प्रज्ञानं ब्रह्म 🙏🚩
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देवराज इंद्र का वास्तविक चरित्र : भाग 2

क्या देवराज इंद्र ने अहिल्या का बलात्कार किया था ?

आइए इस कथा का वास्तविक स्वरूप जानते हैं।

१. शतपथ ब्राह्मण ३.३.४.१८ के अनुसार इंद्र का एक नाम अहिल्याजार भी है ।

२. निरुक्त ३.१६ अनुसार जार सूर्य का पर्यायवाची है क्योंकि वह अहिल्या ( अहानि लियते ) अर्थात रात्रि को जीर्ण करता है ।

३. महर्षि पाणिनीकृत उणादिकोष २.२९ के अनुसार इंद्र सूर्य का नाम है ।

४. निरुक्त १२.९ के अनुसार इंद्र आदित्य अर्थात् सूर्य का नाम है ।

५. प्रसिद्ध मीमांसक कुमारिल भट्ट अपने ग्रंथ तंत्रवार्तिक ( प्रथमाध्याय तृतीयपाद चतुर्थ अधिकरण , अंग्रेजी अनुवाद पृष्ठ १८९ ) में लिखते हैं की इंद्र अर्थात सूर्य के प्रकाश के कारण अहिल्या अर्थात् रात्रि का अंधकार दूर हो जाता है अतः यहां किसी स्त्री के साथ देवराज इंद्र का संसर्ग इत्यादि भाव देखना प्रकरण विरुद्ध तथा असिद्धांतिक होगा ।



अतः सिद्ध होता है कि ब्राह्मण ग्रंथों , निरुक्तादि में वर्णित अर्थों को न समझकर मूर्खों ने इसका अर्थ इंद्र अहिल्या संसर्ग इत्यादि कपोल कल्पित अवधारणाएं बनाकर फैला दी ।

सौजन्य से : @Indra_hi_Paramatma_hai
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देवराज इंद्र का वास्तविक चरित्र : भाग 3

आयुर्वेद प्रवर्तक देवराज इन्द्र

जैसा मैंने पहले बताया देवराज इंद्र ने आत्मा का स्वरूप जानने हेतु 101 वर्ष का ब्रह्मचर्य ग्रहण किया था ; आइए देखते हैं यह संभव कैसे था ।

चरक संहिता सूत्रस्थान १.४ के अनुसार इंद्रदेव ने समग्र रूप से अश्विनीकुमारो द्वारा आयुर्वेद पढ़ा । तदनंतर उन्होंने पृथ्वी पर हो रही भयंकर व्याधियों के समाधान हेतु लक्षण , रोग हेतुज्ञान , औषध ज्ञान , त्रिसूत्र सहित संपूर्ण आयुर्वेद ऋषि भरद्वाज को प्रदान किया जिन्होंने अपने शिष्य आत्रेय पुनर्वसु तथा अन्य ऋषियों को इसका ज्ञान प्रदान किया ।


अष्टांगहृदय सूत्रस्थान के सूत्र ३ के अनुसार इंद्र ने आत्रेय पुनर्वसु को भी आयुर्वेद की शिक्षा दी थी जो गुरु शिष्य परंपरा के माध्यम से आगे बढ़ती‌ गई ।

अष्टांगहृदय अध्याय २ के सूत्र २९ के अनुसार इंद्रिय निग्रह करना अत्यंत आवश्यक होता है । हमें इन्द्रियों को इस भाव से संचालित करना चाहिए कि न तो इनका क्षय हो और न ही इनमें लिप्त होना चाहिए ।


अतः स्पष्ट है कि देवराज की इतनी लंबी आयु के पीछे उनका आयुर्विज्ञान था । वे आयुर्वेद के महान विशेषज्ञ थे ।

क्रमशः ....
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Exposing Neo Buddhists lie on Devi Shashti ( Devasena ) !!

Neo Buddhist : Maya Devi died 6 days after the birth of Buddha. Hence she was called as Devi Shashti and baman copied her after the 12th century.

Me : Any evidence ?

Neo : umm 🧐🤔

Me : Scholars and Buddhist literature holds that Devi Maya died 7 days after the birth of Lord Buddha. So your claim is already baseless.

Neo : Doesn't matter 😭 ! You stole Your Goddess from her only..
There is no evidence of Devi Shashti before 12th century peee poo 💩.

Me : here , what about this Gupta period Sculpture ??

Neo ( crying inside ) : Manuwadi 😡 She is a Buddhist goddess.

Me : 🤣 Then why she is mentioned with Vedic Gods in Bower's Manuscript Part 4 , Leaf 1 , Reverse 😂😂

Neo Buddhist : ham mulnivasio ka Chochan ho gyaa 😭😭😭😭

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A Copper Inscription of 6th CE from A king named Madhavavarman of VIshnu Kundina dynasty

Second Plate first side says :
श्रुतिस्मृतिविहितसनातनधर्मक निरतय


The Sanatana Dharma which is detailed well in Shrutis and Smritis.

Epigraphia Indica Volume 27 , Page 315

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