INCOSPAR (1962) → बाद में ISRO बना।
🔸 आर्यभट्ट (1975) → भारत का पहला उपग्रह।
🔸 SLV-3 → पहला स्वदेशी रॉकेट।
🔸 PSLV → ISRO का वर्कहॉर्स।
🔸 GSLV → क्रायोजेनिक इंजन वाला भारी प्रक्षेपण यान।
🔸 चंद्रयान-3 → दक्षिणी ध्रुव के निकट सफल लैंडिंग।
🔸 आदित्य-L1 → सूर्य अध्ययन मिशन।
🔸 गगनयान → भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन।
🔸 SSLV → छोटे उपग्रहों के लिए कम लागत वाला रॉकेट।
🔸 कुलशेखरपट्टिनम → भारत का दूसरा स्पेसपोर्ट। 🚀🇮🇳
🔸 आर्यभट्ट (1975) → भारत का पहला उपग्रह।
🔸 SLV-3 → पहला स्वदेशी रॉकेट।
🔸 PSLV → ISRO का वर्कहॉर्स।
🔸 GSLV → क्रायोजेनिक इंजन वाला भारी प्रक्षेपण यान।
🔸 चंद्रयान-3 → दक्षिणी ध्रुव के निकट सफल लैंडिंग।
🔸 आदित्य-L1 → सूर्य अध्ययन मिशन।
🔸 गगनयान → भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन।
🔸 SSLV → छोटे उपग्रहों के लिए कम लागत वाला रॉकेट।
🔸 कुलशेखरपट्टिनम → भारत का दूसरा स्पेसपोर्ट। 🚀🇮🇳
👍3
🧫 ऊतक संवर्धन (Tissue Culture) – परीक्षा उपयोगी संक्षिप्त नोट्स
🔹 प्रमुख तकनीकी शब्दावली
➡️ एक्सप्लांट (Explant) – पौधे का वह भाग (जड़, तना, पत्ती, मेरिस्टेम या कोशिका) जिसे संवर्धन हेतु लिया जाता है।
➡️ कैलस (Callus) – पोषक माध्यम पर कोशिका विभाजन से बनने वाला अव्यवस्थित कोशिका-पुंज।
➡️ पूर्णशक्तता (Totipotency) – एक अकेली पौध कोशिका की सम्पूर्ण पौधा बनाने की क्षमता।
➡️ विसंक्रमण (Sterilization) – माध्यम एवं उपकरणों को सूक्ष्मजीवों से मुक्त करने की प्रक्रिया; इसके लिए सामान्यतः ऑटोक्लेव (Autoclave) का उपयोग किया जाता है।
➡️ इन-विट्रो (In-vitro) – प्रयोगशाला में कृत्रिम परिस्थितियों में की जाने वाली जैविक प्रक्रिया।
🔹 ऊतक संवर्धन के चरण
एक्सप्लांट का चयन एवं विसंक्रमण
उपयुक्त पौध भाग का चयन।
एथिल अल्कोहल एवं अन्य रसायनों से सतह विसंक्रमण।
टीकाकरण (Inoculation) एवं ऊष्मायन (Incubation)
विसंक्रमित एक्सप्लांट को MS Medium पर स्थापित किया जाता है।
नियंत्रित तापमान एवं प्रकाश में कैलस का निर्माण होता है।
पुनर्जनन (Regeneration)
कैलस से जड़ एवं तने का विकास कराया जाता है।
दृढ़ीकरण (Hardening)
प्रयोगशाला में विकसित पौधों को धीरे-धीरे बाहरी वातावरण के अनुकूल बनाया जाता है।
🔹 हार्मोन संतुलन (अत्यंत महत्वपूर्ण)
✅ सबसे लोकप्रिय पोषक माध्यम – मुराशिगे एवं स्कूग माध्यम (MS Medium)
🔸 उच्च साइटोकाइनिन + निम्न ऑक्सिन → तने (Shoot) का विकास
🔸 उच्च ऑक्सिन + निम्न साइटोकाइनिन → जड़ (Root) का विकास
🔹 ऊतक संवर्धन की आधुनिक तकनीकें
1. भ्रूण रक्षण (Embryo Rescue)
➡️ दूरस्थ संकरण (Interspecific Hybridization) में भ्रूण के नष्ट होने की स्थिति में अपरिपक्व भ्रूण को निकालकर कृत्रिम माध्यम पर उगाया जाता है।
➡️ इसका उद्देश्य संकर भ्रूण को जीवित रखना है।
2. कायिक संकरण (Somatic Hybridization)
➡️ दो विभिन्न पौधों की कोशिकाओं के प्रोटोप्लास्ट (Protoplast) का कृत्रिम संलयन कर नया संकर पौधा बनाया जाता है।
➡️ इसमें कोशिका भित्ति हटाई जाती है और प्रोटोप्लास्टों का फ्यूजन कराया जाता है।
उदाहरण:
🍅 टमाटर + 🥔 आलू = पोमेटो (Pomato)
3. विभज्योतक संवर्धन (Meristem Culture)
➡️ वायरस संक्रमित पौधों के शीर्षस्थ विभज्योतक (Meristem) का संवर्धन कर रोगमुक्त पौधे प्राप्त किए जाते हैं।
➡️ केला, आलू, गन्ना आदि में व्यापक उपयोग।
🔹 ऊतक संवर्धन के लाभ
✔️ कम समय में बड़ी संख्या में पौधों का उत्पादन।
✔️ रोगमुक्त पौधों की प्राप्ति।
✔️ दुर्लभ एवं विलुप्तप्राय पौधों का संरक्षण।
✔️ वर्षभर पौध उत्पादन संभव।
✔️ समान गुणों वाले पौधों का तीव्र संवर्धन (Micropropagation)।
📌 एक पंक्ति में याद रखें:
"एक्सप्लांट → कैलस → पुनर्जनन → हार्डनिंग → नया पौधा" 🌱
🔹 प्रमुख तकनीकी शब्दावली
➡️ एक्सप्लांट (Explant) – पौधे का वह भाग (जड़, तना, पत्ती, मेरिस्टेम या कोशिका) जिसे संवर्धन हेतु लिया जाता है।
➡️ कैलस (Callus) – पोषक माध्यम पर कोशिका विभाजन से बनने वाला अव्यवस्थित कोशिका-पुंज।
➡️ पूर्णशक्तता (Totipotency) – एक अकेली पौध कोशिका की सम्पूर्ण पौधा बनाने की क्षमता।
➡️ विसंक्रमण (Sterilization) – माध्यम एवं उपकरणों को सूक्ष्मजीवों से मुक्त करने की प्रक्रिया; इसके लिए सामान्यतः ऑटोक्लेव (Autoclave) का उपयोग किया जाता है।
