The United Nations Environment Program (UNEP) declared the year 2025 as the International Year of Glacier Conservation. From 2025,
'International Glacier Day' will be celebrated every March 21. This proposal of World Glacier Day was put forward by Tajikistan. The reason for this is that glaciers are melting rapidly in the world. Venezuela has lost all its glaciers and about 1000 glaciers have melted in Tajikistan alone. The IPCC has also accepted that rapid mitigation should be adopted for climate change.
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (unep) ने वर्ष 2025 को ग्लेशियर संरक्षण का अंतरराष्ट्रीय वर्ष घोषित किया।
2025 से प्रत्येक 21 मार्च को 'अंतरराष्ट्रीय ग्लेशियर दिवस' मनाया जाएगा। विश्व ग्लेशियर दिवस का यह प्रस्ताव ताजिकिस्तान ने रखा था। इसका कारण यह है कि विश्व मे ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। वेनेजुएला ने अपना सभी ग्लेशियर खो दिया है तथा अकेले ताजिकिस्तान में लगभग 1000 ग्लेशियर पिघल चुके हैं। ipcc ने भी माना है कि जलवायु परिवर्तन के लिए तीव्र न्यूनीकरण को अपनाया जाना चाहिए ।
#envt
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'International Glacier Day' will be celebrated every March 21. This proposal of World Glacier Day was put forward by Tajikistan. The reason for this is that glaciers are melting rapidly in the world. Venezuela has lost all its glaciers and about 1000 glaciers have melted in Tajikistan alone. The IPCC has also accepted that rapid mitigation should be adopted for climate change.
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (unep) ने वर्ष 2025 को ग्लेशियर संरक्षण का अंतरराष्ट्रीय वर्ष घोषित किया।
2025 से प्रत्येक 21 मार्च को 'अंतरराष्ट्रीय ग्लेशियर दिवस' मनाया जाएगा। विश्व ग्लेशियर दिवस का यह प्रस्ताव ताजिकिस्तान ने रखा था। इसका कारण यह है कि विश्व मे ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। वेनेजुएला ने अपना सभी ग्लेशियर खो दिया है तथा अकेले ताजिकिस्तान में लगभग 1000 ग्लेशियर पिघल चुके हैं। ipcc ने भी माना है कि जलवायु परिवर्तन के लिए तीव्र न्यूनीकरण को अपनाया जाना चाहिए ।
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IPS राजेश NTRO प्रमुख बने !!
राजस्थान कैडर के IPS राजेश आर्य 1994 को नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (NTRO) का हेड बनाया गया है!!
#Appointment
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राजस्थान कैडर के IPS राजेश आर्य 1994 को नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (NTRO) का हेड बनाया गया है!!
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Secure PCS
भारतीय सेना की टुकड़ी, संयुक्त सैन्य अभ्यास सूर्य किरण के 18वें संस्करण में भाग लेने के लिए रवाना हुई है; इस अभ्यास का आयोजन भारत और किस देश के मध्य किया जाएगा?
18वां भारत-नेपाल 'सूर्यकिरण' सैन्य अभ्यास शुरू हुआ
लुम्बिनी प्रांत के रूपन्देही में 18वां 'सूर्यकिरण' सैन्य अभ्यास शुरू हुआ, जिसमें जंगल युद्ध, आतंकवाद निरोध, शांति स्थापना, आपदा राहत और पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान केंद्रित किया गया।
इसमें नेपाल की श्री जंग बटालियन और भारत की 11वीं गोरखा राइफल्स शामिल हैं।
2010 में शुरू किया गया यह अभ्यास सुरक्षा, सांस्कृतिक संबंधों और पेशेवर सहयोग को मजबूत करता है।
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धर्मरक्षा, एक भारतीय बौद्ध भिक्षु, जिसने तीसरी शताब्दी ईस्वी में चीन की यात्रा की थी, को निम्नलिखित में से किस बौद्ध ग्रंथ के चीनी भाषा में सबसे पहले ज्ञात अनुवाद का श्रेय दिया जाता है?
