्मद औरंगजेब 1658-1707
क्रम याद रखिए आजकल क्रम बहुत पूछा जा रहा है
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अकबर की सैन्य विजय
📍मालवा 1562 बाज बहादुर, जिसे बाद में अकबर के दरबार में मनसबदारी प्रदान की गई।
📍गोंडवाना क्षेत्र 1564 रानी दुर्गावती और नारायण, मध्य भारत पर नियंत्रण स्थापित कर लिया।
📍मेवाड 1567 राणा उदय सिह से जीता।
📍गुजरात 1573 मुजफ्फर शाह से जीता।
📍काबुल 1581 मिर्जा हकीम से जीता।
📍खानदेश 1591 खानदेश के शासक राजा अली खान से जीता, उसने मुगल सम्राट का आधिपत्य स्वीकार कर लिया और वार्षिक शुल्क देने के लिए सहमत हुए।
📍बरार 1596 चांद बीबी से जीता।
📍अहमदनगर 1600 मुजफ्फर शाह से जीता।
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जहांगीर के शासन काल के दौरान महत्वपूर्ण युद्ध/घटनाएं
जहांगीर के उद्घम को चुनौती
राजकुमार खुसरो ने विद्रोह किया जिस पर सिख शुरु अर्जुन देव (5वें सिख बुरु) का वरदहस्त था।
राजकुमार खुसरो को पराजित किया, उन्हें कैद कर अंधा कर दिया गया। जबकि शुरु अर्जुन देव को मार दिया गया।
विद्रोही प्रांतों पर कब्जा
बंगाल में विद्रोही अफनान उस्मान खानिन को वश में किया।
मेवाड़ के राणा उदय सिंह और उनके बेटे राणा प्रताप सिंह से अधीनता स्वीकार कराड़ी जहांगीर ने अपने बेटे शहजादे रखुर्रम के नेतृत्व में एक सैन्य अभियान मेवाड् भेजा।
इसके बाद मेवाड़ ने मुगलों से संधि की और मुल्ल अधीनता स्वीकार कर ली।
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जहांगीर के उद्घम को चुनौती
राजकुमार खुसरो ने विद्रोह किया जिस पर सिख शुरु अर्जुन देव (5वें सिख बुरु) का वरदहस्त था।
राजकुमार खुसरो को पराजित किया, उन्हें कैद कर अंधा कर दिया गया। जबकि शुरु अर्जुन देव को मार दिया गया।
विद्रोही प्रांतों पर कब्जा
बंगाल में विद्रोही अफनान उस्मान खानिन को वश में किया।
मेवाड़ के राणा उदय सिंह और उनके बेटे राणा प्रताप सिंह से अधीनता स्वीकार कराड़ी जहांगीर ने अपने बेटे शहजादे रखुर्रम के नेतृत्व में एक सैन्य अभियान मेवाड् भेजा।
इसके बाद मेवाड़ ने मुगलों से संधि की और मुल्ल अधीनता स्वीकार कर ली।
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मुगल कालीन प्रशासन ।
📍केंद्रीय प्रशासन
सम्राट
वजीर/वकील
मीर बख्शी
मीर सामां/ खान सामा
कारखानों का प्रमुख अधिकारी
सद्र-उस-सुदूर
काजी-उल कुज़्ज़ात
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📍केंद्रीय प्रशासन
सम्राट
राजशाही की देवीय उत्पत्ति पर आधारिता।
सम्राट द्वारा मुलल प्रशासन के सभी अधिकारियों को उनके पद पर स्थापित किया जाता था।
वजीर/वकील
हुमायूँ के शासनकाल तक सैन्य और नालरिक दोनों शक्तियां इसके पास थी।दीवान ए कुल (प्रमुख दीवान)
अकबर के शरा वित्तीय शक्तियां दीवान-ए-कुल को हस्तांतरित कर दी गई।
शाही खजाने की निलरानी करना और सभी खातों की जांच करना।
मीर बख्शी
मनसबदारों की नियुक्ति।
दाल (घोडों का चिन्हांकन) और चेहरा का पर्यवेक्षण (चेहरे के हुलिए के आधार पर सूची तैयार करना)।
मीर सामां/ खान सामा
कारखानों का प्रमुख अधिकारी
सद्र-उस-सुदूर
* धार्मिक मामलों के विज्ञान के प्रमुखा
* शरीयत के कानूनों की रक्षा करने का कर्तव्या
काजी-उल कुज़्ज़ात