➡️ इन-विट्रो (In-vitro) – प्रयोगशाला में कृत्रिम परिस्थितियों में की जाने वाली जैविक प्रक्रिया।
🔹 ऊतक संवर्धन के चरण
एक्सप्लांट का चयन एवं विसंक्रमण
उपयुक्त पौध भाग का चयन।
एथिल अल्कोहल एवं अन्य रसायनों से सतह विसंक्रमण।
टीकाकरण (Inoculation) एवं ऊष्मायन (Incubation)
विसंक्रमित एक्सप्लांट को MS Medium पर स्थापित किया जाता है।
नियंत्रित तापमान एवं प्रकाश में कैलस का निर्माण होता है।
पुनर्जनन (Regeneration)
कैलस से जड़ एवं तने का विकास कराया जाता है।
दृढ़ीकरण (Hardening)
प्रयोगशाला में विकसित पौधों को धीरे-धीरे बाहरी वातावरण के अनुकूल बनाया जाता है।
🔹 हार्मोन संतुलन (अत्यंत महत्वपूर्ण)
✅ सबसे लोकप्रिय पोषक माध्यम – मुराशिगे एवं स्कूग माध्यम (MS Medium)
🔸 उच्च साइटोकाइनिन + निम्न ऑक्सिन → तने (Shoot) का विकास
🔸 उच्च ऑक्सिन + निम्न साइटोकाइनिन → जड़ (Root) का विकास
🔹 ऊतक संवर्धन की आधुनिक तकनीकें
1. भ्रूण रक्षण (Embryo Rescue)
➡️ दूरस्थ संकरण (Interspecific Hybridization) में भ्रूण के नष्ट होने की स्थिति में अपरिपक्व भ्रूण को निकालकर कृत्रिम माध्यम पर उगाया जाता है।
➡️ इसका उद्देश्य संकर भ्रूण को जीवित रखना है।
2. कायिक संकरण (Somatic Hybridization)
➡️ दो विभिन्न पौधों की कोशिकाओं के प्रोटोप्लास्ट (Protoplast) का कृत्रिम संलयन कर नया संकर पौधा बनाया जाता है।
➡️ इसमें कोशिका भित्ति हटाई जाती है और प्रोटोप्लास्टों का फ्यूजन कराया जाता है।
उदाहरण:
🍅 टमाटर + 🥔 आलू = पोमेटो (Pomato)
3. विभज्योतक संवर्धन (Meristem Culture)
➡️ वायरस संक्रमित पौधों के शीर्षस्थ विभज्योतक (Meristem) का संवर्धन कर रोगमुक्त पौधे प्राप्त किए जाते हैं।
➡️ केला, आलू, गन्ना आदि में व्यापक उपयोग।
🔹 ऊतक संवर्धन के लाभ
✔️ कम समय में बड़ी संख्या में पौधों का उत्पादन।
✔️ रोगमुक्त पौधों की प्राप्ति।
✔️ दुर्लभ एवं विलुप्तप्राय पौधों का संरक्षण।
✔️ वर्षभर पौध उत्पादन संभव।
✔️ समान गुणों वाले पौधों का तीव्र संवर्धन (Micropropagation)।
📌 एक पंक्ति में याद रखें:
"एक्सप्लांट → कैलस → पुनर्जनन → हार्डनिंग → नया पौधा" 🌱
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🛡️ भारत की प्रमुख वायु रक्षा प्रणालियाँ (Air Defense Systems)
🔹 S-400 ट्राइम्फ (S-400 Triumph)
➡️ रूस द्वारा विकसित विश्व की सबसे उन्नत लंबी दूरी की वायु रक्षा मिसाइल प्रणालियों में से एक।
➡️ भारत ने इसे रूस से खरीदा है।
➡️ मारक क्षमता (Range): लगभग 400 किमी
➡️ एक साथ 36 लक्ष्यों को ट्रैक एवं नष्ट करने की क्षमता।
➡️ लड़ाकू विमान, ड्रोन, क्रूज मिसाइल तथा बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर सकती है।
🔹 MR-SAM / बराक-8 (Medium Range Surface to Air Missile)
➡️ DRDO (भारत) एवं IAI (इज़रायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज) का संयुक्त विकास।
➡️ मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली।
➡️ मारक क्षमता (Range): लगभग 70–100 किमी
➡️ इसमें Active Radar Seeker तकनीक का उपयोग किया गया है।
➡️ लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन एवं एंटी-शिप मिसाइलों के विरुद्ध प्रभावी।
🔹 आकाश (Akash)
➡️ पूर्णतः स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली।
➡️ विकसित संस्था – DRDO, निर्माण – BEL।
➡️ रैमजेट इंजन (Ramjet Engine) तकनीक पर आधारित।
➡️ लक्ष्य पहचान एवं ट्रैकिंग के लिए राजेंद्र रडार (Rajendra Radar) का उपयोग।
➡️ मारक क्षमता (Range): लगभग 25–30 किमी
➡️ भारतीय थल सेना एवं वायु सेना में सफलतापूर्वक तैनात।
📌 त्वरित पुनरावृत्ति (One-Liner Revision)
🔸 S-400 → रूस निर्मित, 400 किमी रेंज, 36 लक्ष्य ट्रैक।
🔸 MR-SAM / बराक-8 → भारत-इज़रायल संयुक्त परियोजना, 70–100 किमी रेंज।
🔸 आकाश → DRDO की स्वदेशी प्रणाली, रैमजेट इंजन, 25–30 किमी रेंज।
✨ ट्रिक:
"S-400 = 400 km, MR-SAM = 100 km तक, Akash = 30 km तक" 🛡️🇮🇳
🔹 S-400 ट्राइम्फ (S-400 Triumph)
➡️ रूस द्वारा विकसित विश्व की सबसे उन्नत लंबी दूरी की वायु रक्षा मिसाइल प्रणालियों में से एक।
➡️ भारत ने इसे रूस से खरीदा है।
➡️ मारक क्षमता (Range): लगभग 400 किमी