Anonymous Quiz
29%
लोटस सूत्र
32%
महापरिनिर्वाण सूत्र
14%
धम्मपद
25%
अभिधम्म पिटक
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बौद्ध दर्शन के अनुसार, चार आर्य सत्यों के रूप में जानी जाने वाली केंद्रीय शिक्षाएं:
चार आर्य सत्य बौद्ध धर्म की केंद्रीय शिक्षाएँ हैं। वे दुख की प्रकृति और उससे मुक्ति के मार्ग के बारे में बुद्ध की समझ को रेखांकित करते हैं।
पहला महान सत्य दुख (दुक्खा) का सत्य है। यह सिखाता है कि पीड़ा मानव अस्तित्व का एक अंतर्निहित हिस्सा है और यह कि सभी व्यक्ति अपने पूरे जीवन में विभिन्न रूपों में पीड़ा का अनुभव करते हैं।
दूसरा आर्य सत्य दुख के कारण (समुदाय) का सत्य है। यह सिखाता है कि दुख लालसा और आसक्ति से उत्पन्न होता है, अज्ञानता और भ्रम से भर जाता है।
तीसरा आर्य सत्य दुख निरोध (निरोध) का सत्य है। यह सिखाता है कि ज्ञान की खेती और लालसा और आसक्ति के परित्याग से दुख से मुक्ति संभव है।
चौथा आर्य सत्य दुख के निरोध (मग्गा) के मार्ग का सत्य है। यह आठ गुना पथ, पीड़ा से मुक्ति का मार्ग बताता है। आष्टांगिक मार्ग में सम्यक दृष्टि, सम्यक संकल्प, सम्यक वाणी, सम्यक कर्म, सम्यक आजीविका, सम्यक प्रयास, सम्यक स्मृति और सम्यक एकाग्रता शामिल हैं।
संक्षेप में, चार आर्य सत्य दुख की प्रकृति और उससे मुक्ति के मार्ग को समझने के लिए एक प्रारूप प्रदान करते हैं। ये शिक्षाएँ बौद्ध दर्शन और अभ्यास के केंद्र में हैं।
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चार आर्य सत्य बौद्ध धर्म की केंद्रीय शिक्षाएँ हैं। वे दुख की प्रकृति और उससे मुक्ति के मार्ग के बारे में बुद्ध की समझ को रेखांकित करते हैं।
पहला महान सत्य दुख (दुक्खा) का सत्य है। यह सिखाता है कि पीड़ा मानव अस्तित्व का एक अंतर्निहित हिस्सा है और यह कि सभी व्यक्ति अपने पूरे जीवन में विभिन्न रूपों में पीड़ा का अनुभव करते हैं।
दूसरा आर्य सत्य दुख के कारण (समुदाय) का सत्य है। यह सिखाता है कि दुख लालसा और आसक्ति से उत्पन्न होता है, अज्ञानता और भ्रम से भर जाता है।
तीसरा आर्य सत्य दुख निरोध (निरोध) का सत्य है। यह सिखाता है कि ज्ञान की खेती और लालसा और आसक्ति के परित्याग से दुख से मुक्ति संभव है।
चौथा आर्य सत्य दुख के निरोध (मग्गा) के मार्ग का सत्य है। यह आठ गुना पथ, पीड़ा से मुक्ति का मार्ग बताता है। आष्टांगिक मार्ग में सम्यक दृष्टि, सम्यक संकल्प, सम्यक वाणी, सम्यक कर्म, सम्यक आजीविका, सम्यक प्रयास, सम्यक स्मृति और सम्यक एकाग्रता शामिल हैं।
संक्षेप में, चार आर्य सत्य दुख की प्रकृति और उससे मुक्ति के मार्ग को समझने के लिए एक प्रारूप प्रदान करते हैं। ये शिक्षाएँ बौद्ध दर्शन और अभ्यास के केंद्र में हैं।
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बौद्ध दर्शन के अनुसार, चार आर्य सत्यों के रूप में जानी जाने वाली केंद्रीय शिक्षा क्या है?
