Karpatri's Lame logic for defending the Ashleel bhasya done by Mahidhar uvatt.
Saying that It's just a way to supress one's lust in the Vasanta Season when Ashvamedh is done and then Mahishi + Ghoda.... I can't speak much more
Saying that It's just a way to supress one's lust in the Vasanta Season when Ashvamedh is done and then Mahishi + Ghoda.... I can't speak much more
Vedarth PariJat , page 1722-25
Pata nahi kya soch k log aise logo ka samman karte hain
anyways is book ka khandan already Vedarth Kalpataru me ho rakha hai
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Forwarded from मनुवादियों का इतिहास पुरातत्त्व 🚩🚩 (𑁍PUSHYMITRA THE OLD SLAYER𑁍)
ram ji evidence.pptx
5 MB
Glimpses of Women Rights from Markandeya Purana.
सीखो सीखो पांडा बाबू कम से कम अपने पुराणों से ही कुछ अच्छी बातें सीखो । 🐼🐼
सीखो सीखो पांडा बाबू कम से कम अपने पुराणों से ही कुछ अच्छी बातें सीखो । 🐼🐼
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नवबौद्धों के नीले ख़्वाब पार्ट 3
अक्सर आपने साइंस हगनी को केसमुत्तीसुत्त के कलामसुत्त को दिखाकर बौद्ध धर्मग्रंथों को अप्रमाणिक बताते हुए देखा होगा ।
मेरा एक प्रश्न है कि जब बुद्ध ने ग्रंथों एवं पुस्तकों पर विश्वास करने से मना कर दिया है तो खुद त्रिपिटक को झूठ साबित करने के लिए उसी त्रिपिटक के अंगुत्तर निकाय के केसामुत्तिसुत्त कलामसुत्त पर यकीन कैसे कर रहे हो ??
शायद कलामसुत्त पर यकीन रखने के कारण ही आज नवबौद्ध तर्क पर बात नहीं करते । 😁😁
अक्सर आपने साइंस हगनी को केसमुत्तीसुत्त के कलामसुत्त को दिखाकर बौद्ध धर्मग्रंथों को अप्रमाणिक बताते हुए देखा होगा ।
पर शायद यह मूर्ख इस सुत्त को पूरा पढ़ना भूल गया । बुद्ध ने तो यहां पर तर्क पर भी भरोसा करने से मना किया है और यह बात उन्होंने एक बार नहीं अपितु पूरे सुत्त में चार बार कही है :
1. ४.१
2. २५.३
3. २६.१
4. ४१.३
मेरा एक प्रश्न है कि जब बुद्ध ने ग्रंथों एवं पुस्तकों पर विश्वास करने से मना कर दिया है तो खुद त्रिपिटक को झूठ साबित करने के लिए उसी त्रिपिटक के अंगुत्तर निकाय के केसामुत्तिसुत्त कलामसुत्त पर यकीन कैसे कर रहे हो ??
शायद कलामसुत्त पर यकीन रखने के कारण ही आज नवबौद्ध तर्क पर बात नहीं करते । 😁😁
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Behen bas kar
Itna Gyan bahut hai tera 🙏😭😭
Itna Gyan bahut hai tera 🙏😭😭
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Must watch !!!
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यत्र योगेश्वर: कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धर: |
तत्र श्रीर्विजयो भूतिध्रुवा नीतिर्मतिर्मम 78
जहाँ योगश्वर श्रीकृष्ण और श्रेष्ठ धनुर्धर अर्जुन हैं वहाँ निश्चित रूप से अनन्त ऐश्वर्य, विजय, समृद्धि और नीति होती है, ऐसा मेरा निश्चित मत है।
Karna bhakts can cry in comments
तत्र श्रीर्विजयो भूतिध्रुवा नीतिर्मतिर्मम
जहाँ योगश्वर श्रीकृष्ण और श्रेष्ठ धनुर्धर अर्जुन हैं वहाँ निश्चित रूप से अनन्त ऐश्वर्य, विजय, समृद्धि और नीति होती है, ऐसा मेरा निश्चित मत है।
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Cry harder mujeets 😂😂
tumhari babri jinda nahi mar gayi kab ki
tumhari babri jinda nahi mar gayi kab ki
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क्या बुद्ध के समय यज्ञ नहीं हुआ करते थे ?
सुत्तपीटक , खुद्दनिकाय , सुत्तनिपात , महावग्ग के माघसुत्त के अनुसार माघ नामक दानी व्यक्ति बुद्ध से पूछता है कि यज्ञ , दान , इत्यादि कार्य में व्यय किए हुए कर्म तथा धन सफल कैसे होते हैं ?
यहां बुद्ध तुलनात्मक भाव में भी यज्ञ की प्रशंसा कर रहे हैं ।
अतः सिद्ध होता है कि बुद्ध के समय यज्ञ बहुत हुआ करते थे तथा बुद्ध भी उन अध्वर यज्ञों की प्रशंसा किया करते थे जैसा इस प्रकरण से स्पष्ट है।
सुत्तपीटक , खुद्दनिकाय , सुत्तनिपात , महावग्ग के माघसुत्त के अनुसार माघ नामक दानी व्यक्ति बुद्ध से पूछता है कि यज्ञ , दान , इत्यादि कार्य में व्यय किए हुए कर्म तथा धन सफल कैसे होते हैं ?
बुद्ध कहते हैं कि यज्ञ , दान इत्यादि करने वाला तथा परोपकारी व्यक्ति अपने जीवन में आत्मविश्वास , समृद्धि और चराचर में सबके लिए प्रेम को प्राप्त होता है । यज्ञभूमि या यज्ञस्थल वह जगह है जहां यजमान अपने सभी दोषों का शमन कर काम क्रोध मद आदि विकारों से मुक्त हो जाता है तथा सृष्टि में प्रेम का प्रचार करता है ।
तदनंतर इस प्रकार के आचरण से वह ब्रह्मलोक को प्राप्त होता है । दीघनिकाय ५.१४ मैं इसके ऊपर टीका करते हुए बुद्ध कहते हैं कि अगर वह बुद्ध , धम्म तथा संघ की शरण में जाकर ज्ञान की प्राप्ति करे तो भी वह ब्रह्मलोक को प्राप्त होता है क्योंकि यह भी उसके लिए यज्ञ के समान पवित्र होते हैं ।
यहां बुद्ध तुलनात्मक भाव में भी यज्ञ की प्रशंसा कर रहे हैं ।
अतः सिद्ध होता है कि बुद्ध के समय यज्ञ बहुत हुआ करते थे तथा बुद्ध भी उन अध्वर यज्ञों की प्रशंसा किया करते थे जैसा इस प्रकरण से स्पष्ट है।
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