➡️ एक साथ 36 लक्ष्यों को ट्रैक एवं नष्ट करने की क्षमता।
➡️ लड़ाकू विमान, ड्रोन, क्रूज मिसाइल तथा बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर सकती है।
🔹 MR-SAM / बराक-8 (Medium Range Surface to Air Missile)
➡️ DRDO (भारत) एवं IAI (इज़रायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज) का संयुक्त विकास।
➡️ मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली।
➡️ मारक क्षमता (Range): लगभग 70–100 किमी
➡️ इसमें Active Radar Seeker तकनीक का उपयोग किया गया है।
➡️ लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन एवं एंटी-शिप मिसाइलों के विरुद्ध प्रभावी।
🔹 आकाश (Akash)
➡️ पूर्णतः स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली।
➡️ विकसित संस्था – DRDO, निर्माण – BEL।
➡️ रैमजेट इंजन (Ramjet Engine) तकनीक पर आधारित।
➡️ लक्ष्य पहचान एवं ट्रैकिंग के लिए राजेंद्र रडार (Rajendra Radar) का उपयोग।
➡️ मारक क्षमता (Range): लगभग 25–30 किमी
➡️ भारतीय थल सेना एवं वायु सेना में सफलतापूर्वक तैनात।
📌 त्वरित पुनरावृत्ति (One-Liner Revision)
🔸 S-400 → रूस निर्मित, 400 किमी रेंज, 36 लक्ष्य ट्रैक।
🔸 MR-SAM / बराक-8 → भारत-इज़रायल संयुक्त परियोजना, 70–100 किमी रेंज।
🔸 आकाश → DRDO की स्वदेशी प्रणाली, रैमजेट इंजन, 25–30 किमी रेंज।
✨ ट्रिक:
"S-400 = 400 km, MR-SAM = 100 km तक, Akash = 30 km तक" 🛡️🇮🇳
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भारत का पहला 'लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर' (LSD) राष्ट्रीय बायोबैंक किस शहर में स्थापित किया गया है?
Anonymous Quiz
19%
A) बेंगलुरु
60%
B) अहमदाबाद
19%
C) नई दिल्ली
1%
D) मुंबई
CRISPR-Cas9 तकनीक: संपूर्ण नोट्स
CRISPR-Cas9 को विज्ञान की दुनिया में "जीनोम की आणविक कैंची" (Molecular Scissors) कहा जाता है। यह एक क्रांतिकारी जीन-एडिटिंग (Gene Editing) तकनीक है, जिसकी मदद से वैज्ञानिक किसी भी जीव (इंसान, पौधे या जानवर) के DNA को बहुत सटीकता से बदल, हटा या सुधार सकते हैं।
1. पूरा नाम (Full Forms)
CRISPR: Clustered Regularly Interspaced Short Palindromic Repeats
(हिंदी: क्लस्टर्ड रेगुलरली इंटरस्पेस्ड शॉर्ट पालिंड्रोमिक रिपीट्स)
Cas9: CRISPR-associated protein 9
(हिंदी: क्रिसपर-असोसिएटेड प्रोटीन 9)
2. इसके मुख्य भाग और भूमिका
यह तकनीक मुख्य रूप से दो घटकों (Components) से मिलकर बनी है:
1. Cas9 एंजाइम (कैंची): यह एक विशेष प्रोटीन है जो DNA को एक निश्चित स्थान से काटने का काम करता है।
2. gRNA (गाइड RNA - GPS): यह एक छोटा, लैब में तैयार किया गया RNA सीक्वेंस होता है। इसका काम Cas9 कैंची को DNA के उस खास हिस्से तक ले जाना होता है जिसे काटना या बदलना है। यह बिल्कुल एक GPS या गाइड की तरह काम करता है।
3. यह तकनीक काम कैसे करती है? (Mechanism)
चरण 1: पहचान और खोजना (Targeting)
सबसे पहले वैज्ञानिक शरीर के उस खराब या बीमारी वाले जीन (DNA सीक्वेंस) की पहचान करते हैं जिसे बदलना है। इसके बाद उसके पूरक (Complementary) RNA का एक टुकड़ा (gRNA) तैयार किया जाता है। यह gRNA, Cas9 कैंची को अपने साथ लेकर DNA के उसी सटीक हिस्से पर जाकर चिपक जाता है।
चरण 2: काटना (Cutting)
जैसे ही gRNA अपनी सही जगह ढूंढ लेता है, उसके साथ जुड़ा Cas9 एंजाइम सक्रिय (Active) हो जाता है। यह DNA के दोनों धागों (Strands) को उस तय स्थान से काट देता है।
चरण 3: मरम्मत और सुधार (Repairing & Editing)
DNA के कटने के बाद, कोशिका (Cell) का अपना प्राकृतिक रिपेयर सिस्टम काम शुरू करता है। इस समय वैज्ञानिक दो काम कर सकते हैं:
जीन नॉकआउट (Knockout): कोशिका जब खुद DNA को जोड़ती है, तो अक्सर एक छोटी सी गलती हो जाती है, जिससे वह खराब जीन हमेशा के लिए काम करना बंद कर देता है।
नया जीन जोड़ना (Knockin): वैज्ञानिक कटे हुए स्थान पर एक नया, स्वस्थ DNA का टुकड़ा डाल देते हैं। कोशिका मरम्मत करते समय इस नए टुकड़े को जोड़ लेती है, जिससे बीमारी वाला जीन सही जीन से बदल जाता है।
4. यह तकनीक इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
CRISPR से पहले भी जीन एडिटिंग की तकनीकें (जैसे TALENs और ZFNs) मौजूद थीं, लेकिन CRISPR के आने से यह काम:
अत्यधिक सटीक (Highly Precise) हो गया है।
बहुत सस्ता और किफायती है।
तेज और आसान है, जिससे लैब्स में रिसर्च की गति बढ़ गई है।
नोबेल पुरस्कार:
इस क्रांतिकारी खोज के लिए वैज्ञानिक Emmanuelle Charpentier और Jennifer Doudna को वर्ष 2020 का रसायन विज्ञान (Chemistry) का नोबेल पुरस्कार दिया गया।
5. प्रमुख अनुप्रयोग (Applications)
चिकित्सा (Medical): सिकल सेल एनीमिया, थैलेसीमिया, एड्स (HIV) और कुछ प्रकार के कैंसर जैसी आनुवंशिक (Genetic) बीमारियों के इलाज के लिए इसके क्लिनिकल ट्रायल चल रहे हैं।
कृषि (Agriculture): ऐसी जलवायु-अनुकूल फसलें तैयार करना जो सूखे या कीड़ों से बच सकें तथा जिनमें पोषण की मात्रा अधिक हो (जैसे बायो-फोर्टिफाइड फसलें)।
अंग प्रत्यारोपण (Xenotransplantation): सूअर के अंगों के DNA को बदलकर उन्हें इंसानी शरीर के अनुकूल बनाने पर शोध चल रहा है।
6. चुनौतियाँ और नैतिक चिंताएँ (Ethical Concerns)
ऑफ-टारगेट इफेक्ट्स (Off-target Effects): कभी-कभी Cas9 कैंची गलती से किसी दूसरे स्वस्थ जीन को काट सकती है, जिससे नए अनचाहे म्यूटेशन या बीमारियाँ हो सकती हैं।
डिज़ाइनर बेबीज़ (Designer Babies): यदि इस तकनीक का उपयोग बच्चों के रंग, बुद्धिमत्ता या शारीरिक बनावट को मनमुताबिक बदलने के लिए किया जाने लगे, तो यह नैतिक और सामाजिक रूप से बड़ी असमानता पैदा कर सकता है।
पारिस्थितिक संतुलन (Ecological Balance): मच्छरों या अन्य जीवों के जीन में बदलाव करने से पूरी खाद्य श्रृंखला (Food Chain) प्रभावित हो सकती है।
CRISPR-Cas9 को विज्ञान की दुनिया में "जीनोम की आणविक कैंची" (Molecular Scissors) कहा जाता है। यह एक क्रांतिकारी जीन-एडिटिंग (Gene Editing) तकनीक है, जिसकी मदद से वैज्ञानिक किसी भी जीव (इंसान, पौधे या जानवर) के DNA को बहुत सटीकता से बदल, हटा या सुधार सकते हैं।
1. पूरा नाम (Full Forms)
CRISPR: Clustered Regularly Interspaced Short Palindromic Repeats
(हिंदी: क्लस्टर्ड रेगुलरली इंटरस्पेस्ड शॉर्ट पालिंड्रोमिक रिपीट्स)
Cas9: CRISPR-associated protein 9
(हिंदी: क्रिसपर-असोसिएटेड प्रोटीन 9)
2. इसके मुख्य भाग और भूमिका
यह तकनीक मुख्य रूप से दो घटकों (Components) से मिलकर बनी है:
1. Cas9 एंजाइम (कैंची): यह एक विशेष प्रोटीन है जो DNA को एक निश्चित स्थान से काटने का काम करता है।
2. gRNA (गाइड RNA - GPS): यह एक छोटा, लैब में तैयार किया गया RNA सीक्वेंस होता है। इसका काम Cas9 कैंची को DNA के उस खास हिस्से तक ले जाना होता है जिसे काटना या बदलना है। यह बिल्कुल एक GPS या गाइड की तरह काम करता है।
3. यह तकनीक काम कैसे करती है? (Mechanism)
चरण 1: पहचान और खोजना (Targeting)
सबसे पहले वैज्ञानिक शरीर के उस खराब या बीमारी वाले जीन (DNA सीक्वेंस) की पहचान करते हैं जिसे बदलना है। इसके बाद उसके पूरक (Complementary) RNA का एक टुकड़ा (gRNA) तैयार किया जाता है। यह gRNA, Cas9 कैंची को अपने साथ लेकर DNA के उसी सटीक हिस्से पर जाकर चिपक जाता है।
चरण 2: काटना (Cutting)
जैसे ही gRNA अपनी सही जगह ढूंढ लेता है, उसके साथ जुड़ा Cas9 एंजाइम सक्रिय (Active) हो जाता है। यह DNA के दोनों धागों (Strands) को उस तय स्थान से काट देता है।
चरण 3: मरम्मत और सुधार (Repairing & Editing)
DNA के कटने के बाद, कोशिका (Cell) का अपना प्राकृतिक रिपेयर सिस्टम काम शुरू करता है। इस समय वैज्ञानिक दो काम कर सकते हैं:
जीन नॉकआउट (Knockout): कोशिका जब खुद DNA को जोड़ती है, तो अक्सर एक छोटी सी गलती हो जाती है, जिससे वह खराब जीन हमेशा के लिए काम करना बंद कर देता है।
नया जीन जोड़ना (Knockin): वैज्ञानिक कटे हुए स्थान पर एक नया, स्वस्थ DNA का टुकड़ा डाल देते हैं। कोशिका मरम्मत करते समय इस नए टुकड़े को जोड़ लेती है, जिससे बीमारी वाला जीन सही जीन से बदल जाता है।
4. यह तकनीक इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
CRISPR से पहले भी जीन एडिटिंग की तकनीकें (जैसे TALENs और ZFNs) मौजूद थीं, लेकिन CRISPR के आने से यह काम:
अत्यधिक सटीक (Highly Precise) हो गया है।
बहुत सस्ता और किफायती है।
तेज और आसान है, जिससे लैब्स में रिसर्च की गति बढ़ गई है।
नोबेल पुरस्कार:
इस क्रांतिकारी खोज के लिए वैज्ञानिक Emmanuelle Charpentier और Jennifer Doudna को वर्ष 2020 का रसायन विज्ञान (Chemistry) का नोबेल पुरस्कार दिया गया।
5. प्रमुख अनुप्रयोग (Applications)
चिकित्सा (Medical): सिकल सेल एनीमिया, थैलेसीमिया, एड्स (HIV) और कुछ प्रकार के कैंसर जैसी आनुवंशिक (Genetic) बीमारियों के इलाज के लिए इसके क्लिनिकल ट्रायल चल रहे हैं।
कृषि (Agriculture): ऐसी जलवायु-अनुकूल फसलें तैयार करना जो सूखे या कीड़ों से बच सकें तथा जिनमें पोषण की मात्रा अधिक हो (जैसे बायो-फोर्टिफाइड फसलें)।
अंग प्रत्यारोपण (Xenotransplantation): सूअर के अंगों के DNA को बदलकर उन्हें इंसानी शरीर के अनुकूल बनाने पर शोध चल रहा है।
6. चुनौतियाँ और नैतिक चिंताएँ (Ethical Concerns)
ऑफ-टारगेट इफेक्ट्स (Off-target Effects): कभी-कभी Cas9 कैंची गलती से किसी दूसरे स्वस्थ जीन को काट सकती है, जिससे नए अनचाहे म्यूटेशन या बीमारियाँ हो सकती हैं।
डिज़ाइनर बेबीज़ (Designer Babies): यदि इस तकनीक का उपयोग बच्चों के रंग, बुद्धिमत्ता या शारीरिक बनावट को मनमुताबिक बदलने के लिए किया जाने लगे, तो यह नैतिक और सामाजिक रूप से बड़ी असमानता पैदा कर सकता है।
पारिस्थितिक संतुलन (Ecological Balance): मच्छरों या अन्य जीवों के जीन में बदलाव करने से पूरी खाद्य श्रृंखला (Food Chain) प्रभावित हो सकती है।
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🟢 दुनिया के सबसे तेज़ सुपरकंप्यूटर की TOP500 लिस्ट
🟢 जर्मनी के हैम्बर्ग में घोषित छमाही रैंकिंग के अनुसार, चीन का LineShine दुनिया का सबसे शक्तिशाली सिस्टम बन गया है और इसने अमेरिका के El Capitan को पीछे छोड़ दिया है।
🟢 नवीनतम TOP500 लिस्ट के अनुसार, शेन्ज़ेन में नेशनल सुपरकंप्यूटिंग सेंटर में स्थित 'लाइनशाइन' (LineShine) ने 2.198 एक्साफ्लॉप्स (exaflops) की परफॉर्मेंस हासिल की है।
🟢 यह प्रति सेकंड 2 क्विंटिलियन से ज़्यादा कैलकुलेशन करता है, जो 'एल कैपिटन' (El Capitan) से 20 प्रतिशत ज़्यादा है।
🟢 लाइनशाइन की यह रैंकिंग बताती है कि 2017 में 'सनवे ताइहुलाइट' (Sunway TaihuLight) के बाद पहली बार किसी चीनी सिस्टम ने लिस्ट में टॉप किया है।
🟢 TOP500 लिस्ट के अनुसार, LineShine पहला और एकमात्र ऐसा सिस्टम है जिसने सिर्फ़ CPU वाले डिज़ाइन का इस्तेमाल करके 2 exaflops से ज़्यादा परफॉर्मेंस हासिल की है।
🟢 यह लिस्ट 1993 से हर साल दो बार पब्लिश की जा रही है, जब कंप्यूटर साइंटिस्ट एरिक स्ट्रोहमेयर और हंस मेउर ने इस विषय पर एक कॉन्फ्रेंस की तैयारी के लिए दुनिया भर के सुपरकंप्यूटर के आंकड़े पहली बार इकट्ठा किए थे।
🟢 अन्य सुपर कंप्यूटर
🟢 दूसरा स्थान - 'एल कैपिटन', कैलिफोर्निया के लिवरमोर में लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी।
🟢 तीसरा स्थान - 'फ्रंटियर' (Frontier), ओक रिज, टेनेसी में ओक रिज नेशनल लेबोरेटरी।
🟢 चौथा स्थान - 'ऑरोरा' (Aurora), इलिनोइस में आर्गोन नेशनल लेबोरेटरी।
🟢 पाँचवाँ स्थान - 'जुपिटर' (Jupiter), जूलिच, जर्मनी में जूलिच सुपरकंप्यूटिंग सेंटर।
🟢 टॉप 20 में शामिल अन्य देशों में यूनाइटेड किंगडम, जापान, दक्षिण कोरिया, इटली, नीदरलैंड और स्विट्जरलैंड शामिल थे।
🟢 टॉप 500 सूची में भारत के सुपरकंप्यूटर
🟢 32वां - पॉवरएज XE9680, Xeon प्लैटिनम, शक्ति क्लाउड, योट्टा डेटा सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, मुंबई, महाराष्ट्र।
🟢 211वां - AIRAWAT, सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC), पुणे, महाराष्ट्र, भारत।
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#QuickRevisionSeries
🔳महत्वपूर्ण हार्मोन और उनके कार्य
#AbNahiRukegaPrelims
🔳महत्वपूर्ण हार्मोन और उनके कार्य
◼️एस्ट्रोजेन:यह प्रजनन, मासिक धर्म चक्र और रजोनिवृत्ति (menopause) के लिए ज़िम्मेदार है
◼️प्रोजेस्टेरोन:यह गर्भावस्था बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है
◼️प्रोलैक्टिन: बच्चे के जन्म के बाद, स्तनपान कराने के लिए यह हार्मोन महिला में पिट्यूटरी ग्रंथि द्वारा रिलीज़ होता है,
◼️टेस्टोस्टेरोन:पुरुषों में यह पुरुष प्रजनन ऊतकों टेस्टिस (testes) और प्रोस्ट्रेट (prostrate) के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है
◼️इंसुलिन:यह ब्लड शुगर के लेवल को कंट्रोल करता है.