👍A)सुख का सत्य, सुख के कारण का सत्य, सुख के निरोध का सत्य और सुख के निरोध के मार्ग का सत्य है।
🙏B)दुख का सत्य, दुख के कारण का सत्य, दुख के निरोध का सत्य और दुख के निरोध के मार्ग का सत्य है।
♥️C)प्रेम का सत्य, प्रेम के कारण का सत्य, प्रेम के अंत का सत्य और प्रेम के अंत के मार्ग का सत्य है।
🔥D)ज्ञानोदय का सत्य, ज्ञानोदय के कारण का सत्य, ज्ञानोदय की समाप्ति का सत्य, और ज्ञानोदय की समाप्ति के मार्ग का सत्य है
👍A)सुख का सत्य, सुख के कारण का सत्य, सुख के निरोध का सत्य और सुख के निरोध के मार्ग का सत्य है।
🙏B)दुख का सत्य, दुख के कारण का सत्य, दुख के निरोध का सत्य और दुख के निरोध के मार्ग का सत्य है।
♥️C)प्रेम का सत्य, प्रेम के कारण का सत्य, प्रेम के अंत का सत्य और प्रेम के अंत के मार्ग का सत्य है।
🔥D)ज्ञानोदय का सत्य, ज्ञानोदय के कारण का सत्य, ज्ञानोदय की समाप्ति का सत्य, और ज्ञानोदय की समाप्ति के मार्ग का सत्य है
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बौद्ध धर्म
●बौद्ध धर्म के संस्थापक - गौतम बुद्ध
●चतुर्थ बौद्ध संगीति के उपाध्यक्ष - अश्वघोष
●महात्मा बुद्ध की जन्म स्थली लुम्बिनी वन किस महाजनपद के अंतर्गत आती थी - कोशल महाजनपद
●महात्मा बुद्ध की शौतेली माता का नाम - प्रजापति गौतमी
●बुद्ध के प्रथम दो अनुयायी - काल्लिक तथा तपासु
●बुद्ध ने कितने वर्ष की अवस्था में गृह त्याग किया - 29 वर्ष की आयु में
●महात्मा बुद्ध द्वारा दिया गया अंतिम उपदेश - सभी वस्तुएँ क्षरणशील होती हैं अतः मनुष्य को अपना पथ-प्रदर्शक स्वयं होना चाहिए।
●किसे Light of Asia के नाम से जाना जाता है - महात्मा बुद्ध
●चतुर्थ बौद्ध संगीति किसके शासनकाल में हुई - कनिष्क (कुषाण वंश) के शासनकाल में
●बौद्ध धर्म के त्रिरत्न - बुद्ध, धम्म, संघ
●महात्मा बुद्ध की माता का नाम - मायादेवी
●बुद्धकाल में वाराणसी क्यों प्रसिद्ध था - हाथी दाँत के लिए
●तृतीय बौद्ध संगीति कहाँ, कब तथा किसकी अध्यक्षता में हुई - पाटलिपुत्र में, 251 ई.पू.में, मोग्गलिपुत्त तिस्स की अध्यक्षता में
●गौतम बुद्ध का जन्म कब हुआ - 563 ई.पू.
●जिस स्थान पर बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई वह स्थान - बोधगया
●चतुर्थ बौद्ध संगीति के आयोजन का उद्देश्य - बौद्ध धर्म का दो समप्रदायों में ; हीनयान तथा महायान।
●बुद्धकाल में पत्थर का काम करने वाले कहलाते थे - कोहक
●गौतम बुद्ध के पिता का नाम - शुद्धोधन
●गौतम बुद्ध के बेटे का नाम - राहुल
●बौद्ध साहित्य में प्रयुक्त संथागार शब्द का तात्पर्य - राज्य संचालन के लिये गठित परिषद
●गौतम बुद्ध का जन्म स्थान - कपिलवस्तु का लुम्बिनी नामक स्थान में
●बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश कहाँ दिया - सारनाथ
●महात्मा बुद्ध के गृह त्याग की घटना क्या कहलाती है - महाभिनिष्क्रमण
●तृतीय बौद्ध संगीति का आयोजन किसके शासनकाल में हुआ - सम्राट
अशोक (मौर्य वंश) के शासनकाल में
महात्मा बुद्ध के बचपन का नाम - सिद्धार्थ
बौद्ध धर्म से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां 👆
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●बौद्ध धर्म के संस्थापक - गौतम बुद्ध
●चतुर्थ बौद्ध संगीति के उपाध्यक्ष - अश्वघोष
●महात्मा बुद्ध की जन्म स्थली लुम्बिनी वन किस महाजनपद के अंतर्गत आती थी - कोशल महाजनपद
●महात्मा बुद्ध की शौतेली माता का नाम - प्रजापति गौतमी
●बुद्ध के प्रथम दो अनुयायी - काल्लिक तथा तपासु
●बुद्ध ने कितने वर्ष की अवस्था में गृह त्याग किया - 29 वर्ष की आयु में
●महात्मा बुद्ध द्वारा दिया गया अंतिम उपदेश - सभी वस्तुएँ क्षरणशील होती हैं अतः मनुष्य को अपना पथ-प्रदर्शक स्वयं होना चाहिए।
●किसे Light of Asia के नाम से जाना जाता है - महात्मा बुद्ध
●चतुर्थ बौद्ध संगीति किसके शासनकाल में हुई - कनिष्क (कुषाण वंश) के शासनकाल में
●बौद्ध धर्म के त्रिरत्न - बुद्ध, धम्म, संघ
●महात्मा बुद्ध की माता का नाम - मायादेवी
●बुद्धकाल में वाराणसी क्यों प्रसिद्ध था - हाथी दाँत के लिए
●तृतीय बौद्ध संगीति कहाँ, कब तथा किसकी अध्यक्षता में हुई - पाटलिपुत्र में, 251 ई.पू.में, मोग्गलिपुत्त तिस्स की अध्यक्षता में
●गौतम बुद्ध का जन्म कब हुआ - 563 ई.पू.