* दीवानी और फौजदारी दोनों मामलों में शरीयत काजुन का क्रियान्वयन करना। व्यायपालिका का प्रमुख (औरंगजेब से पहले वह कार्यालय मौजूद नहीं था।
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📍प्रांतीय प्रशासन
अकबर 1580
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अकबर 1580
* साम्राज्य को 12 सूबों में विभाजित किया गया (आगे तीन सूबे और जुड़ कर कुल 15 हो गए)शाहजहां
* सुबा > सरकार > परगना महाल
एक और प्रशासनिक इकाई चकला अर्थात परनना के समूह को जोड़ा गया।
चकला > परगना महल
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सूबेदार
दीवान
बख्शी
दरोगा-ए-डाक
वाकिया नवीस / वाकिया निगार
सवानिह निगार
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* किसी प्रांत का राज्यपाल
* सीधे सम्राट द्वारा नियुक्ता
* कार्यकालः 3 वर्ष
दीवान
* राजस्व विभाग का प्रमुखा
* स्वतंत्र अधिकारी तथा केंद्र के प्रति जवाबदेह।
* राजकोष में जमा राशियों का विवरण दर्ज करने के लिए उसके द्वारा रोजनामचा (दैनिक रजिस्टर) तैयार किया जाता था।
बख्शी
मीर बख्शी द्वारा किए गए कार्यों के समान लेकिन प्रांतों के स्तर परा
दरोगा-ए-डाक
राजकीय डाक प्रणाली का प्रमुख
वाकिया नवीस / वाकिया निगार
* डाक प्रणाली का हिस्सा।
* इसका कर्तव्य महत्वपूर्ण सूचना सीधे सम्राट को देना था।
सवानिह निगार
यह गुप्त सेवाओं का हिस्सा था तथा सम्राट को गोपनीय रिपोर्ट भेजता था।
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📍स्थानीय प्रशासन
सरकार के स्तर पर 2 महत्वपूर्ण अधिकारी
परगना प्रशाशन:
ग्राम प्रशासन
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सरकार > परबना (तहसील) > मोजा (गांव)
सरकार के स्तर पर 2 महत्वपूर्ण अधिकारी
फौजदार : सरकार का मुखिया, कानून-व्यवस्था की समस्या का ध्यान रखना, राजस्व संग्रह के मामलों में अमलगुजार की भी मदद करना।
अमलगुजार/आमिलः राजस्व संग्रह का आकलन और पर्यवेक्षणा यह प्रांतीय दीवान को प्राप्तियां और व्यय का विवरण भेजता था।
थानेदार: धाने का मुखिया था जहाँ सेजा तैजात होती थी। इसे फौजदार के अधीन रखा गया था।
परगना प्रशाशन:
शिकवारः परथना का कार्यकारी अधिकारी, राजस्व वसूली में आमिलों की सहायता करता था। आमिल परणना स्तर पर राजस्व वसूली का कार्य।
कानूनगो: अपने क्षेत्र में भूमि से संबंधित सभी अभिलेखों को रखता था। परनना में होने वाली विभिन्न फसलों का विवरण रखता था।
ग्राम प्रशासन
मुकद्दम/मंडल ग्राम प्रधान
पटवारी ग्राम राजस्व अभिलेखों के रखरखाव से संबंधित था।
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रानी वेलु नाच्चियार को ब्रिटिश औपनिवेशिक सत्ता के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली पहली रानी के रूप में जाना जाता है।
वे 1780 में अंग्रेज़ों से निडर होकर लड़ी और उन्हें परास्त किया. उन्हें तमिलनाडु के लोग आज भी वीरमंगई अर्थात बहादुर रानी के नाम से जानते हैं.
जयंती पर सादर नमन 💐🙏
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वे 1780 में अंग्रेज़ों से निडर होकर लड़ी और उन्हें परास्त किया. उन्हें तमिलनाडु के लोग आज भी वीरमंगई अर्थात बहादुर रानी के नाम से जानते हैं.
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