#AbNahiRukegaPrelims
❤2
#QuickRevisionSeries
🔳पादप हार्मोन और उनके कार्य
#AbNahiRukegaPrelims
🔳पादप हार्मोन और उनके कार्य
◼️(a)ऑक्सिन- कोशिकाओं की लम्बाई में वृद्धि, कोशिका विभाजन में सहयोग, पौधों की गतियों पर नियन्त्रण, पत्तियों को गिरने से रोकना, बीज रहित फलों के उत्पादन में सहायता करना।
◼️(b) जिबरेलिन- बीजों के शीघ्र अंकुरण में सहायक, बौने पौधों की लम्बाई में वृद्धि, पौधों की पत्तियों को चौड़ी करने में सहायता करना।
◼️(c) साइटोकाइनिन- प्रोटीन के संश्लेषण में सहायक, कोशिकाओं एवं तने की लम्बाई में वदि पार्श्व कलिकाओं में वृद्धि, जड़ों एवं पत्तियों की वृद्धि रोकने में सहायक एवं अंकुरण के समय उत्प्रेरक उत्पन्न करना
◼️(d) एब्सिसिक अम्ल (ABC) वृद्धि रोधक- पत्तियों के एवं फूलों के खुलने एवं बन्द करने की क्रियाओं का नियन्त्रण, पतझड़ की क्रिया को प्रोत्साहित करना तथा पौधों की वृद्धि दर को कम करना।
#AbNahiRukegaPrelims
❤3
#QuickRevisionSeries
🔳महत्वपूर्ण विटामिन और उनकी कमी से होने वाले रोग
#AbNahiRukegaPrelims
🔳महत्वपूर्ण विटामिन और उनकी कमी से होने वाले रोग
◼️विटामिन ए (रेटिनॉल)- रतौंधी व जीरफ्थेल्मिया, संक्रमण के प्रति प्रभाव्यता
◼️विटामिन बी1(थायमिन) -- वृद्धि का रुकना, भूख और वजन का घटना, बेरी-बेरी, थकान का होना, पेट की खराबी
◼️विटामिन बी2 (राइबोफ्लेविन) -जीभ पर छाले का पड़ जाना, असमय बुढ़ापा आना, प्रकाश न सह पाना,चीलोसिस
◼️विटामिन बी3 (निआसिन) - जीभ का चिकनापन, त्वचा पर फोड़े फुंसी होना, पाचन क्रिया में गड़बड़ी
◼️विटामिन बी5 (पैंटोथेनिक एसिड) - पेशियों में लकवा, पैरों में जलन आदि।
◼️विटामिन बी6 (पाईरिडॉक्सिन) - त्वचा रोग, मस्तिष्क का ठीक से काम ना करना, अनीमिया
#AbNahiRukegaPrelims
👍1
#OFFICERSACADMY
🔳पादप हार्मोन और उनके कार्य
◼️(a)ऑक्सिन- कोशिकाओं की लम्बाई में वृद्धि, कोशिका विभाजन में सहयोग, पौधों की गतियों पर नियन्त्रण, पत्तियों को गिरने से रोकना, बीज रहित फलों के उत्पादन में सहायता करना।
◼️(b) जिबरेलिन- बीजों के शीघ्र अंकुरण में सहायक, बौने पौधों की लम्बाई में वृद्धि, पौधों की पत्तियों को चौड़ी करने में सहायता करना।
◼️(c) साइटोकाइनिन- प्रोटीन के संश्लेषण में सहायक, कोशिकाओं एवं तने की लम्बाई में वदि पार्श्व कलिकाओं में वृद्धि, जड़ों एवं पत्तियों की वृद्धि रोकने में सहायक एवं अंकुरण के समय उत्प्रेरक उत्पन्न करना
◼️(d) एब्सिसिक अम्ल (ABC) वृद्धि रोधक- पत्तियों के एवं फूलों के खुलने एवं बन्द करने की क्रियाओं का नियन्त्रण, पतझड़ की क्रिया को प्रोत्साहित करना तथा पौधों की वृद्धि दर को कम करना।
🔳पादप हार्मोन और उनके कार्य
◼️(a)ऑक्सिन- कोशिकाओं की लम्बाई में वृद्धि, कोशिका विभाजन में सहयोग, पौधों की गतियों पर नियन्त्रण, पत्तियों को गिरने से रोकना, बीज रहित फलों के उत्पादन में सहायता करना।
◼️(b) जिबरेलिन- बीजों के शीघ्र अंकुरण में सहायक, बौने पौधों की लम्बाई में वृद्धि, पौधों की पत्तियों को चौड़ी करने में सहायता करना।
◼️(c) साइटोकाइनिन- प्रोटीन के संश्लेषण में सहायक, कोशिकाओं एवं तने की लम्बाई में वदि पार्श्व कलिकाओं में वृद्धि, जड़ों एवं पत्तियों की वृद्धि रोकने में सहायक एवं अंकुरण के समय उत्प्रेरक उत्पन्न करना
◼️(d) एब्सिसिक अम्ल (ABC) वृद्धि रोधक- पत्तियों के एवं फूलों के खुलने एवं बन्द करने की क्रियाओं का नियन्त्रण, पतझड़ की क्रिया को प्रोत्साहित करना तथा पौधों की वृद्धि दर को कम करना।
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#OFFICERSACADMY
🔳महत्वपूर्ण हार्मोन और उनके कार्य
◼️एस्ट्रोजेन:यह प्रजनन, मासिक धर्म चक्र और रजोनिवृत्ति (menopause) के लिए ज़िम्मेदार है
◼️प्रोजेस्टेरोन:यह गर्भावस्था बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है
◼️प्रोलैक्टिन: बच्चे के जन्म के बाद, स्तनपान कराने के लिए यह हार्मोन महिला में पिट्यूटरी ग्रंथि द्वारा रिलीज़ होता है,
◼️टेस्टोस्टेरोन:पुरुषों में यह पुरुष प्रजनन ऊतकों टेस्टिस (testes) और प्रोस्ट्रेट (prostrate) के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है
◼️इंसुलिन:यह ब्लड शुगर के लेवल को कंट्रोल करता है.