●जिस स्थान पर बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई वह स्थान - बोधगया
●चतुर्थ बौद्ध संगीति के आयोजन का उद्देश्य - बौद्ध धर्म का दो समप्रदायों में ; हीनयान तथा महायान।
●बुद्धकाल में पत्थर का काम करने वाले कहलाते थे - कोहक
●गौतम बुद्ध के पिता का नाम - शुद्धोधन
●गौतम बुद्ध के बेटे का नाम - राहुल
●बौद्ध साहित्य में प्रयुक्त संथागार शब्द का तात्पर्य - राज्य संचालन के लिये गठित परिषद
●गौतम बुद्ध का जन्म स्थान - कपिलवस्तु का लुम्बिनी नामक स्थान में
●बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश कहाँ दिया - सारनाथ
●महात्मा बुद्ध के गृह त्याग की घटना क्या कहलाती है - महाभिनिष्क्रमण
●तृतीय बौद्ध संगीति का आयोजन किसके शासनकाल में हुआ - सम्राट
अशोक (मौर्य वंश) के शासनकाल में
महात्मा बुद्ध के बचपन का नाम - सिद्धार्थ
बौद्ध धर्म से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां 👆
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मेजर ध्यानचंद खेल रत्न अवॉर्ड 2024
1. डी गुकेश, शतरंज (विश्व चैंपियन 2024)
2. हरमनप्रीत सिंह, कप्तान भारतीय हॉकी टीम
3. मनु भाकर, शूटिंग (पेरिस ओलंपिक 2024 डबल ब्रोंज)
4. प्रवीण कुमार, हाई जंप (पेरिस पैराओलिंपिक 2024 गोल्ड)
Note: 6 अगस्त 2021 से पहले इस पुरस्कार को राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार के नाम से जाना जाता था।
1. डी गुकेश, शतरंज (विश्व चैंपियन 2024)
2. हरमनप्रीत सिंह, कप्तान भारतीय हॉकी टीम
3. मनु भाकर, शूटिंग (पेरिस ओलंपिक 2024 डबल ब्रोंज)
4. प्रवीण कुमार, हाई जंप (पेरिस पैराओलिंपिक 2024 गोल्ड)
Note: 6 अगस्त 2021 से पहले इस पुरस्कार को राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार के नाम से जाना जाता था।
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WPI का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 करने के लिए प्रोफेसर रमेश चंद की अध्यक्षता में एक 18 सदस्यीय कार्यदल का गठन किया गया है।
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क्या आप जानते हैं?🌻
स्वराज पार्टी(Swaraj Party):–
1जनवरी, 1923 में गठन। इलाहाबाद में सी आर दास व मोतीलाल नेहरू द्वारा।
प्रमुख सदस्य–एनसी केलकर, हुसैन शहीद सुहरावर्दी,सुभाष चंद्र बोस,श्रीनिवास अयंगर।
उद्देश्य–विधान परिषद में प्रवेश कर सरकार के हर कदम का विरोध करना।
इस पार्टी के सदस्य विट्ठलभाई पटेल 1925 में केन्द्रीय विधान सभा के अध्यक्ष बने।
इसने 1923 के चुनाव में केन्द्रीय विधानमंडल की 104 में से 42 सीटें जीतीं।
एम.ए. जिन्ना ने केन्द्रीय विधान सभा में स्वराज पार्टी का समर्थन किया।
1934(रांची) में इस पार्टी ने सर्वप्रथम संविधान सभा का विचार दिया।
1935 में पार्टी का कांग्रेस में विलय।
नोट:–
📍इस पार्टी के प्रयासों से 1928 में सार्वजनिक सुरक्षा विधेयक निरस्त हुआ।
📍मद्रास प्रांत स्वराज्य पार्टी का गठन 1923 में "एस. सत्यमूर्ति व एस. श्रीनिवास आयंगर" द्वारा किया गया।
📍इस पार्टी ने 1919 के अधिनियम की जाँच हेतु 'मुडीमैन समिति' की नियुक्ति करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
#HISTORY #IMP
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निम्नलिखित में से कौन सही सुमेलित नहीं है? (पुस्तक)__ (लेखक)
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Anonymous Quiz
19%
जाफरनामा-ए-आलमगिरी– मिर्जा मुहम्मद काजिम
29%
मासिर-ए-आलमगिरी-मुहम्मद साकी मुस्तैद
33%
तारीख-ए-शाह शुजाई-मीर मुहम्मद मासूम
19%
नुस्खा-ए-दिलकुशा-भीमसेन
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