मन मे सवाल था
चेहरे पर नकाब था
हुस्न की बारीकियों पर पेहरा बेहिसाब था
देख कर लगा उनहें किसी और का इंतज़ार था
पल भर में टुट जाऐ ऐसा वो खाब था
पर ऊस पल भर के खाब में मै शामिल बेशुमार था ।
चेहरे पर नकाब था
हुस्न की बारीकियों पर पेहरा बेहिसाब था
देख कर लगा उनहें किसी और का इंतज़ार था
पल भर में टुट जाऐ ऐसा वो खाब था
पर ऊस पल भर के खाब में मै शामिल बेशुमार था ।