🔳महत्वपूर्ण हार्मोन और उनके कार्य
◼️एस्ट्रोजेन:यह प्रजनन, मासिक धर्म चक्र और रजोनिवृत्ति (menopause) के लिए ज़िम्मेदार है
◼️प्रोजेस्टेरोन:यह गर्भावस्था बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है
◼️प्रोलैक्टिन: बच्चे के जन्म के बाद, स्तनपान कराने के लिए यह हार्मोन महिला में पिट्यूटरी ग्रंथि द्वारा रिलीज़ होता है,
◼️टेस्टोस्टेरोन:पुरुषों में यह पुरुष प्रजनन ऊतकों टेस्टिस (testes) और प्रोस्ट्रेट (prostrate) के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है
◼️इंसुलिन:यह ब्लड शुगर के लेवल को कंट्रोल करता है.
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० प्रदूषक और उससे प्रभावित अंग :-
• एस्बेस्टस धूल - फेफड़ा
• सीसा - केंद्रीय नर्वस सिस्टम
• कार्बन मोनोऑक्साइड - रक्त धाराएं
• पारा- उदर
• फ्लोराइड - दांत
#Prelims
#PYQFacts
#PCS2026
#PrelimsModeActivated_
• एस्बेस्टस धूल - फेफड़ा
• सीसा - केंद्रीय नर्वस सिस्टम
• कार्बन मोनोऑक्साइड - रक्त धाराएं
• पारा- उदर
• फ्लोराइड - दांत
#Prelims
#PYQFacts
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० वायु प्रदूषण (Air Pollution) :-
• वायु प्रदूषण से आशय वायु में हानिकारक गैसों, धूल एवं कणों की मात्रा सामान्य स्तर से अधिक हो जाने से है।
• वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोत – वाहन, उद्योग, ताप विद्युत संयंत्र, जीवाश्म ईंधनों का दहन एवं पराली जलाना हैं।
• प्रमुख वायु प्रदूषक – PM₂.₅, PM₁₀, सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOₓ), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), ओजोन (O₃), सीसा (Pb) एवं अमोनिया (NH₃) हैं।
• PM₂.₅ सबसे सूक्ष्म एवं सर्वाधिक हानिकारक कणीय प्रदूषक माना जाता है।
• PM₁₀ का आकार 10 माइक्रोमीटर से कम तथा PM₂.₅ का आकार 2.5 माइक्रोमीटर से कम होता है।
• कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) हीमोग्लोबिन से मिलकर कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन (Carboxyhaemoglobin) बनाती है।
• सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) एवं नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOₓ) अम्लीय वर्षा (Acid Rain) के प्रमुख कारण हैं।
• क्षोभमंडलीय ओजोन (Tropospheric Ozone) एक हानिकारक वायु प्रदूषक है।
• स्मॉग (Smog) धुआँ (Smoke) एवं कोहरे (Fog) का मिश्रण है।
• प्रकाश-रासायनिक स्मॉग (Photochemical Smog) का प्रमुख कारण NOₓ एवं हाइड्रोकार्बन हैं।
• शीत ऋतु में दिल्ली एवं उत्तर भारत में स्मॉग की समस्या अधिक देखी जाती है।
• वायु प्रदूषण से दमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों के रोग, हृदय रोग एवं आँखों में जलन जैसी समस्याएँ होती हैं।
• वायु गुणवत्ता को वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) द्वारा मापा जाता है।
• AQI जितना अधिक होगा, वायु की गुणवत्ता उतनी ही खराब होगी।
• भारत में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) वर्ष 2019 में प्रारंभ किया गया।
• विश्व पर्यावरण दिवस प्रत्येक वर्ष 5 जून को मनाया जाता है।
० क्विक रिवीजन :-
• सबसे हानिकारक कणीय प्रदूषक → PM₂.₅
• अम्लीय वर्षा के प्रमुख कारण → SO₂ एवं NOₓ
• CO बनाती है → कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन
• स्मॉग → धुआँ + कोहरा
• प्रकाश-रासायनिक स्मॉग → NOₓ + हाइड्रोकार्बन
• वायु गुणवत्ता का सूचक → AQI
• राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम → 2019
• विश्व पर्यावरण दिवस → 5 जून
#Prelims
#PCS2026
#PYQFacts
#PrelimsModeActivated
• वायु प्रदूषण से आशय वायु में हानिकारक गैसों, धूल एवं कणों की मात्रा सामान्य स्तर से अधिक हो जाने से है।
• वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोत – वाहन, उद्योग, ताप विद्युत संयंत्र, जीवाश्म ईंधनों का दहन एवं पराली जलाना हैं।
• प्रमुख वायु प्रदूषक – PM₂.₅, PM₁₀, सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOₓ), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), ओजोन (O₃), सीसा (Pb) एवं अमोनिया (NH₃) हैं।
• PM₂.₅ सबसे सूक्ष्म एवं सर्वाधिक हानिकारक कणीय प्रदूषक माना जाता है।
• PM₁₀ का आकार 10 माइक्रोमीटर से कम तथा PM₂.₅ का आकार 2.5 माइक्रोमीटर से कम होता है।
• कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) हीमोग्लोबिन से मिलकर कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन (Carboxyhaemoglobin) बनाती है।
• सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) एवं नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOₓ) अम्लीय वर्षा (Acid Rain) के प्रमुख कारण हैं।
