गुमसुम तन्हा क्या सोच रहे हो
अकेले ही अकेले क्या खोज रहे हो
होता है ऐसा तुम पहले तो नहीं हो
मिल जाएगी मंज़िल तुम तलाश कर तो रहे हो।
अकेले ही अकेले क्या खोज रहे हो
होता है ऐसा तुम पहले तो नहीं हो
मिल जाएगी मंज़िल तुम तलाश कर तो रहे हो।
मन मे सवाल था
चेहरे पर नकाब था
हुस्न की बारीकियों पर पेहरा बेहिसाब था
देख कर लगा उनहें किसी और का इंतज़ार था
पल भर में टुट जाऐ ऐसा वो खाब था
पर ऊस पल भर के खाब में मै शामिल बेशुमार था ।
चेहरे पर नकाब था
हुस्न की बारीकियों पर पेहरा बेहिसाब था
देख कर लगा उनहें किसी और का इंतज़ार था
पल भर में टुट जाऐ ऐसा वो खाब था
पर ऊस पल भर के खाब में मै शामिल बेशुमार था ।