• क्षोभमंडलीय ओजोन (Tropospheric Ozone) एक हानिकारक वायु प्रदूषक है।
• स्मॉग (Smog) धुआँ (Smoke) एवं कोहरे (Fog) का मिश्रण है।
• प्रकाश-रासायनिक स्मॉग (Photochemical Smog) का प्रमुख कारण NOₓ एवं हाइड्रोकार्बन हैं।
• शीत ऋतु में दिल्ली एवं उत्तर भारत में स्मॉग की समस्या अधिक देखी जाती है।
• वायु प्रदूषण से दमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों के रोग, हृदय रोग एवं आँखों में जलन जैसी समस्याएँ होती हैं।
• वायु गुणवत्ता को वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) द्वारा मापा जाता है।
• AQI जितना अधिक होगा, वायु की गुणवत्ता उतनी ही खराब होगी।
• भारत में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) वर्ष 2019 में प्रारंभ किया गया।
• विश्व पर्यावरण दिवस प्रत्येक वर्ष 5 जून को मनाया जाता है।
० क्विक रिवीजन :-
• सबसे हानिकारक कणीय प्रदूषक → PM₂.₅
• अम्लीय वर्षा के प्रमुख कारण → SO₂ एवं NOₓ
• CO बनाती है → कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन
• स्मॉग → धुआँ + कोहरा
• प्रकाश-रासायनिक स्मॉग → NOₓ + हाइड्रोकार्बन
• वायु गुणवत्ता का सूचक → AQI
• राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम → 2019
• विश्व पर्यावरण दिवस → 5 जून
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एस्ट्रोबेस स्पेस टेक्नोलॉजीज भारत का पहला फुल फ्लो स्टेजेड कम्बशन (FFSC) रॉकेट इंजन विकसित कर रहा है। यह देश के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में एक बड़ा कदम है।
80 टन क्लास का यह इंजन लिक्विड ऑक्सीजन (LOX) और लिक्विड मीथेन का उपयोग करता है, जो रियूजेबल लॉन्च व्हीकल्स के लिए एक कुशल प्रोपेलेंट (ईंधन) का मिश्रण है।
एडवांस्ड 3D प्रिंटिंग का उपयोग करके, कंपनी ने इंजन के विकास में तेजी लाई है और अपने LOX पावरहेड को हॉट फायर टेस्टिंग के लिए तैयार कर रही है। आंध्र प्रदेश में 21.5 एकड़ की सुविधा से संचालित, एस्ट्रोबेस 2026 के अंत तक पूरी तरह से एकीकृत इंजन परीक्षणों की योजना बना रहा है और 2028 तक अपना पहला मीडियम लिफ्ट रॉकेट लॉन्च करने का लक्ष्य रखता है।
80 टन क्लास का यह इंजन लिक्विड ऑक्सीजन (LOX) और लिक्विड मीथेन का उपयोग करता है, जो रियूजेबल लॉन्च व्हीकल्स के लिए एक कुशल प्रोपेलेंट (ईंधन) का मिश्रण है।
एडवांस्ड 3D प्रिंटिंग का उपयोग करके, कंपनी ने इंजन के विकास में तेजी लाई है और अपने LOX पावरहेड को हॉट फायर टेस्टिंग के लिए तैयार कर रही है। आंध्र प्रदेश में 21.5 एकड़ की सुविधा से संचालित, एस्ट्रोबेस 2026 के अंत तक पूरी तरह से एकीकृत इंजन परीक्षणों की योजना बना रहा है और 2028 तक अपना पहला मीडियम लिफ्ट रॉकेट लॉन्च करने का लक्ष्य रखता है।
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० “विद्युत चुंबकीय तरंग ऊर्जा/आवृति के घटते क्रम में–
• गामा किरण(Gamma-rays)
• एक्स-रे वेव(X–rays)
• पराबैंगनी तरंग(Ultraviolet wave)
• दृश्य तरंग(Visible wave)
• अवरक्त तरंग(Infrared wave)
• माइक्रोवेव(Microwave)
• रेडियो वेव(Radio wave)
#Prelims
#PYQFacts
#PCS2026
#PrelimsModeActivated
• गामा किरण(Gamma-rays)
• एक्स-रे वेव(X–rays)
• पराबैंगनी तरंग(Ultraviolet wave)
• दृश्य तरंग(Visible wave)
• अवरक्त तरंग(Infrared wave)
• माइक्रोवेव(Microwave)
• रेडियो वेव(Radio wave)
#Prelims
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#QuickRevisionSeries
🔳विटामिन और उनकी कमी से होने वाले रोग
🔳विटामिन और उनकी कमी से होने वाले रोग
◼️विटामिन A( रेटिनोल )-रतौंधी
◼️विटामिन C( एस्कोरबिक एसिड)- स्कर्वी रोग
◼️विटामिन D( कैलशिफेराल )-रिकेट्स (बच्चों में) ऑस्टियोमालासिया (वयस्क में)
◼️विटामिन E (टोकॉफरोल)- जनन शक्ति का कम होना
◼️विटामिन K (फाइलोक्वीनोन) - रक्त का थक्का न बनाना
#QuickRevisionSeries
🔳दैनिक प्रयोग में आने वाले दवाइयों के प्रकार
#AbNahiRukegaPrelims
🔳दैनिक प्रयोग में आने वाले दवाइयों के प्रकार
◼️एंटासिड- पेट में अतिरिक्त एसिड को काम करते हैं (जैसे -मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड,ENO आदि )
◼️ट्रेंकुलाइजर -तनाव और मानसिक बीमारी के इलाज में
◼️एनाल्जेसिक- दर्द से राहत देने के लिए (एस्प्रिन ,आदि)
◼️नारकोटिक एनाल्जेसिक- दर्द निवारक जो लत का कारण बन सकते हैं ( जैसे मॉर्फिन और इसके डेरिवेटिव)
◼️ एंटीसेप्टिक- बैक्टीरिया को मारते हैं( जैसे सोफ्रेमायसन ,डिटॉल, टिंचर आयोडीन आदि )
◼️एंटीबायोटिक -सूक्ष्म जीवों द्वारा उत्पादित रासायनिक पदार्थ को मारते हैं और उनके विकास को रोकते हैं (जैसे पेनिसिलिन ,सल्फा ड्रग्स ,स्ट्रेप्टोमाइसिन)
#AbNahiRukegaPrelims